#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#कबीरवाणी...
🔅🔅🔅 कहते हैं कि पांचवे वेद अर्थात् पवित्र #सुक्ष्मवेद के अलावा संसार में और जितने भी सतग्रंथ हैं,शास्त्र हैं,उनमें अध्यातम मार्ग के विषय में,प्रभू प्राप्ति के विषय में संपूर्ण समाधान नहीं हैं इसलिए कहा गया हैं कि सुक्ष्मवेद के अलावा अन्य सभी ज्ञान भवसागर में डुबोने वाली हैं और इसका कारण यह हैं कि
कबीर साहेब कहते हैं कि
नौ मन सूत उलझिया,ऋषि रहे झकमार।
सतगुरू ऐसा सुलझा दे,उलझे ना दूजी बार।।
आध्यात्मिक ज्ञान रूपी अत्यंत उलझे हुए (9 मन) धागे को सामान्य ज्ञानी या ऋषि नहीं सुलझा सकते,केवल तत्वदर्शी संत (सतगुरू) ही इसे ऐसा सुलझाते हैं फिर वह दोबारा कभी नहीं उलझता अर्थात् जीव का मोक्ष निश्चित हो जाता हैं।
और यही सच्चे सद्गुरू की सबसे बड़ी विशेषता,सबसे बड़ा पहचान,भक्त समाज पर सबसे बड़ा उपकार भी होता हैं।
✓✓✓ आतमज्ञान और परमातम् ज्ञान के विषय में पवित्र सतग्रंथों (कबीर सागर, कबीर बीजक, कबीर शब्दावली,वेद गीता पुराण कूर्रान बाइबल गुरूग्रन्थ साहेब) के प्रमाणों के सांथ अपने सारे सवालों के जवाब पाने के लिए अवश्य पढ़ें
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