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Shyam Kunvar Bharti
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**भोजपुरी लोक गीत _ (गोडऊ धुन हुड़का पर) नवका साल के छूटेला ।** अंग्रेजी महीना के आइल जनवरिया ये साजन। नवका साल के छूटेला फुलझरिया ये साजन । आइल नया साल हमके झूलनी गढ़वा दा। नैनीताल शिमला हमके अबकी घुमवा दा । घूमी घूमी मनाईब हमऊ जनवरिया ये साजन । नवका साल के छुटेला ...............। नवका साल में नई साड़ी हमके चाही। गुरही जलेबी गोलगप्पा हमके चाही। सोना के कंगनवा लेइब फरवरिया ये साजन। नवका साल के छूटेला ...........। पच्चीस में बियाह छब्बीस में ललनवा। बनिहा सिपाही इहे हमरो अरमनवा। देशवा बचइहा बनी के पहरिया ये साजन । नवका साल के छुटेला .........। सास ससुर के खूब सेवा हम करब । उपजाइब अनाज किसान हम बनब। खुशहाल होई सगरो नगरिया ये साजन। नवका साल के छुटेला ........। नवका साल में नया काम देशवा में होई। जगवा में बड़ा नाम हमरे देशवा के होई। भारती पिया उतारी तोहार नजरिया ये साजन । नवका साल में छूटेला फुलझरिया ये साजन । गीतकार श्याम कुंवर भारती ( राजभर) बोकारो, झारखंड मॉब.9955509286, #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
Shyam Kunvar Bharti
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नव वर्ष २०२६ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं आपको सपरिवार। मुक्तक _ नव वर्ष आया। हर्ष और उल्लास नव प्रकाश लेकर नव वर्ष आया। उमंग व विजयोत्सव करने पूर्ण आस नव वर्ष आया। मिले मान पद और प्रतिष्ठा बढे धन वैभव कामना है। बधाई हो स्वीकार करने कार्य खास नव वर्ष आया। श्याम कुंवर भारती बोकारो,झारखंड #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
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नव वर्ष २०२६ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं आपको सपरिवार। मुक्तक _ नव वर्ष आया। हर्ष और उल्लास नव प्रकाश लेकर नव वर्ष आया। उमंग व विजयोत्सव करने पूर्ण आस नव वर्ष आया। मिले मान पद और प्रतिष्ठा बढे धन वैभव कामना है। बधाई हो स्वीकार करने कार्य खास नव वर्ष आया। श्याम कुंवर भारती बोकारो,झारखंड #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
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भोजपुरी गजल _ जियल बाड़ा । ढेर दिनन बाद मिलल बाड़ा तू फूल गुलाब खिलल बाड़ा । केवन बात बा तोहरा मे बोला। रूप शराब जईसन पियल बाड़ा । मस्त बयार सब हमसे पूछले, गंध बदन मंद पवन मिलल बाड़ा । दिल क हाल का तोहके बताई। हमसे पूछा कि कईसे जियल बाड़ा । कबो सोचा हमरे बारे फुर्सत में। पता चली भारती प्यार डुबल बाड़ा श्याम कुंवर भारती ( राजभर) बोकारो,झारखंड मॉब.9955509286, #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
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**कहानी _ महावारी** भाग _ 10 लेखक_ श्याम कुंवर भारती सिविल सर्जन की बात सुनकर निर्मला बहुत चिंतित हुई और बोली _ सर इसको इतना तूल देने की जरूरत नही है।मरीजों का इलाज कैसे होगा।अगर सभी डॉ हड़ताल पर चले जायेंगे। तुम उसकी चिंता मत करो इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी ।कोई मरीज इलाज से वंचित नहीं रहेगा और न मरेगा।लेकिन किसी की गुंडागर्दी नहीं चलेगी।वरना कोई भी मुंह उठाकर किसी के ऑफिस में दनदनाते हुए घुस जाएगा और डॉ का कॉलर पकड़ लेगा या थप्पड़ मार देगा जैसे तुम्हारे साथ हुआ है। हम सब डॉ हैं लोगों की जान बचाते हैं और हमारा कोई सम्मान नहीं है।सिविल सर्जन ने गुस्से से कहा। ठीक है सर अगर मरीजों का इलाज बाधित नहीं होगा तो मैं भी आपके साथ हूं । निर्मला ने फोन काटा ही था तभी कुछ मीडिया वाले पहुंच गए और विधायक के साथ हुआ घटना के बारे में पूछने लगे।नहीं चाहते हुए भी उसे पूरी घटना के बारे में बताना पड़ा। वो नौजवान लड़का भी वही था उसने भी अपना बयान दर्ज करा दिया। मीडिया वालो के जाने के बाद निर्मला ने उस लड़के से उसका नाम पूछा ।उसने अपना नाम उज्जवल कुमार बताया।अच्छा अब तुम अपने घर जाओ मैं भी मरीज को देख लेती हूं। उज्जवल बाहर निकला और अपनी बाइक स्टार्ट कर अपने घर चला गया। डॉ निर्मला डिलेवरी रुम में वो महिला बेड पर लेटी हुई थी। निर्मला उसके पास जाकर पूछी _ तुम्हारा माहवारी रेगुलर होता है न । जी डॉ साहब उस महिला ने जवाब दिया।मुझे हर महीने मासिक आता है। तुमने कभी अपना मेडिकल जांच करवाया है। डॉ ने पूछा । जी डॉ साहब हुआ लेकिन डॉ ने बताया मै बिल्कुल मां बनने के योग्य हूं ।फिर भी कोई बच्चा नहीं हुआ। तुम्हारे पति की जांच हुई है क्या। डॉ ने फिर पूछा। नहीं डॉ साहब वो तो आते ही नहीं है कभी जांच करवाने ।बल्कि उल्टे मुझे ही दोष देते हैं कि तुम बच्चा पैदा कर ही नहीं सकती ।खराबी तुममें है।इसलिए तुम्हे रखने से क्या फायदा है।फिर मुझे मार पीट कर घर से बाहर निकाल दिया।इतना बोलकर वो रोने लगी । देखो रोना बंद करो और पहले मैं तुम्हारी जांच करूंगी फिर तुम्हारे पति की करूंगी। तब ही कुछ बता पाऊंगी। डॉ निर्मला ने कहा। फिर उसने उस महिला का पेट और गर्भाशय जांच किया।फिर उसने पूछा तुम पति पत्नी हमेशा साथ सोते थे या नहीं ।मैडम अब क्या बताऊं मेरा पति हमेशा दारू शराब पीकर आता था और मेरी इक्षा के बिना भी मनमानी करता था मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। खैर ठीक है जो हुआ वो हुआ अब मैं जैसा कहती हूं वैसा करो।अभी अपना पेशाब ,स्टूल और बल्ड जांच के लिए दे दो ।उसने एक रुई के बड को उसके जननांगों में डाला और उसे भींगा हुआ बाहर निकाल कर एक सीसी में रख लिया ।फिर मंजू से कहा _ इसे ले जाओ पैथोलॉजी में और जो मै लिखकर दे रही हूं वो सब जांच करवाओ। मंजू उस महिला को लेकर निकल गई । डॉ अपने चैंबर में गई और एक पुर्जा उस महिला के नाम से लिखकर पैथोलॉजी में भेजवा दी। दूसरे दिन दोपहर को सिविल सर्जन के कार्यालय में ईमेल से डॉ निर्मला के स्थानांतरण का आदेश स्वस्थ विभाग से आया जिसे देखते ही पूरे ऑफिस में चर्चा होने लगी । धीरे धीरे यह खबर जिले के सभी डॉ को मिल गई ।सभी नाराज तो पहले से ही थे इस घटना ने और आग में घी का काम किया।सबने तुरंत हड़ताल की घोषणा कर दिया । डॉ निर्मला के ट्रांसफर को रोकने और विधायक द्वारा माफी मांगे जाने की मांग को लेकर । शेष_ अगले भाग 11में लेखक_ श्याम कुंवर भारती बोकारो,झारखंड मॉब. 9955509286 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
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मुक्तक _ अटल बिहारी बाजपेई। बुलंद था हौसला जिसका बाजपेई अटल कहलाया था। समझ न पाया राज कोई पोखरण भूतल करवाया था। काव्य रथी वतन सारथी निर्भीक अदित्य व अडिग रहा। वो अमर हुआ सीमा समर हुआ विश्व पटल दिखाया था। श्याम कुंवर भारती #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
Shyam Kunvar Bharti
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**कहानी _ महावारी** भाग _ 7 लेखक_ श्याम कुंवर भारती डॉ निर्मला उस सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुछ ही दिनों में उस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय डॉ बन गई थी । आसपास के गांव वाले उसकी काफी इज्जत करते थे। जिला के सिविल सर्जन भी उसकी काफी तारीफ करते थे। सदर अस्पताल के प्रभारी भी बहुत खुश थे उसकी वजह से उनका भी काम आसान हो गया था।पहले वाले प्रभारी हर छोटी बड़ी बीमारी के मरीज भेजते रहते थे लेकिन डॉ निर्मला बहुत कम ही मरीज भेजती थी । अधिकांशतः मरीज वो अपने केंद्र में ही ठीक कर देती थी। उसने ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगवाकर इलाज की सुविधा उनके घर तक पहुंचाई ।इससे किशोरी लड़कियों ,गर्भवती महिलाओं , बुजुर्गों और छोटे बच्चों को बहुत राहत हुई ।अब उनको इलाज हेतु इतने दूर पीएचसी नहीं आना पड़ता था।लड़कियों को फ्री में सेनेटरी नेपकिन का वितरण करवाया और उन्हें पीरियड के समय साफ सफाई सावधानी और खान पान पर ध्यान देने हेतु काफी जागरुकता फैलाया। दो बच्चों के बीच में अंतर रखने के लिए ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे उसने गर्भ निरोधक दवाइयां और निरोध का भी वितरण करवाया । इस तरह डॉ निर्मला ने अपने क्षेत्र में स्वस्थ और माहवारी से होने वाली समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया था। उसकी मांग पर जिला से सभी आवश्यक दवाओं की आपूर्ति नियमित की जा रही थी।साथ ही उसने ऑपरेशन थियेटर को भी काफी हद तक सुसज्जित किया।ऑपरेशन हेतु सर्जिकल औजार भी उपलब्ध करवाए।ताकि छोटे मोटे ऑपरेशन वो पीएचसी लेबल पर ही कर सके । अभी तक उसने अपनी शादी नहीं की थी ।अभी नई_ नई प्रभारी के पद पर पदस्थापित हुई थी। चार पांच सालों में वो जहां भी गई अपनी छाप छोड़ती आई थी ।इसलिए उसकी पदोन्नति कर उसे प्रभारी बनाया गया था।अपना पद संभालते ही उसने सरकारी स्वास्थ्य केंद्र को प्राइवेट क्लिनिक से बेहतर बना दिया था। उसके केंद्र पर उसके अनुरोध पर कई मेडिकल स्टाफ और दो डॉ भी स्थानांतरित किए गए थे।जिससे केंद्र को और सहजता से चलाया जाय। सबको देखकर यह आश्चर्य होता था कि उस केंद्र में प्राइवेट डॉ से ज्यादा मरीजों की भीड़ भाड़ रहती थी। उसने कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रति सप्ताह बैठने की अनुमति सिविल सर्जन से ले लिया था।जिससे वहां आंख , कान, चर्म रोग,दांत और हड्डी नस के भी डॉ सप्ताह में एक दिन मरीजों को देखने के लिए आने लगे थे। उस दिन वो जिला में मीटिंग के लिए निकल रही थी ।तभी सिविल सर्जन ने फोन पर कहा _ निर्मला मीटिंग में आ रही हो तो एंबुलेंस लेती आना और अपने दो स्टाफ को भी साथ में ले लेना क्योंकि तुम्हारी पीएचसी के लिए काफी दवाइयां,सर्जिकल स्ट्रूमेंट और काफी पम्पलेट पोस्टर है लेती जाना। उसने कहा ठीक है सर । करीब शाम को छ बजे वो वो जिला से मीटिंग से अपने केंद्र पहुंची ।उसने अपने चैंबर में आते ही अपने एक सहायक को चाय लाने को कहा फिर अपने मेडिकल स्टोर इंचार्ज से दवाईयां और बाकी समान एंबुलेंस से उतारकर स्टोर में रखवाने के लिए कहा। अभी उसने चाय के दो ही घूंट पिया था कि बाहर हो हल्ला होने लगा । थोड़ी ही देर में उसके एक स्टाफ ने भागते हुए आकर बताया _ मैडम बाहर एक महिला बुरी तरह घायल अवस्था में पड़ी हुई है और काफी खून भी बह रहा है।वो औरत दर्द से काफी कराह रही है। डॉ ने पूछा क्या कोई एक्सीडेंट हुआ है। ये तो पता नहीं मैडम उसके साथ उसकी सास और ननद भी है।उस स्टाफ ने बताया। ठीक है उसे तुरंत ड्रेसिंग रूम में ले चलो सब मै देखती हूं उसे । थोड़ी ही देर में । उस घायल महिला को ड्रेसिंग रूम में पहुंचाते ही डॉ निर्मला तुरंत पहुंची ।उस महिला को देखते ही उस बहुत दुख हुआ ।वो बुरी तरह घायल थी । सिर हाथ पैर सबने चोट के निशान थे और वहां से खून बह रहे थे। उसने उसके सिर में देखा । वहा काफी लंबा घाव था। उसने नर्स मंजू से कहा _ एंटीसेप्टिक लोशन रूई और गॉज ले आओ इसके घावों को पहले सफाई करके पट्टी बांधनी होगी।खून को बंद करने के लिए तुरंत इंजेक्शन देना होगा इसके सिर में बड़ा घाव है ।उसमें टांके लगाने होंगे ।उसके गाल और माथे पर भी चोट के निशान थे। उसने सबसे पहले जहां से ज्यादा खून बह रहा था वहां पहले ड्रेसिंग कर दिया।उसके सिर में पांच टांके लगाने पड़े। उसने मंजू से कहा _ दर्द और एंटीसेप्टिक इंजेक्शन तुरंत लगाओ ताकि उसका दर्द कम हो और सेप्टिक न हो।फिर एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगा दो ताकी घाव जल्दी ठीक हो जाए। उस महिला की ननद रीता ने अपनी मां से कहा _ मम्मी तुमको भैया को रोकना चाहिए था । बेटा पैदा करने के लिए भाभी को इतनी बेरहमी से जानवरों की तरह नहीं मारना चाहिए था।अगर मैं नहीं बचाती तो भइया आज भाभी की जान ही ले लेते। उसकी बात सुनकर डॉ निर्मला चौंक गई ।ये तुम क्या कह रही हो । क्या तुम्हारी भाभी का एक्सीडेंट नहीं हुआ है।बल्कि तुम्हारे भैया ने इसे मारा है। इस तरह किसी औरत की कोई राक्षस ही मार सकता है। डॉ बहुत गुस्से में थी ।उसने महिला से पूछना चाहा लेकिन तभी वो बेहोस हो गई। उसने उसकी आंखों की पुतलियां चेक किया उसमें काफी सफेदी नजर आ रही थी । उसने कहा _ काफी खून बह जाने की वजह से ये बिहोश हुई है।इस तुरंत खून चढ़ाना पड़ेगा वरना इसकी मौत भी हो सकती है।मेरे केंद्र में खून की व्यवस्था नहीं है इसे तुरंत सदर अस्पताल भेजना होगा ।मै एंबुलेंस दे देती हूं । इसका प्राथमिक इलाज कर दी हूं अब खून नहीं बहेगा लेकिन यह एक पुलिस केस है मुझे अभी तुरंत पुलिस को बुलाना होगा । उसकी बात सुनकर उस महिला की सास घबड़ा गई । लेकिन उसकी ननद ने कहा _ जी मैडम आप बिल्कुल पुलिस को बुलाइए जबतक भैया को सबक नहीं मिलेगा वो सुधरेंगे नहीं । डॉ ने तुरंत पुलिस थाना जो फोन कर जल्दी केंद्र आने की कहा । थोड़ी देर में पुलिस आ गई । उसने उस महिला को देखा ,उसका फोटो लिया।उसकी सास और ननद का बयान लिया।फिर डॉ से पूछा मैडम हमे इस पीड़ित महिला का भी बयान लेना है ये कबतक होश में आ जाएगी। डॉ ने बताया अभी कुछ कहा नहीं जा सकता ।मैं इसे सदर अस्पताल में रेफर कर रही हूं ।आपको बयान लेने के लिए वही जाना पड़ेगा।क्योंकि इसको यहां रखना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन फिलहाल आप तुरंत इसके पति को गिरफ्तार करे। यह जान से मारने का प्रयास है।अगर ये बच भी गई तो हाफ मर्डर का केस तो लगेगा ही । इसके बाद उसने उस महिला को सफर अस्पताल रेफर कर दिया।साथ ही उसने सदर में फोन कर बोल दिया उस महिला के लिए खून का इंतजाम करने के लिए। शेष अगले भाग _ 8 में। लेखक _ श्याम कुंवर भारती बोकारो,झारखंड मॉब.9955509286 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
Shyam Kunvar Bharti
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भोजपुरी गीत _ सहिला बड़ा सजा। नायक _ दिलवा चुरवले बाड़ू ,अंखियां मिलवले बाड़ू । आके हमरे दिलवा में हल्ला मचवले बाड़ू । आजा गोरी तोहके बतिया दिलवा बताई, करबु हमसे प्यार की देबू हमके भगाई। नायिका_ पिया प्यार में हमके तू बड़ा तड़पावेला। रतिया दिनवा तू याद बड़ा आवेला। समझा मजबूरी गोरी आके तनी समझा जा। प्यार बरसावा तनी घनघोर आवे तनी मजा करा सराबोर तनी ताजा। नायिका _ नजरिए में होला बड़ा बरखा सही ला बड़ा सजा । नायक _ पीरीतिया के रीत गोरी हम हरदम निभाईंब। जाई चाहे जान सुना मोर जान हम ना भुलाईब। नायिका _ दुनिया में तोहसे खाली हम दिलवा लगवली। जिनगी के संगी पिया खाली तोहके हम बनवली। नायक _ अखियां चोरवले बांडू ,मुंहवा लुकवले बाड़ू । जीयरा जरवले बाड़ू ,रूपवा ना दिखवले बाड़ू । दिलवा में का बा बोल के तनी हमके समझा जा। गरवा लगा जा हमके आपन बना जा । नायिका _ बसी जा हमरे अंगवा में पोर पोर मोर राजा। होखे ना केवनो ओर छोर ये राजा नजरिए ने होला बड़ा बरखा सहिका बड़ा सजा । गीतकार श्याम कुंवर भारती (राजभर ) बोकारो,झारखंड मॉब.9955509286 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
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