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Ashutosh shukla
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Ashutosh shukla
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13 days ago
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शराबी की मधुशाला १. कोई आता झूम-झूम के, चकित हों नर-नारी बाला, उलझन में हैं सभी देख के, झूमता क्यों ये मतवाला, एक महाशय ने फिर आकर बतलाया इसका कारण, मदिरा पीने की खातिर यह गया हुआ था मधुशाला। २. चलते-फिरते गोते खाता, क्यों ये झंझट है पाला, होश नहीं है किसी बात का, जोखिम में खुद को डाला, राह लग रही है मुश्किल कितनी उस बेचारे को, सोच रहा है मन ही मन में, क्यों मैं गया था मधुशाला... ३. ठौर-ठिकाना नहीं है कोई, कहीं भी पाता वो ताला, अपनों से भी हुआ पराया पछताता मदिरावाला, घड़ी-घड़ी यह सोचता फिरता कहाँ पाऊँगा आश्रय मैं, गया मज़े था करने लेकिन आफ़त बन गयी मधुशाला... ४. इस पर भी न समझ रहा वो, बन बैठा भोला-भाला, सबकी सुनता निस-दिन पर वो बुद्धि में है पर्दा डाला, अब करेगा आगे क्या जाने सोच नहीं पाता है वो, एक विचार ही करता रहता, जाऊँ कब मैं मधुशाला... ५. आख़िर फिर से चला गया वो, थका है समझाने वाला, गलत राह पर है चल निकला, बुने कुकर्मों का जाला, वही काम करता है जाके भूल के सबकी बातों को, मन में लालच पैदा करके उसे लुभाती मधुशाला। ६. भाव जागते उसके अंदर, जाने कर्म है ये काला, पर फिर भी उसका दिल करता, जपूँ मैं मदिरा की माला, संकट में फँस गया बेचारा, पड़ गया है असमंजस में, छोड़ न पाता प्याले को वो रस है देती मधुशाला... ७. खुद से है वो पता लगाता, कोई न बतलाने वाला, हल न विपदा का है निकलता, खुद को विकटता में ढाला, विद्वानों से पूछता फिरता समाधान इस उलझन का, पैर में जंजीरों की भाँति पीछे पड़ गयी मधुशाला। ८. समझ चुका है वो अब सब-कुछ, नहीं है सिखलाने वाला, खुश होकर मद-मस्त है चलता, कोई न कुछ कहने वाला, छोड़ के आया है अवगुण वो उसी मधु के द्वारे पर, ठान लिया संकल्प है करता, कभी न जाऊँ मधुशाला... ९. अपनाया फिर सबने उसको, बना है वो अब दिलवाला, क्षमा मांगता है वो सबसे, बना वो अब चाहत वाला, कहता फिरता सबसे है वो मुझको ना ठुकराओ तुम, कान पकड़ के कहता हूँ मैं कभी ना देखूँ मधुशाला... १०. कहता अब वो सारे जग से, व्यसन बड़ा झगड़ेवाला, घर की होती बर्बादी है, कुल को नष्ट करने वाला, हाथ जोड़ के करूँ प्रार्थना, कथन मान लो मेरा ये, सुखी रहोगे हरदम जो ना जाओगे तुम मधुशाला... #🤣मधुशाला🤣 #Madhushala
Ashutosh shukla
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2 months ago
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भारतीय इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़े सबसे बड़े और विवादास्पद फैसलों में 1975 का आपातकाल, प्रेस पर प्रतिबंध, जबरन नसबंदी, और ऑपरेशन ब्लू स्टार शामिल हैं।1. 1975 का आपातकाल (Emergency):25 जून 1975 की रात, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। इस 21 महीने के दौरान संविधान के बुनियादी ढांचे को दरकिनार करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था।2. राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी:जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित एक लाख से अधिक पत्रकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मीसा (MISA - Maintenance of Internal Security Act) जैसे सख्त कानूनों के तहत बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया गया था।3. प्रेस सेंसरशिप और मीडिया पर पाबंदी:मीडिया की स्वतंत्रता को पूरी तरह से छीन लिया गया। समाचार पत्रों में छपने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी अनिवार्य थी, जिसके कारण कई अख़बारों ने विरोध स्वरूप अपने संपादकीय पन्ने खाली छोड़ दिए थे।4. जबरन नसबंदी अभियान (Forced Sterilization):आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के छोटे बेटे, संजय गांधी, ने बिना किसी आधिकारिक पद पर रहते हुए अत्यधिक सत्ता का इस्तेमाल किया। जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर देश भर में लाखों पुरुषों की जबरन और क्रूर तरीके से नसबंदी की गई, जिससे जनता में भारी आक्रोश फैला।5. तुर्कमान गेट विध्वंस:दिल्ली के तुर्कमान गेट और आसपास के इलाकों में अवैध कब्जों को हटाने के नाम पर झुग्गियों को ध्वस्त कर दिया गया। विरोध करने वालों पर पुलिस द्वारा गोली चलाई गई थी, जिसमें कई लोग मारे गए थे।6. न्यायपालिका और संविधान में बदलाव:सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1971 के उनके चुनाव को रद्द किए जाने के बाद (इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर), इंदिरा सरकार ने कई संविधान संशोधन (जैसे 39वां और 42वां संशोधन) किए, जिसने प्रधानमंत्री के पद को अदालती जांच से मुक्त कर दिया और न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित कर दिया।7. ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star):जून 1984 में, स्वर्ण मंदिर (अमृतसर) में छिपे हुए खालिस्तानी अलगाववादियों (जनरल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में) को बाहर निकालने के लिए उनके द्वारा सेना को अमृतसर के सबसे पवित्र सिख धार्मिक स्थल के भीतर भेजने का विवादास्पद आदेश दिया गया। इस सैन्य कार्रवाई में अकाल तख्त को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे सिख समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा हुई और इसी के परिणामस्वरूप 31 अक्टूबर 1984 को उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई।आपातकाल से जुड़ी और अधिक ऐतिहासिक जानकारी आप बीबीसी न्यूज़ या विकिपीडिया के विस्तृत लेखों में देख सकते हैं। ##IndiraGandhikekarnaame Adhik matra me shere kijiye . 🙏🙏🙏
Ashutosh shukla
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3 months ago
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Bhajpa ki jeet 🥳🚩🍫 #Bangal Election
Ashutosh shukla
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3 months ago
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*दस्तावेजों से साईं बाबा के मुस्लिम साबित होने पर साईं ट्रस्ट ने सुप्रीमकोर्ट में स्वरूपानंद सरस्वती से माफी मांगी.. !!* *राष्ट्र हिंदु शक्ति के पदाधिकारियों की मांग को तुरंत मंदिर समिति ने मानकर मुर्ती हटाने के लिए प्रस्ताव पर हाथो-हाथ हस्ताक्षर करके हटाने का आदेश दिया !* साई बाबा के मुस्लिम साबित होते ही मंदिरों से हटने लगी साईं बाबा *(चांद मियां)* की मुर्तियां ! सभी भाइयों से निवेदन है कि हर हिंदू भाई इसे कम से कम 10 ग्रुप पर डालें, ताकि सब हिंदुओं को पता चले हम कहां थे और कहां जा रहे हैं । *_साईबाबा उर्फ़ मोहम्मद चांद मियां_* पिता :- मोहम्मद बदरूद्दीन मियां अफगानी, पेशा :- पिण्डारी लुटेरा समुह का सदस्य, जन्म :- १८३२, मौत :- १९१८, *जो काम औरंगजेब, महमुद गजनवी,मुहम्मद गोरी, बलबन, अलाउद्दीन खिलजी, सिकंदर लोदी, बाबर, शाहज़हां, *तैमुर लंग .... नहीं कर सका वह चांद मियां कर गया !* *सनातन देव-देवी मंदिरों में और देवो के विग्रह के साथ चांद मियां स्थापित हो गये। मस्जिद में नहीं स्थापित हुये । सनातन के देवों के नाम में चांद मियां का नाम जपा जाने लगा। जैसे साईं राम, साईं श्याम, साईं कृष्ण, साईं दुर्गा, साईं काली ! लेकिन साईं अल्लाह और साईं मुहम्मद नहीं बोला गया! धार्मिक ग्रंथो में हिन्दु देवों का नकल किया गया, जैसे हनुमान चलीसा, शिव चालीसा। वैसे साईं चलीसा लिखा गया, मुहम्मद चालीसा या साईं पचासा नहीं लिखा गया । वृहस्पतिवार भगवान विष्णु के दिन को साईं मियां कब्जा कर दिये । देवों के गुरू वृहस्पति के अस्तित्व मिटाने के कुत्सित प्रयास किया जा रहा है । विजया दशमी हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण दिन है, भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त किया था । मा दुर्गा महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था । उसी दिन में गौ भक्षक अपना जन्मदिन घोषित कर हिन्दू धर्म पर आघात किया । *सभी साई भक्तों से सवाल ?* _ *1. क्या साई ने भगवान श्री राम की तरह राक्षसों का नाश किया?* _ *2. क्या साई ने भगवान श्री कृष्ण की तरह इस संसार को गीता का ज्ञान दिया ?* _ *3. क्या साई ने भगवान शिव की तरह विषपान कर इस विश्व की रक्षा की ?* _ *4. क्या साई ने किसी ग्रन्थ या महाकाव्य की रचना की ?* _ *5. क्या साई ने श्रवण कुमार की तरह अपने माता-पिता की सेवा की ?* _ *6. क्या साई चैतन्य महाप्रभु की तरह हिन्दुओ के किसी भगवान के भक्त था ?* _ *7. क्या साई ने गुरु गोविंदसिंह जी की तरह मुसलमानों से लोहा ले हिन्दू धर्म की रक्षा की ?* _ *8. क्या साई ने छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह मुसलमानों से लोहा ले हिन्दू धर्म की रक्षा की ?* _ *9. क्या साई ने महाराणा प्रताप की तरह मुस्लिम आक्रांताओ से लोहा लेकर मातृभूमि की रक्षा की ?* _ *10. क्या साई ने शहीद भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद सुखदेव, राजगुरु अन्य क्रांतिकारियों की तरह आजादी की लड़ाई मे अपना योगदान दिया ?* _ *11. गायत्री मंत्र भी साईं के नाम पर और राम के नाम के आगे भी साई लगाते हैं, जब तुम्हारे साई अकेले कल्याण करने में समर्थ हैं l तो उसे "भगवान राम" की जरूरत क्यों है ?* _ *12. वेद मंत्रों में साई को स्थापित किए जाने के लिए क्यों हेरफेर किया जा रहा है ?* _ *13. साई के नाम पर हिन्दू धर्म को भ्रमित और विकृत क्यों किया जा रहा है ?* _ *14. एक जिहादी साई को शिव और विष्णु की तरह हिन्दू देवताओं के रूप में चित्रित किया जाना क्या हिन्दू धर्म का अपमान नहीं है ?* _ *15. इससे हम करोड़ों हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, उस पर साई भक्त क्या कहना चाहेंगे ?* _ *16. क्या साई भगवान राम से भी बड़े हो गए हैं ?* _ *17. उन्हें ब्रह्मांड नायक क्यों बनाया गया.. क्या उन्होंने ब्रह्मांड की रचना की है ?* _ *18. क्या वे राजाधिराज थे ?* _ *19. वे परब्रह्म थे ?* _ *20. वे सच्चिदानंद थे ?* _ *21. क्या आप ऐसा लिख सकते हो कि 'साई अल्लाह' थे,* *अगर नहीं तो.. तो फिर उन्हें 'परब्रह्म' लिखने का अधिकार आपको किसने दिया?* *22. मंदिरों में साई की मूर्ति क्यों लगाई जा रही है?* *23. हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं की मूर्तियां छोटी होती जा रही हैं और साई की मूर्ति बड़ी?* *24. हिन्दू मंदिरों में जान-बूझकर जो साई बाबा की मूर्ति स्थापित की जा रही है क्या वह उचित है?* *25. साई का चित्र पहले शिव के साथ जोड़कर दिखाया जाता था, आजकल राम और हनुमान के साथ जोड़कर दिखाया जाता है.. क्या यह षड्यंत्र या मनमानी हरकत नहीं है?* *26. साई के नाम पर मनमाने मंदिर, आरती, चालीसा और तमाम तरह के कर्मकांड निर्मित कर लिए गए हैं, क्या यह उचित हैं ??* *27. क्या साई बाबा की तुलना राम-कृष्ण से करना सनातन धर्म का अपमान नहीं है?* *28. पहले साई को जातादत्तात्रेय का अवतार बताया गया, फिर विरोध होने पर कबीर का, फिर नामदेव, पांडुरंग, अक्कलकोट का महाराज?* *29. अंत में शिव का अवतार इसलिए घोषित किया गया, क्योंकि शिवजी को भी चित्रों में चिलम पीते हुए दर्शाया गया है?* *30. उसके बाद तो साई सभी देवी-देवताओं के अवतार होने लगे क्यों?* *31. अब उन्हें रामावतार बताया जा रहा है क्यों?* *32. क्या "सबका मालिक एक" सूत्र चाँद साई ने दिया था?* *33. क्या "श्रद्धा और सबुरी" सूत्र चाँद साई ने दिया था?* *34. क्या चाँद साई के नाम के आगे ॐ लगाना उचित है?* *35. क्या वो संसार का स्वामी है?* *36. उसे मोहम्मद का अवतार क्यों नही बताया जाता! जबकि उसे हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है?* *37. उसे अल्लाह का अवतार क्यों नही बताया जाता?* *38. चाँद साई को जीजस का अवतार क्यों नही बताया जाता?* *क्या इसका कोई ठोस जवाब है कि उन्हें भगवान बनाने के लिए हिन्दुओं के अवतारों का ही सहारा क्यों लिया जा रहा है?* *साई भक्तों को अगर इन सवालों के जबाब नहीं मिले तो वे खुद ही सोच लें कि वे किस लायक हैं!* *धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो।* 🚩 *जय श्रीराम*🚩 ⚜🕉⛳🕉 आप से अनुरोध है, साईं मियां का विरोध करें, सनातन धर्म को बचाने में सहयोग करें। जय श्री राम...राम राम... *आपका अपना 🚩सनातनी मित्र पंडित श्री धनेश्वर संजय प्रसाद शुक्ला बिलासपुर छत्तीसगढ* #Chand Miya #sai baba Adhik matra me shere kijiye . 🙏🙏🙏
Ashutosh shukla
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4 months ago
यह भाषाई और वैज्ञानिक रूप से भी सच है। वेदों की सुरक्षा का जो तरीका हमारे ऋषियों ने बनाया था, वह दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है। यहाँ इस बात को पुख्ता करने वाले कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: स्वर और मात्रा की शुद्धता (The Vedic Chanting): वेदों को 'श्रुति' (सुनकर याद रखने वाला) कहा जाता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए 'विकृति पाठ' (जैसे जटा पाठ, शिखा पाठ, घन पाठ) जैसी जटिल प्रणालियाँ बनाई गईं। इसमें मंत्रों को शब्दों के क्रम बदल-बदल कर गाया जाता है। अगर कोई एक मात्रा या 'डंडा' (स्वर) भी बदलने की कोशिश करे, तो वह लय टूट जाती है और तुरंत पकड़ में आ जाता है। अपौरुषेय ज्ञान: वेदों को 'अपौरुषेय' माना जाता है, यानी ये किसी मनुष्य की रचना नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान हैं जो सृष्टि के आरंभ से है। इनकी तुलना में पुराण बहुत बाद के हैं और उनमें भौगोलिक व ऐतिहासिक कहानियों के जुड़ने से मिलावट की गुंजाइश बनी रही। संस्कृत का व्याकरण: वेदों की संस्कृत (Vedic Sanskrit) इतनी प्राचीन और नियमबद्ध है कि उसमें मध्यकालीन या आधुनिक मिलावट के शब्द साफ अलग चमकते हैं। पाणिनि के व्याकरण के नियमों ने वेदों को एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर दिया था। इस प्रकार निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है: अगर किसी को सनातन धर्म का सबसे शुद्ध, वैज्ञानिक और मौलिक (Original) ज्ञान चाहिए, तो वेदों और उपनिषदों से बेहतर कुछ नहीं है। पुराणों में जो 'गंदगी' या 'मिलावट' देखी जा सकती हैं, उससे कई समाज सुधारक (जैसे महर्षि दयानंद सरस्वती) भी सहमत थे और उन्होंने ही "वेदों की ओर लौटो" का नारा भी दिया था। जय श्री राम , जय सनातन धर्म I 🙏🙏🙏यह भाषाई और वैज्ञानिक रूप से भी सच है। वेदों की सुरक्षा का जो तरीका हमारे ऋषियों ने बनाया था, वह दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है। यहाँ इस बात को पुख्ता करने वाले कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: स्वर और मात्रा की शुद्धता (The Vedic Chanting): वेदों को 'श्रुति' (सुनकर याद रखने वाला) कहा जाता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए 'विकृति पाठ' (जैसे जटा पाठ, शिखा पाठ, घन पाठ) जैसी जटिल प्रणालियाँ बनाई गईं। इसमें मंत्रों को शब्दों के क्रम बदल-बदल कर गाया जाता है। अगर कोई एक मात्रा या 'डंडा' (स्वर) भी बदलने की कोशिश करे, तो वह लय टूट जाती है और तुरंत पकड़ में आ जाता है। अपौरुषेय ज्ञान: वेदों को 'अपौरुषेय' माना जाता है, यानी ये किसी मनुष्य की रचना नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान हैं जो सृष्टि के आरंभ से है। इनकी तुलना में पुराण बहुत बाद के हैं और उनमें भौगोलिक व ऐतिहासिक कहानियों के जुड़ने से मिलावट की गुंजाइश बनी रही। संस्कृत का व्याकरण: वेदों की संस्कृत (Vedic Sanskrit) इतनी प्राचीन और नियमबद्ध है कि उसमें मध्यकालीन या आधुनिक मिलावट के शब्द साफ अलग चमकते हैं। पाणिनि के व्याकरण के नियमों ने वेदों को एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर दिया था। इस प्रकार निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है: अगर किसी को सनातन धर्म का सबसे शुद्ध, वैज्ञानिक और मौलिक (Original) ज्ञान चाहिए, तो वेदों और उपनिषदों से बेहतर कुछ नहीं है। पुराणों में जो 'गंदगी' या 'मिलावट' देखी जा सकती हैं, उससे कई समाज सुधारक (जैसे महर्षि दयानंद सरस्वती) भी सहमत थे और उन्होंने ही "वेदों की ओर लौटो" का नारा भी दिया था। जय श्री राम , जय सनातन धर्म I 🙏🙏🙏 #ved #genral knowledge