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एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯कुंडली दोष #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 वास्तु टिप्स आइए आज बात करते हैं कुछ बृक्षों के बारे में की अगर घर के आस पास कौन सा बृक्ष है तो वह क्या फल देगा जैसे घर के पूर्व में पीपल है तो वो ग्रह स्वामी को भय और निर्धनता देता है। पूर्व में बरगद है तो ग्रह स्वामी की हर कामना पूरी होती है शर्त यह है की कामना अछि होनी चाहिए। अग्नि कोण यानि पूर्व दक्षिण कोने में अगर अनार का दरख्त हो तो वो शुभ होता है। अग्नि कोण में अगर बट बृक्ष,पीपल,पाकड़,या गूलर हो तो वो पीड़ा और मृत्यु देने वाले होते है। अगर दक्षिण में पाकड़ है तो रोग और पराजय देगा और दक्षिण में गूलर का पेड़ है तो वो शुभ फलदायक होता है। पच्छिम में बट बृक्ष है तो राज्य पक्ष से पीड़ा या स्त्री नाश और कुलनाशक भी होता है। पच्छिम में आम का पेड़ धन को खराब करता है उत्तर में गूलर है तो नेत्र रोग देता है। आपके घर में दक्षिण में अगर तुलसी है तो उस घर को यम यत्न देता है उन पर तंत्र बहुत जल्दी असर करता है आए दिन घर के सदस्यों को नज़र लगी रहती है धन खराब जगह इस्तेमाल होता है। घर में कांटे वाले बृक्ष कहीं भी हो तो शत्रु से भय रहता है शत्रु बिना वजह परेशांन करते है घर में दूध वाले पेड़ हो तो धन का नाश करते है। अगर घर में फल दार पेड़ है तो संतान पक्ष से परेशानी रहती है। अगर दिन के दुसरे और तीसरे पहर घर पर किसी भी बृक्ष की छाया पड़ती है तो दुख और रोग कर्क होती है। घर में पूर्व,उत्तर और ईशान में अगर वाटिका हो तो बहुत ही शुभ फलदायक होती है आज के लिए बस इतना ही आगे और भी ऐसी ही जानकारिया आप को देते रहेंगे
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी वास्तु टिप्स आइए आज बात करते हैं कुछ बृक्षों के बारे में की अगर घर के आस पास कौन सा बृक्ष है तो वह क्या फल देगा जैसे घर के पूर्व में पीपल है तो वो ग्रह स्वामी को भय और निर्धनता देता है। पूर्व में बरगद है तो ग्रह स्वामी की हर कामना पूरी होती है शर्त यह है की कामना अछि होनी चाहिए। अग्नि कोण यानि पूर्व दक्षिण कोने में अगर अनार का दरख्त हो तो वो शुभ होता है। अग्नि कोण में अगर बट बृक्ष,पीपल,पाकड़,या गूलर हो तो वो पीड़ा और मृत्यु देने वाले होते है। अगर दक्षिण में पाकड़ है तो रोग और पराजय देगा और दक्षिण में गूलर का पेड़ है तो वो शुभ फलदायक होता है। पच्छिम में बट बृक्ष है तो राज्य पक्ष से पीड़ा या स्त्री नाश और कुलनाशक भी होता है। पच्छिम में आम का पेड़ धन को खराब करता है उत्तर में गूलर है तो नेत्र रोग देता है। आपके घर में दक्षिण में अगर तुलसी है तो उस घर को यम यत्न देता है उन पर तंत्र बहुत जल्दी असर करता है आए दिन घर के सदस्यों को नज़र लगी रहती है धन खराब जगह इस्तेमाल होता है। घर में कांटे वाले बृक्ष कहीं भी हो तो शत्रु से भय रहता है शत्रु बिना वजह परेशांन करते है घर में दूध वाले पेड़ हो तो धन का नाश करते है। अगर घर में फल दार पेड़ है तो संतान पक्ष से परेशानी रहती है। अगर दिन के दुसरे और तीसरे पहर घर पर किसी भी बृक्ष की छाया पड़ती है तो दुख और रोग कर्क होती है। घर में पूर्व,उत्तर और ईशान में अगर वाटिका हो तो बहुत ही शुभ फलदायक होती है आज के लिए बस इतना ही आगे और भी ऐसी ही जानकारिया आप को देते रहेंगे
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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #🔯कुंडली दोष #🔯वास्तु दोष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 ज्योतिषी टिप्स धन की मनोकामना पूरी करने के लिए मंगलवार के दिन 22 पीपल के पत्ते लें। उन्हें धोकर रखें। इसके बाद पूर्व दिशा में मुंह करके हर पत्ते पर "राम" लिखें तथा इन्हें उसी दिन हनुमानजी पर चढ़ा आए। आपको तुरंत ही धन लाभ होना शुरू हो जाएगा। ध्यान रखें यह प्रयोग केवल मंगलवार के दिन ही आरंभ होना चाहिए। ऋण मुक्ति के लिए शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा के बीच का समय) में मंगलवार को आटे में गुड़ मिलाकर पुए बनाकर हनुमानजी के मंदिर में चढ़ाएं और गरीबों को खिलाएं। इससे सभी कर्जे दूर हो जाएंगे। घर में झगड़ा बंद करवाने के लिए यदि किसी के घर में बहुत ज्यादा क्लेश या झगड़ा रहता है तो वह इस उपाय को कर सकता है। जब भी घर में आटा पिसवाना हो तो केवल सोमवार को ही पिसवाएं। पिसवाने से पहले उसमें थोड़े से काले चने डाल दें। इस मिश्रित आटे को ज्यों-ज्यों घर के सभी लोग खाएंगे, घर के सभी झगड़े दूर हो जाएंगे।
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी ज्योतिषी टिप्स धन की मनोकामना पूरी करने के लिए मंगलवार के दिन 22 पीपल के पत्ते लें। उन्हें धोकर रखें। इसके बाद पूर्व दिशा में मुंह करके हर पत्ते पर "राम" लिखें तथा इन्हें उसी दिन हनुमानजी पर चढ़ा आए। आपको तुरंत ही धन लाभ होना शुरू हो जाएगा। ध्यान रखें यह प्रयोग केवल मंगलवार के दिन ही आरंभ होना चाहिए। ऋण मुक्ति के लिए शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा के बीच का समय) में मंगलवार को आटे में गुड़ मिलाकर पुए बनाकर हनुमानजी के मंदिर में चढ़ाएं और गरीबों को खिलाएं। इससे सभी कर्जे दूर हो जाएंगे। घर में झगड़ा बंद करवाने के लिए यदि किसी के घर में बहुत ज्यादा क्लेश या झगड़ा रहता है तो वह इस उपाय को कर सकता है। जब भी घर में आटा पिसवाना हो तो केवल सोमवार को ही पिसवाएं। पिसवाने से पहले उसमें थोड़े से काले चने डाल दें। इस मिश्रित आटे को ज्यों-ज्यों घर के सभी लोग खाएंगे, घर के सभी झगड़े दूर हो जाएंगे।
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯कुंडली दोष #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 KITCHAN (घर का बहुत ही महत्वपूरण स्थान होता है रसोई घर) किचन की कुआलिटी क्या होती है। किचन से आपके खाने ,आपके बारे और आपके व्यव्हार के बारे में बहुत कुछ पता चल जाता है। किचन वह जगह है यहाँ खाना बनाया जाता है और हम या हमारे मेहमान जो खाना खाते है खाना चाहे जितना मर्ज़ी बढ़िया बना हो अगर उसे किसी ने स्वाद से अछि तरह खाया नही तो उसका कोई फायदा नही खाना अच्छा स्वादिष्ट और अछि तरह पचे और वो पोष्टिक भी हो और उससे हमे तंदरुस्ती मिले दूसरी बात हमारे घर की रसोई चाहे जितनी मर्ज़ी बढ़ी हो या छोटी इससे कोई मतलब नही यहाँ सिर्फ यह देखना है की हमारा चूल्हा किस दिशा में है यहाँ सिर्फ चूल्हे के हिसाब से ही सारी प्रिडिक्शन होती है। NORTH :-यहाँ पर किचन है तो धन की कमी रहेगी यहाँ अग्नि से ऑपर्चुनिटी में कमी आएगी पर एक चीज़ है की यहाँ पर मिर्च मसाले वाले खाने में भी रस होगा क्योंकि यह जल का एरिया है NNE :-यहां पर अग्नि होने से बीमारी पीछा नही छोड़ेगी गुर्दे पर ज्यादा असर देती है किडनी फेल तक हो जाती है और पेशाब रूक रूक के आना NE :-हर वक्त भ्रम में रहना वहम हो जाना किसी भी तरह का वहम की मुझे कोई बीमारी तो नही है रोज़ाना का व्यवहार खराब होना और खाना भी बेसुआद ही बनता है ENE :-यहाँ अग्नि है तो हमे हर वक्त मनोरंजन के साधनो की ललक लगी रहती है पर हम कर नही पाते जैसे आज पति के साथ कहीं बाहर जाने का प्रोग्राम बनाया पर पति ही लेट हो गए या बच्चों ने कहा की इस sunday को कही बाहर पिकनिक मनाने चलते है या मूवी देखने चलते है पर किसी वजह से नही जा पाते EAST :-सामाजिक दायरा या सोशल एक्टिविटी या पैसे के लिए बहुत अच्छा स्थान नही है यहाँ पर रसोई है तो आप आध्यात्मिक एक्टिविटी में ज्यादा भाग ले सकते है या किसी मंदिर के या किसी ऐसे ट्रस्ट के मेंबर या ट्रस्टी या प्रेजिडेंट हो सकते है ESE :-यहाँ पर शुगर टेंशन बीपी बढ़ेगा यहाँ रसोई है तो बात बात पर बिगड़ जाना बिना बात के गुस्सा करना और शुगर या हाई ब्लूडप्रेशर रहना बिना बात के हाइपर होना आदि हो सकता है SE :-काम करने की ऊर्जा आती है और पैसे के लिए भी यह एरिया किचन के लिए अच्छा है SSE :-यहाँ बना हुआ खाना अछि तरह पचेगा और हिम्मत बढ़ेगी निडर होना पैसा अच्छा होगा SOUTH :-name fame बढ़ेगा यहां का बना खाना खा कर चैन की नींद आएगी SSW :-यहां का खाना खा कर अक्सर पेट खराब रहता है और खाना खराब भी ज्यादा होता है खाना बना तो लिया पर अछि तरह किसी ने खाया नही और फेंकना पढ़ा पिता पुत्र का रिश्ता खराब ऊँची बोलना एनर्जी वेस्ट करना SW :-यहाँ पर स्किल्स अच्छे नही होते शादी लेट होना बंश वृद्धि नही हो पाती रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार नही होता ऐसे लोग किसी के साथ भी अच्छे सम्बन्ध नही बना कर रहते WSW :-यहाँ पर किचन होने से सेविंग खत्म हो सकती है बच्चों की पढाई में भी अड़चन आती है बच्चों के मार्क्स अच्छे नही आते WEST :-इस जोन में हर एक्टिविटी अच्छे रिजल्ट देती है ऐसे आदमी के पास काफी दौलत होगी खाना अच्छे से लगेगा भी और पचेगा भी WNW :-यहाँ पर पति और पत्नी के बीच अक्सर झगडे होते रहेंगे पत्नी पति की कोई न कोई कमी निकालती ही रहेगी और ताने ही मारती रहती है NW :-बैंक की या किसी रिश्तेदार की किसी तरह की स्पोट नही मिल पाती यहाँ टाइम पर कोई मदद नही करेगा NNW :-यहाँ पर किचन है तो पति पत्नी के बीच अलगाव तक हो सकता है एक पर्सन अच्छा है तो दूसरा खराब ही होगा क्रमशः इसके बाद हम बात करेंगे अतिथि कक्ष की यानि ( guest room ) की NOTE :--जैसे मैंने पहले भी लिखा था की यह जो हमने आपको बताया है अगर किसी की रसोई इनमे से जो बुरे जोन हमने बताये है वहां पर है और उस पर्सन को उसके अच्छे रिजल्ट मिल रहे है तो उस जगह से रसोई हटाने की जरूरत नही है क्यों की कई वार ऑटोमैटिकली ही हमारे जोन की प्रभु की कृपा से रेमेडी हो जाती है हो सकता है की बुरे जोन को ख़त्म करने के लिए आपके किचन का रंग या आपके चूल्हे के निचे की सेल्फ का रंग उस जोन की नेगेटिव एनर्जी को ख़त्म कर रहा हो। इस लिए जैसे मैंने पहले भी कहा है की सबसे पहले आप दिक्कत देखो की क्या है फिर उस दिक्कत को जोन के हिसाब से देखो की जोन खराब है ? फिर रेमेडी करो अगर आपको कोई दिक्कत या परेशानी है तो हमसे फोन या व्हाट्सएप्प के माध्यम से बेजिझक सलाह ले सकते है 8708198423
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी KITCHAN (घर का बहुत ही महत्वपूरण स्थान होता है रसोई घर) किचन की कुआलिटी क्या होती है। किचन से आपके खाने ,आपके बारे और आपके व्यव्हार के बारे में बहुत कुछ पता चल जाता है। किचन वह जगह है यहाँ खाना बनाया जाता है और हम या हमारे मेहमान जो खाना खाते है खाना चाहे जितना मर्ज़ी बढ़िया बना हो अगर उसे किसी ने स्वाद से अछि तरह खाया नही तो उसका कोई फायदा नही खाना अच्छा स्वादिष्ट और अछि तरह पचे और वो पोष्टिक भी हो और उससे हमे तंदरुस्ती मिले दूसरी बात हमारे घर की रसोई चाहे जितनी मर्ज़ी बढ़ी हो या छोटी इससे कोई मतलब नही यहाँ सिर्फ यह देखना है की हमारा चूल्हा किस दिशा में है यहाँ सिर्फ चूल्हे के हिसाब से ही सारी प्रिडिक्शन होती है। NORTH :-यहाँ पर किचन है तो धन की कमी रहेगी यहाँ अग्नि से ऑपर्चुनिटी में कमी आएगी पर एक चीज़ है की यहाँ पर मिर्च मसाले वाले खाने में भी रस होगा क्योंकि यह जल का एरिया है NNE :-यहां पर अग्नि होने से बीमारी पीछा नही छोड़ेगी गुर्दे पर ज्यादा असर देती है किडनी फेल तक हो जाती है और पेशाब रूक रूक के आना NE :-हर वक्त भ्रम में रहना वहम हो जाना किसी भी तरह का वहम की मुझे कोई बीमारी तो नही है रोज़ाना का व्यवहार खराब होना और खाना भी बेसुआद ही बनता है ENE :-यहाँ अग्नि है तो हमे हर वक्त मनोरंजन के साधनो की ललक लगी रहती है पर हम कर नही पाते जैसे आज पति के साथ कहीं बाहर जाने का प्रोग्राम बनाया पर पति ही लेट हो गए या बच्चों ने कहा की इस sunday को कही बाहर पिकनिक मनाने चलते है या मूवी देखने चलते है पर किसी वजह से नही जा पाते EAST :-सामाजिक दायरा या सोशल एक्टिविटी या पैसे के लिए बहुत अच्छा स्थान नही है यहाँ पर रसोई है तो आप आध्यात्मिक एक्टिविटी में ज्यादा भाग ले सकते है या किसी मंदिर के या किसी ऐसे ट्रस्ट के मेंबर या ट्रस्टी या प्रेजिडेंट हो सकते है ESE :-यहाँ पर शुगर टेंशन बीपी बढ़ेगा यहाँ रसोई है तो बात बात पर बिगड़ जाना बिना बात के गुस्सा करना और शुगर या हाई ब्लूडप्रेशर रहना बिना बात के हाइपर होना आदि हो सकता है SE :-काम करने की ऊर्जा आती है और पैसे के लिए भी यह एरिया किचन के लिए अच्छा है SSE :-यहाँ बना हुआ खाना अछि तरह पचेगा और हिम्मत बढ़ेगी निडर होना पैसा अच्छा होगा SOUTH :-name fame बढ़ेगा यहां का बना खाना खा कर चैन की नींद आएगी SSW :-यहां का खाना खा कर अक्सर पेट खराब रहता है और खाना खराब भी ज्यादा होता है खाना बना तो लिया पर अछि तरह किसी ने खाया नही और फेंकना पढ़ा पिता पुत्र का रिश्ता खराब ऊँची बोलना एनर्जी वेस्ट करना SW :-यहाँ पर स्किल्स अच्छे नही होते शादी लेट होना बंश वृद्धि नही हो पाती रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार नही होता ऐसे लोग किसी के साथ भी अच्छे सम्बन्ध नही बना कर रहते WSW :-यहाँ पर किचन होने से सेविंग खत्म हो सकती है बच्चों की पढाई में भी अड़चन आती है बच्चों के मार्क्स अच्छे नही आते WEST :-इस जोन में हर एक्टिविटी अच्छे रिजल्ट देती है ऐसे आदमी के पास काफी दौलत होगी खाना अच्छे से लगेगा भी और पचेगा भी WNW :-यहाँ पर पति और पत्नी के बीच अक्सर झगडे होते रहेंगे पत्नी पति की कोई न कोई कमी निकालती ही रहेगी और ताने ही मारती रहती है NW :-बैंक की या किसी रिश्तेदार की किसी तरह की स्पोट नही मिल पाती यहाँ टाइम पर कोई मदद नही करेगा NNW :-यहाँ पर किचन है तो पति पत्नी के बीच अलगाव तक हो सकता है एक पर्सन अच्छा है तो दूसरा खराब ही होगा क्रमशः इसके बाद हम बात करेंगे अतिथि कक्ष की यानि ( guest room ) की NOTE :--जैसे मैंने पहले भी लिखा था की यह जो हमने आपको बताया है अगर किसी की रसोई इनमे से जो बुरे जोन हमने बताये है वहां पर है और उस पर्सन को उसके अच्छे रिजल्ट मिल रहे है तो उस जगह से रसोई हटाने की जरूरत नही है क्यों की कई वार ऑटोमैटिकली ही हमारे जोन की प्रभु की कृपा से रेमेडी हो जाती है हो सकता है की बुरे जोन को ख़त्म करने के लिए आपके किचन का रंग या आपके चूल्हे के निचे की सेल्फ का रंग उस जोन की नेगेटिव एनर्जी को ख़त्म कर रहा हो। इस लिए जैसे मैंने पहले भी कहा है की सबसे पहले आप दिक्कत देखो की क्या है फिर उस दिक्कत को जोन के हिसाब से देखो की जोन खराब है ? फिर रेमेडी करो अगर आपको कोई दिक्कत या परेशानी है तो हमसे फोन या व्हाट्सएप्प के माध्यम से बेजिझक सलाह ले सकते है 8708198423
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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #🔯कुंडली दोष #🔯वास्तु दोष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 शनि से बनने वाले योग *शनि का नाम सुनकर ही जातक भयभीत/चिंताग्रस्त हो जाते हैं, जबकि ऐसा सोचना हमेशा सत्य नहीं होता। शनि देव को भगवान शिव ने न्यायाधीश का पद दिया है और उसका दायित्व शनिदेव पूर्ण निष्ठा से व बिना किसी दुराग्रह के संपादित करते हैं। साढ़ेसाती व ढैय्या के समय जरूर कष्ट प्रदान करते हैं परंतु पूर्ण समय तक नहीं, उसमें भी प्रभाव मित्र राशि में है या शत्रु राशि में तथा उन पर किसी शुभ ग्रह का प्रभाव है या अशुभ ग्रह का, तदनुसार शुभ-अशुभ फल प्राप्त होते हैं। शनि से बनने वाले विभिन्न योगों का क्रमानुसार वर्णन इस प्रकार है-* *1. शशयोग: अगर शनि देव केंद्र स्थानों में स्वराशि का होकर बैठे हां (मकर, कुंभ) तो यह योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक नौकरों से अच्छी तरह काम लेता है, किसी संस्थान समूह या कस्बे का प्रमुख और राजा होता है एवं वह सब गुणों से युक्त सर्वसंपन्न होता है।* *2. राजयोग: अगर वृष लग्न में चंद्रमा हो, दशम में शनि हो, चतुर्थ में सूर्य तथा सप्तमेश गुरु हो तो यह योग बनता है। ऐसा जातक सेनापति/पुलिस कप्तान या विभाग का प्रमुख होता है।* *3. दीर्घ आयु योग: लग्नेश, अष्टमेश, दशमेश व शनि केंद्र त्रिकोण या लाभ भाव में (11वां भाव) हो तो दीर्घ आयु योग होता है।* *4. रवि योग: अगर सूर्य दशम भाव में हो और दशमेश तीसरे भाव में शनि के साथ बैठा है तो यह योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक उच्च विचारों वाला और सामान्य आहार लेने वाला होता है। जातक सरकार से लाभान्वित, विज्ञान से ओतप्रोत, कमल के समान आंखों व भरी हुई छाती वाला होता है।* *5. पशुधन लाभ योग: यदि चतुर्थ में शनि के साथ सूर्य तथा चंद्रमा नवम भाव में हो, एकादश स्थान में मंगल हो तो गाय भैंस आदि पशु धन का लाभ होता है।* *6. अपकीर्ति योग: अगर दशम में सूर्य व श्न हो व अशुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो तो इस योग का निर्माण होता है। इस प्रकार के जातक की ख्याति नहीं होती वरन् वह कुख्यात होता है।* *7. बंधन योग: अगर लग्नेश और षष्टेश केंद्र में बैठे हों और शनि या राहु से युति हो तो बंधन योग बनता है। इसमें जातक को कारावास काटना पड़ता है।* *8. धन योग: लग्न से पंचम भाव में शनि अपनी स्वराशि में हो और बुध व मंगल ग्यारहवें भाव में हों तो यह योग निर्मित होता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक महाधनी होता है। अगर लग्न में पांचवे घर में शुक्र की राशि हो तथा शुक्र पांचवे या ग्यारहवें भाव में हो तो धन योग बनता है। ऐसा जातक अथाह संपत्ति का मालिक होता है।* *9. जड़बुद्धि योग: अगर पंचमेश अशुभ ग्रह से दृष्ट हो या युति करता हो, शनि पंचम में हो तथा लग्नेश को शनि देखता हो तो इस योग का निर्माण होता है। इस योग में जन्म लेने वाले जातक की बुद्धि जड़ होती है।* *10. कुष्ठ योग: यदि मंगल या बुध की राशि लग्न में हो अर्थात मेष, वृश्चिक, मिथुन, कन्या लग्न में हो एवं लग्नेश चंद्रमा के साथ हो, इनके साथ राहु एवं शनि भी हो तो कुष्ठ रोग होता है। षष्ठ स्थान में चंद्र, शनि हो तो 55वें वर्ष में कुष्ठ की संभावना रहती है।* *11. वात रोग योग: यदि लग्न में एवं षष्ठ भाव में शनि हो तो 59 वर्ष में वात रोग होता है। जब बृहस्पति लग्न में हो व शनि सातवें में हो तो यह योग बनता है।* *12. दुर्भाग्य योग: (क) यदि नवम में शनि व चंद्रमा हो, लग्नेश नीच राशि में गया हो तो मनुष्य भीख मांग कर गुजारा करता है। (ख) यदि पंचम भाव में तथा पंचमेश या भाग्येश अष्टम में नीच राशिगत हो तो मनुष्य भाग्यहीन होता है।* *13. पापकर्म से धनार्जन योग: यदि द्वादश भाव में शनि-राहु के साथ मंगल हो तथा शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं हो तो पाप कार्यों से धन लाभ होता है।* *14. अंगहीन योग: दशम में चंद्रमा हो सप्तम में मंगल हो सूर्य से दूसरे भाव में शनि हो तो यही योग बनता है। इस योग में जातक अंगहीन हो जाता है।* *15. सदैव रोगी योग: यदि षष्ठभाव तथा षष्ठेश दोनों ही पापयुक्त हां और शनि राहु साथ हो तो सदैव रोगी होता है।* *16. मतिभ्रम योग: शनि लग्न में हो मंगल नवम पंचम या सप्तम में हो, चंद्रमा शनि के साथ बारहवं भाव में हों एवं चंद्रमा कमजोर हो तो यह योग बनता है।* *17. बहुपुत्र योग: अगर नवांश में राहु पंचम भाव में हो व शनि से संयुक्त हो तो इस योग का निर्माण होता है। इस योग में जन्म लेने वाले जातक के बहुत से पुत्र होते हैं।* *18. युद्धमरण योग: यदि मंगल छठे या आठवें भाव का स्वामी होकर छठे, आठवें या बारहवें भाव में शनि या राहु से युति करे तो जातक की युद्ध में मृत्यु होती है।* *19. नरक योग: यदि 12वें भाव में शनि, मंगल, सूर्य, राहु हो तथा व्ययेश अस्त हो तो मनुष्य नरक में जाता है और पुनर्जन्म लेकर कष्ट भोगता है।* *20. सर्प योग: यदि तीन पापग्रह शनि, मंगल, सूर्य कर्क, तुला, मकर राशि में हो या लगातार तीन केंद्रों में हो तो सर्पयोग होता है। यह एक अशुभ योग है।* *21. दत्तक पुत्र योग: शनि-मंगल यदि पांचवें भाव में हों तथा सप्तमेश 11वें भाव में हो, पंचमेश शुभ हो तो यह योग बनता है। नवम भाव में चर राशि में शनि से दृष्ट हो, द्वादशेश बलवान हो, तो जातक गोद जायेगा। यदि पांचवें भाव में ग्रह हो तथा पंचमेश व्यय स्थान में हो, लग्नेश व चंद्र बली हो तो जातक को गोद लिया पुत्र होगा।
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी शनि से बनने वाले योग *शनि का नाम सुनकर ही जातक भयभीत/चिंताग्रस्त हो जाते हैं, जबकि ऐसा सोचना हमेशा सत्य नहीं होता। शनि देव को भगवान शिव ने न्यायाधीश का पद दिया है और उसका दायित्व शनिदेव पूर्ण निष्ठा से व बिना किसी दुराग्रह के संपादित करते हैं। साढ़ेसाती व ढैय्या के समय जरूर कष्ट प्रदान करते हैं परंतु पूर्ण समय तक नहीं, उसमें भी प्रभाव मित्र राशि में है या शत्रु राशि में तथा उन पर किसी शुभ ग्रह का प्रभाव है या अशुभ ग्रह का, तदनुसार शुभ-अशुभ फल प्राप्त होते हैं। शनि से बनने वाले विभिन्न योगों का क्रमानुसार वर्णन इस प्रकार है-* *1. शशयोग: अगर शनि देव केंद्र स्थानों में स्वराशि का होकर बैठे हां (मकर, कुंभ) तो यह योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक नौकरों से अच्छी तरह काम लेता है, किसी संस्थान समूह या कस्बे का प्रमुख और राजा होता है एवं वह सब गुणों से युक्त सर्वसंपन्न होता है।* *2. राजयोग: अगर वृष लग्न में चंद्रमा हो, दशम में शनि हो, चतुर्थ में सूर्य तथा सप्तमेश गुरु हो तो यह योग बनता है। ऐसा जातक सेनापति/पुलिस कप्तान या विभाग का प्रमुख होता है।* *3. दीर्घ आयु योग: लग्नेश, अष्टमेश, दशमेश व शनि केंद्र त्रिकोण या लाभ भाव में (11वां भाव) हो तो दीर्घ आयु योग होता है।* *4. रवि योग: अगर सूर्य दशम भाव में हो और दशमेश तीसरे भाव में शनि के साथ बैठा है तो यह योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक उच्च विचारों वाला और सामान्य आहार लेने वाला होता है। जातक सरकार से लाभान्वित, विज्ञान से ओतप्रोत, कमल के समान आंखों व भरी हुई छाती वाला होता है।* *5. पशुधन लाभ योग: यदि चतुर्थ में शनि के साथ सूर्य तथा चंद्रमा नवम भाव में हो, एकादश स्थान में मंगल हो तो गाय भैंस आदि पशु धन का लाभ होता है।* *6. अपकीर्ति योग: अगर दशम में सूर्य व श्न हो व अशुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो तो इस योग का निर्माण होता है। इस प्रकार के जातक की ख्याति नहीं होती वरन् वह कुख्यात होता है।* *7. बंधन योग: अगर लग्नेश और षष्टेश केंद्र में बैठे हों और शनि या राहु से युति हो तो बंधन योग बनता है। इसमें जातक को कारावास काटना पड़ता है।* *8. धन योग: लग्न से पंचम भाव में शनि अपनी स्वराशि में हो और बुध व मंगल ग्यारहवें भाव में हों तो यह योग निर्मित होता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक महाधनी होता है। अगर लग्न में पांचवे घर में शुक्र की राशि हो तथा शुक्र पांचवे या ग्यारहवें भाव में हो तो धन योग बनता है। ऐसा जातक अथाह संपत्ति का मालिक होता है।* *9. जड़बुद्धि योग: अगर पंचमेश अशुभ ग्रह से दृष्ट हो या युति करता हो, शनि पंचम में हो तथा लग्नेश को शनि देखता हो तो इस योग का निर्माण होता है। इस योग में जन्म लेने वाले जातक की बुद्धि जड़ होती है।* *10. कुष्ठ योग: यदि मंगल या बुध की राशि लग्न में हो अर्थात मेष, वृश्चिक, मिथुन, कन्या लग्न में हो एवं लग्नेश चंद्रमा के साथ हो, इनके साथ राहु एवं शनि भी हो तो कुष्ठ रोग होता है। षष्ठ स्थान में चंद्र, शनि हो तो 55वें वर्ष में कुष्ठ की संभावना रहती है।* *11. वात रोग योग: यदि लग्न में एवं षष्ठ भाव में शनि हो तो 59 वर्ष में वात रोग होता है। जब बृहस्पति लग्न में हो व शनि सातवें में हो तो यह योग बनता है।* *12. दुर्भाग्य योग: (क) यदि नवम में शनि व चंद्रमा हो, लग्नेश नीच राशि में गया हो तो मनुष्य भीख मांग कर गुजारा करता है। (ख) यदि पंचम भाव में तथा पंचमेश या भाग्येश अष्टम में नीच राशिगत हो तो मनुष्य भाग्यहीन होता है।* *13. पापकर्म से धनार्जन योग: यदि द्वादश भाव में शनि-राहु के साथ मंगल हो तथा शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं हो तो पाप कार्यों से धन लाभ होता है।* *14. अंगहीन योग: दशम में चंद्रमा हो सप्तम में मंगल हो सूर्य से दूसरे भाव में शनि हो तो यही योग बनता है। इस योग में जातक अंगहीन हो जाता है।* *15. सदैव रोगी योग: यदि षष्ठभाव तथा षष्ठेश दोनों ही पापयुक्त हां और शनि राहु साथ हो तो सदैव रोगी होता है।* *16. मतिभ्रम योग: शनि लग्न में हो मंगल नवम पंचम या सप्तम में हो, चंद्रमा शनि के साथ बारहवं भाव में हों एवं चंद्रमा कमजोर हो तो यह योग बनता है।* *17. बहुपुत्र योग: अगर नवांश में राहु पंचम भाव में हो व शनि से संयुक्त हो तो इस योग का निर्माण होता है। इस योग में जन्म लेने वाले जातक के बहुत से पुत्र होते हैं।* *18. युद्धमरण योग: यदि मंगल छठे या आठवें भाव का स्वामी होकर छठे, आठवें या बारहवें भाव में शनि या राहु से युति करे तो जातक की युद्ध में मृत्यु होती है।* *19. नरक योग: यदि 12वें भाव में शनि, मंगल, सूर्य, राहु हो तथा व्ययेश अस्त हो तो मनुष्य नरक में जाता है और पुनर्जन्म लेकर कष्ट भोगता है।* *20. सर्प योग: यदि तीन पापग्रह शनि, मंगल, सूर्य कर्क, तुला, मकर राशि में हो या लगातार तीन केंद्रों में हो तो सर्पयोग होता है। यह एक अशुभ योग है।* *21. दत्तक पुत्र योग: शनि-मंगल यदि पांचवें भाव में हों तथा सप्तमेश 11वें भाव में हो, पंचमेश शुभ हो तो यह योग बनता है। नवम भाव में चर राशि में शनि से दृष्ट हो, द्वादशेश बलवान हो, तो जातक गोद जायेगा। यदि पांचवें भाव में ग्रह हो तथा पंचमेश व्यय स्थान में हो, लग्नेश व चंद्र बली हो तो जातक को गोद लिया पुत्र होगा।
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯कुंडली दोष #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 बाधक योग जन्म कुंडली में 6, 8, 12 स्थानों को अशुभ माना जाता है। मंगल, शनि, राहु-केतु और सूर्य को क्रूर ग्रह माना है। इनके अशुभ स्थिति में होने पर दांपत्य सुख में कमी आती है।सप्तमाधिपति द्वादश भाव में हो और राहू लग्न में हो, तो वैवाहिक सुख में बाधा होना संभव है। *सप्तम भावस्थ राहू युक्त द्वादशाधिपति से वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है। द्वादशस्थ सप्तमाधिपति और सप्तमस्थ द्वादशाधिपति से यदि राहू की युति हो तो दांपत्य सुख में कमी के साथ ही अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है।लग्न में स्थित शनि-राहू भी दांपत्य सुख में कमी करते हैं।* *सप्तमेश छठे, अष्टम या द्वादश भाव में हो, तो वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है।* *षष्ठेश का संबंध यदि द्वितीय, सप्तम भाव, द्वितीयाधिपति, सप्तमाधिपति अथवा शुक्र से हो, तो दांपत्य जीवन का आनंद बाधित होता है।* *छठा भाव न्यायालय का भाव भी है। सप्तमेश षष्ठेश के साथ छठे भाव में हो या षष्ठेश, सप्तमेश या शुक्र की युति हो, तो पति-पत्नी में न्यायिक संघर्ष होना भी संभव है।* *यदि विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करके उपरोक्त दोषों का निवारण करने के बाद ही विवाह किया गया हो, तो दांपत्य सुख में कमी नहीं होती है। किसी की कुंडली में कौन सा ग्रह दांपत्य सुख में कमी ला रहा है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।* *विवाह योग के लिये जो कारक मुख्य है वे इस प्रकार हैं-* *सप्तम भाव का स्वामी खराब है या सही है वह अपने भाव में बैठ कर या किसी अन्य स्थान पर बैठ कर अपने भाव को देख रहा है।* *सप्तम भाव पर किसी अन्य पाप ग्रह की द्रिष्टि नही है।कोई पाप ग्रह सप्तम में बैठा नही है।यदि सप्तम भाव में सम राशि है।* *सप्तमेश और शुक्र सम राशि में है।सप्तमेश बली है।सप्तम में कोई ग्रह नही है।* *किसी पाप ग्रह की द्रिष्टि सप्तम भाव और सप्तमेश पर नही है।* *दूसरे सातवें बारहवें भाव के स्वामी केन्द्र या त्रिकोण में हैं,और गुरु से द्रिष्ट है।* *सप्तमेश की स्थिति के आगे के भाव में या सातवें भाव में कोई क्रूर ग्रह नही है।* *विवाह नही होगा अगर—* *सप्तमेश शुभ स्थान पर नही है।* *सप्तमेश छ: आठ या बारहवें स्थान पर अस्त होकर बैठा है।सप्तमेश नीच राशि में है।* *सप्तमेश बारहवें भाव में है,और लगनेश या राशिपति सप्तम में बैठा है।* *चन्द्र शुक्र साथ हों,उनसे सप्तम में मंगल और शनि विराजमान हों।* *शुक्र और मंगल दोनों सप्तम में हों।* *शुक्र मंगल दोनो पंचम या नवें भाव में हों।* *शुक्र किसी पाप ग्रह के साथ हो और पंचम या नवें भाव में हो।* *शुक्र बुध शनि तीनो ही नीच हों।* *पंचम में चन्द्र हो,सातवें या बारहवें भाव में दो या दो से अधिक पापग्रह हों।सूर्य स्पष्ट और सप्तम स्पष्ट बराबर का हो।* *विवाह में देरी—* *सप्तम में बुध और शुक्र दोनो के होने पर विवाह वादे चलते रहते है,विवाह आधी उम्र में होता है।* *चौथा या लगन भाव मंगल (बाल्यावस्था) से युक्त हो,सप्तम में शनि हो तो कन्या की रुचि शादी में नही होती है।* *सप्तम में शनि और गुरु शादी देर से करवाते हैं।* *चन्द्रमा से सप्तम में गुरु शादी देर से करवाता है,यही बात चन्द्रमा की राशि कर्क से भी माना जाता है।* *सप्तम में त्रिक भाव का स्वामी हो,कोई शुभ ग्रह योगकारक नही हो,तो पुरुष विवाह में देरी होती है।* *सूर्य मंगल बुध लगन या राशिपति को देखता हो,और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो आध्यात्मिकता अधिक होने से विवाह में देरी होती है।* लगन में सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या शुभ ग्रह योग कारक नही हों,परिवार भाव में चन्द्रमा कमजोर हो तो विवाह नही होता है,अगर हो भी जावे तो संतान सुख प्राप्त नही होता।
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी बाधक योग जन्म कुंडली में 6, 8, 12 स्थानों को अशुभ माना जाता है। मंगल, शनि, राहु-केतु और सूर्य को क्रूर ग्रह माना है। इनके अशुभ स्थिति में होने पर दांपत्य सुख में कमी आती है।सप्तमाधिपति द्वादश भाव में हो और राहू लग्न में हो, तो वैवाहिक सुख में बाधा होना संभव है। *सप्तम भावस्थ राहू युक्त द्वादशाधिपति से वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है। द्वादशस्थ सप्तमाधिपति और सप्तमस्थ द्वादशाधिपति से यदि राहू की युति हो तो दांपत्य सुख में कमी के साथ ही अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है।लग्न में स्थित शनि-राहू भी दांपत्य सुख में कमी करते हैं।* *सप्तमेश छठे, अष्टम या द्वादश भाव में हो, तो वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है।* *षष्ठेश का संबंध यदि द्वितीय, सप्तम भाव, द्वितीयाधिपति, सप्तमाधिपति अथवा शुक्र से हो, तो दांपत्य जीवन का आनंद बाधित होता है।* *छठा भाव न्यायालय का भाव भी है। सप्तमेश षष्ठेश के साथ छठे भाव में हो या षष्ठेश, सप्तमेश या शुक्र की युति हो, तो पति-पत्नी में न्यायिक संघर्ष होना भी संभव है।* *यदि विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करके उपरोक्त दोषों का निवारण करने के बाद ही विवाह किया गया हो, तो दांपत्य सुख में कमी नहीं होती है। किसी की कुंडली में कौन सा ग्रह दांपत्य सुख में कमी ला रहा है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।* *विवाह योग के लिये जो कारक मुख्य है वे इस प्रकार हैं-* *सप्तम भाव का स्वामी खराब है या सही है वह अपने भाव में बैठ कर या किसी अन्य स्थान पर बैठ कर अपने भाव को देख रहा है।* *सप्तम भाव पर किसी अन्य पाप ग्रह की द्रिष्टि नही है।कोई पाप ग्रह सप्तम में बैठा नही है।यदि सप्तम भाव में सम राशि है।* *सप्तमेश और शुक्र सम राशि में है।सप्तमेश बली है।सप्तम में कोई ग्रह नही है।* *किसी पाप ग्रह की द्रिष्टि सप्तम भाव और सप्तमेश पर नही है।* *दूसरे सातवें बारहवें भाव के स्वामी केन्द्र या त्रिकोण में हैं,और गुरु से द्रिष्ट है।* *सप्तमेश की स्थिति के आगे के भाव में या सातवें भाव में कोई क्रूर ग्रह नही है।* *विवाह नही होगा अगर—* *सप्तमेश शुभ स्थान पर नही है।* *सप्तमेश छ: आठ या बारहवें स्थान पर अस्त होकर बैठा है।सप्तमेश नीच राशि में है।* *सप्तमेश बारहवें भाव में है,और लगनेश या राशिपति सप्तम में बैठा है।* *चन्द्र शुक्र साथ हों,उनसे सप्तम में मंगल और शनि विराजमान हों।* *शुक्र और मंगल दोनों सप्तम में हों।* *शुक्र मंगल दोनो पंचम या नवें भाव में हों।* *शुक्र किसी पाप ग्रह के साथ हो और पंचम या नवें भाव में हो।* *शुक्र बुध शनि तीनो ही नीच हों।* *पंचम में चन्द्र हो,सातवें या बारहवें भाव में दो या दो से अधिक पापग्रह हों।सूर्य स्पष्ट और सप्तम स्पष्ट बराबर का हो।* *विवाह में देरी—* *सप्तम में बुध और शुक्र दोनो के होने पर विवाह वादे चलते रहते है,विवाह आधी उम्र में होता है।* *चौथा या लगन भाव मंगल (बाल्यावस्था) से युक्त हो,सप्तम में शनि हो तो कन्या की रुचि शादी में नही होती है।* *सप्तम में शनि और गुरु शादी देर से करवाते हैं।* *चन्द्रमा से सप्तम में गुरु शादी देर से करवाता है,यही बात चन्द्रमा की राशि कर्क से भी माना जाता है।* *सप्तम में त्रिक भाव का स्वामी हो,कोई शुभ ग्रह योगकारक नही हो,तो पुरुष विवाह में देरी होती है।* *सूर्य मंगल बुध लगन या राशिपति को देखता हो,और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो आध्यात्मिकता अधिक होने से विवाह में देरी होती है।* लगन में सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या शुभ ग्रह योग कारक नही हों,परिवार भाव में चन्द्रमा कमजोर हो तो विवाह नही होता है,अगर हो भी जावे तो संतान सुख प्राप्त नही होता।