जिस तरह प्रभु राम जी की सेना में वानर, भालू और गिलहरी ने सत्य और धर्म का साथ दिया था, वैसे ही महाराणा प्रताप के स्वाभिमान की लड़ाई में घोड़ा चेतक और हाथी रामप्रसाद ने भी इतिहास रच दिया।
चेतक ने अंतिम सांस तक अपने स्वामी का साथ निभाया, और रामप्रसाद ने अन्न-जल का त्याग कर भूखे रहकर अपने प्राण त्याग दिए, पर मुगलों का दिया हुआ खाना स्वीकार नहीं किया।
ये सिर्फ पशु नहीं थे, बल्कि वफादारी, साहस और स्वाभिमान की जीवित मिसाल थे, जिन्होंने सिखा दिया कि अपने धर्म और स्वाभिमान के लिए हमेशा अडिग रहना चाहिए।
इतिहास के पन्नों में उतना नहीं दिखाया गया, जितना महाराणा प्रताप आपका बलिदान था। #🚩जय श्री राम