फॉलो करें
MLP
@184290003
4,337
पोस्ट
4,470
फॉलोअर्स
MLP
529 ने देखा
🌹कर्ज वाली लक्ष्मी🌹 🙏🙏🙏 एक साधारण से घर में रहने वाला पंद्रह साल का बेटा जब अपने पिता दीनदयाल जी के पास आकर उत्साह और घबराहट भरे स्वर में बोला कि पापा, दीदी के होने वाले ससुर-सास कल आ रहे हैं और जीजाजी का फोन आया था कि दहेज को लेकर कुछ ज़रूरी बात करनी है, तो पहले से ही चिंतित दीनदयाल जी का चेहरा और बुझ गया; कुछ दिन पहले ही उनकी बड़ी बेटी की सगाई एक अच्छे, सुसंस्कृत परिवार में तय हुई थी, पर दहेज का डर उनके मन में लगातार घर करता जा रहा था। उन्होंने भारी मन से कहा कि बेटा, उनका फोन आया था कि दहेज की बात करने आ रहे हैं और यह सोचकर ही मेरा कलेजा काँप रहा है कि कहीं उनकी मांग इतनी ज़्यादा न हो जाए जिसे मैं पूरा न कर पाऊँ, कहते-कहते उनकी आँखें भर आईं और यह उदासी पूरे घर में फैल गई, माँ चुपचाप आँचल से आँखें पोंछने लगी और बेटी भी अपने कमरे में जाकर उदास हो गई। अगले दिन समधी-समधिन आए, पूरे सम्मान और सादगी से उनका स्वागत किया गया, चाय-नाश्ते के बाद जब वातावरण थोड़ा शांत हुआ तो लड़के के पिता ने कहा कि दीनदयाल जी, अब ज़रा काम की बात हो जाए, यह सुनते ही दीनदयाल जी की धड़कन तेज़ हो गई, वे हाँ-हाँ करते हुए हाथ जोड़कर बैठ गए। लड़के के पिता ने अपनी कुर्सी पास खिसकाई और धीरे से उनके कान में कहा कि मुझे दहेज के बारे में बात करनी है, दीनदयाल जी की आँखों से आँसू छलक पड़े और उन्होंने काँपते स्वर में कहा कि समधी जी, जो आपको उचित लगे बताइए, मैं पूरी कोशिश करूँगा, तब लड़के के पिता ने उनका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े स्नेह से कहा कि दीनदयाल जी, आप कन्यादान में कुछ भी दें या कुछ भी न दें, थोड़ा दें या ज़्यादा दें, मुझे सब स्वीकार है, लेकिन एक शर्त है कि कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत दीजिए, क्योंकि जो बेटी अपने पिता को कर्ज में डुबो दे, वैसी कर्ज वाली लक्ष्मी मुझे स्वीकार नहीं, मुझे ऐसी बहू चाहिए जो बिना कर्ज के मेरे घर आए और अपने संस्कार, समझदारी और परिश्रम से मेरी संपत्ति और सुख को दोगुना कर दे। यह सुनकर दीनदयाल जी स्तब्ध रह गए, उनकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले, उन्होंने समधी जी को गले लगाकर कहा कि आपने आज मेरी आत्मा से बोझ उतार दिया और बिल्कुल ऐसा ही होगा, उस दिन घर में जो सुकून और सम्मान का भाव फैला, उसने सबको यह एहसास करा दिया कि असली धन दहेज नहीं बल्कि सोच की समृद्धि होती है। शिक्षा... बेटी बोझ नहीं, सम्मान है; दहेज कर्ज का कारण बनकर लक्ष्मी को अपवित्र करता है, इसलिए कर्ज वाली लक्ष्मी न कोई विदा करे और न कोई स्वीकार करे, क्योंकि सच्ची समृद्धि कर्ज में नहीं, संतोष, सद्बुद्धि और सही सोच में होती है। मंगलमय प्रभात प्रणाम #👍 डर के आगे जीत👌 #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 सफलता के मंत्र ✔️
MLP
530 ने देखा
*हे माँ ! जिस घर में आपका निवास होता है वहाँ सभी सद्गुण स्वतः आ जाते हैं*॥ 🌺*आपका दिन शुभ हो*🌺 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ शुक्रवार #🙏 माँ वैष्णो देवी
MLP
562 ने देखा
🌹भक्ति भाव🌹 🙏🙏🙏 *जब कैलाशपति बने भिखारी — भक्तिभाव की अद्भुत परीक्षा* गोकुल में उस दिन एक अद्भुत लीला रची गई, जब कैलाशपति महादेव अपने आराध्य श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए स्वयं भिक्षुक का वेश धारण कर पृथ्वी पर उतर आए। जब उन्हें पता चला कि परमब्रह्म का अवतार नन्द बाबा के घर जन्मा है, तब कैलाश पर ठहर पाना उनके लिए असंभव हो गया—भक्ति की प्यास उन्हें गोकुल खींच लाई। उन्होंने सोचा, सीधे देव रूप में जाऊँगा तो सभी पहचान लेंगे, इसलिए जटाओं से युक्त, भस्म-धारी, बाघम्बर पहने, सर्पमालाओं से सुसज्जित वे एक जोगी के रूप में “अलख निरंजन” पुकारते यशोदा मैया के द्वार पहुँचे। मैया ने दासी के हाथों भिक्षा भिजवाई, पर जोगी ने लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा— “माई, मुझे अन्न-धन नहीं चाहिए। मेरे गुरु ने कहा है कि यहाँ स्वयं परमात्मा बाल रूप में विराजते हैं। मुझे केवल उनके दर्शन की भीख चाहिए।” मैया बाहर आईं और साधु का भयानक स्वरूप देखकर घबरा गईं। वे हाथों को जोड़कर बोलीं— “महाराज, जो चाहे मांग लीजिए, पर अपने कोमल लल्ला को बाहर नहीं लाऊँगी। वह आपको देखकर डर जाएगा।” तब उस जोगी ने, जो स्वयं महादेव थे, विनम्रता से प्रार्थना की—“मैया, मैं कुछ नहीं चाहता… बस एक झलक, एक पल… मेरे जीवन की सार्थकता हो जाएगी।” भक्त की यह तड़प देखकर माता यशोदा का हृदय पिघल गया। वे नन्हे कान्हा को गोद में छिपाए बाहर आईं। और जैसे ही भोलेनाथ की दृष्टि अपने इष्ट—बालकृष्ण—पर पड़ी, वे आनंद से भर उठे। उनके नेत्रों में प्रेम के आँसू छलक उठे, वे सुध-बुध खोकर नाचने लगे। उस क्षण गोकुल में दिव्यता उतर आई—हरि-हर मिलन का ऐसा दृश्य स्वयं देवताओं के लिए भी दुर्लभ था। कहानी का संदेश:,, यह लीला हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में न ऊँच-नीच है,न पद-प्रतिष्ठा। महादेव जैसे देवाधिदेव भी अपने आराध्य के दर्शन हेतु विनम्र होकर भिक्षुक बन सकते हैं।भक्ति वही सच्ची है जिसमें नम्रता, प्रेम और पूर्ण समर्पण हो। और यह भी कि ईश्वर के दर्शन केवल शक्ति से नहीं, बल्कि भाव से मिलते हैं। मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #👌 आत्मविश्वास #✍️ जीवन में बदलाव
MLP
468 ने देखा
भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। 🙏 माघ मास के शुक्ल पक्ष की पावन जया एकादशी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 💐🌷🌹👇🙏 #🌞 Good Morning🌞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव #शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
MLP
529 ने देखा
हमेशा दूसरों का सहयोग करें पता नहीं कब ये पुण्य जिन्दगी में आपका साथ दे जाए..... जय श्री विघ्नहर्ता गणेश जी महाराज 🚩🚩🌿🌻🪻🌻🌿🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ बुधवार #श्री गणेश
MLP
502 ने देखा
*🌹नीच और ऊँच🌹* 🙏🙏🙏 *महाराजा विक्रमादित्य प्रायः अपने देश की आंतरिक दशा जानने के लिए वेश बदलकर पैदल घूमने जाया करते थे। एक दिन घूमते घूमते एक नगर में पहुंचे। वहां का रास्ता उन्हें मालूम ना था। राजा रास्ता पूछने के लिए किसी व्यक्ति की तलाश में आगे बढ़े।* *आगे उन्हें एक हवलदार सरकारी वर्दी पहने हुए दिखा। राजा ने उसके पास जाकर पूछा*- *"महाशय अमुक स्थान जाने का रास्ता क्या है, कृपया बताइए?"* *हवलदार में अकड़ कर कहा- "मूर्ख तू देखता नहीं, मैं हाकिम हूं, मेरा काम रास्ता बताना नहीं है, चल हट किसी दूसरे से पूछ।"* *राजा ने नम्रता से पूछा* *-महोदय!* *यदि सरकारी आदमी भी किसी यात्री को रास्ता बता दे, तो कोई हर्ज तो नहीं है? खैर मैं किसी दूसरे से पूछ लूंगा। पर इतना तो बता दीजिए, कि आप किस पद पर काम करते हैं?* *हवलदार ने भोंहे चढ़ाते हुए कहा- अंधा है! मेरी वर्दी को देखकर पहचानता नहीं कि मैं कौन हूं?* *राजा ने कहा-शायद आप पुलिस के सिपाही हैं।* *उसने कहा नहीं,उससे ऊंचा।* *तब क्या नायक हैं* ? *नहीं, उस से भी ऊंचा।* *अच्छा तो आप हवलदार हैं?* *हवलदार ने कहा -अब तू जान गया कि मैं कौन हूं। पर यह तो बता इतनी पूछताछ करने का तेरा क्या मतलब और तू कौन है?* *राजा ने कहा- मैं भी सरकारी आदमी हूँ।* *सिपाही की ऐंठ कुछ कम हुई* । **उसने पूछा, क्या तुम नायक हो?** *राजा ने कहा नहीं*, *उससे ऊंचा।* *तब क्या आप हवलदार हैं ?* *नहीं, उस से भी ऊंचा। तो क्या दरोगा है?* *उससे भी ऊंचा।* *हवालदार ने कहा -तो क्या आप कप्तान हैं?* *राजा ने कहा नहीं, उससे भी ऊंचा।* *सूबेदार जी हैं?* *नहीं, उससे भी ऊँचा।* *अब तो हवलदार घबराने लगा, उसने पूछा- तब आप मंत्री जी हैं।* *राजा ने कहा-*भाई! बस एक सीड़ी और बाकी रह गई है। सिपाही ने गौर से देखा, तो शादी पोशाक में महाराजा विक्रमादित्य सामने खड़े हैं।* हवलदार के होश उड़ गए, वह गिड़गिड़ाता हुआ राजा के पांव पर गिर पड़ा और बड़ी दीनता से अपने अपराध की माफी मांगने लगा।* *राजा ने कहा-" *माफी मांगने की कोई बात नहीं है,मैं जानता हूं कि, जो जितने नीचे है वह उतने ही अकड़ते हैं।* *जब तुम बड़े बनोगे तो मेरी तरह तुम भी नम्रता का बर्ताव सीखोगे।जो जितना ही ऊंचा है, वह उतना ही सहनशील एवं नंम्र होता है,और जो जितना नीच एवं ओछा होता है वह उतना ही ऐंठा रहता है।"* *इसीलिए कहा गया है*-: *विद्या विवादाय,धनम् मदाये,* *शक्ति परेशाम परिपीढ़नाएं,* *खलस्य साधोर, विपरीत मेतत,* *ज्ञानय,दानाय,च रक्षणाय।।** *अर्थात*- *"दुष्ट व्यक्ति के पास विद्या हो, तो वह विवाद करता है। धन हो तो घमंड करता है और यदि शक्ति हो तो दूसरों को परेशान करता है। वहीं साधु प्रकृति का व्यक्ति, विद्या ज्ञान देने में, धन दान देने में, और शक्ति दूसरों की रक्षा करने में खर्च करता है।"* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👌 आत्मविश्वास #👍 डर के आगे जीत👌 #👩🏻‍❤️‍💋‍👨🏻प्यार और गुस्सा😠 #👍 सफलता के मंत्र ✔️
MLP
536 ने देखा
*🌹कल की चिंता🌹* 🙏🙏🙏 *एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनायें थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।* *राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक संन्यासी ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है।* *विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी संन्यासी की कुटिया में रहने आ गई। कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने संन्यासी पति से पूछा कि रोटियाँ यहाँ क्यों रखी हैं?* *संन्यासी ने जवाब दिया कि ये रोटियां कल के लिए रखी हैं, अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे। संन्यासी का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं, आप तो केवल भक्ति करते हैं और कल की चिंता करते हैं।* *सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा भरोसा करता है। अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं, हम तो इंसान हैं।* *अगर भगवान चाहेगा तो हमें खाना मिल जायेगा और नहीं मिलेगा तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।* *ये बातें सुनकर संन्यासी की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली संन्यासी है। उसने राजकुमारी से कहा कि आप तो राजा की बेटी हैं, राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं, जब कि मैं तो पहले से ही एक फकीर हूं, फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी।* *केवल कहने से ही कोई संन्यासी नहीं होता, संन्यास को जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।* *शिक्षा:-* *अगर हम भगवान की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान हर समय हमारे साथ हैं। उसको (भगवान) हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं।* *कभी आप बहुत परेशान हों, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो तो आप आँखें बंद करके विश्वास के साथ पुकारें, सच मानिये थोड़ी देर में आपकी समस्या का समाधान मिल जायेगा..!!* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌸पॉजिटिव मंत्र #👍 डर के आगे जीत👌
MLP
544 ने देखा
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇧🇴🇧🇴🇧🇴🇧🇴🇧🇴🇧🇴🇧🇴 तिरंगे की शान और देश का मान हमेशा ऊँचा रहे। हर हर महादेव 🚩🇧🇴🚩 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌞 Good Morning🌞 #शुभ सोमवार #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
See other profiles for amazing content