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@184290003
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18 hours ago
*🌹विशिष्ट शांति🌹* 🙏🙏🙏 *दो तीन दिन पहले की बात है। अपनी 8 बर्षीय पुत्री को स्कूल से घर वापस लाने तीन बजे स्कूल के गेट पर पहुंच गया था। तीन बजकर दस मिनट से जुनियर के.जी. के छात्र बाहर आना शुरू करते हैं जबकि सीनियर छात्र तीन बजे से। गेट पर अभिभावकों की भीड़ लगी थी। एकाएक तेज बारिश शुरु हो गई। सभी ने अपनी छतरी तान ली। मेरे बगल में एक सज्जन बिना छतरी के खड़े थे। मैंने शिष्टाचार वश उन्हें अपनी छतरी में ले लिया।* '*'गाडी से जल्दी जल्दी में आ गया, छतरी नहीं ला सका।" उन्होंने कहा।* *"कोई बात नहीं, ऐसा हो जाता है।"* *जब उनका बेटा रेन कोट पहने निकला तो मैंने उन्हें छाता से गाड़ी तक पहुंचा दिया। उन्होंने मुझे गौर से देखा और धन्यवाद कहकर चले गए।* *कल रात में नो बजे पाटिल साहब का बेटा आया।* *"अंकल गाड़ी की जरूरत थी। रूबी (उस की छ:माह की बेटी) की तवियत बहुत ख़राब है।उसे डाक्टर के पास ले जाना है।"* *"चलो चलते हैं"* *अंधेरी बरसाती रात में जब डाक्टर के यहां हमलोग पहुंचे तो दरवान गेट बंद कर रहा था। कम्पाऊंडर ने बताया कि डॉ.साहब लास्ट पेशेंट देख रहे हैं , अब उठने ही वाले है।अब सोमवार का नम्बर लगेगा।* *मैं कम्पाउंडर से आज ही दिखाने का आग्रह कर ही रहा था कि डाक्टर साहब चैम्बर से घर जाने के लिए बाहर आए। मुझे देखा तो ठिठक गए फिर बोले, "अरे आप आए हैं सर, क्या बात है?"* *प्रेरणास्पद कथाएं हेतु जुड़े रहे इस व्हाट्सएप से* *कहना नहीं होगा कि डाक्टर साहब वही सज्जन थे जिन्हें स्कूल में मैंने छतरी से गाड़ी तक पहुंचाया था।* *डाक्टर साहब ने बच्ची से मेरा रिश्ता पूछा।* *"मेरे मित्र पाटिल साहब की बेटी है। हमलोग एक ही सोसायटी में रहते हैं।"* *उन्होंने बच्ची को देखा, कागज पर दवा लिखी और कम्पाउन्डर को हिदायत दी,* *"यह इंजेक्शन बच्ची को तुरंत लगा दो और दो तीन दिन की दवा अपने पास से दे दो।"* *मैंने एतराज किया तो बोले,* *"अब कहां इस बरसाती रात में आप दवा खोजते फिरेंगे सर। कुछ तो अपना रंग मुझ पर भी चढ़ने दीजिए।"* *बहुत कहने पर भी डॉ.साहब ने ना फीस ली ना दवा का दाम , और अपने कम्पाउंडर से बोले,* *"सर हमारे मित्र हैं, जब भी आयें तो आने देना।"* *गाड़ी तक पहुंचाने आये और कहा,* *"सर आप जैसे निस्वार्थ समाजसेवी क्या इसी दुनिया में रहते हैं?"* *निस्वार्थ सेवा करते रहिए शायद आप का रंग औरो पर भी चढ़ जाये , जिसे भी आवश्यकता हो निःस्वार्थ सेवा भाव से उसकी मदद करें आपको एक विशिष्ट शांति प्राप्त होगी।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #🏠घर-परिवार #👌 आत्मविश्वास #❤️जीवन की सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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18 hours ago
महादेव केवल देव नहीं आस्था और विश्वास का नाम हैं जिस पर भोले बाबा की कृपा हो जाए उसका लोक परलोक सब ठीक हो जाता है.. पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव माता पार्वती जी का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहे ॐ पार्वती पत्तिये नमः 🌿 🚩🚩🌹🌿🌺🌿🌹🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #good morning #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #शुभ शुक्रवार
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1 days ago
*🌹ईश्वर की व्यवस्था🌹* 🙏🙏🙏 एक प्रेरणादायक कहानी.... एक अमीर आदमी था। उसने समुद्र मे अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सेर करने निकला। आधे समुद्र तक पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तुफान आया। उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जैकेट की मदद से समुद्र मे कूद गया। जब तूफान शांत हुआ तब वह तैरता तैरता एक टापू पर पहुंचा लेकिन वहाँ भी कोई नही था। टापू के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था। उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिदंगी मे किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ..? उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत से बचाया तो आगे का रास्ता भी भगवान ही बताएगा। धीरे धीरे वह वहाँ पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा। अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टूटने लगी, भगवान पर से उसका विश्वास उठ गया। उसको लगा कि इस दुनिया मे भगवान है ही नही। फिर उसने सोचा कि अब पूरी जिंदगी यही इस टापू पर ही बितानी है तो क्यूँ ना एक झोपडी बना लूँ ......? फिर उसने झाड की डालियो और पत्तो से एक छोटी सी झोपडी बनाई। उसने मन ही मन कहा कि आज से झोपडी मे सोने को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा। रात हुई ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलियाँ जोर जोर से कड़कने लगी.! तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी। प्रेरणास्पद कथाएं :- पढ़ें और दूसरों को जोड़े.... यह देखकर वह आदमी टूट गया आसमान की तरफ देखकर बोला तू भगवान नही, राक्षस है। तुझमे दया जैसा कुछ है ही नही तू बहुत क्रूर है। वह व्यक्ति हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था। कि अचानक एक नाव टापू के पास आई। नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये और बोले कि हम तुमे बचाने आये हैं। दूर से इस वीरान टापू मे जलता हुआ झोपडा देखा तो लगा कि कोई उस टापू पर मुसीबत मे है। अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे पता नही चलता कि टापू पर कोई है। उस आदमी की आँखो से आँसू गिरने लगे। उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोला कि मुझे क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई थी. सीख- दिन चाहे सुख के हों या दुख के, भगवान अपने भक्तों के साथ हमेशा रहते है !! मंगलमय प्रभात प्रणाम #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
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1 days ago
जब भी मन बेचैन हो जाए तो भगवान से बात करिए वो सुनते हैं , समझते हैं और संभालते हैं.... पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव विष्णु का आशीर्वाद हमेशा बना रहे हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌿🪻🌻🪻🌿🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #good morning #शुभ गुरुवार #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍
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2 days ago
*🌹नालायक बेटा🌹* 🙏🙏🙏 *"बेटा , हमारा एक्सीडेंट हो गया है ।मुझे ज्यादा चोट नहीं आई पर तेरी माँ की हालत गंभीर है। कुछ पैसों की जरुरत है और तेरी माँ को खून चढ़ाना है।"बासठ साल के माधव जी ने अपने बड़े बेटे से फोन पर कहा।"पापा, मैं बहुत व्यस्त हूँ आजकल।मेरा आना नहीं हो सकेगा।मुझे विदेश मे नौकरी का पैकेज मिला है तो उसी की तैयारी कर रहा हूँ।आपका भी तो यही सपना था ना? इसलिये हाथ भी तंग चल रहा है।पैसे की व्यवस्था कर लीजिए मैं बाद मे दे दूँगा।"उनके बडे़ इंजिनियर बेटे ने जबाब दिया।उन्होनें अपने दूसरे डाॅक्टर बेटे को फोन किया तो उसने भी आने से मना कर दिया । उसे अपनी ससुराल में शादी मे जाना था।हाँ इतना जरुर कहा कि पैसों की चिंता मत कीजिए मैं भिजवा दूँगा।यह अलग बात है कि उसने कभी पैसे नहीं भिजवाए। उन्होंने बहुत मायूसी से फोन रख दिया।अब उस नालालक को फोन करके क्या फायदा। जब ये दो लायक बेटे कुछ नहीं कर रहे तो वो नालायक क्या कर लेगा?* *उन्होंने सोचा और बोझिल कदमों से अस्पताल में पत्नी के पास पहुंचे और कुर्सी पर ढेर हो गये।पुरानी बातें याद आने लगे,* *माधव राय जी स्कूल मे शिक्षक थे।उनके तीन बेटे और एक बेटी थी।बड़ा इंजिनियर और मझला डाक्टर था।दोनों की शादी बड़े घराने में हुई थी।दोनो अपनी पत्नियों के साथ अलग अलग शहरों में रहते थे।बेटी की शादी भी उन्होंने खूब धूमधाम से की थी।* *सबसे छोटा बेटा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाया था।ग्यारहवीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और घर में ही रहने लगा। कहता था मुझे नौकरी नहीं करनी अपने माता  पिता की सेवा करनी है पर मास्टर साहब उससे बहुत नाराज रहते थे। उन्होंने उसका नाम नालायक रख दिया था ।दोनों बड़े भाई  पिता के आज्ञाकारी थे पर वह गलत बात पर उनसे भी बहस कर बैठता था। इसलिये माधव जी उसे पसंद नही करते थे।* *जब माधव जी रिटायर हुए तो जमा पुँजी कुछ भी नही थी।सारी बचत दोनों बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटी की शादी मे खर्च हो गई थी।शहर में एक घर , थोड़ी जमीन और गाँव में थोडी सी जमीन थी।घर का खर्च उनके पेंशन से चल रहा था।* *माधव जी को जब लगा कि छोटा सुधरने वाला नही तो उन्होंने बँटवारा कर दिया और उसके हिस्से की जमीन उसे देकर उसे गाँव में ही रहने भेज दिया। हालाँकि वह जाना नहीं चाहता था पर पिता की जिद के आगे झुक गया और गाँव में ही झोपड़ी बनाकर रहने लगा। माधव जी सबसे अपने दोनो होनहार और लायक बेटों की बड़ाई किया करते।उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था।पर उस नालायक का नाम भी नहीं लेते थे।* *दो दिन पहले दोनों पति पत्नी का एक्सीडेन्ट हो गया था । वह अपनी पत्नी के साथ सरकारी अस्पताल मे भर्ती थे।डाॅक्टर ने उनकी पत्नी को आपरेशन करने को कहा था "पापा, पापा!" सुन कर तंद्रा टुटी तो देखा सामने वही नालायक खड़ा था।उन्होंने गुस्से से मुँह फेर लिया।पर उसने पापा के पैर छुए और रोते हुए बोला "पापा आपने इस नालायक को क्यों नहीं बताया? पर मैने भी आप लोगों पर जासूस छोड़ रखे हैं।खबर मिलते ही भागा आया हूँ।"* *पापा के विरोध के वावजूद उसने उनको एक बड़े अस्पताल मे भरती कराया।माँ का आपरेशन कराया ।अपना खून दिया । दिन रात उनकी सेवा में लगा रहता कि एक दिन वह गायब हो गया।* *वह उसके बारे मे फिर बुरा सोचने लगे थे कि तीसरे दिन वह वापस आ गया।महीने भर में ही माँ एकदम भली चंगी हो गई। वह अस्पताल से छुट्टी लेकर उन लोगों को घर ले आया। माधव जी के पूछने पर बता दिया कि खैराती अस्पताल था पैसे नहीं लगे हैं।* *घर मे नौकरानी थी ही।वह उन लोगों को छोड़ कर वापस गाँव चला गया।* *धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो गया।एक दिन यूँ ही उनके मन मे आया कि उस नालायक की खबर ली जाए।दोनों जब गाँव के खेत पर पहुँचे तो झोपड़ी में ताला देख कर चौंके।उनके खेत मे काम कर रहे आदमी से पूछा तो उसने कहा "यह खेत अब मेरे हैं।"* *"क्या?पर यह खेत तो...." उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ।"हाँ।उसकी माँ की तबीयत बहुत खराब थी। उसके पास पैसे नहीं थे तो उसने अपने सारे खेत बेच दिये। वह रोजी रोटी की तलाश में दूसरे शहर चला गया है।बस यह झोपडी उसके पास रह गई है।यह रही उसकी चाबी।"उस आदमी ने कहा।वह झोपड़ी मे दाखिल हुये तो बरबस उस नालायक की याद आ गई।* *टेबल पर पड़ा लिफाफा खोल कर देखा तो उसमे रखा अस्पताल का नौ लाख का बिल उनको मुँह चिढ़ाने लगा।उन्होंने अपनी पत्नी से कहा - "जानकी तुम्हारा बेटा नालायक तो था ही झूठा भी है।"अचानक उनकी आँखों से आँसू गिरने लगे और वह जोर से चिल्लाये -"तूँ कहाँ चला गया नालायक, अपने पापा को छोड़ कर।एक बार वापस आ जा फिर मैं तुझे कहीं नही जाने दूँगा।"उनकी पत्नी के आँसू भी बहे जा रहे थे।और माधव जी को इंतजार था अपने नालायक बेटे को अपने गले से लगाने का।* *सचमुच बहुत नालायक था वो, ये पोस्ट पढ़ते वक्त अगर आँखें नम हुई तो समझो हमारे अंदर भी एक ऩालायक है.* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #👌 आत्मविश्वास #❤️जीवन की सीख #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌
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2 days ago
माता पार्वती और शिव जी के प्रिय पुत्र श्री गणेश जी पूरे संसार के रक्षक हैं जो अपने भक्तों के सारे कष्टों को हर लेते हैं और उन्हें सुख समृद्धि तथा रिद्धि सिद्धि प्रदान करते हैं पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश जी की पूजा वंदना करने का सौभाग्य प्राप्त हो हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌿🪻🌻🪻🌿🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ बुधवार #गणेश
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3 days ago
*🌹सन्यासी बडा या गृहस्थ🌹* 🙏🙏🙏🙏 क्रमशः पार्ट - 2 *हमारे राजा साहब और संन्यासी यह सब हाल वहाँ खड़े हुए देख रहे थे। संन्यासी ने राजा से कहा- "राजन् ! आओ, हम दोनों भी इनके पीछे चल कर देखें कि क्या परिणाम होता है।”* *राजा तैयार हो गया और वे उन दोनों के पीछे थोड़े अन्तर पर चलने लगे। चलते-चलते वह संन्यासी बहुत दूर एक घोर जंगल में पहुँचा, उसके पीछे राजकन्या भी उसी जंगल में पहुँची, आगे चलकर वह संन्यासी बिल्कुल अदृश्य हो गया। बेचारी राजकन्या बड़ी दुखी हुई और घोर अरण्य में भयभीत होकर रोने लगी।* *इतने में राजा और संन्यासी दोनों उसके पास पहुँच गये और उससे बोले- ”राजकन्ये ! डरो मत, इस जंगल में तेरी रक्षा करके हम तेरे पिता के पास तुझे कुशल पूर्वक पहुँचा देंगे। परन्तु अब अँधेरा होने लगा है, इसलिये पीछे लौटना भी ठीक नहीं, यह पास ही एक बड़ा वृक्ष है, इसके नीचे रात काट कर प्रातःकाल ही हम लोग चलेंगे।”* *राजकन्या को उनका कथन उचित जान पड़ा और तीनों वृक्ष के नीचे रात बिताने लगे। उस वृक्ष के कोटर में पक्षियों का एक छोटा सा घोंसला था, उसमें वह पक्षी, उसकी मादी और तीन बच्चे थे, एक छोटा सा कुटुम्ब था। नर ने स्वाभाविक ही घोंसले से जरा बाहर सिर निकाल कर देखा तो उसे यह तीन अतिथि दिखाई दिये।* *इसलिये वह गृहस्थाश्रमी पक्षी अपनी पत्नी से बोला- “प्रिये ! देखो हमारे यहाँ तीन अतिथि आये हुए हैं, जाड़ा बहुत है और घर में आग भी नहीं है।” इतना कह कर वह पक्षी उड़ गया और एक जलती हुई लकड़ी का टुकड़ा कहीं से अपनी चोंच में उठा लाया और उन तीनों के आगे डाल दिया। उसे लेकर उन तीनों ने आग जलाई।* *परन्तु उस पक्षी को इतने से ही सन्तोष न हुआ, वह फिर बोला-"ये तो बेचारे दिनभर के भूखे जान पड़ते हैं, इनको खाने के लिये देने को हमारे घर में कुछ भी नहीं है। प्रिय, हम गृहस्थाश्रमी हैं और भूखे अतिथि को विमुख करना हमारा धर्म नहीं है, हमारे पास जो कुछ भी हो इन्हें देना चाहिये, मेरे पास तो सिर्फ मेरा देह है, यही मैं इन्हें अर्पण करता हूँ।”* *इतना कह कर वह पक्षी जलती हुई आग में कूद पड़ा। यह देखकर उसकी स्त्री विचार करने लगी कि ‘इस छोटे से पक्षी को खाकर इन तीनों की तृप्ति कैसे होगी ? अपने पति का अनुकरण करके इनकी तृप्ति करना मेरा कर्तव्य है।’ यह सोच कर वह भी आग में कूद पड़ी।* *प्रेरणास्पद कथाएं हेतु जुड़े रहे* *यह सब कार्य उस पक्षी के तीनों बच्चे देख रहे थे, वे भी अपने मन में विचार करने लगे कि- "कदाचित अब भी हमारे इन अतिथियों की तृप्ति न हुई होगी, इसलिये अपने माँ बाप के पीछे इनका सत्कार हमको ही करना चाहिये।” यह कह कर वे तीनों भी आग में कूद पड़े।* *यह सब हाल देख कर वे तीनों बड़े चकित हुए। सुबह होने पर वे सब जंगल से चल दिये। राजा और संन्यासी ने राजकन्या को उसके पिता के पास पहुँचाया।* *इसके बाद संन्यासी राजा से बोला- "राजन् !! अपने कर्तव्य का पालन करने वाला चाहे जिस परिस्थिति में हो श्रेष्ठ ही समझना चाहिये। यदि गृहस्थाश्रम स्वीकार करने की तेरी इच्छा हो, तो उस पक्षी की तरह परोपकार के लिये तुझे तैयार रहना चाहिये और यदि संन्यासी होना चाहता हो, तो उस यति की तरह राज लक्ष्मी और रति को भी लज्जित करने वाली सुन्दरी तक की उपेक्षा करने के लिये तुझे तैयार होना चाहिये। कठोर कर्तव्य धर्म को पालन करते हुए दोनों ही बड़े हैं..!!"* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #👌 आत्मविश्वास #❤️जीवन की सीख #🏠घर-परिवार #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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3 days ago
जिसके भाग्य में महादेव की भक्ति लिखी हो उससे ज्यादा भाग्यशाली इस संसार में कोई नहीं.... पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा वंदना का सौभाग्य प्राप्त हो हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌿🌹🌻🌹🌿🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #शुभ मंगलवार #good morning #😇सोमवार भक्ति स्पेशल🌟
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4 days ago
*🌹संन्यासी बड़ा या गृहस्थ🌹* 🙏🙏🙏 *किसी नगर में एक राजा रहता था, उस नगर में जब कोई संन्यासी आता तो राजा उसे बुलाकर पूछता कि- ”भगवान ! गृहस्थ बड़ा है या संन्यास ?” अनेक साधु अनेक प्रकार से इसको उत्तर देते थे। कई संन्यासी को बड़ा तो बताते पर यदि वे अपना कथन सिद्ध न कर पाते तो राजा उन्हें गृहस्थ बनने की आज्ञा देता। जो गृहस्थ को उत्तम बताते उन्हें भी यही आज्ञा मिलती।* *इस प्रकार होते-होते एक दिन एक संन्यासी उस नगर में आ निकला और राजा ने बुलाकर वही अपना पुराना प्रश्न पूछा। संन्यासी ने उत्तर दिया- “राजन। सच पूछें तो कोई आश्रम बड़ा नहीं है, किन्तु जो अपने नियत आश्रम को कठोर कर्तव्य धर्म की तरह पालता है वही बड़ा है।”* *राजा ने कहा- “तो आप अपने कथन की सत्यता प्रमाणित कीजिये।“* *संन्यासी ने राजा की यह बात स्वीकार कर ली और उसे साथ लेकर दूर देश की यात्रा को चल दिया।* *घूमते-घूमते वे दोनों एक दूसरे बड़े राजा के नगर में पहुँचे, उस दिन वहाँ की राज कन्या का स्वयंवर था, उत्सव की बड़ी भारी धूम थी। कौतुक देखने के लिये वेष बदले हुए राजा और संन्यासी भी वहीं खड़े हो गये। जिस राजकन्या का स्वयंवर था, वह अत्यन्त रूपवती थी और उसके पिता के कोई अन्य सन्तान न होने के कारण उस राजा के बाद सम्पूर्ण राज्य भी उसके दामाद को ही मिलने वाला था।* *राजकन्या सौंदर्य को चाहने वाली थी, इसलिये उसकी इच्छा थी कि मेरा पति, अतुल सौंदर्यवान हो, हजारों प्रतिष्ठित व्यक्ति और देश-देश के राजकुमार इस स्वयंवर में जमा हुए थे। राज-कन्या उस सभा मण्डली में अपनी सखी के साथ घूमने लगी। अनेक राजा-पुत्रों तथा अन्य लोगों को उसने देखा पर उसे कोई पसन्द न आया। वे राजकुमार जो बड़ी आशा से एकत्रित हुए थे, बिल्कुल हताश हो गये। अन्त में ऐसा जान पड़ने लगा कि मानो अब यह स्वयंवर बिना किसी निर्णय के अधूरा ही समाप्त हो जायगा।* *प्रेरणास्पद कथाएं पढ़ने हेतु जुड़े रहे* *इसी समय एक संन्यासी वहाँ आया, सूर्य के समान उज्ज्वल काँति उसके मुख पर दमक रही थी। उसे देखते ही राजकन्या ने उसके गले में माला डाल दी। परन्तु संन्यासी ने तत्क्षण ही वह माला गले से निकाल कर फेंक दी और कहा- ”राजकन्ये। क्या तू नहीं देखती कि मैं संन्यासी हूँ? मुझे विवाह करके क्या करना है?”* *यह सुन कर राजकन्या के पिता ने समझा कि यह संन्यासी कदाचित भिखारी होने के कारण, विवाह करने से डरता होगा, इसलिये उसने संन्यासी से कहा- "मेरी कन्या के साथ ही आधे राज्य के स्वामी तो आप अभी हो जायेंगे और पश्चात् सम्पूर्ण राज्य आपको ही मिलेगा।"* *राजा के इस प्रकार कहते ही राजकन्या ने फिर वह माला उस साधु के गले में डाल दी, किन्तु संन्यासी ने फिर उसे निकाल पर फेंक दिया और बोला- "राजन् ! विवाह करना मेरा धर्म नहीं है।"* *ऐसा कह कर वह तत्काल वहाँ से चला गया, परन्तु उसे देखकर राजकन्या अत्यन्त मोहित हो गई थी, अतएव वह बोली - "विवाह करूंगी तो उसी से करूंगी, नहीं तो मर जाऊँगी।” ऐसा कह कर वह उसके पीछे चलने लगी।* *क्रमशःअगले भाग में* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🏠घर-परिवार #❤️जीवन की सीख
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4 days ago
🌸 ॐ महादेवाय नमः 🌸 🙏🏻 हे महादेव! "ऋण,रोग,दरिद्रता,पाप, क्षुद,अपमृत्यु का नाश करके सबको स्वस्थ और दीर्घायु जीवन दीजिए।" 🙏🏻आपके शरणागत हूं। 🌺सुप्रभातम 🌺 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #good morning शुभ सोमवार