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पंकज बलवाड़ी
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पंकज बलवाड़ी
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6 months ago
लो एक और बढ़िया खबर सुनो। मैं पहले दिन से कह रहा हूं टैरिफ आपदा नहीं अवसर है। भारतीय कंपनी जोहो ने नया ब्राउजर लांच किया है । सबसे बड़ी बात यह है कि यह ब्राउज़र गूगल क्रोम को कड़ी टक्कर दे रहा है । अब हम अमेरिका पर निर्भर नहीं हैं बल्कि आत्मनिर्भर हैं। पहले माइक्रोसॉफ्ट और अब गूगल के कम्पटीशन में ब्राउज़र आ गया है इस ब्राउज़र का नाम ऊला ब्राउज़र है । दावा किया जा रहा है कि ऊला ब्राउज़र गूगल क्रोम से भी बहुत बेहतरीन है । आत्मनिर्भर भारत का एक और बढ़ता कदम। लगता है भारतीय इंजीनियर अमेरिका की मिट्टी पलीद करके ही मानेंगे। जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #आत्मनिर्भर भारत #आत्मनिर्भर भारत अभियान #स्वदेशी अपनाओ स्वदेशी चलाओ #स्वदेशी अपनाओ विदेशी भगाओ अभियान
पंकज बलवाड़ी
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6 months ago
आज बीएसएनएल ने पूरे देश में 4G service लॉन्च की. मैंने सोशल मीडिया पर देखा कि लोग इसका मज़ाक उड़ा रहे हैं.... कि बीएसएनएल 10-15 साल पीछे रह गया दुनिया से. बात कुछ हद तक सही है. लेकिन यहाँ हमारे देश ने एक बहुत बड़ी चीज Achieve की है... जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए. बीएसएनएल ने यह काम किया है पूर्ण स्वदेशी Stack बना कर... इसका मतलब.... सभी Telecom Components, सारे हार्डवेयर Software, और यहाँ तक कि Mobile Towers भी पूरी तरह से देसी तकनीक से बने हैं. अब आप पूछेंगे... कि इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई. बड़ी नहीं.. बहुत बड़ी बात है. इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो अपनी खुद की टेलीकॉम तकनीक विकसित कर सकते हैं, जैसे डेनमार्क, स्वीडन, दक्षिण कोरिया और चीन। जी हाँ... दुनिया में भारत पांचवा देश बन गया है... जो बिलकुल scratch से 4G technology और तमाम Telecom Components को स्वयं बना सकता है.... पूरी तरह 100% भारतीय. अब प्रश्न है कि यह Stack क्या बला है. आप फ़ोन इस्तेमाल करते हैं.... उसके लिए आपके पास तो आपका हैंडसेट होता है.... लेकिन backend पर सर्वर्स हैं, Software काम करता है... तमाम तरह के Switch Routers converters, Towers और ना जाने कैसे कैसे हजारों तरह के components होते हैं. यह स्टैक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर—दोनों स्तर पर देश में ही विकसित किया गया है, जिससे भारत टेलीकॉम क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गया है। यह तकनीक न केवल किफायती और सुरक्षित है, बल्कि इसे भविष्य में 5G और 6G के लिए भी तैयार किया जा सकता है। देश के दूरदराज़, ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों तक मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचेगी और डिजिटल इंडिया अभियान को नई ताकत मिलेगी स्वदेशी 4G स्टैक की सुरक्षा खूबियां निम्नलिखित हैं: यह नेटवर्क पूरी तरह भारतीय डेटा संप्रभुता कानूनों के अनुरूप है, जिससे डेटा की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होती है।इसमें उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीक का प्रयोग किया गया है जो कॉल कनेक्टिविटी और डेटा फ्लो को सुरक्षित रखता है। सीमा क्षेत्रों और सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों में भी यह नेटवर्क सुरक्षित सेवा प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलती है। क्लाउड-आधारित तकनीक और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड नेटवर्किंग (SDN) के इस्तेमाल से नेटवर्क स्केलेबल और फेल-सेफ होता है, साथ ही रिमोट प्रबंधन की सुविधा भी देता है। क्योंकि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक है, इसलिए इसमें कोई विदेशी बैकडोर या संदेहास्पद सुरक्षा खतरे नहीं होते। यह सुरक्षा खूबियां भारत को टेलीकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाती हैं और डिजिटल इंडिया को मजबूती देती हैं, खासकर ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षित कनेक्टिविटी प्रदान करने में. सबसे बड़ी बात.... क्यूंकि stack हमारा है..... अब हम आराम से 5G और 6G पर अपग्रेड कर सकते हैं... बिना किसी अन्य देश पर निर्भरता के. इस काम में TCS, तेजस Networks,और CDOT ने बड़ी भूमिका निभाई है. इन सबने मिल कर बीएसएनएल के लिए 97,500 Telecom Towers बनाये हैं. #bsnl 4g network