#सत_भक्ति_संदेश
तन मन शीश ईश अपने पै, पहलम चोट चढावै ।
जब कोए राम भक्त गति पावै, हो जी ।।
संत नित्यानंद जी ने भक्ति को सफल करने की विधि बताई है। कहा है कि गुरू जी से दीक्षा लेने के पश्चात् परमेश्वर को पूर्ण रूपसे समर्पित हो जाना चाहिए और तन मन धन अपने परमेश्वर को पहलम चोट चढ़ावै यानी प्रारम्भ से ही कुर्बानी का भाव बन जाए ।
तब भक्त की गति यानी मुक्ति होगी।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महराज जी
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