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🌹ईमानदारी की अनदेखी कीमत🌹 🙏🙏🙏 काम की तलाश में कई दिनों तक भटकने के बाद थका-हारा और निराश युवक जब घर लौटने ही वाला था, तभी पीछे से एक कमजोर-सी आवाज़ आई—“ऐ भाई! कोई मजदूर मिलेगा क्या?” उसने मुड़कर देखा तो एक झुकी कमर वाला वृद्ध तीन गठरियाँ उठाए खड़ा था। युवक ने सहानुभूति से कहा कि वह मजदूरी कर लेगा, क्योंकि उसे रामगढ़ ही जाना है। वृद्ध ने बताया कि वह दो गठरियाँ खुद उठाएगा, लेकिन तीसरी गठरी भारी है, उसे पहुँचा देने पर दो रुपये देगा। युवक ने बिना देर किए मदद स्वीकार कर ली और इसे अपना फर्ज बताया। जैसे ही उसने गठरी उठाई, वजन से चौंक गया। पूछने पर वृद्ध ने धीरे से कहा कि उसमें एक-एक रुपये के सिक्के हैं। युवक के मन में क्षणभर विचार आया, पर उसने स्वयं को समझाया कि उसे ईमानदारी से कमाई करनी है, चोरी से नही, रास्ते में एक नदी आई। युवक सहज ही पानी में उतर गया, पर वृद्ध डर से रुक गया। उसने विनती की कि एक और गठरी उठा ले और मजदूरी बढ़ा देगा, साथ ही आशंका जताई कि कहीं वह भाग न जाए क्योंकि इसमें चाँदी के सिक्के हैं। युवक ने साफ कहा कि वह बेईमान नहीं है। नदी पार करने के बाद पहाड़ी आई। यहाँ वृद्ध ने तीसरी गठरी भी सौंपने से पहले डर जताया कि इसमें सोने के सिक्के हैं और अगर वह भाग गया तो पकड़ नहीं पाएगा। युवक ने अपनी ईमानदारी का बखान करते हुए बताया कि उसने पहले सेठ की नौकरी केवल इसलिए छोड़ी थी क्योंकि वह गलत काम करवाना चाहता था। वृद्ध ने भरोसा कर लिया और युवक तीनों गठरियाँ लेकर आगे बढ़ गया। पहाड़ी पार करते-करते उसके मन में लालच ने घर कर लिया—“अगर मैं भाग जाऊँ तो बूढ़ा क्या कर लेगा? एक झटके में अमीर बन जाऊँगा, पत्नी खुश हो जाएगी, इज्ज़त मिलेगी।” लालच जीत गया और वह भाग निकला। घर पहुँचकर जैसे ही उसने गठरियाँ खोलीं, उसके होश उड़ गए—अंदर सिक्कों की जगह मिट्टी के ढेले थे। तभी एक कागज़ मिला, जिस पर लिखा था कि यह नाटक राज्य के खजाने की सुरक्षा के लिए ईमानदार मंत्री खोजने हेतु किया गया था और परीक्षा लेने वाला वृद्ध स्वयं महाराजा था। अगर वह लालच में न पड़ता, तो मंत्रीपद और सम्मान उसका होता। यह पढ़कर वह पछतावे में डूब गया, क्योंकि एक पल के लालच ने उसका उज्ज्वल भविष्य छीन लिया। शिक्षा : ईमानदारी का मूल्य तुरंत नहीं, पर उसका फल जीवन भर मिलता है। लालच के क्षणिक आकर्षण में सिद्धांत छोड़ देना सबसे बड़ा नुकसान है, क्योंकि जीवन कब और कैसे हमारी परीक्षा ले ले—कोई नहीं जानता। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 सफलता के मंत्र ✔️
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*दरिद्रता सभी दुखों की जड़ है इसलिए हे महालक्ष्मी! कृपा कीजिए*॥ 🙏*सतत् शरणागत*🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
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🌹प्रेम🌹 🙏🙏🙏 एक बार एक पुत्र अपने पिता से रूठ कर घर छोड़ कर दूर चला गया और फिर इधर उधर यूँही भटकता रहा। दिन बीते, महीने बीते और साल बीत गए | एक दिन वह बीमार पड़ गया | अपनी झोपडी में अकेले पड़ उसे अपने पिता के प्रेम की याद आई कि कैसे उसके पिता उसके बीमार होने पर उसकी सेवा किया करते थे । उसे बीमारी में इतना प्रेम मिलता था कि वो स्वयं ही शीघ्र अति शीघ्र ठीक हो जाता था | उसे फिर एहसास हुआ कि उसने घर छोड़ कर बहुत बड़ी गलती की है, वो रात के अँधेरे में ही घर की और हो लिया। जब घर के नजदीक गया तो उसने देखा आधी रात के बाद भी दरवाज़ा खुला हुआ है | अनहोनी के डर से वो तुरंत भाग कर अंदर गया तो उसने पाया की आंगन में उसके पिता लेटे हुए हैं | उसे देखते ही उन्होंने उसका बांहे फैला कर स्वागत किया | पुत्र की आँखों में आंसू आ गए | उसने पिता से पूछा "ये घर का दरवाज़ा खुला है, क्या आपको आभास था कि मैं आऊंगा?" पिता ने उत्तर दिया "अरे पगले ये दरवाजा उस दिन से बंद ही नहीं हुआ जिस दिन से तू गया है, मैं सोचता था कि पता नहीं तू कब आ जाये और कंही ऐसा न हो कि दरवाज़ा बंद देख कर तू वापिस लौट जाये |" ठीक यही स्थिति उस परमपिता परमात्मा की है | उसने भी प्रेमवश अपने भक्तो के लिए द्वार खुले रख छोड़े हैं कि पता नहीं कब भटकी हुई कोई संतान उसकी और लौट आए।i हमें भी आवश्यकता है सिर्फ इतनी कि उसके प्रेम को समझे और उसकी और बढ़ चलें। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #🏠घर-परिवार
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जब मिले किसी से तो याद रखिए वो इंसान है भगवान नहीं उसमें खूबियां भी होंगी और खामियां भी.... जय श्री लक्ष्मी नारायण 🚩🚩🌻🌻🪷🌻🌻🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
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जय श्री गणेश जी! 💐🌷🌸🌺🪷🌹 🙏विघ्नहर्ता आपकी हर बाधा दूर करें सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद बना रहे..🙏🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #श्री गणेश #🙏🏻 गणपति भजन 🌺
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🌹प्यारा सुकून🌹 🙏🙏🙏 शहर की बहुत बड़ी दुकान थी, जिसके ब्रेड पकौड़े और समोसे बड़े मशहूर थे। मैं पहले भी उनके स्वाद के बारे में सुन चुका था, मगर कल जब एक खास दोस्त ने कहा—“भाई मोहन, क्या स्वादिष्ट समोसे थे… और इतने बढ़िया, मुलायम ब्रेड पकौड़े! वाह, मज़ा ही आ गया…”तो आज मैंने भी वहीं जाकर उन लज़ीज़ समोसों और ब्रेड पकौड़ों का मज़ा लेने की ठान ली। आज की कहानी ऑफिस से निकला तो सात बज चुके थे। सोचा—आज घर जाने से पहले उसी दुकान पर कुछ खा लिया जाए। जैसे ही दुकान के बाहर गाड़ी खड़ी कर अंदर जाने लगा, तभी किसी नन्हे से हाथ के स्पर्श ने मेरा ध्यान खींच लिया। देखा तो पाँच–छह साल की एक छोटी-सी बच्ची खड़ी थी। उसने मासूमियत से पूछा—“अंकल… क्या आप भी यहाँ समोसा और पकौड़ा खाने आए हैं?” मैंने कहा—“हाँ… मगर तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो?” वो बोली—“यहाँ बहुत अच्छे मिलते हैं, लेकिन आप मत जाइए उन्हें खाने…” मैं उसकी बात सुनकर हैरान हो गया। कारण पूछा तो उसकी आँखों में नमी उतर आई। बोली—“अंकल… ये दुकान वाले भैया हमें और मेरे छोटे भाई को हर रात बचे हुए समोसे और पकौड़े दे देते हैं। उसी से हमारा पूरे दिन का खाली पेट भर जाता है। आज भी बहुत कम पकौड़े बचे हैं… कल तो सब खत्म हो गए थे, इसीलिए हमें कुछ मिला ही नहीं। मैं तो भूखी रह लेती हूँ, मगर मेरा छोटू… वो रोता है…”इतना कहकर वह फूट-फूटकर रो पड़ी। मैंने उसे चुप कराया और कहा— “पर मैं तो ज़रूर समोसे और पकौड़े लूँगा…”यह कहकर मैं अंदर जाने लगा। यह देखकर वह और घबरा गई। कुछ देर बाद जब मैं बाहर आया, तो दुकानदार भी मेरे साथ था। मैंने जो समोसे और पकौड़े लिए थे, वे दोनों बहन-भाई को पकड़ा दिए और कहा— “अब से तुम्हें रात का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। मैंने इन भैया से बात कर ली है। अब से ये तुम्हें रोज़ समय पर समोसे और पकौड़े दे दिया करेंगे।” यह कहते हुए मेरी आँखें भीग गईं और मैं बाहर आ गया। दोस्तों, मैंने वो ब्रेड पकौड़े और समोसे तो नहीं खाए, मगर उनका स्वाद सचमुच मेरे मन में बस गया। क्योंकि मैंने दुकानदार से हर महीने कुछ रुपये देने का वादा किया था, जिसके बदले वह बिना किसी को बताए उन दोनों बहन-भाई को रोज़ उनके मनपसंद स्वादिष्ट समोसे और पकौड़े देता रहेगा। मेरे पिताजी कहते हैं—कुछ काम ऐसे होने चाहिए, जिन्हें करने से आपको और आपके मन को सच्चा सुकून मिले। शिक्षा... सच्चा सुख भोग में नहीं, बल्कि किसी भूखे चेहरे पर मुस्कान लाने में है। जब हम अपने हिस्से की खुशियाँ दूसरों के साथ बाँटते हैं, तब जीवन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। इंसानियत, करुणा और संवेदना—यही वह धन है जो खर्च करने से घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🌸पॉजिटिव मंत्र #👫 हमारी ज़िन्दगी #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
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🌹कर्म का फल🌹 🙏🙏🙏 अगला भाग ,2 ......इतने में ज्योतिषी जी आ गये। घर में प्रवेश करते ही ब्राह्मणी ने अनेक दुर्वचन कहकर उनका तिरस्कार किया। परंतु ज्योतिषीजी चुप रहे और अपनी स्त्री को कुछ भी नहीं कहा। कुछ देर बाद वे अपनी गद्दी पर आ बैठे। ब्राह्मण को देखकर ज्योतिषी ने उनसे कहाः "कहिये, ब्राह्मण देवता! कैसे आना हुआ?" ब्राह्मण ने कहा- आया तो था अपने बारे में पूछने के लिए परंतु पहले आप अपना हाल बताइये कि आपकी पत्नी अपनी जुबान से आपका इतना तिरस्कार क्यों करती है? जो किसी से भी नहीं सहा जाता और आप सहन कर लेते हैं, इसका क्या कारण है? ज्योतिषी जी ने कहा- यह मेरी पत्नी नहीं, मेरा कर्म है। दुनिया में जिसको भी देखते हो अर्थात् भाई, पुत्र, शिष्य, पिता, गुरु, सम्बंधी- जो कुछ भी है, सब अपना कर्म ही है । यह पत्नी नहीं, मेरा किया हुआ पूर्व का कर्म ही है और यह भोगे बिना कटेगा नहीं।। अपना किया हुआ जो भी कुछ शुभ-अशुभ कर्म है, वह अवश्य ही भोगना पड़ता है। बिना भोगे तो सैंकड़ों-करोड़ों कल्पों के गुजरने पर भी कर्म नहीं टल सकता।' इसलिए मैं अपने कर्म खुशी से भोग रहा हूँ और अपनी स्त्री की ताड़ना भी नहीं करता, ताकि आगे इस कर्म का फल न भोगना पड़े। महाराज! आपने क्या कर्म किया था?।। ज्योतिषी जी ने कहा- सुनिये, पूर्वजन्म में मैं कौआ था और मेरी पत्नी गधी थी। इसकी पीठ पर फोड़ा था, फोड़े की पीड़ा से यह बड़ी दुःखी और कमजोर भी हो गयी थी। फोड़े में कीड़े पड़ गये जिन्हें खाने के लिये मैं इसके फोड़े में चोंच मारता और कीड़ों को खाता था। इससे जब दर्द के कारण यह कूदती थी आखिर त्रस्त होकर यह गाँव से दस-बारह मील दूर जंगल में चली गयी। वहाँ भी इसे देखते ही मैं इसकी पीठ पर जोर से चोंच मारी तो मेरी चोंच इसकी हड्डी में चुभ गयी। इस पर इसने अनेक प्रयास किये, फिर भी चोंच न छूटी।। मैंने भी चोंच निकालने का बड़ा प्रयत्न किया मगर न निकली। फिर यह गंगाजी मे प्रवेश कर गयी ऐसा सोंचकर कि पानी के भय से ही यह दुष्ट मुझे छोड़ देगा। परंतु वहाँ भी मैं अपनी चोंच निकाल न पाया। आखिर में यह बड़े प्रवाह में प्रवेश कर गयी। गंगा का प्रवाह तेज होने के कारण हम दोनों बह गये और बीच में ही मर गये। तब गंगा जी के प्रभाव से यह तो ब्राह्मणी बनी और मैं बड़ा भारी ज्योतिषी बना। अब वही मेरी पत्नी बनी है।। जो कुछ दिनों और अपने मुख से गाली निकालकर मुझे दुःख देगी, लेकिन मैंने चोंच इसको दर्द पहुंचाने के लिये नहीं मारी थी। अतः इसकी समझ भी ठीक होगी और मैं भी अपने पूर्वकर्मों का फल समझकर सहन करता रहूँगा। इसका दोष नहीं मानता क्योंकि यह किये हुए कर्मों का ही फल है। इसलिए मैं शांत रहता हूँ और प्रतिक्षा में हूँ कि कभी तो इसका स्वभाव अच्छा होगा। अब अपना प्रश्न पूछो?।। ब्राह्मण ने अपना सब समाचार सुनाया और पूछाः- अधर्मी पापी राजा ने मुझ निरपराध का हाथ क्यों कटवाया? ज्योतिषी जी ने कहा- राजा ने आपका हाथ नहीं कटवाया, आपके कर्म ने ही आपका हाथ कटवाया है। ब्राह्मण ने पूछ किस प्रकार का कौन सा कर्म? ज्योतिषी जी ने कहा- पूर्वजन्म में आप एक तपस्वी थे और राजकन्या गौ थी तथा राजकुमार कसाई था। वह कसाई जब गौ को मारने लगा, तब गौ बेचारी जान बचाकर आपके सामने से जंगल में भाग गयी। पीछे से कसाई आया और आप से पूछा कि "इधर कोई गाय तो नहीं गई है?" आपने जिस तरफ गौ गयी थी, उस तरफ अपने हाथ से इशारा किया तो उस कसाई ने जाकर गौ को मार डाला। इतने में जंगल से शेर आया और गौ एवं कसाई दोनों को खा गया। कसाई को राजकुमार और गौ को राजकन्या का जन्म मिला एवं पूर्वजन्म के किये हुए उस कर्म ने एक रात्रि के लिए उन दोनों को इकट्ठा किया। क्योंकि कसाई ने गौ को गड़ासे से मारा था, इसी कारण राजकन्या के हाथों अनायास ही तलवार गिरने से राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया।। इस तरह अपना फल देकर कर्म निवृत्त हो गया। तुमने जो हाथ का इशारा रूप कर्म किया था, उस पापकर्म ने तुम्हारा हाथ कटवा दिया है। इसमें तुम्हारा ही दोष है किसी अन्य का नहीं, ऐसा निश्चय कर सुखपूर्वक रहो। कितना सहज है ज्ञान संयुक्त जीवन! यदि हम इस कर्म सिद्धान्त को मान और जान लें तो पूर्वकृत घोर से घोर कर्म का फल भोगते हुए भी हम दुःखी नहीं होंगे। बल्कि अपने चित्त की समता बनाये रखने में सफल होंगे...। मंगलमय प्रभात प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👫 हमारी ज़िन्दगी #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 सफलता के मंत्र ✔️
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महादेव कहते हैं!:... 🙏“विश्वास रखो, जब समय तुम्हारे साथ नहीं होता, तब मैं तुम्हारे साथ होता हूँ।”🙏🙏 ।।ॐ नमः शिवाय।। 🌹💐🌷🌸🌺🪷 #🌞 Good Morning🌞 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ सोमवार #🛕बाबा केदारनाथ📿
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