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सुशील मेहता
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सुशील मेहता
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1 hours ago
राष्ट्रीय समुद्री दिवस भारत में हर साल पांच अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है. यह दिन अंतरमहाद्वीपीय वाणिज्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था के समर्थन में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने के लिए मनाया जाता है. इसके साथ भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना भी इसका उद्देश्य है। पहली बार 5 अप्रैल, 1919 के दिन सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लि. का पहला स्टीम शिप एसएस लॉयल्टी मुंबई से लंदन की पहली समुद्री यात्रा के लिए अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उतारा गया था. यह कदम भारतीय नौवहन इतिहास के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि उस दौरान समुद्री मार्गों को अंग्रेजों द्वारा नियंत्रित किया जाता था.मर्चेंट नेवी वीक का आयोजन 31 मार्च से 05 अप्रैल, 2021 तक राजभवन मुंबई में किया गया है. एक से तीन अप्रैल तक वेबिनार का भी आयोजन किया गया. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना है. #जागरूकता दिवस
सुशील मेहता
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1 hours ago
ईस्टर पुनरुत्थान दिवस या ईस्टर, यूनानी : Πάσχα ईसाई पूजन-वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक धार्मिक पर्व है। ईसाई धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार, इस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन यीशु मरे हुओं में से पुनर्जीवित हो गए थे। इस पुनरुत्थान को ईसाई ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार मानते हैं।, ये दिन गुड फ्राईडे के दो दिन बाद और पुण्य बृहस्पतिवार या मौण्डी थर्सडे के तीन दिन बाद आता है। 26 और 36 ई.प. के बीच में हुई उनकी मृत्यु और उनके जी उठने के कालक्रम को अनेकों तरीके से बताया गया है। ईसाई धर्म की कुछ मान्यताओं के अनुसार ईस्टर शब्द की उत्पत्ति ईस्त्र शब्द से हुई है। ईस्टर की तिथि की गणना वसंत विषुव के बाद पहले पूर्णिमा के बाद पहला रविवार होता है। धर्म विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुराने समय में किश्चियन चर्च ईस्टर रविवार को ही पवित्र दिन के रूप में मानते थे। किंतु चौथी सदी से गुड फ्रायडे सहित ईस्टर के पूर्व आने वाले प्रत्येक दिन को पवित्र घोषित किया गया। - ईस्टर रविवार के पहले सभी गिरजाघरों में रात्रि जागरण तथा अन्य धार्मिक परंपराएं पूरी की जाती है। - असंख्य मोमबत्तियां जलाकर प्रभु यीशु में अपने विश्वास प्रकट करते हैं। यही कारण है कि ईस्टर पर सजी हुई मोमबत्तियां अपने घरों में जलाना तथा मित्रों में इन्हें बांटना एक प्रचलित परंपरा है। - ईस्टर के दिन उषाकाल में होने वाली प्रार्थना के बाद दोपहर 12 बजे से पूर्व में भी आराधना होती है। इसमें पुनरुत्थान प्रवचन व प्रार्थना होती है। - ईसाई धर्म में गुड फ्रायडे से तीसरा दिन रविवार अधिक महत्व रखता है। - ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन प्रभु यीशु पुन: जीवित हो गए थे। - ईसाई धर्म के अनुयायी ऐसा मानते हैं कि पुन: जीवित होने के बाद चालीस दिन तक प्रभु यीशु शिष्यों और मित्रों के साथ रहे और अंत में स्वर्ग चले गए। - शुरुआती समय में ईसाई धर्म को मानने वाले अधिकांश यहूदी थे। जिन्होंने प्रभु यीशु के जी उठने को ईस्टर घोषित कर दिया। #शुभ कामनाएँ 🙏
सुशील मेहता
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1 hours ago
विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत हिंदू धर्म में वैशाख महीने का विशेष महत्व है और धार्मिक कार्यों के लिए इस माह को काफी पवित्र माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के एकदंत रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से जातक के सभी दुख दूर हो जाते हैं और यश की प्राप्ति होती है। इसके अलावा विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश और माता चौथ की आराधना की जाती है। इस व्रत को करने से संतान संबंधी सभी दुख दूर होते हैं और संतान का भविष्य उज्जवल बनता है। वहीं वैवाहिक जीवन में तनाव कम होता है और कारोबार में आ रही समस्याएं भी दूर हो जाती है। विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने से जातक को बल, बुद्धि, आरोग्य और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवताओं के ऊपर भारी संकट आ गया. जब वह खुद से उस संकट का समाधान नहीं निकाल पाए तो भगवान शिव के पास मदद मांगने के लिए गए. भगवान शिव ने गणेश जी और कार्तिकेय से संकट का समाधान करने के लिए कहा तो दोनों भाइयों ने कहा कि वे आसानी से इसका समाधान कर लेंगे. इस प्रकार शिवजी दुविधा में आ गए. उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी का चक्कर लगाकर जो सबसे पहले मेरे पास आएगा वही समाधान करने जाएगा. भगवान कार्तिकेय बिना किसी देर किए अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल गए. वहीं गणेश जी के पास मूषक की सवारी थी. ऐसे में मोर की तुलना में मूषक का जल्दी परिक्रमा करना संभव नहीं था. तब उन्होंने बड़ी चतुराई से पृथ्वी का चक्कर ना लगाकर अपने स्थान पर खड़े होकर माता पार्वती और भगवान शिव की 7 परिक्रमा की. जब महादेव ने गणेश जी से पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो इस पर गणेश जी बोले माता पिता के चरणों में ही पूरा संसार होता है। #शुभ कामनाएँ 🙏