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भरत दास
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भरत दास
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#अन्नपूर्णामुहिम_किसानोंकेलिए वरदान प्रार्थना सुबह, मदद शाम को! बधावड़ गाँव ने जब सुबह मदद की गुहार लगाई, तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ कि शाम होने तक राहत सामग्री उनके दरवाज़े पर होगी। 12 घंटे से भी कम समय में संत रामपाल जी महाराज ने 3000 फीट पाइप, 5 शक्तिशाली मोटरें और 2 समर्सिबल पंप भेजकर साबित कर दिया कि सच्ची सेवा में एक पल की भी देरी नहीं होती। #• भक्ति भावनाएं • सुविचार एवं अनमोल वचन • ईश्वर आस्था #भक्ति भावनाएं ईश्वर आस्था सुविचार
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#📓 हिंदी साहित्य #ज्योतिष #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो गोबर गणेश छोड़ो, आदि गणेश पूजो! क्या है आदि गणेश की शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि, जिससे जीवात्मा इस भवसागर से पार हो जाती है? जानने लिए पढ़िए ज्ञान गंगा पुस्तक
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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #ज्योतिष #📓 हिंदी साहित्य #गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं गोबर गणेश छोड़ो, आदि गणेश पूजो! "गणेश" का मतलब है गणों का प्रमुख, प्रजा का स्वामी, जो अपनी प्रजा को हर कष्ट से बचाए। और वेदों अनुसार कष्टहर्ता परमात्मा केवल कबीर जी हैं। जिसका प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मंत्र 26, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 94 मंत्र 3, यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 में है। 🎈संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं गोबर गणेश छोड़ो, आदि गणेश पूजो! "अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।" यह गुण पूर्ण परमात्मा अर्थात आदि गणेश के हैं जिसका प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, सूक्त 162 मंत्र 5, सूक्त 163 मंत्र 1-3 में है।
भरत दास
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#ज्योतिष #📓 हिंदी साहित्य #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो ##गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं गोबर गणेश छोड़ो, आदि गणेश पूजो! संत गरीबदास जी ने अमरग्रंथ साहिब के त्रिभंगी छंद अध्याय में कहा है: यौह मान संदेशा रे। सुन सतगुरु उपदेशा रे। क्या पूजै शंकर शेषा रे। औह दुर्लभ देशा रे। प्रथम पूज आदि गणेशा रे।।
भरत दास
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#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #📓 हिंदी साहित्य #ज्योतिष संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं गोबर गणेश छोड़ो, आदि गणेश पूजो! क्योंकि आदि गणेश वह है, जिसने इस सृष्टि को बनाया। जिनकी पूजा सभी देवता भी करते हैं। अमरग्रंथ साहिब के राग जांगड़ा अध्याय के शब्द 2 की पहली पंक्ति में लिखा है: गणपति गौरि कूँ सौंरि संजम करै, आदि गणेश प्रथम मनावै। ब्रह्मा और विष्णु शिव की मदद संग ले, अलख जगदीश कबीर कै सिर चढ़ावै।।
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