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अजय ओमप्रकाश आर्य
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अजय ओमप्रकाश आर्य
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7 hours ago
12.4.2026 सब संसार के लोगों का मन अशांत है। चंचलता चिंता तनाव काम क्रोध लोभ ईर्ष्या द्वेष अभिमान आदि दोषों से घिरा हुआ है। तो ऐसा मन कैसे शांत हो सकता है? *"जिसका मन शांत नहीं है, वह व्यक्ति सुखी कैसे हो सकता है? नहीं हो सकता।"* मन को शांत कैसे बनाएं? उसका मुख्य उपाय है, ईश्वर का ध्यान करना। *"जो व्यक्ति प्रतिदिन सुबह-शाम नियमित रूप से निराकार सर्वव्यापक सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान सर्वरक्षक न्यायकारी आनंद के भंडार ईश्वर का ध्यान करता है। और ईश्वर का ध्यान करते हुए व्यवहार में इन सब कर्मों को भी करता है। जैसे वेदों का अध्ययन करता है, ईमानदारी से अपना जीवन जीता है। सच्चाई परोपकार सेवा दान दया आदि शुभ कर्मों का आचरण करता है। झूठ छल कपट आदि दोषों से दूर रहता है। उसका मन शांत होता है। बस संसार में वही सुखी होता है, अन्य नहीं।"* *"जो जितनी मात्रा में ये सब कार्य करेगा। उसका मन उतनी ही मात्रा में शांत होगा, और उसे उतनी ही मात्रा में सुख मिलेगा।"* *"आप भी ऊपर बताए कर्मों का आचरण तथा ईश्वर का ध्यान सुबह-शाम नियमित रूप से 2 मास तक करके देखिए। आपको निश्चित रूप से शांति मिलेगी और सुख मिलेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
अजय ओमप्रकाश आर्य
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1 days ago
11.4.2026 जब आपको कोई नए लोग मिलते हैं, पहली बार आपका उनसे परिचय होता है, तो चेहरा देखकर ही पहले पहले परिचय किया जाता है। फिर धीरे-धीरे आपस में मिलना जुलना आदि व्यवहार बढ़ता जाता है। *"यदि आपके और उनके विचार मिलते हों, गुण कर्म स्वभाव मिलता हो, तो उसका परिणाम यह होता है, कि कुछ समय के बाद आपमें और उन में एक मधुर संबंध बन जाता है।"* उस संबंध का आरंभ भले ही चेहरा देखकर हुआ हो। परन्तु यदि कुछ समय बाद दोनों व्यक्तियों का आपस में परस्पर सभ्यता नम्रता सच्चाई उत्तम भावनाओं और सम्मानपूर्वक व्यवहार होता रहता है, तब तो वह संबंध टिक जाता है। *"अन्यथा थोड़ी भी चालाकी चतुराई या धोखाधड़ी करने पर वह संबंध शीघ्र ही टूट जाता है, लंबे समय तक नहीं टिकता।"* *"इसलिए यदि आप किसी के साथ लंबे समय तक अपना संबंध मधुर बनाए रखना चाहते हों, आनंद पूर्ण बनाए रखना चाहते हों, तो आप दोनों को परस्पर सभ्यता नम्रता सच्चाई उत्तम भावनाएं और सम्मान आदि गुणों की आवश्यकता पड़ेगी। इसके बिना वह संबंध लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓
अजय ओमप्रकाश आर्य
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2 days ago
10.4.2026 कुछ लोग कुछ शास्त्रों को पढ़कर अभिमानी हो जाते हैं, और यह समझते हैं, कि *"अब हम पूर्ण विद्वान बन गए।" "जबकि उन पढ़ी सुनी बातों पर वे लोग आचरण नहीं करते।"* तो केवल शब्द ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति को मिथ्या संतोष नहीं कर लेना चाहिए, कि *"मैंने बहुत सीख लिया है," "जब तक उन बातों को वह आचरण में न उतार ले।"* *"शाब्दिक ज्ञान से आचरण सदा उत्तम होता है। शाब्दिक ज्ञान तो रावण के पास भी बहुत था। परंतु वह ज्ञान उसके आचरण में नहीं उतरा, इसलिए फलीभूत नहीं हुआ।" "श्री रामचंद्र जी महाराज ने वेदों का अध्ययन किया। शब्द शास्त्र भी पढ़ा, और उसे आचरण में भी उतारा। इसलिए वे सफल हो गए। और आज तक संसार के लोग उनका सम्मान कर रहे हैं।"* *"अतः शाब्दिक ज्ञान से संतुष्ट न हो जाएं।श्री रामचंद्र जी महाराज के समान उसे अपने जीवन में भी उतारें, तभी आपका कल्याण होगा, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख
अजय ओमप्रकाश आर्य
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3 days ago
9.4.2026 जैसे खेत में किसान बीज होता है। गेहूं चना ज्वार बाजरी इत्यादि *"जैसी भी फसल का बीज बोता है, वैसी ही फसल उत्पन्न होती है।"* इसी प्रकार से मनुष्य के मन में भी जो विचार आते हैं, और यदि वे विचार उसके मन में टिक जाते हैं, तो *"यह भी बीज बोने जैसा ही काम है।"* अर्थात जैसे खेत में बीज बोने पर कुछ समय तक उसको खाद पानी दिया जाता है। फिर उसका अंकुर फूटता है, पौधा बनता है। और *"कुछ समय बाद उसी नस्ल की फसल उत्पन्न होती है, जिस नस्ल का बीज बोया गया था।"* ऐसे ही किसी व्यक्ति के मन में जो विचार स्थापित हो जाता है, कुछ समय तक उस पर चिंतन मनन चलता है। फिर *"वह व्यक्ति वैसी ही भाषा बोलता है, और वैसे ही कर्मों का आचरण करता है। और फिर अंत में उसको वैसा ही कर्मों का फल मिलता है, जिस प्रकार का विचार रूपी बीज उसने अपने मन में बोया था।"* तो यदि आप अच्छा फल अर्थात सुख भोगना चाहते हों, तो अच्छा बीज बोएं। अर्थात *"सेवा परोपकार दान दया सभ्यता नम्रता यज्ञ संध्या उपासना प्राणियों की रक्षा माता-पिता की सेवा वेदों का अध्ययन आर्य विद्वानों का सम्मान सत्कार करना इत्यादि शुभ कर्मों से संबंधित विचार अपने मन में स्थापित करें। फिर उन्हें बढ़ाएं। उन पर चिंतन मनन करें। वैसी ही अच्छी भाषा बोलें। वैसे ही अच्छे कर्म करें। तो आपको इसका अच्छा फल अर्थात सुख मिलेगा।"* *"और यदि आप अपने मन में निंदा चुगली ईर्ष्या राग द्वेष अविद्या काम क्रोध लोग अभिमान आदि से संबंधित बुरे विचार स्थापित करेंगे। तो वैसी ही आपकी वाणी होगी, और वैसे ही आपके कर्म होंगे। फिर उनका फल भी वैसा ही अर्थात दुख भोगना पड़ेगा।"* *"अब आप बुद्धिमान हैं। स्वयं देख लीजिए, कि किस प्रकार के विचार आपको अपने मन में स्थापित करने चाहिएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
अजय ओमप्रकाश आर्य
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4 days ago
8.4.2026 लोग कुछ पढ़ाई करते हैं। डिग्रियां लेते हैं। पैसे कमाते हैं। बंगला बनाते हैं। कार खरीदते हैं। खाते पीते हैं। डांस करते हैं, और सो जाते हैं। लोग समझते हैं, कि मनुष्य जीवन इतना ही है। परंतु ध्यान देने की बात यह है, कि *"मनुष्य जीवन इतना ही नहीं है। यह तो केवल स्वार्थ पूर्ति है।"* मनुष्य जीवन में सबसे विशेष बात यह है, कि *"स्वार्थ पूर्ति करते हुए कुछ परोपकार भी करना चाहिए। दूसरों की सेवा भी करनी चाहिए। कुछ दान करना चाहिए। मूक प्राणियों पर दया करनी चाहिए। गरीब कमजोर रोगी आदि की सहायता करनी चाहिए। प्रतिदिन अपने घर में वैदिक यज्ञ करना चाहिए। ईश्वर की सुबह-शाम उपासना करनी चाहिए। माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। वृद्धों और विकलांगों की रक्षा करनी चाहिए। वेद के विद्वानों का सत्कार सम्मान और उनसे विद्या प्राप्त करनी चाहिए। यह सब भी मनुष्य जीवन की सफलता के अंतर्गत है।"* *"तो केवल खा पी कर सो न जाएं। इन उत्तम कर्मों का आचरण भी करें। तभी आपका यह मानव जीवन सफल होगा और आगे भी मनुष्य जीवन फिर से मिल जाएगा।"* *"यदि आप ने ऊपर बताए शुभ कर्मों का आचरण नहीं किया, और खा पी कर पशु पक्षियों के समान यदि आप सो जाएंगे, तो न कुछ पुण्य मिलेगा, और न ही अगला जन्म मनुष्य का।"* दूसरी बात -- *"यदि शुभ कर्म नहीं किया, तो कुछ न कुछ अशुभ कर्म ही करेंगे। और फिर उनका फल पशु पक्षी वृक्ष आदि योनियों में भोगना होगा, जो कि बहुत दुखदायक लगेगा।"* *"इसलिए पढ़ाई-लिखाई धन कमाना इत्यादि के साथ-साथ शुभ कर्मों का आचरण भी करें। इससे आपका मन बुद्धि और आत्मा पवित्र होगा, तथा आप का मनुष्य जीवन भी सफल हो जाएगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓