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DesiAlchemist on Instagram: "अपच, गैस, अफारा और भोजन के बाद भारीपन आज सामान्य समस्याएँ बन चुकी हैं, परंतु आयुर्वेद इन्हें रोग नहीं, बल्कि जठराग्नि के असंतुलन का संकेत मानता है। जब अग्नि मंद होती है, तब भोजन पूर्ण रूप से पच नहीं पाता और आम का निर्माण होता है, जो आगे चलकर अनेक विकारों का कारण बनता है। आयुर्वेद का दृष्टिकोण स्पष्ट है ,अपच का समाधान दवाओं से नहीं, बल्कि अग्नि को पुनः संतुलित और प्रज्वलित करने से होता है। शास्त्रीय दीपन–पाचन द्रव्य जैसे सोंठ, पिप्पली, अजवाइन, जीरा, हींग और काली मिर्च भोजन के साथ लिए जाने पर पाचन रसों को सक्रिय करते हैं, वायु को शांत करते हैं और पाचन को सहज बनाते हैं। घृत इन औषध द्रव्यों को सूक्ष्म स्तर तक पहुँचाकर उनके प्रभाव को समर्थ बनाता है। यह सरल लेकिन गहन आयुर्वेदिक सिद्धांत है , जब अग्नि संतुलित होती है, तब शरीर स्वयं स्वास्थ्य, ऊर्जा और स्थिरता की ओर अग्रसर होता है। यही कारण है कि आयुर्वेद भोजन और अग्नि को उपचार की प्रथम सीढ़ी मानता है। Desi Alchemist Ayurveda & Rasashastra for Every Home #Ayurveda #Agni #DeepanPachan #DigestiveHealth #AyurvedicWisdom Rasashastra DesiAlchemist"
395 likes, 5 comments - desi_alchemist on February 6, 2026: "अपच, गैस, अफारा और भोजन के बाद भारीपन आज सामान्य समस्याएँ बन चुकी हैं, परंतु आयुर्वेद इन्हें रोग नहीं, बल्कि जठराग्नि के असंतुलन का संकेत मानता है। जब अग्नि मंद होती है, तब भोजन पूर्ण रूप से पच नहीं पाता और आम का निर्माण होता है, जो आगे चलकर अनेक विकारों का कारण बनता है। आयुर्वेद का दृष्टिकोण स्पष्ट है ,अपच का समाधान दवाओं से नहीं, बल्कि अग्नि को पुनः संतुलित और प्रज्वलित करने से होता है। शास्त्रीय दीपन–पाचन द्रव्य जैसे सोंठ, पिप्पली, अजवाइन, जीरा, हींग और काली मिर्च भोजन के साथ लिए जाने पर पाचन रसों को सक्रिय करते हैं, वायु को शांत करते हैं और पाचन को सहज बनाते हैं। घृत इन औषध द्रव्यों को सूक्ष्म स्तर तक पहुँचाकर उनके प्रभाव को समर्थ बनाता है। यह सरल लेकिन गहन आयुर्वेदिक सिद्धा
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DesiAlchemist on Instagram: "आयुर्वेद में कफ को न तो रोग कहा गया है, न ही शत्रु बल्कि असंतुलन की अवस्था माना गया है। जब अग्नि मंद होती है, तो कफ शरीर में ठहराव, भारीपन और निष्क्रियता लाता है। यहीं से जकड़न, सुस्ती और ऊर्जा की कमी जन्म लेती है। दालचीनी जल उसी ठहराव को तोड़ने का एक शास्त्रसम्मत और अनुशासित उपाय है। यह कोई त्वरित चमत्कार नहीं, बल्कि अग्नि को जाग्रत करने की प्रक्रिया है जहाँ शरीर स्वयं संतुलन की ओर लौटता है। आयुर्वेद में शक्ति का अर्थ अति नहीं, सही मात्रा और सही समय है। Desi Alchemist Ayurveda & Rasashastra for Every Home Desi Alchemist #DalchiniWater #AgniDeepana #KaphaBalance #AyurvedicRoutine #DesiAlchemist"
1,047 likes, 7 comments - desi_alchemist on January 23, 2026: "आयुर्वेद में कफ को न तो रोग कहा गया है, न ही शत्रु बल्कि असंतुलन की अवस्था माना गया है। जब अग्नि मंद होती है, तो कफ शरीर में ठहराव, भारीपन और निष्क्रियता लाता है। यहीं से जकड़न, सुस्ती और ऊर्जा की कमी जन्म लेती है। दालचीनी जल उसी ठहराव को तोड़ने का एक शास्त्रसम्मत और अनुशासित उपाय है। यह कोई त्वरित चमत्कार नहीं, बल्कि अग्नि को जाग्रत करने की प्रक्रिया है जहाँ शरीर स्वयं संतुलन की ओर लौटता है। आयुर्वेद में शक्ति का अर्थ अति नहीं, सही मात्रा और सही समय है। Desi Alchemist Ayurveda & Rasashastra for Every Home Desi Alchemist #DalchiniWater #AgniDeepana #KaphaBalance #AyurvedicRoutine #DesiAlchemist".
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DesiAlchemist on Instagram: "अम्लता, जलन और खट्टी डकार अक्सर केवल पेट की समस्या नहीं होती यह शरीर में बढ़े हुए पित्त का संकेत होती है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन-अग्नि अनियंत्रित हो जाती है, तो वही अग्नि जलन बनकर शरीर को थकाने लगती है। सौंफ जल उस अतिरिक्त गर्मी को दबाता नहीं, बल्कि उसे शांत और संतुलित करता है। शीतल, मधुर और पित्त-शामक गुणों से युक्त सौंफ जल पेट, आँखों और मन—तीनों को ठंडक देता है। यही कारण है कि इसे पित्त-प्रकृति और अम्लता से परेशान व्यक्तियों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यह कोई तात्कालिक उपाय नहीं, बल्कि शरीर के स्वाभाविक संतुलन की ओर लौटने का एक सरल आयुर्वेदिक मार्ग है। Ayurveda & Rasashastra for Every Home Desi Alchemist #AyurvedaWisdom #PittaBalance #SaunfWater #DigestiveHealth #DesiAlchemist"
1,243 likes, 11 comments - desi_alchemist on January 18, 2026: "अम्लता, जलन और खट्टी डकार अक्सर केवल पेट की समस्या नहीं होती यह शरीर में बढ़े हुए पित्त का संकेत होती है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन-अग्नि अनियंत्रित हो जाती है, तो वही अग्नि जलन बनकर शरीर को थकाने लगती है। सौंफ जल उस अतिरिक्त गर्मी को दबाता नहीं, बल्कि उसे शांत और संतुलित करता है। शीतल, मधुर और पित्त-शामक गुणों से युक्त सौंफ जल पेट, आँखों और मन—तीनों को ठंडक देता है। यही कारण है कि इसे पित्त-प्रकृति और अम्लता से परेशान व्यक्तियों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यह कोई तात्कालिक उपाय नहीं, बल्कि शरीर के स्वाभाविक संतुलन की ओर लौटने का एक सरल आयुर्वेदिक मार्ग है। Ayurveda & Rasashastra for Every Home Desi Alchemist #AyurvedaWisdom #PittaBalance #SaunfWater #DigestiveHealth #De
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DesiAlchemist on Instagram: "दमा (Asthma) केवल एक श्वसन रोग नहीं यह शरीर में कफ और वात के दीर्घकालिक असंतुलन का संकेत है। जब कफ श्वसन मार्ग में अवरोध पैदा करता है और वात उसकी गति को अस्थिर करता है, तब साँस फूलना, घरघराहट और छाती में जकड़न जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। आयुर्वेद में ऐसे विकारों को केवल दबाने के बजाय अग्नि, कफ और वात के संतुलन के माध्यम से समझा और संभाला जाता है। इस पोस्ट में बताए गए सूत्र • तात्कालिक राहत में सहायक • श्वसन मार्ग की सफ़ाई में सहयोगी • और दीर्घकालिक संतुलन के लिए उपयोगी माने गए हैं। महत्वपूर्ण ये उपाय मुख्य चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं हैं। गंभीर दमा, एलर्जी-आधारित अस्थमा या नियमित इनहेलर उपयोग की स्थिति में वैद्य या चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है। शुद्ध औषधि तभी फल देती है जब उसके साथ आहार, दिनचर्या और अनुशासन भी शुद्ध हों। Desi Alchemist Ayurveda & Rasashastra for Every Home #AsthmaCare #AyurvedaHindi #ShwasSwasthya #KaphVataBalance #DesiAlchemist"
312 likes, 1 comments - desi_alchemist on January 16, 2026: "दमा (Asthma) केवल एक श्वसन रोग नहीं यह शरीर में कफ और वात के दीर्घकालिक असंतुलन का संकेत है। जब कफ श्वसन मार्ग में अवरोध पैदा करता है और वात उसकी गति को अस्थिर करता है, तब साँस फूलना, घरघराहट और छाती में जकड़न जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। आयुर्वेद में ऐसे विकारों को केवल दबाने के बजाय अग्नि, कफ और वात के संतुलन के माध्यम से समझा और संभाला जाता है। इस पोस्ट में बताए गए सूत्र • तात्कालिक राहत में सहायक • श्वसन मार्ग की सफ़ाई में सहयोगी • और दीर्घकालिक संतुलन के लिए उपयोगी माने गए हैं। महत्वपूर्ण ये उपाय मुख्य चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं हैं। गंभीर दमा, एलर्जी-आधारित अस्थमा या नियमित इनहेलर उपयोग की स्थिति में वैद्य या चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है। शुद्ध औषधि तभी फल देती है जब
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