पहले बायोमेट्रिक में हुई गड़बड़ी के कारण किसान फसल बेचने का इंतजार करते रहे।
जबकि मौसम खराब होने की सूचना सरकार को पहले से थी, फिर भी बचाव का कोई प्रयास नहीं किया गया।
अब हालत ये है कि गेहूं भीग चुका है।
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गेहूं में नमी का तय मानक 12% था, लेकिन नमी बढ़ने के कारण 14.60 लाख टन आवक में से केवल 3.37 लाख टन की ही खरीद हो पाई।
किसान खून-पसीना बहाकर फसल उगाता है, लेकिन MSP पर खरीद न होने की वजह से उसे अपनी मेहनत औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
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