Raju dangi
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10 days ago
मयि च अनन्ययोगेन अव्यभिचारिणी भक्ति: श्री कृष्ण माँ, एकाग्र भक्ति एकांत, पवित्र जगह पर रहने का स्वभाव है (आम लोगों के समूह में, भीड़ में बेपरवाही)। श्री कृष्ण के अलावा किसी अन्य भगवान या भौतिक चीज़ में बेपरवाही को एकाग्र भक्ति कहते हैं। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇