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श्रवणगिरि गोस्वामी मालकोसनी
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श्रवणगिरि गोस्वामी मालकोसनी
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🕉️ शिवरात्रि का अर्थ क्या है ? 🌿 पुराणों में, वेदों में और शास्त्रों में भगवान शिव-महाकाल के महात्म्य को प्रतिपादित किया गया है। भगवान शिव हिन्दू संस्कृति के प्रणेता आदिदेव महादेव हैं। हमारी सांस्कृतिक मान्यता के अनुसार 33 कोटि देवताओं में 'शिरोमणि' देव शिव ही हैं। सृष्टि के तीनों लोकों में भगवान शिव एक अलग, अलौकिक शक्ति वाले देव हैं। भगवान_शिव पृथ्वी पर अपने निराकार-साकार रूप में निवास कर रहे हैं। भगवान शिव सर्वव्यापक एवं सर्वशक्तिमान हैं। महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिवशंकर के प्रदोष तांडव नृत्य का महापर्व है। शिव प्रलय के पालनहार हैं और प्रलय के गर्भ में ही प्राणी का अंतिम कल्याण सन्निहित है। शिव शब्द का अर्थ है 'कल्याण' और 'रा' दानार्थक धातु से रात्रि शब्द बना है, तात्पर्य यह कि जो सुख प्रदान करती है, वह रात्रि है। 'शिवस्य प्रिया रात्रियस्मिन व्रते अंगत्वेन विहिता तदव्रतं शिवरात्र्‌याख्याम्‌।' इस प्रकार शिवरात्रि का अर्थ होता है, वह रात्रि जो आनंद प्रदायिनी है और जिसका शिव के साथ विशेष संबंध है। शिवरात्रि, जो फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को है, उसमें शिव पूजा, उपवास और रात्रि जागरण का प्रावधान है। इस महारात्रि को शिव की पूजा करना सचमुच एक महाव्रत है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति महाशिवरात्रि के व्रत पर भगवान शिव की भक्ति, दर्शन, पूजा, उपवास एवं व्रत नहीं रखता, वह सांसारिक माया, मोह एवं आवागमन के बंधन से हजारों वर्षों तक उलझा रहता है। यह भी कहा गया है कि जो शिवरात्रि पर जागरण करता है, उपवास रखता है और कहीं भी किसी भी शिवजी के मंदिर में जाकर भगवान शिवलिंग के दर्शन करता है, वह जन्म-मरण पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति पा जाता है। शिवरात्रि के व्रत के बारे में पुराणों में कहा गया है कि इसका फल कभी किसी हालत में भी निरर्थक नहीं जाता है। शिवरात्रि का व्रत सबसे अधिक बलवान है। भोग और मोक्ष का फलदाता शिवरात्रि का व्रत है। इस व्रत को छोड़कर दूसरा मनुष्यों के लिए हितकारक व्रत नहीं है। यह व्रत सबके लिए धर्म का उत्तम साधन है। निष्काम अथवा सकाम भाव रखने वाले सांसारिक सभी मनुष्य, वर्णों, आश्रमों, स्त्रियों, पुरुषों, बालक-बालिकाओं तथा देवता आदि सभी देहधारियों के लिए शिवरात्रि का यह श्रेष्ठ व्रत हितकारक है। शिवरात्रि के दिन प्रातः उठकर स्नानादि कर शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का विधिवत पूजन कर नमन करें। रात्रि जागरण महाशिवरात्रि व्रत में विशेष फलदायी है। गीता में इसे स्पष्ट किया गया है- या निशा सर्वभूतानां तस्या जागर्ति संयमी। यस्यां जागृति भूतानि सा निशा पश्चतो सुनेः॥ - तात्पर्य यह कि विषयासक्त सांसारिक लोगों की जो रात्रि है, उसमें संयमी लोग ही जागृत अवस्था में रहते हैं और जहां शिव पूजा का अर्थ पुष्प, चंदन एवं बिल्वपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित कर भगवान शिव का जप व ध्यान करना और चित्त वृत्ति का निरोध कर जीवात्मा का परमात्मा शिव के साथ एकाकार होना ही वास्तविक पूजा है। शिवरात्रि में चार प्रहरों में चार बार अलग-अलग विधि से पूजा का प्रावधान है। महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में भगवान शिव की ईशान मूर्ति को दुग्ध द्वारा स्नान कराएं, दूसरे प्रहर में उनकी अघोर मूर्ति को दही से स्नान करवाएं और तीसरे प्रहर में घी से स्नान कराएं व चौथे प्रहर में उनकी सद्योजात मूर्ति को मधु द्वारा स्नान करवाएं। इससे भगवान आशुतोष अतिप्रसन्न होते हैं। प्रातःकाल विसर्जन और व्रत की महिमा का श्रवण कर अमावस्या को निम्न प्रार्थना कर पारण करें - संसार क्लेश दग्धस्य व्रतेनानेन शंकर। प्रसीद समुखोनाथ, ज्ञान दृष्टि प्रदोभव॥ - तात्पर्य यह कि भगवान शंकर! मैं हर रोज संसार की यातना से, दुखों से दग्ध हो रहा हूं। इस व्रत से आप मुझ पर प्रसन्न हों और प्रभु संतुष्ट होकर मुझे ज्ञानदृष्टि प्रदान करें। 'ॐ नमः शिवाय' कहिए और देवादिदेव प्रसन्न होकर सब मनोरथ पूर्ण करेंगे। शिवरात्रि के दिन शिव को ताम्रफल (बादाम), कमल पुष्प, अफीम बीज और धतूरे का पुष्प चढ़ाना चाहिए एवं अभिषेक कर बिल्व पत्र चढ़ाना चाहिए। ।। हर हर महादेव ।। ।। ॐ नमः शिवाय ।। ओम् नमो नारायण जय भोलेनाथ 🚩🔱🙏🌹🔱 #🏙 आपणो जोधपुर #📝भक्ति संदेश🙏 #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच
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*राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली ।* *ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥* *🙇‍♂️👏राम राम जी राम राम👏🙇‍♂️* #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच #📝भक्ति संदेश🙏 #🏙 आपणो जोधपुर
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ऐक दशनामी जब दुसरे दशनामी से मीलते हे तो ॐ नमो नारायण मंत्र से अभीवादन करते हे, उसका अर्थ क्या है जानो, नारायण खुद जीनको नमस्कार करते हैं उसको याद करना ओम नमो नारायणाय #🌻 सकारात्मक सोच #📝भक्ति संदेश🙏 #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🏙 आपणो जोधपुर
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ओम् नमो नारायण.🔱..ॐ नमः शिवाय..🌿.💖🔱🕉🙏🙏🙏🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🕉🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🌿🕉🕉🌿🕉🌿🕉 जय भोलेनाथ 🔱🕉 #🏙 आपणो जोधपुर #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच #📝भक्ति संदेश🙏
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ऐक दशनामी जब दुसरे दशनामी से मीलते हे तो ॐ नमो नारायण मंत्र से अभीवादन करते हे, उसका अर्थ क्या है जानो, नारायण खुद जीनको नमस्कार करते हैं उसको याद करना ओम नमो नारायण आप सभी का दिन सुभ व मंगलमय हो जय भोलेनाथ बाबा री 🚩🔱🙏🌹🔱 हर हर महादेव #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच #🏙 आपणो जोधपुर #📝भक्ति संदेश🙏
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*धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ! ओम् नमो नारायण*🙏🏻 हर हर महादेव धनतेरस के पावन अवसर पर, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और धन की वर्षा हो। यह पर्व आपके लिए नई खुशियाँ और सफलताएँ लेकर आए। जय भोलेनाथ बाबा री आप सभी को सपरिवार धनतेरस दीपावली गोवर्धन पूजा और भाई दूज कि ढेर सारी शुभकामनाएं 🚩🔱🙏🌹🔱 #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #📝भक्ति संदेश🙏 #🏙 आपणो जोधपुर #🌻 सकारात्मक सोच
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🚩 कैसे शुरू हुआ "करवा चौथ" का व्रत, किसने किया था पहली बार व्रत....??🌷 करवाचौथ का व्रत भारतीय महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। हालांकि सामाजिक मान्यताएं कहती हैं कि इस व्रत का चलन पंजाबी परंपराओं से लिया गया है। लेकिन इस व्रत से जुड़ी धार्मिक कथाएं कुछ और कहती हैं। आइए, जानते हैं कि करवा चौथ का व्रत पूरे ब्रह्मांड में सबसे पहले किसने_किया। प्राचीन समय में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी। वह अपने पति के साथ नदी किनारे बसे एक गांव में रहती थी। उसका पति काफी उम्रदराज था। एक दिन वह नदी में स्नान करने गया। नदी में नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया और निगलने के लिए उसे अपनी तरफ खींचने लगा। इस पर वह अपनी पत्नी का नाम लेकर ‘करवा_करवा’ चिल्लाकर अपनी पत्नी को सहायता के लिए पुकारने लगा। करवा_पतिव्रता स्त्री थी और उसके सतीत्व में बहुत बल था। जैसे ही उसने अपने पति की आवाज सुनी, करवा दौड़कर अपने पति के पास पहुंची। उसने अपने पति का पैर मगर के मुंह में देखकर अपनी सूती साड़ी से एक धागा निकाला और अपने तपोबल की आन देकर उस मगरमच्छ को कच्चे धागे से ही बांध दिया। मगरमच्छ को उस सूत के धागे से बांधने के बाद करवा यमराज के पास पहुंची। यमराज उस समय भगवान चित्रगुप्त के खाते देख रहे थे। करवा अपने हाथ में लाई हुई सात सीकों को झाड़ने लगी। इससे यमराज के खाते इधर-उधर बिखर गए। उनका ध्यान करवा पर पड़ा। यमराज ने रुष्ट होते हुए पूछा ‘देवी तुम क्या चाहती हो?’ इस पर करवा ने कहा कि यमराज एक मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है, आप अपनी शक्ति से उस मगर को मृत्युदंड देकर अपने लोक नरक में ले जाओ। इस पर यमराज ने कहा कि मगरमच्छ की आयु अभी शेष है, समय से पहले मैं उसे मृत्यु नहीं दे सकता। इस पर करवा ने कहा ‘यदि आप मगरमच्छ को मारकर, मेरे पति को चिरायु होने का वरदान नहीं देगें तो मैं अपने तपोबल से आपको नष्ट होने का शाप दूंगी।’ करवा की बात सुनकर चित्रगुप्त सोच में पड़ गए। क्योंकि वह करवा के सतीत्व के कारण न तो उसे शाप दे सकते थे और न ही उसके वचन की अनदेखा कर सकते थे। तब उन्होंने मगरमच्छ को असमय ही यमलोक भेज दिया और करवा के पति को लंबी आयु का वरदान दिया। साथ ही चित्रगुप्त ने करवा को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारा जीवन सुख और समृद्धि से भरपूर होगा। हे करवा! आज तुमने अपने पति के जीवन की रक्षा अपने तपोबल से की है, मैं वरदान देता हूं कि इस तिथि पर जो भी महिला पूर्ण विश्वास और आस्था से व्रत और पूजन करेगी, मैं उसके सौभाग्य की रक्षा करूंगा। करवा के तप के कारण भगवान चित्रगुप्त ने सौभाग्य की रक्षा का आशीर्वाद दिया और उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथ) तिथि होने कारण, करवा और चौथ के मिलने से इस व्रत का नाम करवा_चौथ पड़ा। इस तरह मां करवा वह पहली महिला हैं, जिन्होंने सुहाग की रक्षा के इस व्रत को न केवल पहली बार किया बल्कि इसकी शुरुआत भी की। इस व्रत को करने के बाद शाम को पूजा करते समय माता करवा की यह कथा पढ़ें। साथ ही माता करवा से विनती करें कि हे_मां_करवा जिस प्रकार आपने अपने सुहाग_और_सौभाग्य की रक्षा की, उसी तरह हमारे सुहाग की रक्षा करना। भगवान चित्रगुप्त और यमराज से विनती करें कि हे प्रभु जो वचन आपने माता_करवा को दिया था, उसका निर्वाह करते हुए हमारे व्रत को स्वीकार कर हमारे सौभाग्य की रक्षा करना। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने अर्जुन के लिए करवाचौथ का व्रत रखा था। इस व्रत के बारे में वराह_पुराण में उल्लेख मिलता है। ओम् नमो नारायण आप सभी का दिन सुभ व मंगलमय हो करवा चौथ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹 #📝भक्ति संदेश🙏 #🏙 आपणो जोधपुर #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🌻 सकारात्मक सोच
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