#कुरान संदेश #🤲 इबादत # अल्लाह हु अक़बर #🤲 नात-ए-शरीफ #🕋🌟 नमाज़-ए-फ़ज्र 🌟🕋 #😊आज के सुविचार👌 #❤️जीवन के सीख ⚠️ ह़ुज़ूर (ﷺ) का पसीना मुबारक ⚠️
ह़ज़रते उ़मर फ़ारूक़े आ'ज़म रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु इरशाद फ़रमाते हैं:
كَأَنَّ رِيْحَ عِرْقِ رَسُوْلِ اللَّٰهِ ﷺ رِيحُ المِسْكِ بِأَبِيْ وَأُمِّيْ! لَمْ أَرَ قَبْلَه وَلَا بَعْدَه مِثْلَه۔
मेरे मां-बाप मुस्त़फ़ा जाने रह़मत (ﷺ) पर क़ुर्बान, आपका मुबारक पसीना मुश्क की त़रह़ ख़ुशबूदार था. मैंने आपसे पहले और आपके बा'द आप जैसा कोई नहीं देखा.
📙 [सुबुलुल हुदा वल-रशाद फ़ी सीरते ख़ैरुल इ़बाद, जिल्द नं. 2, सफ़ह़ा नं. 65]
आ'ला ह़ज़रत अ़लैहिर्रह़मा फ़रमाते हैं:
"शबनमे बाग़े ह़क़ या'नी रुख़ का अ़रक़;
उस की सच्ची बराक़त पे लाखों सलाम."
शरह़ कलामे रज़ा: अल्लाह तआ़ला के गुल्शने क़ुद्स की ओस और शबनम देखनी है, तो रुख़े बद़्द़ुह़ा का मुअ़ंबर पसीना तक लो, हम तो उस पसीने की चमक-दमक पे लाखों सलाम भेजते हैं.
"वल्लाह जो मिल जाए मेरे गुल का पसीना;
मांगे न कभी इ़त़्र न फिर चाहे दुल्हन फूल."
शरह़ कलामे रज़ा: ख़ुदा की क़सम अगर शादी के वक़्त किसी दुल्हन को ह़ुज़ूर (ﷺ) का पसीना मिल जाए, तो वो कभी किसी ख़ुशबू की त़लब व ख़्वाहिश न रखे, और न ही वो किसी फूल को तलाश करे.
📙 [रज़ा की ज़बां तुम्हारे लिए, सफ़ह़ा नं. 102, नाशिर: सिरात़ पब्लिकेशन्ज़]
एक शख़्स ने अपनी लड़की को उसके शौहर के घर भेजने के लिए ख़ुशबू की जुस्तजू की, मगर उसे न मिल सकी, तो उसने ह़ुज़ूर (ﷺ) की ख़िदमत में ह़ाज़िर होकर अ़र्ज़ किया के ह़ुज़ूर (ﷺ) कोई ख़ुशबू अ़त़ा फ़रमा दें, मगर कोई ख़ुशबू मौजूद न थी, तो ह़ुज़ूर (ﷺ) ने शीशी त़लब फ़रमाई, ताकि उसमें ख़ुशबू डाल दी जाए. फिर आप (ﷺ) ने अपने जिस्मे अक़्दस से पसीना लेकर उस शीशी में भर दिया और फ़रमाया: जाकर इसे अपनी लड़की के जिस्म पर मल दो. जब उसे मला गया, तो सारा मदीना उसकी ख़ुशबू से महक गया था और उसके घर का नाम ही बैतुल मुत़य्यबीन (ख़ुशबू वालों का घर) रख दिया.
📙 [मदारिजुन नबुव्वत, जिल्द नं. 1, सफ़ह़ा नं. 40, नाशिर: शब्बीर ब्रादर्ज़ (लाहौर)]
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मुह़म्मद ज़ैद रज़ा क़ादिरी
04/12/2025