📖 Chapter 2: पहली मुलाकात
रात का समय था…
मुंबई की भागती हुई ज़िंदगी से दूर, एक ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म से निकल रही थी।
आदर्श खिड़की के पास बैठा था…
हाथ में एक पुरानी डायरी, आँखों में अधूरे सपने।
ट्रेन की आवाज़ — “छुक-छुक…”
और दिल की धड़कन — कुछ नया होने वाला है…
उसी वक्त…
एक लड़की जल्दी-जल्दी डिब्बे में चढ़ती है।
सफेद सूट…
हाथ में किताब…
चेहरे पर सादगी, लेकिन आँखों में गहराई।
वो थी — सोनिया।
सीट ढूंढते-ढूंढते वो आदर्श के सामने आकर रुकती है।
“Excuse me… ये सीट खाली है?”
आदर्श हल्का सा मुस्कुराता है —
“हाँ… बैठ जाइए।”
कुछ देर तक दोनों चुप…
सिर्फ ट्रेन की आवाज़ और खिड़की से आती हवा।
फिर अचानक…
सोनिया की किताब नीचे गिर जाती है।
आदर्श झुककर उठाता है —
किताब का नाम था…
👉 “Love Beyond Cities”
आदर्श मुस्कुराया —
“अच्छी किताब है…”
सोनिया हैरान —
“आपने पढ़ी है?”
“नहीं… लेकिन नाम से लगता है कहानी अधूरी होगी…”
सोनिया हल्का सा हँसती है —
“हर कहानी अधूरी नहीं होती…”
अब बातचीत शुरू हो चुकी थी…
नाम, शहर, सपने…
“मैं आदर्श… मुंबई से।”
“मैं सोनिया… प्रयागराज से…”
दो अलग दुनिया…
एक ही सफर…
रात गहराती गई…
ट्रेन आगे बढ़ती गई…
और दो अनजान लोग…
धीरे-धीरे एक-दूसरे के लिए खास बनते गए।
अचानक…
ट्रेन एक स्टेशन पर रुकती है।
सोनिया उठती है —
“मेरा स्टेशन आ गया…”
आदर्श के दिल में अजीब सा खालीपन…
“फिर मिलेंगे?” — उसने धीरे से पूछा।
सोनिया मुस्कुराई…
“अगर किस्मत ने चाहा…”
वो उतर जाती है…
ट्रेन फिर चल पड़ती है…
आदर्श खिड़की से बाहर देखता रहता है…
और दिल में सिर्फ एक ही सवाल…
👉 क्या ये मुलाकात सच में पहली थी… या कुछ शुरू हो चुका था?
✨ Chapter End Line: "कुछ मुलाकातें छोटी होती हैं…
लेकिन उनकी यादें ज़िंदगी भर साथ चलती हैं…"
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