#☝अनमोल ज्ञान
🌟 || व्यक्तित्व निमार्ण || 🌟
विचारों से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है। मनुष्य के सिवा अन्य कोई भी प्राणी श्रेष्ठ विचारों द्वारा एक श्रेष्ठ जीवन का निर्माण नहीं कर सकता है। मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसका व्यक्तित्व निर्माण प्रकृति से ज्यादा उसकी स्वयं की प्रवृत्ति पर निर्भर होता। मनुष्य के अलावा अन्य सभी प्राणी का निर्माण प्रकृति ने जैसा कर दिया, कर दिया। अब उसमें और बेहतर बनने की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है।
मनुष्य में जीवन के अंतिम क्षणों तक विचार परिवर्तन से जीवन परिवर्तन के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह अपने जीवन को अपने अनुसार उत्कृष्ट या निकृष्ट बना सकने में समर्थ होता है। पशु के जीवन में पशु से पशुपतिनाथ बनने की संभावना नहीं होती पर एक मनुष्य के जीवन में श्रेष्ठ विचार, श्रेष्ठ संग और महापुरुषों के आश्रय से नर से नारायण बनने की प्रबल संभावना विद्यमान रहती है। जीवन में सद्गुणों की बहुलता ही इंसान को भगवान बना देती है।🖋️
जय श्री राधे कृष्ण
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