ईश्वर की कृपा से सब कुछ होने के बाबजूद भी अगर शौक करेगे तो बेईमानी की कमाई से लूट की कमाई से तो ये गलतियां उनकी नहीं होती विरासत में जैसा बाप दादा करते आते है वैसा ही फिर औलाद करती है धर्म के रास्ते पर चलकर कभी भी शौक नहीं पाल सकते ऐसे लोग किस ईश्वर की पूजा पाठ करते है किस देवी के नाम का जगराता कराते है किस भगवान के नाम पर भंडारा कराते है ऐसे ईश्वर ख़ुश थोड़ी नहीं होता क्योंकि उसमे मेहनत की कमाई का अंश नहीं होता इसलिए ईश्वर ऐसे भोजन का भोग स्वीकार नहीं करता जैसे भगवान श्री कृष्ण ने कौरवों के यहाँ नहीं खाया और विदुर जी के घर पहुंच कर भोग छिलके लगाया था ईश्वर
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