९.१ लाख व्ह्यू · १९ ह प्रतिक्रिया | छायावाद के आधार स्तंभों में से एक, महाकवि जयशंकर प्रसाद जी के जन्मदिवस पर सादर प्रणाम🙏🏻 साहित्य-साधना के निःसंग व्रती प्रसाद जी ने काव्य के अतिरिक्त, इतिहास और अध्यात्म की गवाक्षों से झाँकती अनेक कथाएँ तथा नाट्य-कृतियाँ रचीं। सामान्य अनुभवों की निस्सार प्रतीति को भी उन्होंने अपने सघन कलाबोध और शब्द-साधना के संस्पर्श से रससिक्त, प्राणवंत एवं सम्मोहक बना दिया। भग्न अभिलाषाओं से उपजी वेदना जैसे प्राकृत तत्त्व, जब प्रसाद जैसे समर्थ शब्द-साधक की वाणी का आश्रय पाते हैं, तो चिर-उपेक्षित ‘आँसू’ भी करुणा का अमृत बनकर पाठक तथा श्रोता के अंतःकरण में झरने सा मनमोहक नाद करते हैं। आपकी सृजन-साधना सदा हिंदी की साहित्यिक चेतना की आलोक-शिला बनकर भाषा के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करती रहेगी❤️ | Dr. Kumar Vishwas
छायावाद के आधार स्तंभों में से एक, महाकवि जयशंकर प्रसाद जी के जन्मदिवस पर सादर प्रणाम🙏🏻
साहित्य-साधना के निःसंग व्रती प्रसाद जी ने काव्य के अतिरिक्त,...