Follow
vk
@2496776058
1,063
Posts
715
Followers
vk
537 views
7 days ago
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) सनातन धर्म मे विवाह एक परम पवित्र अनुष्ठान है ! आज की पीढी इस पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर रही है ! आइए संक्षिप्त मे विवाह की पवित्रता एवं महत्व को समझने का प्रयास करते हैं विवाह संस्कार में सप्तपदी (सात फेरे) सबसे महत्वपूर्ण विधि मानी जाती है। वैदिक परंपरा में अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू सात कदम साथ चलते हैं। प्रत्येक फेरा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवनभर निभाए जाने वाले एक संकल्प का प्रतीक है। सप्तपदी पूर्ण होने के बाद ही विवाह को पूर्ण माना जाता है। नीचे सात फेरों और उनसे जुड़े सात वचनों का सरल अर्थ प्रस्तुत है। प्रथम फेरा – अन्न एवं जीवन-निर्वाह वचन: हम दोनों मिलकर जीवन-यापन के लिए अन्न, धन और आवश्यक साधनों का उचित प्रबंध करेंगे। अर्थ: पति-पत्नी एक-दूसरे का साथ देते हुए परिवार के पालन-पोषण का दायित्व निभाने का संकल्प लेते हैं। जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति दोनों की साझा जिम्मेदारी है। द्वितीय फेरा – शक्ति एवं सुरक्षा वचन: हम एक-दूसरे को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति देंगे तथा हर परिस्थिति में साथ रहेंगे। अर्थ: यह फेरा केवल बाहरी सुरक्षा का नहीं, बल्कि सुख-दुःख, रोग-स्वास्थ्य और कठिन समय में परस्पर सहारा बनने का संकल्प है। तृतीय फेरा – समृद्धि एवं धर्मपालन वचन: हम धर्म, सदाचार और परिश्रम के मार्ग पर चलकर समृद्ध जीवन का निर्माण करेंगे। अर्थ: दांपत्य जीवन सत्य, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों पर आधारित रहेगा। दोनों मिलकर परिवार की उन्नति और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। चतुर्थ फेरा – प्रेम एवं पारिवारिक सुख वचन: हम प्रेम, सम्मान और विश्वास के साथ अपने परिवार का निर्माण करेंगे। अर्थ: पति-पत्नी केवल जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सच्चे मित्र भी बनेंगे। परिवार में प्रेम, सौहार्द और सम्मान बनाए रखने का संकल्प लेते हैं। पंचम फेरा – संतान एवं उत्तरदायित्व वचन: यदि संतान हो, तो उसका पालन-पोषण अच्छे संस्कारों और शिक्षा के साथ करेंगे। अर्थ: यह फेरा आने वाली पीढ़ी के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। संतान को सद्गुण, शिक्षा और उत्तम संस्कार देना दोनों का समान कर्तव्य माना गया है। षष्ठ फेरा – स्वास्थ्य एवं दीर्घायु वचन: हम एक-दूसरे के स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु के लिए सदैव प्रयास करेंगे। अर्थ: जीवन में आने वाले रोग, कष्ट और संघर्षों में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे तथा स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का प्रयास करेंगे। सप्तम फेरा – मित्रता, निष्ठा एवं आजीवन साथ वचन: हम जीवनभर सच्चे मित्र, विश्वासपात्र और एक-दूसरे के प्रति निष्ठावान रहेंगे। अर्थ: सातवाँ फेरा दांपत्य जीवन की पूर्णता का प्रतीक है। इस फेरे के साथ दोनों जन्मभर साथ निभाने, विश्वास बनाए रखने और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का सम्मान करने का संकल्प लेते हैं। सात फेरों का सार अन्न और आजीविका – परिवार के पालन-पोषण का संकल्प। बल और सुरक्षा – हर परिस्थिति में एक-दूसरे का सहारा। धर्म और समृद्धि – सदाचार एवं परिश्रम से उन्नति। प्रेम और सम्मान – सुखी एवं स्नेहपूर्ण परिवार का निर्माण। संतान और संस्कार – अगली पीढ़ी के प्रति उत्तरदायित्व। स्वास्थ्य और दीर्घायु – एक-दूसरे के सुख और स्वास्थ्य की कामना। मित्रता और आजीवन निष्ठा – जीवनभर साथ, विश्वास और प्रेम का व्रत। यदि आप कथा-वाचन के लिए इसे प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो इसे शास्त्रीय शैली, भावपूर्ण भाषा और श्लोकों सहित 10–15 मिनट के प्रवचन के रूप में भी तैयार किया जा सकता है।
vk
537 views
8 days ago
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) हाल ही मे नक्सलवाद से मुक्त हुए भारतवर्ष में यदि आतंकवाद और अराजकतावादी तत्वों के बीच नजदीकियां बढती हैं तो शांति व्यवस्था के लिए बहुत गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है ! युवाओं के आंदोलनो की आड़ भारत के दुश्मनों के लिए सुनहरे अवसर के समान है ! अतः युवाओं को गलत हाथों मे पड़ने से रोकने के लिए तत्काल बेहद कड़े निर्णय लेने की आवश्यक्ता है ! कोमल चित्त वाले जोश से भरे युवा अभी उतने परिपक्व नहीं हैं और कहीं न कहीं सोशल मीडिया प्लेटफार्म एआई के उपयोग से बच्चों के सामने सरकार विरोधी कंटेंट परोस कर उनमे असंतोष पैदाकर के उनकी ऊर्जा का इस्तेमाल करके भारतवर्ष मे अस्थिरता फैलाने मे सहयोगी बनने का काम कर रहे हैं ! अभिभावकों को भी इस ओर सोचने की जरूरत है ! सरकार को 10th तक की पढाई के लिए मोबाइल मुक्त शिक्षा व्यवस्था बनानी चाहिए ! और मोबाइल यूजर्स के लिए न्यूनतम 16 वर्ष आयु निर्धारित करना चाहिए !
vk
427 views
9 days ago
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) निम्न लिखित सनातन के गौरवपूर्ण इतिहास का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं जो अब तक शेष बच पाए हैं इसके लिए भारतवर्ष को ब्राह्मणों का कृतज्ञ होना चाहिए ! ChatGPT ( copy-pest) हिंदू धर्म में "सभी" ग्रंथों की एक निश्चित और सर्वमान्य सूची नहीं है, क्योंकि परंपरा अत्यंत विशाल है और विभिन्न संप्रदायों, क्षेत्रों तथा कालों में अनेक ग्रंथ रचे गए हैं। फिर भी प्रमुख पौराणिक और धार्मिक ग्रंथों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है: 1. वेद (4) ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद 2. उपवेद (4) आयुर्वेद धनुर्वेद गान्धर्ववेद स्थापत्यवेद 3. उपनिषद (मुख्य 13) ईशोपनिषद केनोपनिषद कठोपनिषद प्रश्नोपनिषद मुण्डकोपनिषद माण्डूक्योपनिषद तैत्तिरीयोपनिषद ऐतरेयोपनिषद छान्दोग्य उपनिषद बृहदारण्यक उपनिषद श्वेताश्वतर उपनिषद कौषीतकि उपनिषद मैत्रायणी उपनिषद परंपरा में कुल 108 उपनिषदों का भी उल्लेख मिलता है। 4. वेदांग (6) शिक्षा कल्प व्याकरण निरुक्त छंद ज्योतिष 5. महाकाव्य (2) रामायण महाभारत (इसी का एक भाग भगवद्गीता है) 6. अष्टादश (18) महापुराण ब्रह्म पुराण पद्म पुराण विष्णु पुराण शिव पुराण भागवत पुराण नारद पुराण मार्कण्डेय पुराण अग्नि पुराण भविष्य पुराण ब्रह्मवैवर्त पुराण लिंग पुराण वराह पुराण स्कन्द पुराण वामन पुराण कूर्म पुराण मत्स्य पुराण गरुड़ पुराण ब्रह्माण्ड पुराण 7. उपपुराण परंपरा में 18 उपपुराणों का उल्लेख मिलता है, जैसे: सनत्कुमार नारसिंह शिवधर्म कपिल कालिका साम्ब सौर पाराशर आदि। 8. धर्मशास्त्र (स्मृतियाँ) मनुस्मृति याज्ञवल्क्य स्मृति नारद स्मृति पराशर स्मृति बृहस्पति स्मृति कात्यायन स्मृति आदि। 9. आगम और तंत्र शैव आगम वैष्णव आगम (पाञ्चरात्र, वैखानस) शाक्त तंत्र 10. दर्शन शास्त्र (षड्दर्शन) न्याय वैशेषिक सांख्य योग पूर्व मीमांसा वेदांत यदि आपका उद्देश्य सभी प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथों की विस्तृत सूची है, तो उसमें वेद, 108 उपनिषद, 18 महापुराण, 18 उपपुराण, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, वेदांग, धर्मशास्त्र, आगम-तंत्र और अनेक अन्य ग्रंथ शामिल होकर संख्या सैकड़ों तक पहुँच जाती है।
vk
553 views
10 days ago
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) तमाम साजिशों, षडयंत्रों और यातनाओं के बाद भी यदि सनातन की जड़ें शेष हैं तो इसका संपूर्ण श्रेय ब्राह्मणों को है ! याद रखिए कि जब तकनीकी नही थी तब इन्होने ही अपने परिश्रम से समाज के सभी वर्गों मे शास्त्रों की शिक्षा से संयुक्त परिवारों और रिश्तों को मर्यादाओं मे रहने की व्यवस्था स्थापित की ! योग्यतानुसार चयन का प्रावधान कर सब जीवों और प्रकृति के बीच की वैज्ञानिक जटिलताओं को एक विशिष्ट किन्तु अत्यंत साधारण जीवनशैली की संतुलित और व्यवस्थित रूप रेखा मे योजनाबद्ध तरीकों से एकीकृत किया व संसार के सब जीवों के अधिकार और अस्तित्व की रक्षा को सुनिश्चित किया ! विश्व इतिहास गवाह है कि दुनिया के दूर देशों से लोग भारत मे शिक्षा ग्रहण करने आते थे ! यदि ब्राह्मण संकीर्ण विचारधारा रखते तो ज्ञान का प्रकाश सर्वत्र नहीं फैलता ! बल्कि यह अविकसित मानव सभ्यताओं की क्रूरता मे बुझ चुका होता ! भारतवर्ष मे अब तक जो परिवार परंपरा शिष्टाचार आदि शेष है उसके लिए ब्राह्मणो के प्रति जितना भी आभार प्रकट किया जाए कम है !
vk
426 views
10 days ago
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) यदि ब्राह्मण वर्चस्ववादी होता तो क्या हजारों वर्षों से रावण दहन को जारी रहने देता था ? क्या वह वेदव्यास,वाल्मिकी,सन्त कबीर,संत रैदास,रहीम,रसखान जैसे गैर ब्राह्मणों को महानता के शिखर पर बैठने देता ? क्या वह किसी क्षत्रिय और यदुवंशी को भगवान बनाकर महिमामंडन करता ? सत्य यह है ब्राह्मणों ने हमेशा विद्या अध्ययन को प्राथमिकता दी और प्रतिभा को निखारने का काम किया ! वेदों और उपनिषदों को कंठस्थ कर यत्न पूर्वक उनको आज तक बचाकर रखा है ! आधुनिक युग मे भी तमाम सहायताएं मिलने के बाद भी कुछ वर्गों के बच्चे पढाई लिखाई के प्रति गंभीर नहीं दिखते लेकिन ब्राह्मण वर्ग ने गरीबी और विषम से विषम परिस्थितियों मे भी शिक्षा से कभी मुंह नहीं मोड़ा ! रावण का पुतला जलाया जाना ब्राह्मणों की न्याय संगत नीति का प्रमाण हैं ! उन्हें बदनाम मत कीजिए ! उनसे शिक्षा के प्रति समर्पित रहना सीखिए ! उनसे ज्ञानार्जन के लिए त्याग करना और एकाग्रचित होना सीखिए ! रही बात शिक्षा व्यवस्था पर काबिज होने की तो यदि यह बात सच होती तो सारी रचनाएं, सभी शंकराचार्य और सारे भगवान सिर्फ ब्राह्मण परिवारों के नाम से होते ! लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है ! इसलिए निम्न स्तरीय मानसिकता का त्याग कीजिए ! और अपनी सोच को विस्तार दीजिए !