Hemant Kumar
479 views
6 days ago
AI indicator
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट। अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥ अर्थ: गुरु कुम्हार के समान है और शिष्य घड़े (कुंभ) की तरह। गुरु शिष्य की कमियों को दूर करता है। वह अंदर से सहारा देकर (प्यार देकर) बाहर से चोट मारता है (अनुशासन सिखाता है)। . . . #trueguru_santrampaljimaharaj #kabirisgod #🙏गुरु महिमा😇