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@184290003
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11 hours ago
माथे का चंदन नहीं मन का विश्वास चाहिए शिव को पाने के लिए केवल सच्चा एहसास चाहिए पवित्र श्रावण मास के पावन अवसर पर भगवान पशुपति नाथ महादेव का आशीर्वाद प्राप्त हो हर हर महादेव 🌿🌿 🚩🚩🌿🪻🌻🪻🌿🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #good morning #✋भगवान भैरव🌸
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12 hours ago
आदि तुम्हीं अनादि तुम्हीं तुम्हीं अनंत का सार हो साज तुम्हीं श्रृंगार तुम्हीं तुम ही जीवन का आधार हो जय श्री रुद्र शिव शंकर पवित्र श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएं 🚩🚩🌹🌹🪷🌹🌹🙏🙏 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🔱हर हर महादेव good morning शुभ गुरुवार
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12 hours ago
*🌹आत्मिक खजाना🌹* 🙏🙏🙏 *एक भिखारी था । उसने सम्राट बनने के लिए अपनी कमर कसी की में सम्राट बन कर रहुँगा ।* *चौराहे पर अपनी फटी -पुरानी चादर बिछा दी, अपनी हांडी रख दी और सुबह ,दोपहर,शाम भीख मांगना शुरू कर दिया क्योंकि उसे सम्राट होना था ।* *भीख मांगकर भी भला कोई सम्राट हो सकता है? किंतु उसे इस बात का पता नही था ।* *भीख मांगते -मांगते वह बुढा हो गया ओर मौत ने दस्तक दी और वह मर गया । क्योकि मौत किसी को छोड़ती नही है। लोगो ने उसकी हांडी फेक दी ,सड़े गले कपड़े बिस्तर नदी में बहा दिए ।* *जमीन गंदी हो गई थी तो सफाई करने के लिए थोड़ी खुदाई की। खुदाई करने पर लोगों को वहाँ बहुत बड़ा खजाना मिला ।* *तब लोगो ने कहा कितना अभागा था जीवन भर भीख मांगता रहा । जहाँ बैठा था अगर जरा -सी खुदाई करता तो सम्राट हो जाता ।* *ऐसे ही हम जीवनभर बाहर की चीजों की भीख मांगते रहते है किंतु जरा सा अपने भीतर गोता मारे, ईश्वर को पाने के लिए ध्यान का जरा सा अभ्यास करें तो उस आत्मखजाने को पा सकते जो हमारे अंदर छुपा हुआ है।* *अपनेआप को खोजो बहुत कुछ अपने अंदर छुपा मिलेगा ।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #🏠घर-परिवार #❤️जीवन की सीख #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👌 आत्मविश्वास
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1 days ago
*🌹दुनिया क्या कहेगी ?🌹* 🙏🙏🙏 *एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया* *पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं तो तीन-चार पनिहारिनें पानी के लिए आईं तो एक पनिहारिन ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया...पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।"* *पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली...उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया...दूसरी बोली,"साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई.. अभी रोष नहीं गया, तकिया फेंक दिया।" तब साधु सोचने लगा, अब वह क्या करें ?* *तब तीसरी पनिहारिन* बोली,*"बाबा! *यह तो पनघट है,* *यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी, बोलती ही रहेंगी, उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे तो साधना कब करोगे?"* *लेकिन एक चौथी पनिहारिन ने बहुत ही सुन्दर और एक बड़ी अद्भुत बात कह दी- *"साधु बाबा, क्षमा करना, लेकिन हमको लगता है,तूमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा है, अभी तक वहीं का वहीं बने हुए है।* *दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे, तूम जैसे भी हो, हरिनाम लेते रहो।" सच तो यही है, दुनिया का तो काम ही है कहना...* *आप ऊपर देखकर चलोगे तो कहेंगे... "अभिमानी हो गए।"* *नीचे देखकर चलोगे तो कहेंगे... "बस किसी के सामने देखते ही नहीं।"* *आंखे बंद कर दोगे तो कहेंगे कि... "ध्यान का नाटक कर रहा है।"* *चारो ओर देखोगे तो कहेंगे कि... "निगाह का ठिकाना नहीं। निगाह घूमती ही रहती है।"* *और परेशान होकर आंख फोड़ लोगे तो यही दुनिया कहेगी कि... "किया हुआ भोगना ही पड़ता है।"* *ईश्वर को राजी करना आसान है,* *लेकिन संसार को राजी करना असंभव है* *दुनिया क्या कहेगी, उस पर ध्यान दोगे तो आप अपना ध्यान नहीं लगा पाओगे...* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #❤️जीवन की सीख #🏠घर-परिवार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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1 days ago
जय श्री महाकाल 🌷💐🌹🌻🌼🌸🪷🪻 जिसके सिर पर महाकाल का है हाथ हो, उसे दुनिया की कोई ताकत डरा नहीं सकती, उनके आशीर्वाद ही सबसे बड़ा सहारा है।... हर हर महादेव महाकाल पवित्र मास सावन 🙏🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #good morning #शुभ बुधवार
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2 days ago
*🌹ईश्वर का गणित🌹* 🙏🙏🙏 *एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे । थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया और वो भी उन दोनों के साथ बैठकर गपशप करने लगा ।* *कुछ देर बाद वो आदमी बोला उसे बहुत भूख लग रही है उन दोनों को भी भूख लगने लगी थी । पहला आदमी बोला मेरे पास 3 रोटी हैं, दूसरा बोला मेरे पास 5 रोटी हैं हम तीनों मिल बांट कर खा लेते हैं।* *उसके बाद सवाल आया कि 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे ?? पहले आदमी ने राय दी कि ऐसा करते हैं कि हर रोटी के 3 टुकडे करते हैं, अर्थात 8 रोटी के 24 टुकडे (8 X 3 = 24) हो जाएंगे और हम तीनों में 8 - 8 टुकड़े बराबर बराबर बंट जाएंगे।* *तीनों को उसकी राय अच्छी लगी और 8 रोटी के 24 टुकडे करके प्रत्येक ने 8 - 8 रोटी के टुकड़े खाकर भूख शांत की और फिर बारिश के कारण मंदिर के प्रांगण में ही सो गए । सुबह उठने पर तीसरे आदमी ने उनके उपकार के लिए दोनों को धन्यवाद दिया और प्रेम से 8 रोटी के टुकड़ों के बदले दोनों को उपहार स्वरूप 8 सोने की गिन्नी देकर अपने घर की ओर चला गया ।* *उसके जाने के बाद दूसरे आदमी ने पहले आदमी से कहा हम दोनों 4 - 4 गिन्नी बांट लेते हैं । पहला आदमी बोला नहीं मेरी 3 रोटी थी और तुम्हारी 5 रोटी थी, अतः मैं 3 गिन्नी लुंगा, तुम्हें 5 गिन्नी रखनी होगी । इस पर दोनों में बहस होने लगी ।* *इसके बाद वे दोनों समाधान के लिये मंदिर के पुजारी के पास गए और उन्हें समस्या बताई तथा समाधान के लिए प्रार्थना की ।* *पुजारी भी असमंजस में पड़ गया, दोनों दूसरे को ज्यादा देने के लिये लड़ रहे है । पुजारी ने कहा तुम लोग ये 8 गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ और मुझे सोचने का समय दो, मैं कल सवेरे जवाब दे पाऊंगा । पुजारी को दिल में वैसे तो दूसरे आदमी की 3-5 की बात ठीक लग रही थी पर फिर भी वह गहराई से सोचते-सोचते गहरी नींद में सो गया। कुछ देर बाद उसके सपने में भगवान प्रगट हुए तो पुजारी ने सब बातें बताई और न्यायिक मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की और बताया कि मेरे ख्याल से 3 - 5 बंटवारा ही उचित लगता है ।* *भगवान मुस्कुरा कर बोले- नहीं, पहले आदमी को 1 गिन्नी मिलनी चाहिए और दूसरे आदमी को 7 गिन्नी मिलनी चाहिए । भगवान की बात सुनकर पुजारी अचंभित हो गया और अचरज से पूछा*- *प्रभु, ऐसा कैसे* *भगवन फिर एक बार मुस्कुराए और बोले* *इसमें कोई शंका नहीं कि पहले आदमी ने अपनी 3 रोटी के 9 टुकड़े किये परंतु उन 9 में से उसने सिर्फ 1 बांटा और 8 टुकड़े स्वयं खाया अर्थात उसका त्याग सिर्फ 1 रोटी के टुकड़े का था इसलिए वो सिर्फ 1 गिन्नी का ही हकदार है । दूसरे आदमी ने अपनी 5 रोटी के 15 टुकड़े किये जिसमें से 8 टुकड़े उसने स्वयं खाऐ और 7 टुकड़े उसने बांट दिए । इसलिए वो न्यायानुसार 7 गिन्नी का हकदार है .. ये ही मेरा गणित है और ये ही मेरा न्याय है !* *ईश्वर की न्याय का सटिक विश्लेषण सुनकर पुजारी नतमस्तक हो गया।* *इस कहानी का सार ये ही है कि हमारी वस्तुस्थिति को देखने की, समझने की दृष्टि और ईश्वर का दृष्टिकोण एकदम भिन्न है । हम ईश्वरीय न्यायलीला को जानने समझने में सर्वथा अज्ञानी हैं ।* *हम अपने त्याग का गुणगान करते है, परंतु ईश्वर हमारे त्याग की तुलना हमारे सामर्थ्य एवं भोग तौर कर यथोचित निर्णय करते हैं ।* *यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कितने धन संपन्न है महत्वपूर्ण यहीं है कि हमारे सेवाभाव कार्य में त्याग कितना है।* *मंगलमय प्रभात* *स्नेह वंदन* *प्रणाम* #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #☝ मेरे विचार #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏गीता ज्ञान🛕
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2 days ago
शीश गंग तन भस्म है, गरल कंठ में धार सबका दुख जो पी गये वन्दन बारंबार... पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा वंदना करने का सौभाग्य प्राप्त हो हर हर महादेव 🌿 🚩🚩🌹🌿🪻🌿🌹🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #🔱हर हर महादेव #good morning #शुभ मंगलवार
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3 days ago
*🌹ना तीन में, ना तेरह में🌹* 🙏🙏🙏 *एक नगर सेठ थे। अपनी पदवी के अनुरुप वे अथाह दौलत के स्वामी थे। घर, बंगला, नौकर-चाकर थे। एक चतुर मुनीम भी थे जो सारा कारोबार संभाले रहते थे।* *किसी समारोह में नगर सेठ की मुलाकात नगर-वधु से हो गई। नगर-वधु यानी शहर की सबसे खूबसूरत वेश्या। अपने पेशे की जरुरत के मुताबिक नगर-वधु ने मालदार व्यक्ति जानकर नगर सेठ के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया। फिर उन्हें अपने घर पर भी आमंत्रित किया।* *सम्मान से अभिभूत सेठ, दूसरे-तीसरे दिन नगर-वधु के घर जा पहुँचे। नगर-वधु ने आतिथ्य में कोई कमी नहीं छोड़ी। खूब आवभगत की और यकीन दिला दिया कि वह सेठ से बेइंतहा प्रेम करने लगी है।* *अब नगर-सेठ जब-तब नगर-वधु के ठौर पर नजर आने लगे। शामें अक्सर वहीं गुजरने लगीं। नगर भर में खबर फैल गई। काम-धंधे पर असर होने लगा। मुनीम की नजरें इस पर टेढ़ी होने लगीं।* *एक दिन सेठ को बुखार आ गया। तबियत कुछ ज्यादा बिगड़ गई। कई दिनों तक बिस्तर से नहीं उठ सके। इसी बीच नगर-वधु का जन्मदिन आया। सेठ ने मुनीम को बुलाया और आदेश दिया कि एक हीरों जड़ा नौलखा हार खरीदा जाए और नगर-वधु को उनकी ओर से भिजवा दिया जाए। निर्देश हुए कि मुनीम खुद उपहार लेकर जाएँ।* *मुनीम तो मुनीम था। खानदानी मुनीम। उसकी निष्ठा सिर्फ सेठ के प्रति भर नहीं थी। उसके पूरे परिवार और काम धंधे के प्रति भी थी। उसने सेठ को समझाया कि वे भूल कर रहे हैं। मुनीम ने बताने की कोशिश कि वेश्या किसी व्यक्ति से प्रेम नहीं करती, पैसों से करती है।* *मुनीम ने उदाहरण देकर समझाया कि नगर-सेठ जैसे कई लोग प्रेम के भ्रम में वहाँ मंडराते रहते हैं।* *लेकिन सेठ को ना समझ में आना था, ना आया। सेठ ने सख्ती से कहा कि मुनीम नगर-वधु के पास तोहफा पहुँचा आएँ।* *मुनीम क्या करते !! एक हीरों जड़ा नौलखा हार खरीदा और नगर-वधु के घर की ओर चल पड़े। लेकिन रास्ते भर वे इस समस्या को निपटाने का उपाय भी सोचते रहे।* *नगर-वधु के घर पहुँचे तो नौलखा हार का डब्बा खोलते हुए कहा, “यह तोहफा उसकी ओर से जिससे तुम सबसे अधिक प्रेम करती हो।”* *नगर-वधु ने फटाफट तीन नाम गिना दिए। मुनीम को आश्चर्य नहीं हुआ कि उन तीन नामों में सेठ का नाम नहीं था। निर्विकार भाव से उन्होंने कहा, “देवी, इन तीन में तो उन महानुभाव का नाम नहीं है जिन्होंने यह उपहार भिजवाया है।”* *ऐसी ही प्रेरणास्पद और सत्य पर आधारित कथायें ब संस्कारित कहानियां पढ़ने के लिये जुड़े रहे* *नगर-वधु की मुस्कान गायब हो गई। सामने चमचमाता नौलखा हार था और उससे भारी भूल हो गई थी। उसे उपहार हाथ से जाता हुआ दिखा। उसने फौरन तेरह नाम गिनवा दिए।* *तेरह नाम में भी सेठ का नाम नहीं था। लेकिन इस बार मुनीम का चेहरा तमतमा गया। ग़ुस्से से उन्होंने नौलखा हार का डब्बा उठाया और खट से उसे बंद करके उठ गए। नगर-वधु गिड़गिड़ाने लगी। उसने कहा कि उससे भूल हो गई है। लेकिन मुनीम चल पड़े।* *बीमार सेठ सिरहाने से टिके मुनीम के आने की प्रतीक्षा ही कर रहे थे। नगर-वधु के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे।* *मुनीम पहुचे और हार का डब्बा सेठ के सामने पटकते हुए कहा, “लो, अपना नौलखा हार, न तुम तीन में न तेरह में। यूँ ही प्रेम का भ्रम पाले बैठे हो।”* *सेठ की आँखें खुल गई थीं। इसके बाद वे कभी नगर-वधु के दर पर नहीं दिखाई पड़े।* *मंगलमय प्रभात* *प्रणाम* #☝ मेरे विचार #🏠घर-परिवार #❤️जीवन की सीख #👌 आत्मविश्वास #good morning
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3 days ago
पवित्र श्रावण मास के नागपंचमी पर्व पर भगवान शिव के आशीर्वाद और नाग देवता की कृपा से हम सब के जीवन की बाधाएं दूर हो तृतीय सोमवार को नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त हो ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव 🌿🌿 🚩🚩🌿🪻🌹🪻🌿🙏🙏 #🔱हर हर महादेव #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #good morning #शुभ सोमवार #🌸 जय श्री कृष्ण😇
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4 days ago
🌹घर को स्वर्ग बनाइए🌹 🙏🙏🙏 ससुराल में बेटी जैसा सम्मान और प्यार पाना चाहती हैं, तो एक बात दिल से समझिए… आज बहुत-सी बेटियों के मन में एक शिकायत होती है—“हमें ससुराल में बेटी जैसा प्यार और सम्मान नहीं मिलता…” शिकायत जायज़ भी हो सकती है… लेकिन इस शिकायत के साथ कभी-कभी हमें एक सवाल खुद से भी पूछ लेना चाहिए—“क्या मैं भी इस घर को उतना ही अपना मानती हूँ, जितना चाहती हूँ कि यह घर मुझे अपना माने?” यही सवाल शायद रिश्तों की बहुत-सी उलझनों का जवाब दे सकता है। जब हम मायके में बेटी थीं, तब माँ हमारे लिए कितनी सहजता से सब कुछ कर देती थी। हम देर से उठते तो माँ बिना शिकायत के नाश्ता बना देती। आज की कहानी चाय चाहिए होती तो चाय मिल जाती। खाना चाहिए तो खाना तैयार मिलता। घर के बहुत-से काम माँ या मेड संभाल लेते। और हम भी अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार कभी-कभी हाथ बँटा देते थे। लेकिन शादी के बाद जिंदगी की भूमिका बदल जाती है। अब हम सिर्फ किसी की बेटी नहीं रहतीं…हम किसी की पत्नी बनती हैं, किसी की बहू बनती हैं और आगे चलकर किसी की माँ भी बनती हैं। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि बहू को घर का हर काम अकेले करना चाहिए। नहीं। बहू भी इंसान है। उसे थकान होती है। उसे आराम चाहिए। उसे अपने सपने और अपनी पहचान भी चाहिए। ससुराल कोई नौकरी की जगह नहीं, एक घर है—जहाँ जिम्मेदारियों के साथ प्यार, सम्मान और समझदारी भी होनी चाहिए। लेकिन एक पल के लिए अपने आप को अपनी भाभी की जगह रखकर देखिए… अगर आप मायके जाएँ और देखें कि आपकी माँ सुबह से अकेली रसोई में लगी हुई हैं, घर का सारा काम कर रही हैं और आपकी भाभी आराम कर रही हैं… तो क्या आपको अच्छा लगेगा? शायद आप तुरंत माँ से कहेंगी— “माँ, आप क्यों इतना काम कर रही हो? भाभी को भी थोड़ा हाथ बँटाने दो।” लेकिन क्या हमने कभी अपनी भाभी की जगह खुद को रखकर सोचा है? जो अपेक्षा हम अपनी भाभी से रखते हैं, वही अपेक्षा कभी-कभी हमारे ससुराल वाले भी हमसे रखते हैं। रिश्ते सिर्फ इस बात से नहीं चलते कि “मुझे क्या मिला?” रिश्ते तब खूबसूरत बनते हैं जब हम पूछते हैं— “मैंने इस रिश्ते को क्या दिया?” और यह बात सिर्फ बहुओं के लिए नहीं है… सासुमां से भी एक छोटी-सी विनती… अगर आप चाहती हैं कि आपकी बहू आपको माँ कहकर सिर्फ पुकारे ही नहीं, बल्कि दिल से माँ माने… तो उसे सिर्फ “बहू” मत समझिए। उसे अपने घर की बेटी की तरह अपनाइए। उसकी छोटी-छोटी गलतियों को तानों का विषय मत बनाइए। उसकी तुलना किसी और से मत कीजिए। हर समय उसकी परीक्षा मत लीजिए। क्योंकि…जिस घर में बहू को हर पल खुद को साबित करना पड़े, वहाँ वह घर तो संभाल सकती है… लेकिन दिल नहीं खोल पाती। और बहुओं से भी एक बात— अगर आपको सास में माँ का प्यार चाहिए,तो सास के प्रति बेटी जैसा अपनापन भी दिखाइए। उनकी तबीयत पूछिए। उनकी जरूरत समझिए। घर को सिर्फ “ससुराल” नहीं, अपना घर समझने की कोशिश कीजिए। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि आप अपनी गरिमा, अपनी सीमाएँ और अपने अधिकार भूल जाएँ। अपनापन रखिए, लेकिन आत्मसम्मान के साथ। जिम्मेदारी निभाइए, लेकिन अपनी पहचान के साथ। प्यार दीजिए, लेकिन खुद को मिटाकर नहीं... क्योंकि…बेटी बनना सिर्फ अधिकार पाने का नाम नहीं है, बेटी बनना जिम्मेदारी निभाने और रिश्तों को दिल से अपनाने का नाम भी है। याद रखिए—मायका हो या ससुराल, घर दीवारों से नहीं बनता… घर बनता है समझदारी से, घर बनता है सम्मान से, घर बनता है त्याग से, घर बनता है एक-दूसरे की भावनाओं को समझने से। जहाँ “मैं” से ज्यादा “हम” की आवाज सुनाई देती है,वहीं घर धीरे-धीरे स्वर्ग बन जाता है। इसलिए अगली बार शिकायत करने से पहले बस एक पल ठहरकर खुद से पूछिए—“क्या मैं इस घर को उतना ही अपना मानती हूँ ? जितना चाहती हूँ कि यह घर मुझे अपना माने?” अगर इस सवाल का जवाब “हाँ” है… तो यकीन मानिए,रिश्तों में बदलाव आने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि घर को स्वर्ग बनाने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत नहीं होती…बस थोड़ी-सी समझदारी, थोड़ा-सा सम्मान, थोड़ा-सा त्याग और… बहुत सारा अपनापन चाहिए। स्नेह वंदन , मंगलमय प्रभात प्रणाम #👌 आत्मविश्वास #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार