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@184290003
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22 hours ago
*🌹राजा और सम्बन्ध🌹* 🙏🙏🙏 *सुदूर प्रदेश के नयासर गांव में एक चौधरी जी रहते थे। चौधरी जी ने एक दुकानदार के पास पाँच सौ रुपये हिपाजत से संभाल कर रखने के लिये रख दिये... उन्होंने सोचा कि जब बच्ची की शादी होगी, तो पैसा ले लेंगे, थोड़े सालों के बाद जब बच्ची सयानी हो गयी, तो चौधरी जी उस दुकानदार के पास गये और अपने पैसे मांगे तो दुकानदार ने नकार दिया कि आपने कब हमें पैसा दिया था। उसने चौधरी जी से कहा कि क्या हमने कुछ लिखकर दिया है?* *चौधरी जी इस हरकत से परेशान हो गये और चिन्ता में डूब गये।* *थोड़े दिन के बाद उन्हें याद आया कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दें। ताकि वह कुछ फैसला कर दें एवं मेरा पैसा कन्या के विवाह के लिए मिल जाये। वह राजा के पास पहुँचे तथा अपनी फरियाद सुनाई...। राजा ने कहा...। कल हमारी सवारी निकलेगी तुम उस लालाजी की दुकान के पास खड़े रहना।* *राजा की सवारी निकली...। सभी लोगों ने फूलमालाएँ पहनायीं, किसी ने आरती उतारी।* *चौधरी जी लालाजी की दुकान के पास खड़े थे। राजा ने कहा - चौधरी जी! आप यहाँ कैसे? आप तो हमारे गुरु हैं? आइये इस बग्घी में बैठ जाइये, लालाजी यह सब देख रहे थे, उन्होंने आरती उतारी, सवारी आगे बढ़ गयी।* *थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने चौधरी जी को उतार दिया और कहा कि चौधरी जी हमने आपका काम कर दिया। अब आगे आपका भाग्य।* *उधर लालाजी यह सब देखकर हैरान थे कि चौधरी जी की तो राजा से अच्छी साँठ-गाँठ है। कहीं वह हमारा कबाड़ा न करा दें।* *लालाजी ने अपने मुनीम को चौधरी जी को ढूँढ़कर लाने को कहा...। चौधरी जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार कर रहे थे, मुनीम जी आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले गये|* *लालाजी ने प्रणाम किया और बोले - चौधरी जी! हमने काफी श्रम किया तथा पुराने खाते को देखा...तो पाया कि हमारे खाते में आपका पाँच सौ रुपये जमा है।* *चौधरी जी दस साल में ब्याज के बारह हजार रुपये हो गये, चौधरी जी आपकी बेटी हमारी बेटी है...अत: एक हजार रुपये आप हमारी तरफ से ले जाइये तथा उसे लड़की की शादी में लगा देना।* *इस प्रकार लालाजी ने चौधरी जी को तेरह हजार रुपये देकर प्रेम के साथ विदा किया...जब मात्र एक राजा के साथ सम्बंध होने भर से विपदा दूर हो जाती है तो...।* *हम सब भी अगर इस दुनिया के राजा,भगवान् से अगर अपना सम्बन्ध जोड़ लें...। तो आपकी कोई समस्या, कठिनाई या फिर आपके साथ अन्याय का कोई प्रश्न ही उत्पन्न नही होगा।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #☝अनमोल ज्ञान #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #❤️जीवन की सीख #👌 आत्मविश्वास #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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22 hours ago
जिस समस्या का ना कोई उपाय उसका हल सिर्फ ॐ नमः शिवाय पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहे 🚩🚩🌹🌿🪷🌹🌿🙏🙏 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #good morning #शुभ बुधवार
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1 days ago
🌹अच्छे की कमी🌹 🙏🙏🙏 एक कालेज का छात्र था जिसका नाम था रवि। हमेशा वह बहुत चुपचाप सा रहता था। किसी से ज्यादा बात नहीं करता था इसलिए उसका कोई दोस्त भी नहीं था। वह हमेशा कुछ परेशान सा रहता था। पर लोग उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। एक दिन वह क्लास में पढ़ रहा था। उसे गुमसुम बैठे देख कर अध्यापक महोदय उसके पास आये और क्लास के बाद मिलने को कहा। क्लास खत्म होते ही रवि अध्यापक महोदय के कमरे में पहुंचा। रवि मैं देखता हूँ कि तुम अक्सर बड़े गुमसुम और शांत बैठे रहते हो, ना किसी से बात करते हो और ना ही किसी चीज में रूचि दिखाते हो, इसलिए इसका सीधा असर तुम्हारी पढ़ाई में भी साफ नजर आ रहा है! इसका क्या कारण है ?” अध्यापक महोदय ने पूछा। रवि बोला, मेरा भूतकाल का जीवन बहुत ही खराब रहा है, मेरी जिन्दगी में कुछ बड़ी ही दुखदायी घटनाएं हुई हैं, मैं उन्ही के बारे में सोच कर परेशान रहता हूँ, और किसी चीज में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता हूँ। अध्यापक महोदय ने ध्यान से रवि की बातें सुनी और मन ही मन उसे फिर से सही रास्ते पर लाने का विचार करके रविवार को घर पे बुलाया। रवि निश्चित समय पर अध्यापक महोदय के घर पहुँच गया। रवि क्या तुम नीम्बू शरबत पीना पसंद करोगे? अध्यापक ने पूछा। जी। रवि ने झिझकते हुए कहा। अध्यापक महोदय ने नीम्बू शरबत बनाते वक्त जानबूझ कर नमक अधिक डाल दिया और चीनी की मात्रा कम ही रखी। शरबत का एक घूँट पीते ही रवि ने अजीब सा मुंह बना लिया। अध्यापक महोदय ने पूछा, क्या हुआ, तुम्हे ये पसंद नहीं आया क्या? जी, वो इसमे नमक थोड़ा अधिक पड़ गया है…. रवि अपनी बात कह ही रहा था की अध्यापक महोदय ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा, ओफ़-ओ, कोई बात नहीं मैं इसे फेंक देता हूँ, अब ये किसी काम का नहीं रहा… ऐसा कह कर अध्यापक महोदय गिलास उठा ही रहे थे कि रवि ने उन्हें रोकते हुए कहा, नमक थोड़ा सा अधिक हो गया है तो क्या, हम इसमें थोड़ी और चीनी मिला दें तो ये बिलकुल ठीक हो जाएगा। बिलकुल ठीक रवि यही तो मैं तुमसे सुनना चाहता था…. अब इस स्थिति की तुम अपनी जिन्दगी से तुलना करो, शरबत में नमक का ज्यादा होना जिन्दगी में हमारे साथ हुए बुरे अनुभव की तरह है….और अब इस बात को समझो, शरबत का स्वाद ठीक करने के लिए हम उसमे में से नमक नहीं निकाल सकते, इसी तरह हम अपने साथ हो चुकी दुखद घटनाओं को भी अपने जीवन से अलग नहीं कर सकते, पर जिस तरह हम चीनी डाल कर शरबत का स्वाद ठीक कर सकते हैं उसी तरह पुरानी कड़वाहट और दुखों को मिटाने के लिए जिन्दगी में भी अच्छे अनुभवों की मिठास घोलनी पड़ती है। यदि तुम अपने अतीत का ही रोना रोते रहोगे तो ना तुम्हारा वर्तमान सही होगा और ना ही भविष्य उज्ज्वल हो पाएगा। अध्यापक महोदय ने अपनी बात पूरी की। रवि को अब अपनी गलती का एहसास हो चुका था, उसने मन ही मन एक बार फिर अपने जीवन को सही दिशा देने का प्रण लिया। अक्सर बंद होते हुए दरवाजे की तरफ इतनी देर तक देखते रहते हैं कि हमें खुलते हुए अच्छे दरवाजों की भनक तक नहीं लगती और हमारा जीवन दुखों के सागर में ही डूबा रह जाता है, जरुरी है कि हम अपनी पुरानी गलतियों या फिर तकलीफ़ों को भूलना सीखें और जिंदगी को फिर से नयी दिशा की और मोड़ें! मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️जीवन की सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #☝अनमोल ज्ञान
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1 days ago
जिसके भाग्य में महादेव की भक्ति लिखी हो उससे ज्यादा भाग्यशाली इस संसार में कोई नहीं.... पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहे हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌹🌿🌻🌿🌹🙏🙏 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #good morning #शुभ मंगलवार
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2 days ago
🌹एक गलतफहमी ने सिखाया बड़ा सबक🌹 🙏🙏🙏 राघव स्वभाव से बहुत तेज़-तर्रार आदमी था। छोटी-सी बात पर गुस्सा करना और बिना पूरी बात जाने किसी को दोषी ठहरा देना उसकी आदत बन चुकी थी। एक दिन उसका पुराना मित्र नरेश कई वर्षों बाद उससे मिलने आया। दोनों ने साथ चाय पी और पुरानी यादें ताज़ा कीं। बातचीत के दौरान नरेश ने कहा, “राघव, तुम अब भी पहले जैसे ही गुस्सैल हो?” राघव हँसते हुए बोला, “क्या करूँ दोस्त, गलत बात देखकर चुप नहीं रह सकता।” नरेश ने मुस्कुराकर कहा, “कभी-कभी गलत बात दिखाई देती है, लेकिन सच कुछ और होता है।” राघव उसकी बात समझ नहीं पाया। कुछ महीनों बाद राघव की बेटी की शादी तय हुई। शादी की तैयारियों की पूरी जिम्मेदारी उसके छोटे भाई समान मित्र मोहन ने अपने ऊपर ले ली। मोहन ने वादा किया कि वह शादी के दिन सुबह सबसे पहले विवाह स्थल पर पहुँच जाएगा। शादी वाले दिन सुबह से ही घर में चहल-पहल थी। मेहमान आने लगे, रस्में शुरू हो गईं, लेकिन मोहन कहीं दिखाई नहीं दिया। राघव का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह बोला, “जिसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी, वही आज गायब है! ऐसे दोस्त से तो दुश्मन अच्छा।” परिवार वालों ने उसे शांत करने की कोशिश की, लेकिन वह किसी की सुनने को तैयार नहीं था। शाम को बेटी के रिसेप्शन की तैयारियाँ चल रही थीं। तभी एक आदमी मोहन की ओर से एक सुंदर साड़ी, ₹501 का शगुन और शुभकामना पत्र लेकर आया। राघव ने बिना पढ़े पत्र फाड़ दिया और गुस्से में बोला, “जाकर कह देना, अब हमें उसकी किसी औपचारिकता की जरूरत नहीं है।” रात बीत गई। शादी भी संपन्न हो गई। करीब दस दिन बाद राघव की बेटी ने कहा, “पिताजी, मोहन चाचा हमारे लिए परिवार जैसे हैं। वे शादी में नहीं आए तो जरूर कोई मजबूरी रही होगी। हमें उनके घर जाकर मिलना चाहिए।” राघव मन ही मन नाराज़ था, फिर भी बेटी के साथ मोहन के घर चला गया। दरवाज़ा खुला था। घर में अजीब-सी खामोशी थी। मोहन की पत्नी सुशीला रसोई से बाहर आईं। उन्होंने बेटी को गले लगाया और आशीर्वाद दिया। राघव ने देखा कि उनकी आँखें लाल थीं और चेहरा बेहद थका हुआ था। उसकी पत्नी ने धीरे से सुशीला का हाथ पकड़कर पूछा, “बहन, सच बताइए… बात क्या है? आप कुछ छिपा रही हैं।” इतना सुनते ही सुशीला फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा, “भैया… जिस दिन आपकी बेटी की शादी थी, उसी सुबह मोहन को अचानक दिल का दौरा पड़ा था। डॉक्टर के आने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई।” राघव के पैरों तले जमीन खिसक गई। सुशीला ने आगे कहा, “मोहन आखिरी समय तक आपकी बेटी की शादी की चिंता कर रहे थे। उनकी इच्छा थी कि शादी में कोई बाधा न आए। इसलिए मैंने उनकी मृत्यु की खबर किसी को नहीं दी। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से आपकी बेटी की शादी का माहौल दुख में बदल जाए।” राघव की आँखों से आँसू बहने लगे। उसे याद आया—वह पत्र जो उसने गुस्से में फाड़ दिया था, वह साड़ी जिसे उसने ठुकरा दिया था और वे कठोर शब्द, जो उसने बिना सच जाने कहे थे। वह सिर झुकाकर बोला, “बहन, मैंने मोहन को नहीं समझा… मैंने सिर्फ सिक्के का एक पहलू देखा था।” सुशीला ने आँसू पोंछते हुए कहा, “भैया, इंसान की कहानी तब तक पूरी नहीं होती, जब तक उसका दूसरा पहलू न जान लिया जाए।” उस दिन राघव हमेशा के लिए बदल गया। सीख हम अक्सर किसी के व्यवहार को देखकर तुरंत फैसला सुना देते हैं, लेकिन हमें यह नहीं पता होता कि वह व्यक्ति भीतर से किस दर्द या मजबूरी से गुजर रहा है। किसी के बारे में राय बनाने से पहले उसकी परिस्थिति को समझिए। क्योंकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, और हर इंसान की कहानी का भी। अधूरी जानकारी पर लिया गया फैसला अक्सर रिश्ते तोड़ देता है, जबकि थोड़ी समझदारी वही रिश्ता बचा सकती है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🏠घर-परिवार #❤️जीवन की सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
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2 days ago
“जहाँ दुनिया की उम्मीदें खत्म हो जाती हैं, वहीं से मेरे भोलेनाथ का हाथ थामने की शुरुआत होती है… महादेव साथ हों तो किस्मत बदलने की नहीं, बस कर्म करते रहने की जरूरत होती है। हर हर महादेव! 🙏 🌹 💐 🏵 🥀 🌹 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #good morning #😇सोमवार भक्ति स्पेशल🌟
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3 days ago
*🌹वस्तु का मूल्य🌹* 🙏🙏🙏 *एक गांव में एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था जो वस्तुओं के उपयोग के मामले में बहुत कंजूस था।उन्हें बचा बचा कर उपयोग किया करता था। उसके पास एक चांदी का पात्र था, जिसे वह बहुत संभाल कर रखता था क्योंकि वह उसकी सबसे मूल्यवान वस्तु थी। उसने सोचा हुआ था कि कभी किसी विशेष व्यक्ति के आने पर उसे भोजन कराने के लिए उस पात्र को उपयोग करेगा।* *एक बार उसके यहां एक संत भोजन पर आए। उसका विचार था कि संत को उस चांदी के पात्र में भोजन परोसेंगे।भोजन का समय आते आते उसका विचार बदल गया। "मेरा पात्र बहुत कीमती है, एक गांव-गांव भटकने के वाले साधू के लिए उसे क्या निकालना!" किसी राजसी व्यक्ति के आने पर यह पात्र इस्तेमाल करूंगा।* *कुछ दिनों बाद उसके घर राजा का मंत्री भोजन पर आया। पहले उसके मन में विचार आया कि मंत्री को चांदी के पात्र में भोजन कराएंगे लेकिन तुरन्त उसने विचार बदल दिया। "यह तो राजा का मंत्री है, जब राजा स्वयं मेरे घर भोजन करने आएंगे तब कीमती पात्र निकाल लूंगा"।* *कुछ समय और बीता। एक दिन राजा स्वयं उस के घर भोजन के लिए पधारे। वह राजा अभी कुछ समय पूर्व ही अपने पड़ोसी राजा से युद्ध में हार गए थे और उनके राज्य के कुछ हिस्से पर पड़ोसी राजा ने कब्जा कर लिया था। भोजन परोसते समय बूढ़े व्यक्ति को विचार आया कि अभी-अभी हुई पराजय के कारण राजा का गौरव कम हो गया है। इस कीमती पात्र में तो किसी गौरवशाली व्यक्ति को ही भोजन कराऊंगा।इस तरह उसका पात्र बिना उपयोग के पड़ा रहा।* *कुछ समय उपरांत बूढ़े व्यक्ति की मृत्यु हो गई। मृत्यु उपरांत एक दिन उसके बेटे को वह पात्र दिखाई दिया जो कि रखे रखे काला पड़ चुका था। उसने वह पात्र अपनी पत्नी को दिखाया पूछा, इसका क्या करें ? वह चांदी का पात्र इतना काला पड़ चुका था कि पहचान में नहीं आ रहा था कि यह चांदी का हो सकता है। उसकी पत्नी मुंह बनाते हुए बोली, "कितना गंदा पात्र है, इसे कुत्ते के भोजन देने के लिए निकाल दो"। उस दिन के बाद से उनका पालतू कुत्ता उस चांदी के बर्तन में भोजन करने लगा।* *जिस पात्र को बूढ़े व्यक्ति ने जीवन भर किसी विशेष व्यक्ति के लिए संभाल कर रखा था, अंततः उसकी यह गत हुई।* *शिक्षा : कोई वस्तु कितनी भी मूल्यवान क्यों ना हो, उसका मूल्य तभी है जब वह उपयोग में लाई जाए। बिना उपयोग के बेकार पड़ी कीमती से कीमती वस्तु का भी कोई मूल्य नहीं। इसलिए अपने पास जो भी वस्तुऐं हों उसका यथा समय उपयोग अवश्य करना चाहिए।* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👌 आत्मविश्वास
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3 days ago
शिव चेतना है, उनको पाने के लिए योग्यता नहीं, तप करनी पड़ती है .. पवित्र श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहे हर हर महादेव 🌿🌿 🚩🚩🌹🌹🌿🌹🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🔱हर हर महादेव #good morning #शुभ रविवार
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4 days ago
🌹खुशियों का रिमोट🌹 🙏🙏🙏 नित्या एक साधारण परिवार की लड़की थी। उसे सजना-संवरना, तस्वीरें खींचना और छोटी-छोटी खुशियों को जीना बहुत पसंद था। एक दिन वह अपनी सहेली की मैरिज पार्टी में गई। गुलाबी रंग की साड़ी में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। सभी ने उसकी तारीफ की। उसने कई सेल्फियाँ लीं और घर आकर बड़े उत्साह से अपनी सबसे सुंदर तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। तस्वीर पोस्ट करते समय उसके चेहरे पर मुस्कान थी। उसे पूरा विश्वास था कि कुछ ही घंटों में सैकड़ों लाइक्स और तारीफों की बाढ़8 आ जाएगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सुबह उठते ही उसने सबसे पहले मोबाइल उठाया। पोस्ट खोली... सिर्फ पाँच लाइक्स। उसने खुद को समझाया—"अभी लोग सो रहे होंगे।" दोपहर हुई। बार-बार मोबाइल देखती रही। लाइक्स मुश्किल से दस हुए थे। कुछ लोगों ने तस्वीर देखी जरूर थी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। शाम तक उसकी मुस्कान गायब हो चुकी थी। उसे लगने लगा, "क्या मैं अब सुंदर नहीं रही? क्या किसी को मेरी परवाह नहीं? क्या मैं लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखती?" उसने अपनी वही तस्वीर व्हाट्सऐप के कई ग्रुपों में भेज दी। वहाँ भी नीले टिक तो आ गए, मगर जवाब नहीं आया। हर बार मोबाइल की स्क्रीन जलती, उसका दिल उम्मीद से धड़क उठता, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती। रात को वह तकिए में चेहरा छिपाकर रोने लगी। तभी उसकी माँ उसके पास आईं। उन्होंने प्यार से पूछा, "बेटी, क्या हुआ?" नित्या फूट-फूटकर रो पड़ी। बोली, "माँ, शायद अब मैं किसी के लिए अच्छी नहीं रही। मेरी फोटो किसी को पसंद ही नहीं आई।" माँ ने उसके आँसू पोंछे और उसे अपने पास बैठाकर बोलीं— "बेटी, जब तू छोटी थी, मिट्टी में खेलकर घर आती थी, तब तेरी मुस्कान देखकर हमारा घर खिल उठता था। तब न कोई लाइक था, न कोई कमेंट... फिर भी तू सबसे ज्यादा खुश रहती थी। आज तूने अपनी खुशी उन लोगों के हवाले कर दी है, जिन्हें शायद तेरी पोस्ट देखने की भी फुर्सत नहीं।" माँ ने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, "याद रख, जो लोग तुम्हारी तस्वीर पर लाइक नहीं करते, जरूरी नहीं कि वे तुमसे प्यार भी नहीं करते। कई लोग दिल से दुआ देते हैं, लेकिन शब्दों में नहीं कहते। और कुछ लोग सिर्फ स्क्रॉल करके आगे बढ़ जाते हैं। क्या उनकी चुप्पी से तुम्हारी कीमत कम हो जाती है?" नित्या की आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। उसने पहली बार महसूस किया कि सचमुच उसने अपनी खुशियों का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथों में दे दिया था। उसने उसी पल मोबाइल बंद किया, माँ को गले लगा लिया और बोली, "आज से मेरी मुस्कान किसी लाइक, कमेंट या शेयर की मोहताज नहीं होगी। मैं अपनी खुशी खुद तय करूँगी।" माँ ने उसके माथे को चूम लिया। उस रात नित्या ने वर्षों बाद सबसे सुकून भरी नींद सोई। शिक्षा जिस दिन हम अपनी खुशी का रिमोट दूसरों के हाथों से वापस अपने हाथ में ले लेते हैं, उसी दिन से सच्ची जिंदगी शुरू होती है। दुनिया की तालियों से ज्यादा कीमती अपने मन की शांति होती है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️जीवन की सीख #👌 आत्मविश्वास #🏠घर-परिवार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👍 डर के आगे जीत👌
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4 days ago
तलवार की धार से नहीं महादेव के आशीर्वाद से दुनिया चलती है ... पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की कृपा हमेशा बनी रहे हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌿🪻🌻🪻🌿🙏🙏 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #शुभ शनिवार #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #good morning