Pradeep Agrawal
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2 days ago
*🌹🌹🌹विचारणीय🌹🌹🌹* *🌹🌹सत्यम शिवम सुंदरम 🌹🌹* *शिवलिंग को गुप्तांग की गलत संज्ञा क्यों और किस लिए दी गई ?* *क्या कभी आपने इस पर विचार किया है ?* इस गलत संज्ञा के कारण अब तो सनातन संस्कृति के लोग भी शिवलिंग को शिव् भगवान का गुप्तांग समझने लगे है और दूसरों को भी ये गलत जानकारी देने लगे हैं। परन्तु सही तथ्यों को जानना बहुत जरूरी है... कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते हैं और छोटे छोटे बच्चों को बताते हैं कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते हैं। उनको संस्कृत का ज्ञान नहीं होता है और अपने बच्चों को सनातन संस्कृति के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बना देते हैं। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, इसे देववाणी भी कहा जाता है। लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है जबकी जनेन्द्रिय को संस्कृत मे शिशिन कहा जाता है। शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक पुरुष लिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक, इसी प्रकार स्त्री लिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक और नपुंसक लिंग का अर्थ हुआ नपुंसकता का प्रतीक। अब यदि जो लोग पुरुष लिंग को मनुष्य की जनेन्द्रिय समझ कर आलोचना करते है, तो वे बताये ”स्त्री लिंग” के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग होना चाहिए? शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परम पुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्द-पुराण में कहा है, कि आकाश स्वयं लिंग है। शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है। शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है और ना ही शुरुआत। शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता, दरअसल यह गलत फहमी भाषा के रूपांतरण और म श्री खाटू श्याम के दीवाने का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App https://primetrace.com/group/489/post/1184065670?utm_source=android_post_share_web&referral_code=QM29Q&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING #✍ आदर्श कोट्स #☝आज का ज्ञान #☝अनमोल ज्ञान #🌸पॉजिटिव मंत्र #👌 अच्छी सोच👍