#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 :
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बुराई पर ( पाप पर ) केवल
अहिंसा से ही विजय प्राप्त
करना चाहिए । पाप केवल
अहिंसा से ही डरता है ।
नाम सिमरन ( ईश्वर रब खुदा
सिमरन ) अहिंसक बनने में
सहायक है ।
हमारे अंदर बुराई/पाप छुप
कर रहना पसंद करता है ।
बुराई/पाप को हमारे अंदर
छुप कर रहना बहुत पसंद है ।
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संत कबीरदास जी की
विचारधारा के अनुसार हिंसक
और अहिंसक इंसान का
अंतर को समझने का सरल
प्रयास ।
1. या तो हिंसक इंसान बाहर
के शत्रु खोजता है, या तो
अहिंसक इंसान भीतर के
अहंकार को जीतता है।
2. या तो हिंसक इंसान तलवार
पर भरोसा करता है, या तो
अहिंसक इंसान सत्य पर।
3. या तो हिंसक इंसान डर
फैलाता है, या तो अहिंसक
इंसान प्रेम।
4. या तो हिंसक इंसान
क्रोध में जीता है, या तो
अहिंसक इंसान करुणा
में।
5. या तो हिंसक इंसान
दूसरों को नीचा दिखाता
है, या तो अहिंसक इंसान
स्वयं को छोटा मानता है।
6. या तो हिंसक इंसान
शब्दों से घाव देता है,
या तो अहिंसक इंसान
मौन से सिखाता है।
7. या तो हिंसक इंसान
धर्म के नाम पर लड़ता है,
या तो अहिंसक इंसान
धर्म को जीता है।
8. या तो हिंसक इंसान
बाहरी पूजा में उलझा है,
या तो अहिंसक इंसान
भीतर राम को देखता है।
9. या तो हिंसक इंसान
जाति-पाति में फँसा है,
या तो अहिंसक इंसान
मानवता में।
10. या तो हिंसक इंसान
दूसरों की भूल खोजता
है, या तो अहिंसक इंसान
अपनी।
11. या तो हिंसक इंसान
बोलकर चोट करता है,
या तो अहिंसक इंसान
बोलकर जोड़ता है।
12. या तो हिंसक इंसान
दिखावे का साधु है,
या तो अहिंसक इंसान
सच्चा भक्त।
13. या तो हिंसक इंसान
लोभ से बंधा है, या तो
अहिंसक इंसान संतोष
से मुक्त।
14. या तो हिंसक इंसान
छल से जीतता है, या
तो अहिंसक इंसान सत्य
से हारकर भी जीतता है।
15. या तो हिंसक इंसान
देह को सब कुछ मानता
है, या तो अहिंसक इंसान
आत्मा को।
16. या तो हिंसक इंसान
अपमान का बदला लेता
है, या तो अहिंसक इंसान
क्षमा देता है।
17. या तो हिंसक इंसान
शोर में जीता है, या तो
अहिंसक इंसान शांति में।
18. या तो हिंसक इंसान
आग बनकर जलाता है,
या तो अहिंसक इंसान
दीप बनकर रोशन करता है।
19. या तो हिंसक इंसान
दूसरों को बदलना चाहता
है, या तो अहिंसक इंसान
स्वयं को।
20. या तो हिंसक इंसान
बाहरी शुद्धता दिखाता
है, या तो अहिंसक इंसान
मन की।
21. या तो हिंसक इंसान
कर्म से भागता है, या तो
अहिंसक इंसान कर्म को
साधना बनाता है।
22. या तो हिंसक इंसान
भय का व्यापार करता है,
या तो अहिंसक इंसान
भरोसे का।
23. या तो हिंसक इंसान
भीड़ का हिस्सा है, या तो
अहिंसक इंसान चेतना का।
24. या तो हिंसक इंसान
दूसरों की पीड़ा नहीं देखता,
या तो अहिंसक इंसान
उसे अपना मानता है।
25. या तो हिंसक इंसान
जीत को लक्ष्य बनाता है,
या तो अहिंसक इंसान
सत्य को।
26. या तो हिंसक इंसान
वाणी को हथियार बनाता
है, या तो अहिंसक इंसान
औषधि।
27. या तो हिंसक इंसान
धर्म में दीवारें खड़ी करता
है, या तो अहिंसक इंसान
पुल।
28. या तो हिंसक इंसान
अपने मत को श्रेष्ठ मानता
है, या तो अहिंसक
इंसान सबको सीख
मानता है।
29. या तो हिंसक इंसान
समय नष्ट करता है, या
तो अहिंसक इंसान
समय साधता है।
30. या तो हिंसक इंसान
बाहर की जीत चाहता
है, या तो अहिंसक
इंसान भीतर की।
31. या तो हिंसक इंसान
क्रोध को शक्ति समझता
है, या तो अहिंसक इंसान
कमजोरी।
32. या तो हिंसक इंसान
दूसरों के पतन से खुश
होता है, या तो अहिंसक
इंसान उत्थान से।
33. या तो हिंसक इंसान
दिखावे का ज्ञान रखता
है, या तो अहिंसक
इंसान अनुभव का।
34. या तो हिंसक इंसान
तर्क से लड़ता है, या
तो अहिंसक इंसान
विवेक से समझाता है।
35. या तो हिंसक इंसान
शरीर को सजाता है,
या तो अहिंसक इंसान
चरित्र को।
36. या तो हिंसक इंसान
दूसरों को दोष देता है,
या तो अहिंसक इंसान
स्वयं सुधारता है।
37. या तो हिंसक इंसान
अंधविश्वास फैलाता है,
या तो अहिंसक इंसान
चेतना जगाता है।
38. या तो हिंसक इंसान
मोह में बंधा है, या तो
अहिंसक इंसान प्रेम
में मुक्त।
39. या तो हिंसक इंसान
डर से धर्म निभाता है,
या तो अहिंसक इंसान
प्रेम से।
40. या तो हिंसक इंसान
बाहर गुरु खोजता है,
या तो अहिंसक इंसान
भीतर।
41. या तो हिंसक इंसान
शब्दों का बोझ है,
या तो अहिंसक
इंसान मौन का रस।
42. या तो हिंसक इंसान
दूसरों की आस्था तोड़ता
है, या तो अहिंसक
इंसान जोड़ता है।
43. या तो हिंसक इंसान
अधिकार माँगता है,
या तो अहिंसक इंसान
कर्तव्य निभाता है।
44. या तो हिंसक इंसान
जीवन को युद्ध समझता
है, या तो अहिंसक
इंसान साधना।
45. या तो हिंसक इंसान
अपनी इच्छा थोपता है,
या तो अहिंसक इंसान
सह-अस्तित्व निभाता है।
46. या तो हिंसक इंसान
मृत्यु से डरता है, या तो
अहिंसक इंसान जीवन
समझता है।
47. या तो हिंसक इंसान
बाहरी नियमों में फँसा
है, या तो अहिंसक
इंसान आत्मज्ञान में।
48. या तो हिंसक इंसान
जीतकर भी खाली है,
या तो अहिंसक इंसान
हारकर भी पूर्ण।
49. या तो हिंसक इंसान
दूसरों को बदलकर
सुख चाहता है, या तो
अहिंसक इंसान स्वयं
बदलकर।
50. या तो हिंसक इंसान
भ्रम में जीता है, या
तो अहिंसक इंसान
बोध में।
51. या तो हिंसक इंसान
वासना का दास है,
या तो अहिंसक इंसान
प्रेम का सेवक।
52. या तो हिंसक इंसान
समय के साथ कठोर
होता है, या तो
अहिंसक इंसान कोमल।
53. या तो हिंसक इंसान
शरीर मारता है, या
तो अहिंसक इंसान
अहंकार।
54. या तो हिंसक इंसान
दूसरों की सीमाएँ
लाँघता है, या तो
अहिंसक इंसान अपनी।
55. या तो हिंसक इंसान
बाहर शत्रु देखता है, या तो
अहिंसक इंसान भीतर मित्र।
56. या तो हिंसक इंसान
उपदेश देता है, या तो
अहिंसक इंसान
उदाहरण बनता है।
57. या तो हिंसक इंसान
स्वार्थ में डूबा है, या
तो अहिंसक इंसान
सेवा में।
58. या तो हिंसक इंसान
शोर मचाता है, या तो
अहिंसक इंसान प्रभाव
छोड़ता है।
59. या तो हिंसक इंसान
दिखता बहुत है, या तो
अहिंसक इंसान गहराता है।
60. या तो हिंसक इंसान
बाहर की दुनिया जीतता
है, या तो अहिंसक इंसान
स्वयं को।
61. या तो हिंसक इंसान
भ्रम को सच मानता है,
या तो अहिंसक इंसान
सच को जीता है।
62. या तो हिंसक इंसान
धर्म से दूरी बढ़ाता है,
या तो अहिंसक इंसान
धर्म की आत्मा बनता है।
63. या तो हिंसक इंसान
अलगाव फैलाता है, या
तो अहिंसक इंसान एकता।
64. या तो हिंसक इंसान
अहंकार में ऊँचा है, या
तो अहिंसक इंसान
विनम्रता में।
65. या तो हिंसक इंसान
बाहरी शत्रु से लड़ता है,
या तो अहिंसक इंसान
भीतर के विकार से।
66. या तो हिंसक इंसान
शब्दों में फँसा है, या
तो अहिंसक इंसान
अनुभव में।
67. या तो हिंसक इंसान
नियम तोड़कर जीतता है,
या तो अहिंसक इंसान
नियम निभाकर।
68. या तो हिंसक इंसान
भ्रमित भक्त है, या तो
अहिंसक इंसान जाग्रत
संत।
69. या तो हिंसक इंसान
डर से नियंत्रित है, या
तो अहिंसक इंसान
प्रेम से मुक्त।
70. या तो हिंसक इंसान
अंधकार बढ़ाता है, या
तो अहिंसक इंसान
दीप जलाता है।
71. या तो हिंसक इंसान
दूसरों की आहुति चाहता
है, या तो अहिंसक इंसान
अपनी।
72. या तो हिंसक इंसान
बाहर भगवान खोजता
है, या तो अहिंसक
इंसान हर जीव में।
73. या तो हिंसक इंसान
कर्म बाँधता है, या तो
अहिंसक इंसान कर्म
काटता है।
74. या तो हिंसक इंसान
देह से बोलता है, या तो
अहिंसक इंसान आत्मा से।
75. या तो हिंसक इंसान
दिखावे की भक्ति करता
है, या तो अहिंसक इंसान
सच्ची।
76. या तो हिंसक इंसान
समय के साथ टूटता है,
या तो अहिंसक इंसान
निखरता है।
77. या तो हिंसक इंसान
बाहर की लड़ाई जीतता
है, या तो अहिंसक
इंसान भीतर की।
78. या तो हिंसक इंसान
भ्रम फैलाता है, या तो
अहिंसक इंसान बोध।
79. या तो हिंसक इंसान
संसार में उलझा है, या
तो अहिंसक इंसान
उससे मुक्त।
80. या तो हिंसक इंसान
मन का दास है, या तो
अहिंसक इंसान मन
का साक्षी।
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