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@184290003
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58 minutes ago
*🌹कर्म और उद्देश्य🌹* 🙏🙏🙏 *देखिये! डाक्टर भी चाकू चलाता है और डाकू भी चाकू चलाता है। कर्म दोनों का एक है, पर उद्देश्य में भिन्नता है।* *डाक्टर के चाकू से मैं मर भी गया, तो भी डाक्टर को कोई दोष नहीं लगेगा। डाकू का चाकू खाकर मैं बच भी गया, तो भी डाकू को दोष लगेगा। विचार करें, क्यों?* *डाक्टर मुझे बचाने के लिए, मुझ पर कृपा रूप, मेरी चिकित्सा के लिए चाकू चला रहा है। डाकू मुझे लूटने के उद्देश्य से, मुझे मारने के लिए चाकू चला रहा है।* *अब ध्यान दें, वहाँ संसार में, कर्म की बड़ी कीमत मानी जाती है। जबकि परमात्मा के दरबार में कर्म की कीमत नहीं है, यहाँ तो उद्देश्य की कीमत है। आपने क्या किया? यह बात गौण है। क्यों किया? पड़ताल इस बात की की जाती है।* *हमें यह भी समझना होगा कि किसी ने बुरा किया तो बहुत गलत किया, पर किसी ने भला किया, तो क्या तीर मार लिया? भला तो करना ही चाहिए, भला तो स्वाभाविक ही होना चाहिए, इसमें बड़ी बात क्या है?* *किसी को दुख में देख कर किसी का हृदय द्रवित हो गया, उसने सहायता का हाथ बढ़ा दिया, तो यह तो मनुष्योचित स्वभाव ही है। इसमें "मैंने किसी की सहायता की" ऐसी गर्व की कौन सी बात है? यह तो भगवान की कृपा है कि आपको भले कर्म का निमित्त बना लिया।* *मुझसे नए नए मिलने वाले, बड़ी सूची गिनाते हैं। महाराज! मैं यह करता हूँ, वह करता हूँ। मैंने अमुक शास्त्र अमुक बार पढ़ा, अमुक क्रिया अमुक बार की, अमुक तीर्थ किए, इतना नाम जपा आदि आदि। और मैं देखता हूँ कि वे दुखी भी हैं। कारण क्या है? उनका दुख इस बात का है कि मैंने इतना किया, फिर भी उनके जीवन का कष्ट दूर नहीं हुआ। कि कचहरी में हार गए, कि व्यापार में हानि हो गई, कि परिवार प्रतिकूल है, कि रोग नहीं मिटा।* *तो अपने सत्कर्मों के बदले में, जो संसार का सुख चाहता है, सम्पत्ति, स्वास्थ्य चाहता है, उसका कर्म तो ठीक ही था, पर उद्देश्य गड़बड़ हो गया। उसने जो किया, सुख की कामना से किया। "संसार से निवृत्त हो जाऊँ" ऐसा उसका उद्देश्य नहीं है। "थोड़ा संसार और बना लूं, संसार को अनुकूल बना लूं" ऐसा उद्देश्य है।* *किसलिए आप क्या करते हो, इस का मूल्य दो कौड़ी है, किस उद्देश्य से करते हो, उस का ही मूल्य है....।* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👫 हमारी ज़िन्दगी
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59 minutes ago
🌹रविवार सुप्रभात🌹 सूर्य भगवान की किरणों के साथ आज का दिन आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नई रोशनी लेकर आए। हर अंधेरा मिटे, हर सपना सजे, और आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनी रहे। 🙏 जय सूर्य देव 🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #🌞 Good Morning🌞 #शुभ रविवार #☀ जय सूर्यदेव
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1 days ago
🌹विजेता मेंढक🌹 🙏🙏🙏 बहुत समय पहले की बात है।एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे ।सरोवर के  बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा  भी लगा हुआ था जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया  था। खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी  थी। एक दिन मेंढकों के दिमाग में  आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए ।रेस में भाग  लेने  वाली  प्रतियोगीयों को  खम्भे पर चढ़ना होगा , और  जो  सबसे पहले एक ऊपर पहुच  जाएगा वही विजेता माना  जाएगा । रेस का दिन आ पंहुचा,चारो तरफ बहुत भीड़ थी । आस -पास  के  इलाकों  से  भी कई  मेंढक  इस  रेस  में  हिस्सा लेने पहुचे   . माहौल में  सरगर्मी थी   , हर  तरफ शोर ही शोर  था । रेस  शुरू  हुई ……लेकिन खम्भे को देखकर  भीड़  में  एकत्र  हुए  किसी  भी  मेंढक  को  ये  यकीन  नहीं हुआकि  कोई भी  मेंढक   ऊपर  तक  पहुंच पायेगा … हर  तरफ  यही सुनाई  देता … “ अरे  ये बहुत  कठिन  है ” “ वो  कभी भी ये  रेस  पूरी  नहीं  कर  पायंगे “ सफलता का  तो  कोई  सवाल ही नहीं  , इतने  चिकने  खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता  ”और  यही हो भी  रहा  था , जो भी  मेंढक  कोशिश  करता , वो  थोडा  ऊपर  जाकर  नीचे  गिर  जाता , कई  मेंढक दो -तीन  बार  गिरने  के  बावजूद  अपने  प्रयास  में  लगे  हुए  थे …पर  भीड़  तो अभी भी  चिल्लाये  जा  रही  थी , “ ये  नहीं  हो  सकता , असंभव ”, और  वो  उत्साहित  मेंढक  भी ये सुन-सुनकर हताश हो गए और अपना  प्रयास  छोड़  दिया . लेकिन  उन्ही  मेंढकों  के  बीच  एक  छोटा  सा  मेंढक  था , जो  बार -बार  गिरने  पर  भी  उसी  जोश  के  साथ  ऊपर  चढ़ने  में  लगा  हुआ  था ….वो लगातार   ऊपर  की  ओर  बढ़ता  रहा ,और  अंततः  वह  खम्भे के  ऊपर  पहुच  गया  और इस रेस का  विजेता  बना . उसकी  जीत  पर  सभी  को  बड़ा  आश्चर्य  हुआ , सभी मेंढक  उसे  घेर  कर  खड़े  हो  गए  और  पूछने  लगे   ,” तुमने  ये  असंभव  काम  कैसे  कर  दिखाया , भला तुम्हे   अपना  लक्ष्य   प्राप्त  करने  की  शक्ति  कहाँ  से  मिली, ज़रा हमें भी तो बताओ कि तुमने ये विजय कैसे प्राप्त की ?” तभी  पीछे  से  एक  आवाज़  आई … “अरे उससे  क्या  पूछते  हो , वो तो बहरा  है। अक्सर हमारे अन्दर अपना लक्ष्य प्राप्त करने की काबीलियत होती है, पर हम अपने चारों तरफ मौजूद नकारात्मकता की वजह से खुद को कम आंक बैठते हैं और हमने जो बड़े-बड़े सपने देखे होते हैं उन्हें पूरा किये बिना ही अपनी ज़िन्दगी गुजार देते हैं । आवश्यकता  इस बात की है हम हमें कमजोर बनाने वाली हर एक आवाज के प्रति बहरे और ऐसे हर एक दृश्य के प्रति अंधे हो जाएं. और तब हमें सफलता के शिखर पर पहुँचने से कोई नहीं रोक पायेगा। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #☝ मेरे विचार #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख
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1 days ago
जय शनिदेव जय हनुमान जी 🌷💐🌸🪷🌹🙏🙏 किसी का बुरा चाहने से उसका बुरा हो या ना हो,पर आपका अन्तःकरण अवश्य ही मैला होगा,यह निश्चित है,,. सुप्रभात 🙏🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शनिवार #जय हनुमान
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2 days ago
🌹अमल के बिना ज्ञान व्यर्थ है🌹 🙏🙏🙏 एक राजा के विशाल महल में एक सुंदर वाटिका थी, जिसमें अंगूरों की एक बेल लगी थी। वहां रोज एक चिड़िया आती और मीठे अंगूर चुन-चुनकर खा जाती और अधपके और खट्टे अंगूरों को नीचे गिरा देती। माली ने चिड़िया को पकड़ने की बहुत कोशिश की पर वह हाथ नहीं आई। हताश होकर एक दिन माली ने राजा को यह बात बताई। यह सुनकर भानुप्रताप को आश्चर्य हुआ। उसने चिड़िया को सबक सिखाने की ठान ली और वाटिका में छिपकर बैठ गया। जब चिड़िया अंगूर खाने आई तो राजा ने तेजी दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। जब राजा चिड़िया को मारने लगा, तो चिड़िया ने कहा, हे राजन, मुझे मत मारो। मैं आपको ज्ञान की 4 महत्वपूर्ण बातें बताऊंगी।' राजा ने कहा, 'जल्दी बताओ ।' चिड़िया बोली, 'हे राजन, सबसे पहले, तो हाथ में आए शत्रु को कभी मत छोड़ो।' राजा ने कहा, 'अब दूसरी बात बता।' चिड़िया ने कहा, 'असंभव बात पर भूलकर भी विश्वास मत करो और तीसरी बात यह है कि बीती बातों पर कभी पश्चाताप मत करो।' राजा व्यग्र होकर बोला, 'अब चौथी बात भी जल्दी से बता दो।' इस पर चिड़िया बोली, चौथी बात बड़ी गूढ़ और रहस्यमयी है। मुझे जरा ढीला छोड़ दें क्योंकि मेरा दम घुट रहा है। कुछ सांस लेकर ही बता सकूंगी।' चिड़िया की बात सुन जैसे ही राजा ने अपना हाथ ढीला किया, चिड़िया उड़कर एक डाल पर बैठ गई और बोली, 'मेरे पेट में दो हीरे हैं।' यह सुनकर राजा पश्चाताप में डूब गया। राजा की हालत देख चिड़िया बोली, 'हे राजन, ज्ञान की बात सुनने और पढ़ने से कुछ लाभ नहीं होता, उस पर अमल करने से होता है। आपने मेरी बात नहीं मानी। मैं आपकी शत्रु थी, फिर भी आपने पकड़कर मुझे छोड़ दिया। मैंने यह असंभव बात कही कि मेरे पेट में दो हीरे हैं फिर भी आपने उस पर भरोसा कर लिया। आपके हाथ में वे काल्पनिक हीरे नहीं आए, तो आप पछताने लगे। सारांश- उपदेशों को जीवन में उतारे बगैर उनका कोई मोल नहीं। मंगलमय प्रभात प्रणाम #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🏠घर-परिवार #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👌 आत्मविश्वास
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2 days ago
🌸“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”🌸 🙏“महालक्ष्मी जी का आशीर्वाद आपके जीवन में धन, सुख और समृद्धि की वर्षा करे। जहाँ माँ लक्ष्मी, वहाँ कभी कमी नहीं।”🙏🙏 जय महालक्ष्मी माता 🌷💐🪷🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ शुक्रवार #जय #🌞 Good Morning🌞
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2 days ago
🌺*प्रातः अभिनंदनम्*🌺 *आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ*॥ *सादर नमन*🙏🙏 #🙏श्री राम भक्त हनुमान🚩 #हनुमान #हनुमान जयंती #जय बजरंगबली #राम
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3 days ago
🌹मित्रता🌹 🙏🙏🙏 बहुत समय पहले की बात है। एक पाकुड़ के पेड़ पर एक हंस और एक कौआ रहते थे। दोनों में गहरी मित्रता थी। कौआ जलनशील स्वभाव का था। जबकि हंस दयालु स्वभाव का था। गर्मी के मौसम में एक थका हारा यात्री वृक्ष के नीचे आकर बैठ गया। थोड़ी देर में उसे नींद आने लगी। उसने अपना धनुष बाण बगल में रख कर सो गया। वृक्ष की छाया थोड़ी देर में उसके मुख से ढल गई। सूर्य की तेज़ किरणे उसके मुख पर पड़ने लगी। यात्री को विचलित देख कर हंस को दया आने लगी।वृक्ष पर बैठे हुए हंस ने विचार कर अपने पंखों को पसार फिर उसके मुख पर छाया कर दी। गहरी नींद के कारण उसने अपना मुख खोल दिया। कौआ को यात्री का सुख सहन नहीं हो रहा था। कौआ उसके मुँह में बीट करके उड़ गया। इससे पहले की हंस कुछ समझ पाता कौआ उड़ गया। अब पेड़ पर सिर्फ हंस बचा था। यात्री ने जैसे ही ऊपर देखा , उसे सिर्फ हंस दिखाई दिया। हंस द्वारा किये गए उपकार से यात्री अनजान था। उसने सोचा, ‘‘जरुर ही इसी ने मेरे चेहरे को गन्दा किया है।” यात्री ने गुस्से में सोचा इस दुष्ट को दुष्टता की सजा अवश्य दूंगा।ऐसा सोच कर यात्री ने हंस पर बाण चला दिया। हंस तो जानता भी नहीं था कि बाण क्या होता है ? बाण हंस के हृदय में आकर लगा। हंस जमीन पर आकर गिरा और उसके प्राण निकल गए। दयालु और परोपकारी हंस को दूसरे के अपराध की सजा मिली। हंस के जीवन की भूल बस यही थी कौआ उसका मित्र था। दोस्तों , दुष्ट और कुटिल से मित्रता हमेशा घातक होती है..! मंगलमय प्रभात प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #👫 हमारी ज़िन्दगी #☝ मेरे विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
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3 days ago
जो पीले वस्त्रों में सुशोभित हैं जो सदा गदा चक्र और शस्त्र धारण करते हैं जिनके सुंदर चेहरे पर प्यारी मुस्कान है उन भगवान विष्णु को मैं बारंबार प्रणाम करता हूं ये दुनियां के रखवाले हैं जगत के पालनहार हैं जय श्री लक्ष्मी नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🚩🚩🌻🌻🪷🌻🌻🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
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4 days ago
🌹लालच ने छीनी शांति🌹 🙏🙏🙏 किसी गाँव में एक धनी सेठ रहता था उसके बंगले के पास एक जूते सिलने वाले गरीब मोची की छोटी सी दुकान थी। उस मोची की एक खास आदत थी कि जब भी जूते सिलता तब भगवान के भजन गुनगुनाया करता था लेकिन सेठ ने कभी उसके भजनों की तरफ ध्यान नहीं दिया । एक दिन सेठ व्यापार के सिलसिले में विदेश गया और घर लौटते वक्त उसकी तबियत बहुत ख़राब हो गयी । लेकिन पैसे की कोई कमी तो थी नहीं सो देश विदेशों से डॉक्टर, वैद्य, हकीमों को बुलाया गया लेकिन कोई भी सेठ की बीमारी का इलाज नहीं कर सका । अब सेठ की तबियत दिन प्रतिदिन ख़राब होती जा रही थी। वह चल फिर भी नहीं पाता था| एक दिन वह घर में अपने बिस्तर पे लेटा था अचानक उसके कान में मोची के भजन गुनगुनाने की आवाज सुनाई दी, आज मोची के भजन कुछ अच्छे लग लग रहे थे सेठ को, कुछ ही देर में सेठ इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसे ऐसा लगा जैसे वो साक्षात परमात्मा से मिलन कर रहा हो। मोची के भजन सेठ को उसकी बीमारी से दूर लेते जा रहे थे कुछ देर के लिए सेठ भूल गया कि वह बीमार है उसे अपार आनंद की प्राप्ति हुई । कुछ दिन तक यही सिलसिला चलता रहा, अब धीरे धीरे सेठ के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा। एक दिन उसने मोची को बुलाया और कहा – मेरी बीमारी का इलाज बड़े बड़े डॉक्टर नहीं कर पाये लेकिन तुम्हारे भजन ने मेरा स्वास्थ्य सुधार दिया ये लो 1000 रुपये इनाम, मोची खुश होते हुए पैसे लेकर चला गया । लेकिन उस रात मोची को बिल्कुल नींद नहीं आई वो सारी रात यही सोचता रहा कि इतने सारे पैसों को कहाँ छुपा कर रखूं और इनसे क्या क्या खरीदना है? इसी सोच की वजह से वो इतना परेशान हुआ कि अगले दिन काम पे भी नहीं जा पाया। अब भजन गाना तो जैसे वो भूल ही गया था, मन में खुशी थी पैसे की। अब तो उसने काम पर जाना ही बंद कर दिया और धीरे धीरे उसकी दुकानदारी भी चौपट होने लगी । इधर सेठ की बीमारी फिर से बढ़ती जा रही थी । एक दिन मोची सेठ के बंगले में आया और बोला सेठ जी आप अपने ये पैसे वापस रख लीजिये, इस धन की वजह से मेरा धंधा चौपट हो गया, मैं भजन गाना ही भूल गया। इस धन ने तो मेरा परमात्मा से नाता ही तुड़वा दिया। मोची पैसे वापस करके फिर से अपने काम में लग गया । मित्रो ये केवल एक कहानी मात्र नहीं है ये एक सीख है कि किस तरह हम पैसों का लालच हमको अपनों से दूर ले जाता है हम भूल जाते हैं कि कोई ऐसी शक्ति भी है जिसने हमें बनाया है मंगलमय प्रभात प्रणाम #🏠घर-परिवार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार