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Sunil Das prajapati
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Sunil Das prajapati
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1 दिन पहले
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 66 गीता ज्ञान दाता काल कहता है, " मेरी सभी धार्मिक पूजाओं को मुझमें त्याग कर, तू केवल उस एक पूर्ण परमात्मा की शरण में जा। मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा; तू शोक मत कर। 1Sant Rampal Ji Maharaj
Sunil Das prajapati
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1 दिन पहले
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीताजी अध्याय 18 श्लोक 62 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा गीता ज्ञानदाता से भिन्न है। हे भारत! तू संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की ही शरण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शान्ति को तथा सदा रहने वाले अविनाशी स्थान को अर्थात् सतलोक को प्राप्त होगा।” यही प्रमाण गीता जी अध्याय 18 श्लोक 66 में भी दिया गया है।
Sunil Das prajapati
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1 दिन पहले
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीताजी अध्याय 4 श्लोक 5 में गीता ज्ञान देने वाला भगवान स्वयं को जन्म मरण के अंतर्गत बता रहा है, फिर जन्म मरण से परे अविनाशी व पूजनीय पूर्ण परमात्मा कौन है? जानने के लिए पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा। Sant Rampal Ji Maharaj
Sunil Das prajapati
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2 दिन पहले
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 62 “हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”। ’सब प्रकार से’ का अर्थ कोई अन्य पूजा नहीं करना बल्कि मन-कर्म-वचन से केवल एक भगवान में विश्वास रखना है।
Sunil Das prajapati
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2 दिन पहले
#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि अर्जुन पूर्ण परमात्मा के तत्वज्ञान को जानने वाले तत्वदर्शी संतों के पास जा कर उनसे विनम्रता से पूर्ण परमात्मा का भक्ति मार्ग प्राप्त कर, मैं उस पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग नहीं जानता। संत रामपाल जी महाराज ही वह तत्वदर्शी संत हैं।
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