**कहानी _ महावारी**
भाग _ 7
लेखक_ श्याम कुंवर भारती
डॉ निर्मला उस सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुछ ही दिनों में उस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय डॉ बन गई थी । आसपास के गांव वाले उसकी काफी इज्जत करते थे। जिला के सिविल सर्जन भी उसकी काफी तारीफ करते थे।
सदर अस्पताल के प्रभारी भी बहुत खुश थे उसकी वजह से उनका भी काम आसान हो गया था।पहले वाले प्रभारी हर छोटी बड़ी बीमारी के मरीज भेजते रहते थे लेकिन डॉ निर्मला बहुत कम ही मरीज भेजती थी । अधिकांशतः मरीज वो अपने केंद्र में ही ठीक कर देती थी।
उसने ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगवाकर इलाज की सुविधा उनके घर तक पहुंचाई ।इससे किशोरी लड़कियों ,गर्भवती महिलाओं , बुजुर्गों और छोटे बच्चों को बहुत राहत हुई ।अब उनको इलाज हेतु इतने दूर पीएचसी नहीं आना पड़ता था।लड़कियों को फ्री में सेनेटरी नेपकिन का वितरण करवाया और उन्हें पीरियड के समय साफ सफाई सावधानी और खान पान पर ध्यान देने हेतु काफी जागरुकता फैलाया।
दो बच्चों के बीच में अंतर रखने के लिए ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे उसने गर्भ निरोधक दवाइयां और निरोध का भी वितरण करवाया ।
इस तरह डॉ निर्मला ने अपने क्षेत्र में स्वस्थ और माहवारी से होने वाली समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया था।
उसकी मांग पर जिला से सभी आवश्यक दवाओं की आपूर्ति नियमित की जा रही थी।साथ ही उसने ऑपरेशन थियेटर को भी काफी हद तक सुसज्जित किया।ऑपरेशन हेतु सर्जिकल औजार भी उपलब्ध करवाए।ताकि छोटे मोटे ऑपरेशन वो पीएचसी लेबल पर ही कर सके ।
अभी तक उसने अपनी शादी नहीं की थी ।अभी नई_ नई प्रभारी के पद पर पदस्थापित हुई थी। चार पांच सालों में वो जहां भी गई अपनी छाप छोड़ती आई थी ।इसलिए उसकी पदोन्नति कर उसे प्रभारी बनाया गया था।अपना पद संभालते ही उसने सरकारी स्वास्थ्य केंद्र को प्राइवेट क्लिनिक से बेहतर बना दिया था।
उसके केंद्र पर उसके अनुरोध पर कई मेडिकल स्टाफ और दो डॉ भी स्थानांतरित किए गए थे।जिससे केंद्र को और सहजता से चलाया जाय।
सबको देखकर यह आश्चर्य होता था कि उस केंद्र में प्राइवेट डॉ से ज्यादा मरीजों की भीड़ भाड़ रहती थी।
उसने कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रति सप्ताह बैठने की अनुमति सिविल सर्जन से ले लिया था।जिससे वहां आंख , कान, चर्म रोग,दांत और हड्डी नस के भी डॉ सप्ताह में एक दिन मरीजों को देखने के लिए आने लगे थे।
उस दिन वो जिला में मीटिंग के लिए निकल रही थी ।तभी सिविल सर्जन ने फोन पर कहा _ निर्मला मीटिंग में आ रही हो तो एंबुलेंस लेती आना और अपने दो स्टाफ को भी साथ में ले लेना क्योंकि तुम्हारी पीएचसी के लिए काफी दवाइयां,सर्जिकल स्ट्रूमेंट और काफी पम्पलेट पोस्टर है लेती जाना।
उसने कहा ठीक है सर ।
करीब शाम को छ बजे वो वो जिला से मीटिंग से अपने केंद्र पहुंची ।उसने अपने चैंबर में आते ही अपने एक सहायक को चाय लाने को कहा फिर अपने मेडिकल स्टोर इंचार्ज से दवाईयां और बाकी समान एंबुलेंस से उतारकर स्टोर में रखवाने के लिए कहा।
अभी उसने चाय के दो ही घूंट पिया था कि बाहर हो हल्ला होने लगा ।
थोड़ी ही देर में उसके एक स्टाफ ने भागते हुए आकर बताया _ मैडम बाहर एक महिला बुरी तरह घायल अवस्था में पड़ी हुई है और काफी खून भी बह रहा है।वो औरत दर्द से काफी कराह रही है।
डॉ ने पूछा क्या कोई एक्सीडेंट हुआ है।
ये तो पता नहीं मैडम उसके साथ उसकी सास और ननद भी है।उस स्टाफ ने बताया।
ठीक है उसे तुरंत ड्रेसिंग रूम में ले चलो सब मै देखती हूं उसे ।
थोड़ी ही देर में ।
उस घायल महिला को ड्रेसिंग रूम में पहुंचाते ही डॉ निर्मला तुरंत पहुंची ।उस महिला को देखते ही उस बहुत दुख हुआ ।वो बुरी तरह घायल थी । सिर हाथ पैर सबने चोट के निशान थे और वहां से खून बह रहे थे।
उसने उसके सिर में देखा । वहा काफी लंबा घाव था।
उसने नर्स मंजू से कहा _ एंटीसेप्टिक लोशन रूई और गॉज ले आओ इसके घावों को पहले सफाई करके पट्टी बांधनी होगी।खून को बंद करने के लिए तुरंत इंजेक्शन देना होगा इसके सिर में बड़ा घाव है ।उसमें टांके लगाने होंगे ।उसके गाल और माथे पर भी चोट के निशान थे।
उसने सबसे पहले जहां से ज्यादा खून बह रहा था वहां पहले ड्रेसिंग कर दिया।उसके सिर में पांच टांके लगाने पड़े।
उसने मंजू से कहा _ दर्द और एंटीसेप्टिक इंजेक्शन तुरंत लगाओ ताकि उसका दर्द कम हो और सेप्टिक न हो।फिर एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगा दो ताकी घाव जल्दी ठीक हो जाए।
उस महिला की ननद रीता ने अपनी मां से कहा _ मम्मी तुमको भैया को रोकना चाहिए था । बेटा पैदा करने के लिए भाभी को इतनी बेरहमी से जानवरों की तरह नहीं मारना चाहिए था।अगर मैं नहीं बचाती तो भइया आज भाभी की जान ही ले लेते।
उसकी बात सुनकर डॉ निर्मला चौंक गई ।ये तुम क्या कह रही हो । क्या तुम्हारी भाभी का एक्सीडेंट नहीं हुआ है।बल्कि तुम्हारे भैया ने इसे मारा है।
इस तरह किसी औरत की कोई राक्षस ही मार सकता है।
डॉ बहुत गुस्से में थी ।उसने महिला से पूछना चाहा लेकिन तभी वो बेहोस हो गई।
उसने उसकी आंखों की पुतलियां चेक किया उसमें काफी सफेदी नजर आ रही थी ।
उसने कहा _ काफी खून बह जाने की वजह से ये बिहोश हुई है।इस तुरंत खून चढ़ाना पड़ेगा वरना इसकी मौत भी हो सकती है।मेरे केंद्र में खून की व्यवस्था नहीं है इसे तुरंत सदर अस्पताल भेजना होगा ।मै एंबुलेंस दे देती हूं ।
इसका प्राथमिक इलाज कर दी हूं अब खून नहीं बहेगा लेकिन यह एक पुलिस केस है मुझे अभी तुरंत पुलिस को बुलाना होगा ।
उसकी बात सुनकर उस महिला की सास घबड़ा गई ।
लेकिन उसकी ननद ने कहा _ जी मैडम आप बिल्कुल पुलिस को बुलाइए जबतक भैया को सबक नहीं मिलेगा वो सुधरेंगे नहीं ।
डॉ ने तुरंत पुलिस थाना जो फोन कर जल्दी केंद्र आने की कहा ।
थोड़ी देर में पुलिस आ गई ।
उसने उस महिला को देखा ,उसका फोटो लिया।उसकी सास और ननद का बयान लिया।फिर डॉ से पूछा मैडम हमे इस पीड़ित महिला का भी बयान लेना है ये कबतक होश में आ जाएगी।
डॉ ने बताया अभी कुछ कहा नहीं जा सकता ।मैं इसे सदर अस्पताल में रेफर कर रही हूं ।आपको बयान लेने के लिए वही जाना पड़ेगा।क्योंकि इसको यहां रखना खतरे से खाली नहीं है।
लेकिन फिलहाल आप तुरंत इसके पति को गिरफ्तार करे। यह जान से मारने का प्रयास है।अगर ये बच भी गई तो हाफ मर्डर का केस तो लगेगा ही ।
इसके बाद उसने उस महिला को सफर अस्पताल रेफर कर दिया।साथ ही उसने सदर में फोन कर बोल दिया उस महिला के लिए खून का इंतजाम करने के लिए।
शेष अगले भाग _ 8 में।
लेखक _ श्याम कुंवर भारती
बोकारो,झारखंड
मॉब.9955509286
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