#🙏🏻आध्यात्मिकता😇#❤️जीवन की सीख देखो_भगवान_चमत्कार_भगवान_अपने_बच्चों_को_सबकुछ_देतेहै?
🔴संत रामपाल जी महाराज जी काउद्देश्यहैकिसभीशास्त्रोंकेअनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की पूजा करें और अपने मूल निवास सतलोक में वापस लौटकर पूर्ण ब्रह्म कबीर परमेश्वर की शरण ग्रहणकरें।
ऐसे परम संत का 17फरवरीकोबोध दिवस था!
#ईश्वर आस्था#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#अगर_मन_बहुत_बकवास_करता_हैतो_अस्पताल_घूमकर_आजाओ?
🩺जो व्यक्ति मनुष्य जन्म प्राप्त करके भक्ति नहीं करता, वह चौरासी लाख योनियों में कष्ट उठाता है। कुत्ता रात में ऊपर की ओर मुंह करके बहुत रोता है। इसलिए पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर सतभक्ति करनी चाहिए।
#शेखफ़रीद_को_बंदीछोड़_का_साकछत_दर्शन
🦚काशी करौंत काहे लेही, बिना भजन नहीं ढंग रे।
कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है, करो साध सत्संग रे।।
मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण और सच्चे संत की शरण में जाना अनिवार्य है। इसी का समर्थन श्रीमद्भगवद्गीता भी करती है:
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उस परम ज्ञान को जानने के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ, उन्हें दंडवत प्रणाम करो और निष्कपट भाव से सेवा करो। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇#ईश्वर आस्था
#🙏🏻गुरबानी#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #हम_उस_भगवान_के_पुजारी_है_जोकिसी_कोनही_मरता?
😂😭17 फरवरी को उस महान संत रामपाल जी महाराज जी का बोध दिवस है, जिन्होंने मानव कल्याण के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया। और देखते ही देखते पूरे विश्व में अपने तत्वज्ञान का परचम लहरा दिया।
15, 16, 17 फरवरी को संत रामपाल जी महाराज जी के बोध दिवस के उपलक्ष्य में उनके सभी आश्रमों में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें संपूर्ण विश्व को आमंत्रित किया गया है
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇#🙏गुरु महिमा😇 #मेरे_पर्वतदिगार_का_नूरी_ज्ञान_आज_विश्व_में_फेल_गया?
🏳️17 फरवरी को उस महान संत रामपाल जी महाराज जी का बोध दिवस है, जिन्होंने मानव कल्याण के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया। और देखते ही देखते पूरे विश्व में अपने तत्वज्ञान का परचम लहरा दिया।
15, 16, 17 फरवरी को संत रामपाल जी महाराज जी के बोध दिवस के उपलक्ष्य में उनके सभी आश्रमों में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें संपूर्ण विश्व को आमंत्रित किया गया है।
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇#🙏कर्म क्या है❓ #परमात्मा_ने_कहा_माया_और_काया_पर_इतना_अटूट_विश्वास_मत_करो?
⚕️बिन सतगुरू पावै नहीं खालक खोज विचार।
चौरासी जग जात है, चिन्हत नाहीं सार।।
सतगुरू के बिना खालिक (परमात्मा) का विचार यानि यथार्थ ज्ञान नहीं मिलता। जिस कारण से संसार के व्यक्ति चौरासी लाख प्रकार के प्राणियों के शरीरों को प्राप्त करते हैं क्योंकि वे सार नाम, मूल ज्ञान को नहीं पहचानते।