*1. एक नाम को जानकर, दूजा देई बहाय। तीर्थ व्रत जप तप नहीं, सदगुरू चरण समाय।।*
*2. तीरथ व्रत करि जग मुआ, जूडे पानी नहाय। सत्यनाम जाने बिना, काल युगन युग युग खाय।।*
*3. तीर्थ चले दो जना, चित चंचल मन चोर। पाप न एको उतरिया, मन दास लाए और।।*
*4. लाख करो पूजा चाहे, तीर्थ करो हजार। जीवों पर दया नहीं, तो सब कुछ है बेकार।।*
*5. योनि पूजे लिंग पूजे, पूज रहे मल मूत्र। वेद गीता से नफ़रत करे, ये पाखंडियों के पूत।।*
*6. पत्थर पूजे से हरि मिले तो मैं पूजूं पहाड़। तातै तो चक्की भली पीस खाय संसार।।*
*7. पत्थर पूजने से कुछ ना मिले, पुस्तक पढ़ने से मिले ज्ञान। मंदिर जाने से अगर भगवान मिले तो, पुजारी आपसे क्यों मांगे दान।।*
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