#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#ये_आपको_तय_करना_हैं
कि मरने के बाद आपको क्या बनना हैं ?
पवित्र श्री मद् भागवत गीता जी हमारे पवित्र चारों वेदों का सार हैं, निचोड़ हैं और सबसे बड़ी बात यह हैं यह ईश्वरीय संविधान हैं। इसमें बताया गया हैं कि जो जैसा कर्म करेगा उसे वैसा ही फल प्राप्त होता हैं,उनकी वैसी ही गति होती हैं।
आइये एक नजर डालें, पवित्र गीता जी के इस श्लोक पर...
{अध्याय 9 का श्लोक 25}
यान्ति, देवव्रताः, देवान्, पितृन्, यान्ति, पितृव्रताः।
भूतानि,यान्ति,भूतेज्याः,यान्ति, मद्याजिनः,अपि,माम्।।25।।
अनुवाद : - गीता जी का ज्ञान दाता प्रभू यह #ब्रम्ह/#क्षरपुरूष/#कालपुरूष अपने इस मृत्युलोक के जीव आत्माओं के लिए उन्होंने कर्म का जो संविधान बना रखा हैं, उनके विषय में बता रहा हैं कि...
(देवव्रताः) देवताओं को पूजने वाले (देवान्) देवताओं को (यान्ति) प्राप्त होते हैं
अर्थात् देवताओं के पुजारी अपने ईष्टदेव के लोक (जैसे ब्रम्हा जी के लोक, विष्णु जी के लोक, शिव जी के लोक आदि ) में चला जाता हैं,वहां उसे कोई गण या पार्षद आदि बना दिया जाता हैं जब तक कि उनके पुण्यकर्म सांथ रहेगा तब तक।
और
(पितृव्रताः) पितरों को पूजने वाले (पितृन्) पितरों को (यान्ति) प्राप्त होते हैं
अर्थात् जो अपने पितरों की आजीवन पूजा करते हैं वे मृत्यु के पश्चात् पितरलोक में चले जाते हैं और पितर बन जाते हैं।
और
(भूतेज्याः) भूतों को पूजने वाले (भूतानि) भूतों को (यान्ति) प्राप्त होते हैं
अर्थात् भूत प्रेत की साधना करने वाले अन्त में स्वयं भी भूत प्रेत बन जाते हैं और भटकते रहते हैं
और
(मद्याजिनः) इसी प्रकार से मेरे मत अनुसार जो मेरा (#ब्रम्ह का) पूजन करते हैं,मेरे ऐसे भक्तजन (माम्) मुझे (अपि) ही (यान्ति) प्राप्त होते हैं।
सार - उपरोक्त सभी प्रकार के साधक / भक्त उपरोक्त सभी प्रकार के साधनाओं को करने के कारण से देव दूर्लभ अपने अनमोल मानव जीवन के मूल उद्देश्य, मूल लक्ष्य (#पूर्ण_मोक्ष) से वंचित रह जाते हैं क्योंकि गीता जी के अध्याय 4 के श्लोक नम्बर 32,34 के अनुसार वह #तत्वदर्शी_सन्त की खोज नहीं करते हैं और इस कारण से #पूर्ण_परमात्मा (#Complete_GOD) की जानकारी इन्हें नहीं हो पाती हैं और कालपुरूष के द्वारा फैलाए गए मिथ्या/अधुरे ज्ञान का अवलंबन करके अपना जीवन को बरबाद करके चले जाते हैं क्योंकि जिस लोक में वह जाएगा,वहां का समय पूरा होने के बाद उन्हें नर्क में धकेल दिया जाएगा फिर उसके बाद वहां का समय पूरा होने होने के बाद चौरासी लाख योनियों में उन्हें और दंड दिया जाएगा।
✓✓✓ अब आप यह तय करें कि मरने के पश्चात् आप कहां जाना चाहते हैं, क्या बनना चाहते हैं ?
अथवा पूर्ण परमात्मा की भक्ति करके इस जन्म मरण के बखेड़ा से हमेशा हमेशा के लिए निकलना चाहते हैं ?
गरीब,तीन चरण चिंतामणि साहेब,सर्व बदन में छाए हैं *
माता पिता कूल न बंधु,न कीन्हें जननी जाये **
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