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Vivek bharti
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Vivek bharti
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12 घंटे पहले
#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 किलो मख्खन एक समय बात है एक किसान बेकरी चलाने वाले व्यापारी को एक किलो मख्खन बेचता था | एक बार मख्खन खरीदने के बाद व्यापारी को लगा इस बार मख्खन चेक कर ले , इस लिए उसने उसका वजन किया तो वह एक किलो से कम निकला | इससे व्यापारी को घुस्सा आया और व्यापारी उस किसान को कोर्ट में ले गया | न्यायाधीश ने किसान से पूछा, “क्या आप माखन तोल के बेचते हो ? कसे तोलते हो ?” किसान ने कहां, “ मेरे पास कोई सही वजन नहीं है जिससे मै तोल सकू |” न्यायाधीश ने पूछा फिर कैसे तोलते हो ? किसान ने कंहा ,”मै हर रोज व्यापारी की दुकान से एक किलो की ब्रेड की खरेदी करता हूँ और उसी के आधार पर माखन तोल कर उसे देता हूँ |” हम जो दुसरे को देते है वहीँ हमें मिलता है |
Vivek bharti
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12 घंटे पहले
#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 है तो मार्ग है एक वृद्ध किसान बहुत ही अस्वस्थ था, चिंताग्रस्त था | पोटैटो बोने क समय आ गया था लेकिन वृद्धावस्था के कारण श्रम करना उसे सभव नहीं था| उसे हर बार सहायत्ता करने वाला उसका पुत्र कारावास में सजा काट रहा था | अपनी चिंता से अवगत कराने उसने अपने बेटे को कारावास में चिठ्ठी भेजी | दो दिन बाद उसे पुत्र का टेलीग्राम मिला जिसमे लिखा था “ बाबा, कृपया खेत में मत जाईये , उसमे काम ना करे | वहां पर बंदूके तथा बारूद छिपाया है |” दुसरे दिन भोर प्रात:: सुरक्षाबल तथा पोलिस के लोग आये और उन्होंने पूरा खेत खोद निकाला | बंदूके न मिलनेपर वैसे ही वापिस चले गए | वृद्ध को बहुतही आश्चर्य हुवा| उसने सारा घटना क्रम लिखकर पुत्र को भेजा| दो तिन दिनोंके पश्चात् उसे पुत्र की चिठ्ठी मिली की, “ बाबा ! आप अभी निश्चिन्त हो आलू बोने का कम शुरू करे | मै यहां रहकर आपकी इतनी ही मदत कर पाया |”
Vivek bharti
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3 दिन पहले
ईश्वर का दोस्त एक संत ने एक रात स्वप्न देखा कि उनके पास एक देवदूत आया है। देवदूत के हाथ में एक सूची थी। उसने कहा, 'यह उन लोगों की सूची है, जो प्रभु से प्रेम करते हैं।' संत ने कहा, 'मैं भी प्रभु से प्रेम करता हूं। मेरा नाम तो इसमें अवश्य होगा।' देवदूत बोला, 'नहीं, इसमें आप का नाम नहीं है।' संत उदास हो गए। फिर उन्होंने पूछा, 'इसमें मेरा नाम क्यों नहीं है? मैं ईश्वर से ही प्रेम नहीं करता बल्कि गरीबों से भी प्रेम करता हूं। मैं अपना अधिकतर समय निर्धनों की सेवा में लगाता हूं। उसके बाद जो समय बचता है उसमें प्रभु का स्मरण करता हूं।' तभी संत की आंख खुल गई। दिन में वह स्वप्न को याद कर उदास थे। एक शिष्य ने उदासी का कारण पूछा तो संत ने स्वप्न की बात बताई और कहा, 'लगता है सेवा करने में कहीं कोई कमी रह गई है।' दूसरे दिन संत ने फिर वही स्वप्न देखा। वही देवदूत फिर उनके सामने खड़ा था। इस बार भी उसके हाथ में कागज था। संत ने बेरुखी से कहा, 'अब क्यों आए हो मेरे पास? मुझे प्रभु से कुछ नहीं चाहिए।' देवदूत ने कहा, 'आपको प्रभु से कुछ नहीं चाहिए, लेकिन प्रभु का तो आप पर भरोसा है। इस बार मेरे हाथ में दूसरी सूची है।' संत ने कहा, 'तुम उनके पास जाओ जिनके नाम इस सूची में हैं। मेरे पास क्यों आए हो?' देवदूत बोला, 'इस सूची में आप का नाम सबसे ऊपर है।' यह सुन कर संत को आश्चर्य हुआ। बोले, 'क्या यह भी ईश्वर से प्रेम करने वालों की सूची है।' देवदूत ने कहा, 'नहीं, यह वह सूची है जिन्हें प्रभु प्रेम करते हैं। ईश्वर से प्रेम करने वाले तो बहुत हैं, लेकिन प्रभु उसको प्रेम करते हैं जो गरीबों से प्रेम करते हैं। प्रभु उसको प्रेम नहीं करते जो दिन रात कुछ पाने के लिए प्रभु का गुणगान करते रहते हंै।' #😎मोटिवेशनल गुरु🤘
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