GodMorningSaturday
आदर अनादर, करो क्यों न कोई!
मम संत शरण, जगत जान छोई!
मेरी शरण में आकर चाहे तुम्हारी कोई इज्जत करे या बेज्जती करे तुम चिंता ना करना। मेरी शरण में जो आ गया तो जगत तो समझो राख है। यह बकवाद ही किया करते हैं, पर आने दो मेरा समय में अपने भक्त के साथ खड़ा पाऊंगा!!
##sant rampal ji maharaj