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3 months ago
सिर्फ 23 साल की उम्र में, अंजलि सरदाना ने एक टॉप वेंचर कैपिटल इंटर्नशिप छोड़ दी, ताकि वो एक ऐसी समस्या पर काम कर सके जो उसके दिमाग से हटती ही नहीं थी—जहाँ हर घर को रोज़ घरेलू मदद की ज़रूरत होती है, वहाँ यह बाजार इतना उलझा हुआ और अस्थिर क्यों है? उसने अपनी माँ को देर रात तक काम करते देखा, मरीजों और परिवार को एक साथ संभालते देखा, और यह बात उसके मन में गहरी बैठ गई। अंजलि मानती थी कि मजदूर बाजार का असली काम मांग और सप्लाई को जोड़ना है, लेकिन सम्मान और भरोसे के साथ, ना कि उलझन और अनिश्चितता के साथ। हर काम सम्मान के लायक है, और हर कामगार भी। उसने Pronto का पहला वर्ज़न लगभग बिना बजट के बनाया, Cursor no-code टूल्स की मदद से, और पायलट को एक पार्क से ऑपरेट किया। शुरुआती ग्राहकों ने 10-मिनट की घरेलू सर्विस बुक की—झाड़ू, पोछा, बर्तन—और बात तेजी से फैलने लगी। आज Pronto कई शहरों में चल रहा है, 7 महीनों में 7-फिगर रेवेन्यू बना चुका है, और 1,000+ ट्रेंड प्रोफेशनल्स इसके साथ काम कर रहे हैं। इसका मकसद सिर्फ तेज़ सर्विस नहीं, बल्कि क्वालिटी, सेफ्टी और रिलायबिलिटी देना है। हर शिकायत को एक केस की तरह देखा जाता है, सिर्फ नंबर की तरह नहीं। अंजलि लगातार सुधार, बदलाव और विस्तार पर काम कर रही है—उसके लिए यह पैसा नहीं, असर सबसे बड़ी बात है। 🔎 पूरी कहानी पढ़ें: foundora.in # #🙌 Never Give Up
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3 months ago
एक वीज़ा रिजेक्शन ने सब कुछ बदल दिया। 2021 में, सैन फ्रांसिस्को में काम कर रहे इंजीनियर मोहक नाहटा का वीज़ा रिजेक्ट हो गया। प्रोसेस धीमा था, उलझा हुआ था, और हर कदम पर अनिश्चितता थी। परेशानी सिर्फ़ देरी की नहीं थी, बल्कि उस सवाल की थी—अगर मेरे लिए इतना मुश्किल है, तो लाखों लोगों के लिए कैसा होगा? यहीं से Atlys की शुरुआत हुई। वीज़ा प्रक्रिया से डर हटाने के मकसद से बना Atlys, पेपरवर्क को साफ़ और आसान बनाता है। आज 2 मिलियन से ज़्यादा यात्री इस पर भरोसा करते हैं—इस बात का सबूत कि एक पर्सनल परेशानी भी बहुतों के लिए रास्ता बना सकती है। #मोटिवेशन
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4 months ago
#📲मेरा पहला पोस्ट😍 विरोहन की शुरुआत एक साधारण समझ से हुई—अस्पताल तेज़ी से बढ़ रहे थे, लेकिन प्रशिक्षित हेल्थकेयर स्टाफ की कमी थी, और दूसरी तरफ़ कई छात्रों के पास डिग्री तो थी, पर नौकरी नहीं। 2017–18 में शुरू हुआ विरोहन पढ़ाई को सीधे अस्पताल के काम से जोड़ने के उद्देश्य से बना। यह कोई आम कॉलेज नहीं था, बल्कि यूनिवर्सिटीज़ और हेल्थकेयर नियोक्ताओं के साथ मिलकर काम करने वाला एक मॉडल था। क्लासरूम पढ़ाई के साथ अस्पतालों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप ने छात्रों को आत्मविश्वास दिया। आज विरोहन 13,000 से ज़्यादा छात्रों को प्रशिक्षित कर चुका है और देशभर में हेल्थकेयर करियर बनाने में मदद कर रहा है। पुरी कहानी पढ़ने के लिए foundora.in पर जाएं