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Rangrezza
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इस्लामिक बातें ┄┅════❁❀❁════┅┄ ⃝ ⃝ ⃝ ᯾🅢︎🅣︎🅐︎🅣︎🅤︎🅢︎᯾ ⃝ ⃝ ⃝ ┄┅════❁❀❁════┅┄ ♥️ 🌐ㅤ   📩 📤 ˡᶦᵏᵉ ᶠᵒˡˡᵒʷ ˢᵃᵛᵉ ˢʰᵃʳᵉ #कुरान संदेश #🤲 इबादत # अल्लाह हु अक़बर #🤲 नात-ए-शरीफ #🕋🌟 नमाज़-ए-फ़ज्र 🌟🕋
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*चाँद रजब का आया, जश्न-ए-गरीब नवाज़ शुरू हुआ, हर तरफ़ रौनकें फैलीं, दिल में सुकून भरा।"* *"या गरीब नवाज़, आपकी शान निराली, रजब के इस चांद से रोशन हो दुनिया सारी।"🫀✨* #कुरान संदेश #🤲 इबादत # अल्लाह हु अक़बर #🤲 नात-ए-शरीफ #🕋🌟 नमाज़-ए-फ़ज्र 🌟🕋
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#कुरान संदेश #🤲 इबादत # अल्लाह हु अक़बर #🤲 नात-ए-शरीफ #🕋🌟 नमाज़-ए-फ़ज्र 🌟🕋 #😊आज के सुविचार👌 #❤️जीवन के सीख ⚠️ ह़ुज़ूर (ﷺ) का पसीना मुबारक ⚠️ ह़ज़रते उ़मर फ़ारूक़े आ'ज़म रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु इरशाद फ़रमाते हैं: كَأَنَّ رِيْحَ عِرْقِ رَسُوْلِ اللَّٰهِ ﷺ رِيحُ المِسْكِ بِأَبِيْ وَأُمِّيْ! لَمْ أَرَ قَبْلَه وَلَا بَعْدَه مِثْلَه۔ मेरे मां-बाप मुस्त़फ़ा जाने रह़मत (ﷺ) पर क़ुर्बान, आपका मुबारक पसीना मुश्क की त़रह़ ख़ुशबूदार था. मैंने आपसे पहले और आपके बा'द आप जैसा कोई नहीं देखा. 📙 [सुबुलुल हुदा वल-रशाद फ़ी सीरते ख़ैरुल इ़बाद, जिल्द नं. 2, सफ़ह़ा नं. 65] आ'ला ह़ज़रत अ़लैहिर्रह़मा फ़रमाते हैं: "शबनमे बाग़े ह़क़ या'नी रुख़ का अ़रक़; उस की सच्ची बराक़त पे लाखों सलाम." शरह़ कलामे रज़ा: अल्लाह तआ़ला के गुल्शने क़ुद्स की ओस और शबनम देखनी है, तो रुख़े बद़्द़ुह़ा का मुअ़ंबर पसीना तक लो, हम तो उस पसीने की चमक-दमक पे लाखों सलाम भेजते हैं. "वल्लाह जो मिल जाए मेरे गुल का पसीना; मांगे न कभी इ़त़्र न फिर चाहे दुल्हन फूल." शरह़ कलामे रज़ा: ख़ुदा की क़सम अगर शादी के वक़्त किसी दुल्हन को ह़ुज़ूर (ﷺ) का पसीना मिल जाए, तो वो कभी किसी ख़ुशबू की त़लब व ख़्वाहिश न रखे, और न ही वो किसी फूल को तलाश करे. 📙 [रज़ा की ज़बां तुम्हारे लिए, सफ़ह़ा नं. 102, नाशिर: सिरात़ पब्लिकेशन्ज़] एक शख़्स ने अपनी लड़की को उसके शौहर के घर भेजने के लिए ख़ुशबू की जुस्तजू की, मगर उसे न मिल सकी, तो उसने ह़ुज़ूर (ﷺ) की ख़िदमत में ह़ाज़िर होकर अ़र्ज़ किया के ह़ुज़ूर (ﷺ) कोई ख़ुशबू अ़त़ा फ़रमा दें, मगर कोई ख़ुशबू मौजूद न थी, तो ह़ुज़ूर (ﷺ) ने शीशी त़लब फ़रमाई, ताकि उसमें ख़ुशबू डाल दी जाए. फिर आप (ﷺ) ने अपने जिस्मे अक़्दस से पसीना लेकर उस शीशी में भर दिया और फ़रमाया: जाकर इसे अपनी लड़की के जिस्म पर मल दो. जब उसे मला गया, तो सारा मदीना उसकी ख़ुशबू से महक गया था और उसके घर का नाम ही बैतुल मुत़य्यबीन (ख़ुशबू वालों का घर) रख दिया. 📙 [मदारिजुन नबुव्वत, जिल्द नं. 1, सफ़ह़ा नं. 40, नाशिर: शब्बीर ब्रादर्ज़ (लाहौर)] ______________ मुह़म्मद ज़ैद रज़ा क़ादिरी 04/12/2025
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#कुरान संदेश #🤲 इबादत # अल्लाह हु अक़बर #🤲 नात-ए-शरीफ #🕋🌟 नमाज़-ए-फ़ज्र 🌟🕋 #💖मोहब्बत दिल से🤗 #💖Love You ज़िंदगी💞 *सय्यिदा फ़ातिमत ज़हरा रदियल्लाहु तआला अन्हा की तारीखे विलादत व विसाल* सय्यिदा फ़ातिमत ज़हरा रदियल्लाहु तआला अन्हा की तारीखे विसाल बयान करते हुए हाफ़िज़ इब्न सअद (मतुफ्फ़ा 230 हि.) अपनी मशहूर किताब “अत्तबक़ात” (तबक़ात-ए-इब्न सअद) में लिखते हैं: “توفيت ليلة الثلاثاء لثلاث خلون من شهر رمضان سنة إحدى عشرة، و هي ابنة تسع و عشرين سنة أو نحوها” “आप का विसाल 3 रमज़ान 11 हिजरी, मंगल की रात हुआ। उस वक़्त आपकी उम्र 29 साल या उसके आस-पास थी।” तबक़ात-ए-इब्न सअद सबसे क़दीम माख़ज़ है जिसमें पूरी तहदीद के साथ आपकी तारीखे वफ़ात बयान की गई है। अहल-ए-सुन्नत अहल-ए-हक़ निहायत अकीदत व एहतिराम के साथ 3 रमज़ानुल मुबारक यौमे सय्यिदा फ़ातिमत ज़हरा अकीदत व एहतिराम के साथ मनाते हैं। अलबत्ता आपकी तारीखे विलादत अहल-ए-सुन्नत के किसी माख़ज़ में मुझे नज़र नहीं आई। न ही साबित है। आइमा-ए-तारीख़ व सीरत ने आम तौर से यह बयान किया है कि एलान-ए-नुबुव्वत से 5 साल क़ब्ल आपकी विलादत हुई। मगर दिन और तारीख़ की तहदीद के साथ किसी सुन्नी माख़ज़ में कोई तारीख़ हमारे इल्म में नहीं। कुछ शिया माख़ज़ में पूरी तहदीद के साथ “20 जुमा̈दा उल-आख़िरह, रोज़-ए-जुमा” को आपकी तारीखे विलादत कहा गया है बग़ैर सनद के। मगर यह राफ़िज़ियों का क़ौल है, और रावाफ़िज़ ने शातिर-बाज़ी से ऐसा किया कि अहल-ए-सुन्नत की तवज्ज़ोह 22 जुमा̈दा उल-आख़िरह — यौमे अय्याम-ए-अफ़ज़लुल ख़ल्क़ बअद-र्रसूल, सय्यिदुना सिद्दीक़-ए-अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु से तवज्जोह हटाकर अपना फ़साद डाल सकें। अहल-ए-सुन्नत के किसी मुस्तनद माख़ज़ में ऐसा कोई क़ौल या तारीख़ मौजूद नहीं। सैयदा ___ ज़ाहिरा ___ तय्यिबा ___ ताहिरा जाने अहमद की राहत पे लाखों सलाम सल्लल्लाहु तआला अला अबीहा व अलैहा व सल्लम
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