हम किसान, एक गांव में रहकर, दिन-रात पसीना बहाते हैं। मिट्टी से सोना उगाते हैं हम, अपनी शान इसी में पाते हैं।
शहरों की चकाचौंध से दूर, खेतों की हरियाली अपनी है।
सहनी पड़े कितनी भी मुश्किलें, पर किसानी ही अपनी तपनी है।
हम किसान, एक गांव में रहकर, अपनी तकदीर खुद बनाते हैं।
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