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Vivek bharti
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Vivek bharti
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जैसा कर्म वैसा फल एक बार एक वृद्ध महिला की कार का टायर सुनसान रस्ते मे पंक्चर हो गया। उसे सूझ नहीं रहा था की क्या करें। काफी समय बाद एक गरीब साईकीलस्वार अपनी साइकिल से उतरा और उस महिला की और बढ़ा। महिला बूढी थी। उसे डर लग रहा था की कही ये आदमी उसे नुकसान पहुंचाने तो नहीं आ रहा है। तभी वो आदमी उसकी मर्सिडीज गाड़ी के आगे खड़े हो गया। वो धीरे से बोला की मैडम आप गाडी मी बैठीये बाहर बहुत ठण्ड है। तब तक मैं आपकी गाड़ी को देख लेता हूँ। और मेरा नाम ब्रायन अंडरसन हैं। थोडे हि सामायामे गाडी ठीक हो गयी उसने ब्रायन का बहुत ही धन्यवाद किया। महिला ने उससे पूछा “तुम्हारे कितने पैसे हुए बेटा?” वो इस समय ब्रायन जो मांगता उसे देने के लिए तैयार थी। पर ब्रायन ने ऐसा कुछ नहीं सोचा था। वो तो बस उसकी मदद करने आया था। उसने पैसो के बारे में कभी सोचा भी नहीं था। चाहे उसे इनकी कितनी भी जरुरत क्यों न हो।उसने कहा ” मुझे आपके पैसे नहीं चाहिए मैडम, पर अगर आपको अगली बार ऐसा कोई व्यक्ति दिखे जिसे आपकी सहायता की जरुरत हो।”ये कहकर वो चला गया। और महिला भी अपने सफ़र पर चल दी। थोड़ी रात को वो एक पेट्रोल पंप के पास से गुजरी। पास ही में एक होटल भी था। उसने सोचा की कुछ खाने के बाद बाकि का सफ़र तय किया जाए। बाहर बारिश हो रही थी। जब वो होटल में गयी। तो एक लड़की, जो करीब 26-28 की होगी, अपनी प्यारी मुस्कान के साथ उसके पास आई। और उसे अपने बाल पोछने के लिए टॉवेल दिया। उस लड़की की मुस्कान बनावटी नहीं थी। बूढी महिला ने देखा की वो लड़की करीब 8 मास की गर्भवती थी। उसे देखकर हैरानी हुई की इस हालात में वो अपनी परेशानियों की परवाह किये बगेर कैसे उसके और बाकि customers के साथ इतना अच्छा व्यवहार कर रही हैं। और तभी उसे ब्रायन की याद आई। बूढी महिला ने उसे अपना आर्डर दिया। और खाने के बाद बिल आने पर पैसे 100 डॉलर उसे दे दिए। जब लड़की बाकि के पैसे लौटाने आई। तो वो महिला वहां नहीं थी। वो सोचने लगी की कहाँ जा सकती है। तभी उसे टेबल पर पड़े नैपकिन पर कुछ लिखा मिला। उसे पड़कर उसकी आँखों में आंसू आ गए। उसमे लिखा था, ” तुमे ये पैसे रख लों। कभी किसी ने मेरी भी मदद की थी। और अब मेरा फ़र्ज़ बनता है की मैं तुम्हारी मदद करू। मेरी बस यही विनती है की तुम इस चैन को यही मत टूटने देना। इसे आगे बढ़ाना। जरूरतमंद की मदद करना…” और इसके साथ ही 400 डॉलर और रखे हुए थे। वो महिला का शुक्रिया करने लगी। उसे और उसके पति को इन पैसो की सख्त जरुरत थी। क्योंकि अगले महीने ही उनके यहाँ बच्चे की संभावना थी… वो होटल का सारा काम करके घर पर लौटी। और बिस्तर पर आकर अपने पति के पास लेट गयी। उसे ख़ुशी थी की अब उन्हें ज्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं हैं। उसके पति कई दिनों से परेशान थे। उसने अपने पति के गालो को धीरे से चुमते हुए कहा, ” सब कुछ ठीक हो जायेगा। I love you Bryan Anderson। ”   #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
Vivek bharti
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चमत्कार टेस एक आठ वर्ष की लड़की थी | उसने अपने माता पिताकी चर्चा सुनी की उसका छोटा भाई काफी बीमार है और उनके पास पैसे इलाज के लिए बिलकुल पैसे नहीं है |केवल एक महँगी सर्जरी उसे बचा सकती थी |पिताजी उसके रोते हुए माँ को कह रहे थे की केवल कोइ चमत्कार ही उसे बचा सकता है | टेस अपने कक्षा में गयी और अपनी मनी बैंक से इक्कट्ठा किये पैसे को निकला , उसकी तिन बार गिनती कियी और फिर अपने डिब्बे में डालकर डिब्बा बंद कर दुसरे दरवाजे से बहार निकल कर मुख्या रास्ते पर स्थित रेक्सल दवाई की दुकान पर गयी | दुकानदार व्यस्त था , उसने थोड़ी राह देखी ,उसका ध्यान आकर्षित करनेका प्रयास भी किया लेकिन दुकानदार उस छोटी टेस को अनदेखा ही था | आखरी उसने एक सिक्का निकल कर सामने वाले टेबल की कंच्पर टिक टिक किया | इस बार दुकानदार ने उसे पूछा क्या चाहिए ? और कहा “देखो मै अपने भाई से ,जो शिकागो से आया है बात कर रहा हूँ , काफी दिन से उसे देखा भी नहीं था |” टेस ने कहा ,” देखिये ,मुझे अपने छोटे भाईके बारे में बताना ही | वह काफी बीमार है और मुझे उसके लिए चमत्कार चाहिए |” “क्या कहा ?” “पिताजी ने कहा केवल कोइ चमत्कार ही उसे बचा सकता है | चमत्कार की क्या कीमत है ?” “हम यंहा चमत्कार नहीं बेचते “ “देखिये, मेरे पास पैसे है यदी कम लगते है तो बाद में जमा कर दूंगी | लेकिन कृपया मुझे चमत्कार दीजिये |” केमिस्ट का भाई जो एकदम अछे कपडे पहना सभ्य व्यक्ति लग रहा था , इस वक्त टेस के पास आया और उसने पूछा “ किस प्रकार का चमत्कार आपको चाहिए?” टेस ने अश्रुपूर्ण नयनोसे कहा, “ मुझे पता नहीं | मेरा छोटा भाई काफी बीमार है | माँ कहती है उसे सर्जरी कि आवश्यकता है और पिताजी के पास बिलकुल पैस नहीं है , मै मेरे पास के पैसे उपयोग में लाना चाहती हूँ|” “कितने पैसे है?” “मेरे पास एक डॉलर औए ग्यारह सेंट्स है |” केमिस्ट के भाई ने कहा “क्या बात है ? यही चमत्कार की कीमत है |” केमिस्ट के भाई ने एक हाथ में पैसा लिया और दुसरे हाथ से टेस को पकड़ते हुए कहा, “मुझे अपने भाई के पास ले चलो | मुझे देखना है की उसे किस प्रकार का चमत्कार चाहिए ?” वह व्यक्ति शिकागो का प्रसिद्ध न्यूरो सर्जन डॉ कार्लटन आर्मस्ट्रोंग था| सर्जरी पूर्ण हुई ,बिना एक पैसा खर्च किये | टेस का भाई ठीक हुवा |घर लौटने के बाद टेस के माता – पिता घटना को याद करके बोल रहे थे यह सब केवल चमत्कार ही था | पता नहीं कितना खर्च आया ? टेस को हंसी आयी उसे पता था चमत्कार की सही कीमत – एक डॉलर ग्यारह सेंट्स #😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
Vivek bharti
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ग्लास का भार एक बार एक साइकोलॉजी की प्रोफेसर वर्ग में आई। और एक ग्लास उठा लिया।। सबने सोचा की अब वो वहीँ पुराना ‘ग्लास आधा ख़ाली है या आधा भरा’ वाला पाठ पढ़ाएगी। पर उसके बदले उन्होंने छात्रों से पूछा की उनके हाथ में जो ग्लास है उसका वजन कितना है? सभी छात्रों ने अपने अपने अनुसार उत्तर दिए।। किसी ने 50ग्राम कहा, तो किसी ने 100 ग्राम।। पर महिला प्रोफेसर ने जवाब दिया: ” मेरे ख्याल से इसग्लास का exact weight matter नहीं करता।। बल्कि ये matter करता है की मैं इसे कितनी देर तक hold करके रखती हूँ। अगर मैं इसे केवल 1-2 मिनिट के लिए उठा के रखती हूँ तो ये मुझे सामान्य सा लगेगा।। पर यदि मैं इसे एक घंटा उठा के रखती हूँ तो मेरा हाथ दुखने लगेगा।। पर यदि मैं इसे पूरा दिन उठा के रखूं।। तो यक़ीनन मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा।। थोड़ी देर के लिए paralyse हो जायेगा।। मतलब की इसका थोडा सा भार भी, यदि मैं ज्यादा देर तक उठा की रखूं। तो मुझे तकलीफ हो सकती है।।” सभी इस उत्तर से सहमत थे। वो आगे बोली, ” इसी तरह अगर, एक छोटी सी समस्या की चिंता मैं करती रहूँ।। तो पहले वो कोई ख़ास भार नहीं देगी मन पर।। पर यदि मैं उसी के बारे में सोचती रहूँ।। उसी से परेशान रहूँ।। उसी पर stress करती रहूँ।। तो वो छोटी से परेशानी भी मुझे बहुत कष्ट दे सकती है।। मैं डिप्रेशन का शिकार हो सकती हूँ।। मैं दूसरा कुछ भी कार्य करने में असमर्थ हो जाउंगी।। यही तो हमारी वास्तविक परेशानी है #😎मोटिवेशनल गुरु🤘
Vivek bharti
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#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 पूल दो भाई साथ साथ खेती करते थे। मशीनों की भागीदारी और चीजों का व्यवसाय किया करते थे । चालीस साल के साथ के बाद एक एक छोटी सी ग़लतफहमी की वजह से उनमे पहली बार झगडा हो गया था झगडा दुश्मनी में बदल गया था। एक सुबह एक बढाई बड़े भाई से काम मांगने आया। बड़े भाई ने कहा “हाँ ,मेरे पास तुम्हारे लिए काम हैं। उस खेत की तरफ देखो ,वो मेरा पडोसी हैं। यूँ तो वो मेरा भाई हैं। पिछले सप्ताह तक हमारे खेतो के बीच घास का मैदान हुआ करता था। पर मेरा भाई मुझे परेशान करने के बुलडोजर ले आया और हमारे खेतो के बीच ये खाई आई हैं। अब मुझे उसे मजा चखना है। तुम खेत के चारो तरफ बाड़ बना दो ताकि मुझे उसकी शक्ल भी ना देखनी पड़े।” “ठीक हैं”, बढाई ने कहा। उसने बढाई को सारा सामान लाकर दे दिया और खुद शहर चला गया। शाम को लौटा तो बढाई का काम देखकर भौचक्का रह गया। बाड़ की जगह वहा एक पूल था जो खाई को एक तरफ से दूसरी तरफ जोड़ता था। इससे पहले की बढाई कुछ कहता , उसका छोटा भाई आ गया। “तुम कितने दरियादिल हो, मेरे इतने भला बुरा कहने के बाद भी तुमने हमारे बीच ये पूल बनाया, कहते कहते उसकी आँखे भर आई और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगे। जब दोनों भाई सम्भले तो देखा की बढाई जा रहा था। रुको मेरे पास तुम्हारे लिए और भी कई काम हैं, बड़ा भाई बोला। मुझे रुकना अच्छा लगता,पर मुझे ऐसे कई पूल और बनाने हैं,बढाई मुस्कुराकर बोला और अपनी राह को चल दिया।
Vivek bharti
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#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 वैज्ञानिकों ने प्रयोग करने हेतु एक कमरेमे कुछ बंदरोंको रखा | छत को लटकाकर केले रखे |लेकिन पहुँचने का साधन कुछ नहीं था | बन्दर केले को ताकते रहते | कुछ दिनोबाद का कमरेमे एक सीढ़ी रखा दि | बन्दर धीरे धीरे सीढ़ी का उपयोग कर केले खाने के अभ्यस्त हो गए | कुछ दिनोंबाद जैसे ही बन्दर सीढी चढने लगे तो आधे अंतर पर पहुंचते ही जोरदार पानी की ब्योच्छावर हो ऐसी रचना कियी | पहले पहले तो बंदरोंको ध्यान में नहीं आया | लेकिन धीरे धीरे बात उनके ध्यान में आयी की सीढ़ी पर चढ़नेसे पानी की मार पड़ती है , इसलिए सीढी की और जाना छोड़ दिया | कुछ दिनोबाद एक दो बन्दर नए छोड़े गए | नए बन्दर केले को देख कर सीढ़ी की और दौड़े| जैसे वह सीढ़ी चढने लगे तो पुराने बंदरोने उन्हें खिंचा और जाने से रोका | ऐसा बार बार होने के बाद नए बन्दर भी न जाने के अभ्यस्त हो गए | सात दिनोबाद 2 पुराने बंदरोंको निकालकर दो नए बन्दर रखे गए ,| घटना क्रम पूर्व जैसा रहा | पुराने बन्दर नये बंदरोंका सीढ़ी चढनेसे विरोध करते देखे | नए बंदरोंको धीरे धीरे आदत हो गयी | कुछ दिनों बाद पुराने बंदरोंकी सारी टोली बदल के नए बंदरोंकी टोली आयी जिसमे पानी का मार खाने वाला एक भी बन्दर नहीं था | लेकिन सीढ़ीपर जाने से विरोध करने की परंपरा बनी रही | विवेक कुमार
Vivek bharti
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#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 दुसरोंका भी ध्यान एक बार एक छोटा सा लड़का, करीब दस साल का अपनी मनपसंद आईसक्रीम खाने के लिए एक अच्छे से होटल में गया। उसके पास कुछ पैसे तो थे ही। वो टेबल पर जाकर आराम से बेठ गया। एक वेट्रेस आई और उससे प्यार से पूछा, “ आप क्या लेगे सर ? ” बच्चा बड़ी उत्सुकता से उससे पूछ बैठा की चोकोलेट आईसक्रीम के कितने दाम होंगे? वेट्रेस ने उसे बताया 30 रु । लड़के ने अपनी जेब को टटोला और पैसे गिनने लगा। वो बहुत देर कर रहा था। वेट्रेस अपना धैर्य खोते जा रही थी, क्योंकि दुसरे सभी लोग अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। बच्चा पैसे गिनने के बाद फिर पूछने लगा। प्लेन आईसक्रीम के कितने दाम है? वेट्रेस ने उससे थोड़ी गर्म आवाज में बोला की 25 रु। बच्चे ने कहा- “ हा मुझे वही चाहिये” फिर वेट्रेस ने उसे उसकी पसंद की आईसक्रीम लाकर दे दी। और बच्चा मजे से खाकर, काउंटर पर पैसे देकर चला गया। वेट्रेस जब टेबल साफ करने आई। तो वो वो बहुत दुखी हुई, और रोनी से हो गयी। टेबल साफ करते वक्त उसे टिप के रूप में 5 रु दिखाई दिए। बच्चा उसकी पसंद की आईसक्रीम इसलिए नहीं माँगा सका था क्योंकि उसे इतनी देर से उसकी खातिर करने वाली वेट्रेस के लिए टिप भी देनी थी।
Vivek bharti
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#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 जैसा कर्म वैसा फल एक बार एक वृद्ध महिला की कार का टायर सुनसान रस्ते मे पंक्चर हो गया। उसे सूझ नहीं रहा था की क्या करें। काफी समय बाद एक गरीब साईकीलस्वार अपनी साइकिल से उतरा और उस महिला की और बढ़ा। महिला बूढी थी। उसे डर लग रहा था की कही ये आदमी उसे नुकसान पहुंचाने तो नहीं आ रहा है। तभी वो आदमी उसकी मर्सिडीज गाड़ी के आगे खड़े हो गया। वो धीरे से बोला की मैडम आप गाडी मी बैठीये बाहर बहुत ठण्ड है। तब तक मैं आपकी गाड़ी को देख लेता हूँ। और मेरा नाम ब्रायन अंडरसन हैं। थोडे हि सामायामे गाडी ठीक हो गयी उसने ब्रायन का बहुत ही धन्यवाद किया। महिला ने उससे पूछा “तुम्हारे कितने पैसे हुए बेटा?” वो इस समय ब्रायन जो मांगता उसे देने के लिए तैयार थी। पर ब्रायन ने ऐसा कुछ नहीं सोचा था। वो तो बस उसकी मदद करने आया था। उसने पैसो के बारे में कभी सोचा भी नहीं था। चाहे उसे इनकी कितनी भी जरुरत क्यों न हो।उसने कहा ” मुझे आपके पैसे नहीं चाहिए मैडम, पर अगर आपको अगली बार ऐसा कोई व्यक्ति दिखे जिसे आपकी सहायता की जरुरत हो।”ये कहकर वो चला गया। और महिला भी अपने सफ़र पर चल दी। थोड़ी रात को वो एक पेट्रोल पंप के पास से गुजरी। पास ही में एक होटल भी था। उसने सोचा की कुछ खाने के बाद बाकि का सफ़र तय किया जाए। बाहर बारिश हो रही थी। जब वो होटल में गयी। तो एक लड़की, जो करीब 26-28 की होगी, अपनी प्यारी मुस्कान के साथ उसके पास आई। और उसे अपने बाल पोछने के लिए टॉवेल दिया। उस लड़की की मुस्कान बनावटी नहीं थी। बूढी महिला ने देखा की वो लड़की करीब 8 मास की गर्भवती थी। उसे देखकर हैरानी हुई की इस हालात में वो अपनी परेशानियों की परवाह किये बगेर कैसे उसके और बाकि customers के साथ इतना अच्छा व्यवहार कर रही हैं। और तभी उसे ब्रायन की याद आई। बूढी महिला ने उसे अपना आर्डर दिया। और खाने के बाद बिल आने पर पैसे 100 डॉलर उसे दे दिए। जब लड़की बाकि के पैसे लौटाने आई। तो वो महिला वहां नहीं थी। वो सोचने लगी की कहाँ जा सकती है। तभी उसे टेबल पर पड़े नैपकिन पर कुछ लिखा मिला। उसे पड़कर उसकी आँखों में आंसू आ गए। उसमे लिखा था, ” तुमे ये पैसे रख लों। कभी किसी ने मेरी भी मदद की थी। और अब मेरा फ़र्ज़ बनता है की मैं तुम्हारी मदद करू। मेरी बस यही विनती है की तुम इस चैन को यही मत टूटने देना। इसे आगे बढ़ाना। जरूरतमंद की मदद करना…” और इसके साथ ही 400 डॉलर और रखे हुए थे। वो महिला का शुक्रिया करने लगी। उसे और उसके पति को इन पैसो की सख्त जरुरत थी। क्योंकि अगले महीने ही उनके यहाँ बच्चे की संभावना थी… वो होटल का सारा काम करके घर पर लौटी। और बिस्तर पर आकर अपने पति के पास लेट गयी। उसे ख़ुशी थी की अब उन्हें ज्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं हैं। उसके पति कई दिनों से परेशान थे। उसने अपने पति के गालो को धीरे से चुमते हुए कहा, ” सब कुछ ठीक हो जायेगा। I love you Bryan Anderson। ”   विवेक कुमार
Vivek bharti
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#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 ग्लास का भार एक बार एक साइकोलॉजी की प्रोफेसर वर्ग में आई। और एक ग्लास उठा लिया।। सबने सोचा की अब वो वहीँ पुराना ‘ग्लास आधा ख़ाली है या आधा भरा’ वाला पाठ पढ़ाएगी। पर उसके बदले उन्होंने छात्रों से पूछा की उनके हाथ में जो ग्लास है उसका वजन कितना है? सभी छात्रों ने अपने अपने अनुसार उत्तर दिए।। किसी ने 50ग्राम कहा, तो किसी ने 100 ग्राम।। पर महिला प्रोफेसर ने जवाब दिया: ” मेरे ख्याल से इसग्लास का exact weight matter नहीं करता।। बल्कि ये matter करता है की मैं इसे कितनी देर तक hold करके रखती हूँ। अगर मैं इसे केवल 1-2 मिनिट के लिए उठा के रखती हूँ तो ये मुझे सामान्य सा लगेगा।। पर यदि मैं इसे एक घंटा उठा के रखती हूँ तो मेरा हाथ दुखने लगेगा।। पर यदि मैं इसे पूरा दिन उठा के रखूं।। तो यक़ीनन मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा।। थोड़ी देर के लिए paralyse हो जायेगा।। मतलब की इसका थोडा सा भार भी, यदि मैं ज्यादा देर तक उठा की रखूं। तो मुझे तकलीफ हो सकती है।।” सभी इस उत्तर से सहमत थे। वो आगे बोली, ” इसी तरह अगर, एक छोटी सी समस्या की चिंता मैं करती रहूँ।। तो पहले वो कोई ख़ास भार नहीं देगी मन पर।। पर यदि मैं उसी के बारे में सोचती रहूँ।। उसी से परेशान रहूँ।। उसी पर stress करती रहूँ।। तो वो छोटी से परेशानी भी मुझे बहुत कष्ट दे सकती है।। मैं डिप्रेशन का शिकार हो सकती हूँ।। मैं दूसरा कुछ भी कार्य करने में असमर्थ हो जाउंगी।। यही तो हमारी वास्तविक परेशानी है   विवेक कुमार
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