पांच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानुं ज्ञान अपारा।
सत्य स्वरूपी नाम साहेब का, सोई नाम हमारा।।
हाड़, चाम, लहु नहीं मेरे, कोई जाने सत्य नाम उपासी।
तारन तरन अभय पद दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।
कबीर परमेश्वर जी ने स्वयं कहा था कि मेरा पांच तत्व से बना शरीर नहीं है। मैं अविनाशी परमात्मा हूँ। न मेरा जन्म होता, न मृत्यु। सबका उद्धार करने आया हूँ। #santrampal mahraj ji#🎶Arijit Singh Best Playlist#👑SRK लवर्स💗#🖤एक्ट्रेस लुक्स#😎शहंशाह अमिताभ
कबीर साहेब वि.स. 1575 सन् 1518 माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत छोड़कर गए हैं, उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है। मगहर में जहाँ से कबीर जी सहशरीर सतलोक गए थे, वहां आज भी यादगार मौजूद है।
कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हौ, ऐसा वचन हमार।।
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