🔱Sonusamit Kumar🕉️🚩🌷🔱🔱
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4 days ago
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एक बार रानी झाली ने अपने राजमहल में एक विशाल यज्ञ और कथा का आयोजन कराया… दूर-दूर से बड़े पंडित, संत और राजा बुलाए गए… और विशेष निमंत्रण भेजा गया सतगुरु Guru Ravidas Ji Maharaj को… जब गुरु जी सभा में पहुँचे… तो रानी झाली खुद अपने सिंहासन से उठीं…or गुरु जी का स्वागत किया… और उन्हें सबसे ऊँचे आसन पर बैठाया… लेकिन… कुछ घमंडी पंडित यह देखकर जल उठे… उन्होंने धीमे स्वर में कहा — “ये तो चर्मकार है… इसे इतना सम्मान कैसे दिया जा सकता है?” सभा में अहंकार था… लेकिन अगले ही पल… कुछ ऐसा हुआ… जिसने पूरे राजमहल को हिला दिया… कथा शुरू हुई… और अचानक… हर पंडित को अपने पास सिर्फ Guru Ravidas Ji Maharaj दिखाई देने लगे… कोई दाईं ओर देखता — गुरु जी। कोई बाईं ओर देखता — गुरु जी। हर दिशा में… सिर्फ गुरु जी का प्रकाश… सभा में सन्नाटा छा गया… थालियाँ हाथ में रुक गईं… अहंकार काँप उठा… जो लोग जाति पर घमंड कर रहे थे… वही अब गुरु जी के चरणों में झुक चुके थे… तब सतगुरु Guru Ravidas Ji Maharaj ने शांत स्वर में कहा — “मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं… उसके कर्म और भक्ति से होती है…” रानी झाली की आँखों से आँसू बह रहे थे… क्योंकि आज पूरी सभा ने देख लिया था — सच्चा संत वो नहीं जिसे दुनिया ऊँचा कहे… सच्चा संत वो है… जिसके सामने अहंकार खुद झुक जाए… 🔥 Best Line 🔥 “जाति का घमंड पल भर में टूट जाता है… लेकिन सच्ची भक्ति का प्रकाश सदियों तक चमकता है…” #🙏कर्म क्या है❓