*ग़ज़ल – जय श्री हनुमान*
दिल में जो है शक्ति का दीप जलाए बैठा हूँ,
नाम हनुमत का हर साँस में बसाए बैठा हूँ।
पर्वत उठाया जिसने खेल-खेल में इक दिन,
उस वीर के चरणों में शीश झुकाए बैठा हूँ।
राम के दूत हैं, संकट हरते हैं पल में,
हर दुख से रक्षा को आस लगाए बैठा हूँ।
भूत-पिशाच निकट ना आवे, जपे जो नाम तेरा,
तेरे जयकारों में खुद को भुलाए बैठा हूँ।
लाल अंग, सुनहरी छवि, वज्र का सा तन तेरा,
तेरी भक्ति की धारा में खुद को बहाए बैठा हूँ।
सिंदूर चढ़ा है अंग पे, जलता सा रूप तेरा,
तेरी भक्ति में रमता, खुद को मिटाए बैठा हूँ।
आज तेरा दिन है, जयंतियों का राजा,
तेरे चरणों में ये जीवन चढ़ाए बैठा हूँ।
केसरीनंदन, अंजनीसुत, पवनपुत्र बलवाना,
हर दिल में आज तेरा जयघोष गूंजता जाना।
तू ही भक्तों का रक्षक, तू ही ग्यानी, तू ही बल,
तेरे बिना अधूरा है रामभक्ति का हर पल।
सात समंदर पार करे, मन को भी पार लगाये,
तू ही तो है जो प्रेम से प्रभु तक पहुँचाए।
#jai thirupati balaji 🌼🙏🌼🙏🌼