भविष्य मालिका और श्रीमद्भागवत: कलयुग के अंत का संकेत
श्रीमद्भागवत महापुराण और भविष्य मालिका (जो करीब ६०० साल पहले पंचसखाओं द्वारा लिखी गई थी) दोनों ही ग्रंथ कलयुग के अंत और आने वाले समय की ओर स्पष्ट संकेत देते हैं। जहाँ भागवत कलयुग के लक्षणों का वर्णन करता है, वहीं भविष्य मालिका वर्तमान समय की घटनाओं की सटीक व्याख्या करती है।
ग्रंथों के अनुसार मुख्य संकेत:
धर्म की ग्लानि: श्रीमद्भागवत के अनुसार कलयुग में केवल धन ही प्रतिष्ठा का आधार होगा और सत्य का लोप होगा। भविष्य मालिका कहती है कि जब इंसान अपनी मर्यादा भूल जाएगा, तभी महाप्रलय का समय निकट आएगा।
प्रकृति का प्रकोप: दोनों ग्रंथों में बताया गया है कि आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाएं, महामारी और भीषण युद्ध (तीसरा विश्व युद्ध) मानवता को झकझोर देंगे।
कल्कि अवतार का आगमन: अधर्म के विनाश और धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा। भविष्य मालिका के अनुसार २०२५-२०३२ के बीच का समय 'युग संधि' का काल है, जहाँ कलयुग समाप्त होकर सतयुग की नींव रखी जाएगी।
बचाव का मार्ग: क्या करें?
१. नाम जप: "हरे कृष्ण" महामंत्र या "माधव" नाम का निरंतर जप ही कलयुग की व्याधियों से बचने का एकमात्र साधन है।
२. त्रिसंध्या साधना: सुबह, दोपहर और शाम को प्रभु का ध्यान और पूजन करें।
३. सात्विक जीवन: मांसाहार और व्यसनों का पूरी तरह त्याग करें और सत्य के मार्ग पर चलें।
निष्कर्ष:
समय बलवान है और परिवर्तन निश्चित है। जैसा कि श्रीमद्भागवत में कहा गया है, "कलौ तस्य फलं सर्वं कृष्णकीर्तनात्" — कलयुग के सारे दोष केवल भगवान के कीर्तन से ही दूर हो सकते हैं। आइए, हम सब भक्ति और धैर्य के साथ इस परिवर्तन का स्वागत करें।
#💪बुद्धांची तत्वे📜 #🎭Whatsapp status #✍ज्ञानेश्वरी📖 #😇भक्ती स्टेट्स #🌻आध्यात्म 🙏