পূর্ণ পরমাত্মা মাতৃগর্ভ থেকে জন্ম নেন না, না তাঁর মৃত্যু হয়। তিনি সশরীরে আসেন এবং সশরীরেই গমন করেন।
আজ থেকে প্রায় ৫০৮ বছর আগে (মাঘ, শুক্ল একাদশী, ভি. স. ১৫৭৫, সন ১৫১৮) পরমেশ্বর কবীর জী উত্তরপ্রদেশের মগহর নগরী থেকে লক্ষ লক্ষ মানুষের সামনে সশরীরে সৎলোক (ঋতধাম)-এ গমন করেছিলেন। এই উপলক্ষে সন্ত রামপাল জী মহারাজের সান্নিধ্যে 27 থেকে 29 জানুয়ারি 2026 তারিখ সৎলোক আশ্রমসমূহে নির্বাণ দিবস উপলক্ষে তিন দিবসব্যাপী মহাসমাগমের আয়োজন করা হয়েছে। এতে সন্ত গরিবদাস জী মহারাজের অমৃতবাণীর অখণ্ড পাঠ, রক্তদান শিবির, পণমুক্ত বিবাহ, আধ্যাত্মিক প্রদর্শনী, নিঃশুল্ক নামদীক্ষা ও শুদ্ধ দেশি ঘি দ্বারা প্রস্তুত বিশাল ভাণ্ডারার মতো ভব্য কর্মসূচি অনুষ্ঠিত হবে। এই দিব্য ভাণ্ডারায় সমগ্র বিশ্ব সপরিবারে সাদর আমন্ত্রিত।
पूर्ण परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं, ना ही उनकी मृत्यु होती है। वे सशरीर आते हैं और सशरीर जाते हैं।
आज से लगभग 508 वर्ष पूर्व (माघ, शुक्ल एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को) परमेश्वर कबीर जी ने उत्तरप्रदेश के मगहर कस्बे से लाखों लोगों के सामने सशरीर सतलोक (ऋतधाम) को प्रस्थान किया था। इसी उपलक्ष्य में संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में सतलोक आश्रमों में 27 से 29 जनवरी 2026 को निर्वाण दिवस के अवसर पर 3 दिवसीय महासमागम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज की अमृतवाणी का अखंड पाठ, रक्तादान शिविर, दहेजमुक्त विवाह, आध्यात्मिक प्रदर्शनी, निःशुल्क नामदीक्षा, शुद्ध देसी घी से निर्मित विशाल भंडारा जैसे भव्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दिव्य भंडारे में संपूर्ण विश्व सह परिवार सादर आमंत्रित है।
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