न मिले कोई सिला, कोई वफ़ा तो भी चलेगा,
कुछ भी ना मिले मुझे उस शख़्स से तो भी चलेगा।
वो मुझे याद करे या ना करे महफ़िल में अपनी,
उसकी तन्हाई में मेरा ज़िक्र हुआ तो भी चलेगा।
मैं नहीं कहती कि वो हर वक़्त रहे पास मेरे,
बस मेरा होना उसमें ज़रा सा झलकता रहे तो भी चलेगा।
दुनिया ढूँढती फिरती है हुस्न-ओ-इश्क़ के गवाह,
हमारी ख़ामोशी ने सब कुछ कह दिया तो भी चलेगा।
उसे बंदिशें पसंद नहीं, और मुझे उसका आज़ाद रहना,
वो दूर रहकर भी सिर्फ़ मेरा रहा तो भी चलेगा।
🫠
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से