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कटारिया K 💌 S राजपूत
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कटारिया K 💌 S राजपूत
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6 घंटे पहले
#😍स्टेटस की दुनिया🌍 #😃 शानदार स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस #📖 कविता और कोट्स✒️ *मैं कौन हूँ?* *(Who Am I)* *[मन का अंतरद्वंद]* -------------------- *सेवा निवृत्ति के बाद,* *न कोई नौकरी,* *न कोई दिनचर्या,* *और एक शांत घर।* *जो अब सिर्फ,* *सन्नाटे की गूंज है! बच्चे सभी अपने परिवार में मस्त व्यस्त हैं। अब उनकी भी उत्तरदायित्व भारी भरकम है। *मैंने अंततः* *अपने असली अस्तित्व को,* *खोजना शुरू किया।।* *मैं कौन हूँ?* *मैंने बंगले बनवाए,* *छोटे-बड़े कई निवेश किए।* *पर आज चार दीवारों में,* *सिमट गया हूँ।।* *साइकिल से मोपेड,* *मोपेड से बाइक।* *बाइक से कार तक की रफ्तार,* *और स्टाइल का पीछा किया।* *पर अब धीरे-धीरे चलता हूँ,* *वो भी अकेले,* *अपने कमरे के भीतर।।* *प्रकृति मुस्कराई और पूछा,* *तुम कौन हो, प्रिय मित्र?* *मैंने कहा -* *मैं...! बस मैं हूँ...!।* *राज्य देखे, देश विदेश देखे,* *महाद्वीपों की सैर की।* *पर आज मेरी यात्रा,* *ड्राइंग रूम से* *रसोई तक सीमित है।।* *संस्कृतियाँ,* *और परंपराएँ सीखीं।* *पर अब केवल,* *अपने ही परिवार को,* *समझने की इच्छा है।।* *प्रकृति फिर मुस्कराई,* *तुम कौन हो, प्रिय मित्र?* *मैंने उत्तर दिया,* *मैं...! बस मैं हूँ...!!* *कभी जन्म दिन,* *सगाई, शादियाँ,* *धूमधाम से मनाईं।* *पर आज,* *सब्ज़ियाँ खरीदने के लिए,* *सिक्के गिनता हूँ।।* *प्रकृति ने फिर पूछा,* *तुम कौन हो, प्रिय मित्र?* *मैंने कहा,* *मैं...! बस मैं हूँ...!!* *सोना, चाँदी, हीरे,* *लॉकर्स में,* *चुपचाप पड़े हैं।* *सूट-ब्लेज़र,* *अलमारी में टंगे हैं,* *बिना छुए।* *पर अब मैं,* *नरम सूती कपड़ों में,* *जीता हूँ,* *सादा और आज़ाद।।* *कभी अंग्रेज़ी, संस्कृत, गुजराती, मराठी *व हिंदी में दक्ष था।* *अब तो केवल माँ की बोली में,* *सुकून मिलता है।।* *काम के सिलसिलों में,* *नगर नगर देश-देश घूमता रहा।* *अब उन मुनाफ़ों,* *और नुकसानों को,* *यादों में तौलता हूँ।।* *व्यवसाय चलाया,* *परिवार बसाया,* *अनेक रिश्ते बनाए।* *पर अब,* *मेरे सबसे प्रिय साथी,* *पड़ोस के,* *वो स्नेही बुज़ुर्ग हैं।।* *कभी नियमों का,* *पालन किया।* *शिक्षा में आगे बढ़ा।* *पर अब समझ आया,* *कि वास्तव में,* *मायने क्या रखता है?* *ज़िंदगी की,* *हर ऊँच-नीच के बाद।* *एक शांत पल में,* *मेरी आत्मा ने मुझसे,* *फुसफुसा कर कहा --* *हे यात्री,* *बस अब तैयार हो जा,* *अंतिम यात्रा की तैयारी कर। *प्रकृति ने कोमलता से,* *मुस्कराते हुए पूछा -- अब बताओ *तुम कौन हो, प्रिय मित्र?* *और मैंने उत्तर दिया --* *हे प्रकृति,* *तुम मैं हो और मैं तुम।* *कभी मैं,* *आकाश में उड़ता था।* *अब ज़मीन को,* *सम्मान से छूता हूँ।* *मुझे क्षमा करो,* *एक और मौका दो जीने का।*पैसा कमाने की मशीन नहीं,* *एक सच्चा इंसान बनकर,* *मूल्यों के साथ,* *परिवार के साथ,* *प्यार से जीने का।।*
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