#dutt #Dattatreya #bapushri #punitkripaprasadi ॐ तत्सत् जय गुरु दत्त*
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*स्नान-दान से पुरुषोत्तम मास में मिलता है दुखों से छुटकारा*
लोक-व्यवहार में संक्रांति रहित मास 'अधिक मास' के अतिरिक्त अधिमास, मलमास व आध्यात्मिक विषयों में *अत्यन्त पुण्यदायी होने के कारण 'पुरूषोत्तम-मास' आदि नामों से भी जाना जाता है।* ज्योतिष गणनानुसर एक सौर वर्ष 365 दिन, 6 घंटे और 11 सेकंड का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिन और लगभग 9 घंटे का होता है। सौर वर्ष व चंद्र वर्ष और सौर मास व चंद्र मास के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए भारतीय *शास्त्रकारों द्वारा 'अधिक-मास' की परिकल्पना (व्यवस्था) की गई है।*
पुरूषार्थ चिंतामणि के अनुसार एक अधिक मास से दूसरे अधिक मास तक की अवधि अर्थात् पुनरावृत्ति 28 मास से लेकर 36 मास के भीतर होना सम्भव है। इस प्रकार हर तीसरे वर्ष में अधिक मास अर्थात् पुरूषोत्तम मास की पुनरावृत्ति होती रहती है।
*पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन स्नान, दान जपादि करने से लोगों के दुख, शोक, पाप और दारिद्रय का निवारण हो जाता है।* नियमपूर्वक संयमित रहकर भगवान की विधिपूर्वक पूजार्चन
*भविष्योत्तरपुराण अनुसार पुरुषोत्तम (अधिक मास) मास में ईश्वर (भगवान कृष्ण) के निमित्त जो व्रत, उपवास, स्नान, दान या पूजनादि किए जाते हैं,* उन सबका अक्षय फल होता है और व्रती के सब अनिष्ट नष्ट हो जाते हैं। पुराणों में शास्त्रकारों ने सर्वपाप हरण करने वाले अधिमास काल में व्रत, उपवास, पूजन, दान आदि संबंध में विभिन्न प्रकार के विधान बतलाए गए है। इसके अतिरिक्त ज्येष्ठ मास में प्रतिदिन श्री पुरूषोत्तम माहात्म्य का पाठ एक निश्चित समय पर श्रद्धापूर्वक करना चाहिए।
*अधिक मास करने से अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है*
और मृत्यु के बाद किसी प्रकार की अधोगति का भय नहीं रहता। विक्रम संवत् 2083 में प्रथम ज्येष्ठ शुल्क प्रतिपदा तद्नुसार
*17 मई से ज्येष्ठ अधिक मास प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा*
॥ जय गुरु दत्त ॥
*पुनित कृपा प्रसादी*
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