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एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपायमहालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए बहुत कम लोग जानते हैं। रावण सभी शास्त्रों का जानकार और श्रेष्ठ विद्वान था। रावण ने भी ज्योतिष और तंत्र शास्त्र की रचना की है। दशानन ने ऐसे कई उपाय बताए हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत रातोंरात बदल सकती है। यहां जानिए रावण संहिता के अनुसार कुछ ऐसे तांत्रिक उपाय जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत चमक सकती है... महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल थी। तंत्र शास्त्र का भी वह महाज्ञाता था। इसी वजह से जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह सहसा ही उससे मोहित हो जाता था। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि रावण का प्रभाव उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था। रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक तिलक की चर्चा की गई है। जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक...... 1. धन प्राप्ति का उपाय: किसी भी शुभ मुहूर्त में या किसी शुभ दिन में सुबह जल्दी उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे जाएं। किसी शांत एवं एकांत स्थान पर वट वृक्ष के नीचे चमड़े का आसन बिछाएं। आसन पर बैठकर धन प्राप्ति मंत्र का जप करें। धन प्राप्ति का मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ध्व: ध्व: स्वाहा। इस मंत्र का जप आपको 21 दिनों तक करना चाहिए। मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। 21 दिनों में अधिक से अधिक संख्या में मंत्र जप करें। जैसे ही यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपको अचानक धन प्राप्ति अवश्य कराएगा। 2.यदि किसी व्यक्ति को धन प्राप्त करने में बार-बार रुकावटें आ रही हों तो उसे यह उपाय करना चाहिए। यह उपाय 40 दिनों तक किया जाना चाहिए। इसे अपने घर पर ही किया जा सकता है। उपाय के अनुसार धन प्राप्ति मंत्र का जप करना है। प्रतिदिन 108 बार। मंत्र: ऊँ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं, श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा। इस मंत्र का जप नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो जाएगी और आपके धन में आ रही रुकावटें दूर होने लगेंगी। 3. यदि आप दसों दिशाओं से यानी चारों तरफ से पैसा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। यह उपाय दीपावली के दिन किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में विधि- विधान से महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के सो जाएं और सुबह जल्दी उठें। नींद से जागने के बाद पलंग से उतरे नहीं बल्कि यहां दिए गए मंत्र का जप 108 बार करें। मंत्र: ऊँ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा। शय्या पर मंत्र जप करने के बाद दसों दिशाओं में दस-दस बार फूंक मारें। इस उपाय से साधक को चारों तरफ से पैसा प्राप्त होता है 4.सफेद आंकड़े को छाया में सुखा लें। इसके बाद कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर इसे पीस लें और इसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का समाज में वर्चस्व हो जाता है। 5.यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। गड़ा धन प्राप्त करने के लिए यहां दिए गए मंत्र का जप दस हजार बार करना होगा। मंत्र: ऊँ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा। गड़े हुए धन के दर्शन करने के लिए विधि इस प्रकार है। किसी शुभ दिवस में यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या करें। मंत्र सिद्धि हो जाने के बाद जिस स्थान पर धन गड़ा हुआ है वहां धतुरे के बीज, हलाहल, सफेद घुघुंची, गंधक, मैनसिल, उल्लू की विष्ठा, शिरीष वृक्ष का पंचांग बराबर मात्रा में लें और सरसों के तेल में पका लें। इसके बाद इस सामग्री से गड़े धन की शंका वाले स्थान पर धूप-दीप ध्यान करें। यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या में करें। ऐसा करने पर उस स्थान से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का साया हट जाएगा। भूत- प्रेत का भय समाप्त हो जाएगा। साधक को भूमि में गड़ा हुआ धन दिखाई देने लगेगा। ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें। 6.शास्त्रों के अनुसार दूर्वा घास चमत्कारी होती है। इसका प्रयोग कई प्रकार के उपायों में भी किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति सफेद दूर्वा को कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध के साथ पीस लें और इसका तिलक लगाएं तो वह किसी भी काम में असफल नहीं होता है। 7.महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए यह तांत्रिक उपाय करें। किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, अक्षय तृतीया, होली आदि की रात यह उपाय किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में यह उपाय श्रेष्ठ फल देता है। इस उपाय के अनुसार आपको दीपावली की रात कुमकुम या अष्टगंध से थाली पर यहां दिया गया मंत्र लिखें। मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:। इस मंत्र का जप भी करना चाहिए। किसी साफ एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला या कमल गट्टे की माला के साथ मंत्र जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। अधिक से अधिक इस मंत्र की आपकी श्रद्धानुसार बढ़ा सकते हैं। इस उपाय से आपके घर में महालक्ष्मी की कृपा बरसने लगेगी। 8.अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें, लेप बना लें। इस लेप को लगाने से व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। सभी लोग इनके कहे को मानते हैं। 9.यदि आप देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की कृपा से अकूत धन संपत्ति चाहते हैं तो यह उपाय करें। उपाय के अनुसार आपको यहां दिए जा रहे मंत्र का जप तीन माह तक करना है। प्रतिदिन मंत्र का जप केवल 108 बार करें। मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा। मंत्र जप करते समय अपने पास धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। जब तीन माह हो जाएं तो यह कौड़ी अपनी तिजोरी में या जहां आप पैसा रखते हैं वहां रखें। इस उपाय से जीवनभर आपको पैसों की कमी नहीं होगी। 10.यदि आप घर या समाज या ऑफिस में लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू लेकर उसे बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें। इसके बाद इससे तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का आकर्षण बढ़ता है। #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए बहुत कम लोग जानते हैं। रावण सभी शास्त्रों का जानकार और श्रेष्ठ विद्वान था। रावण ने भी ज्योतिष और तंत्र शास्त्र की रचना की है। दशानन ने ऐसे कई उपाय बताए हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत रातोंरात बदल सकती है। यहां जानिए रावण संहिता के अनुसार कुछ ऐसे तांत्रिक उपाय जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत चमक सकती है... महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल थी। तंत्र शास्त्र का भी वह महाज्ञाता था। इसी वजह से जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह सहसा ही उससे मोहित हो जाता था। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि रावण का प्रभाव उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था। रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक तिलक की चर्चा की गई है। जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक...... 1. धन प्राप्ति का उपाय: किसी भी शुभ मुहूर्त में या किसी शुभ दिन में सुबह जल्दी उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे जाएं। किसी शांत एवं एकांत स्थान पर वट वृक्ष के नीचे चमड़े का आसन बिछाएं। आसन पर बैठकर धन प्राप्ति मंत्र का जप करें। धन प्राप्ति का मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ध्व: ध्व: स्वाहा। इस मंत्र का जप आपको 21 दिनों तक करना चाहिए। मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। 21 दिनों में अधिक से अधिक संख्या में मंत्र जप करें। जैसे ही यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपको अचानक धन प्राप्ति अवश्य कराएगा। 2.यदि किसी व्यक्ति को धन प्राप्त करने में बार-बार रुकावटें आ रही हों तो उसे यह उपाय करना चाहिए। यह उपाय 40 दिनों तक किया जाना चाहिए। इसे अपने घर पर ही किया जा सकता है। उपाय के अनुसार धन प्राप्ति मंत्र का जप करना है। प्रतिदिन 108 बार। मंत्र: ऊँ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं, श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा। इस मंत्र का जप नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो जाएगी और आपके धन में आ रही रुकावटें दूर होने लगेंगी। 3. यदि आप दसों दिशाओं से यानी चारों तरफ से पैसा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। यह उपाय दीपावली के दिन किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में विधि- विधान से महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के सो जाएं और सुबह जल्दी उठें। नींद से जागने के बाद पलंग से उतरे नहीं बल्कि यहां दिए गए मंत्र का जप 108 बार करें। मंत्र: ऊँ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा। शय्या पर मंत्र जप करने के बाद दसों दिशाओं में दस-दस बार फूंक मारें। इस उपाय से साधक को चारों तरफ से पैसा प्राप्त होता है 4.सफेद आंकड़े को छाया में सुखा लें। इसके बाद कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर इसे पीस लें और इसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का समाज में वर्चस्व हो जाता है। 5.यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। गड़ा धन प्राप्त करने के लिए यहां दिए गए मंत्र का जप दस हजार बार करना होगा। मंत्र: ऊँ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा। गड़े हुए धन के दर्शन करने के लिए विधि इस प्रकार है। किसी शुभ दिवस में यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या करें। मंत्र सिद्धि हो जाने के बाद जिस स्थान पर धन गड़ा हुआ है वहां धतुरे के बीज, हलाहल, सफेद घुघुंची, गंधक, मैनसिल, उल्लू की विष्ठा, शिरीष वृक्ष का पंचांग बराबर मात्रा में लें और सरसों के तेल में पका लें। इसके बाद इस सामग्री से गड़े धन की शंका वाले स्थान पर धूप-दीप ध्यान करें। यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या में करें। ऐसा करने पर उस स्थान से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का साया हट जाएगा। भूत- प्रेत का भय समाप्त हो जाएगा। साधक को भूमि में गड़ा हुआ धन दिखाई देने लगेगा। ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें। 6.शास्त्रों के अनुसार दूर्वा घास चमत्कारी होती है। इसका प्रयोग कई प्रकार के उपायों में भी किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति सफेद दूर्वा को कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध के साथ पीस लें और इसका तिलक लगाएं तो वह किसी भी काम में असफल नहीं होता है। 7.महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए यह तांत्रिक उपाय करें। किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, अक्षय तृतीया, होली आदि की रात यह उपाय किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में यह उपाय श्रेष्ठ फल देता है। इस उपाय के अनुसार आपको दीपावली की रात कुमकुम या अष्टगंध से थाली पर यहां दिया गया मंत्र लिखें। मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:। इस मंत्र का जप भी करना चाहिए। किसी साफ एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला या कमल गट्टे की माला के साथ मंत्र जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। अधिक से अधिक इस मंत्र की आपकी श्रद्धानुसार बढ़ा सकते हैं। इस उपाय से आपके घर में महालक्ष्मी की कृपा बरसने लगेगी। 8.अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें, लेप बना लें। इस लेप को लगाने से व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। सभी लोग इनके कहे को मानते हैं। 9.यदि आप देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की कृपा से अकूत धन संपत्ति चाहते हैं तो यह उपाय करें। उपाय के अनुसार आपको यहां दिए जा रहे मंत्र का जप तीन माह तक करना है। प्रतिदिन मंत्र का जप केवल 108 बार करें। मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा। मंत्र जप करते समय अपने पास धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। जब तीन माह हो जाएं तो यह कौड़ी अपनी तिजोरी में या जहां आप पैसा रखते हैं वहां रखें। इस उपाय से जीवनभर आपको पैसों की कमी नहीं होगी। 10.यदि आप घर या समाज या ऑफिस में लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू लेकर उसे बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें। इसके बाद इससे तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का आकर्षण बढ़ता है।
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#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨कुंडली देखकर भावी पत्नी के स्वभाव के बारे में काफी कुछ जानकारी हासिल की जा सकती है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव जीवनसाथी का भाव होता है। इससे होने वाले पति या पत्नी के स्वभाव के बारे में पता लगता है। इस भाव में उपस्थित ग्रहों के अनुसार स्वभाव तय होता है। किसी स्त्री के बारे में जानकारी हासिल करना हो तो इस भाव के ग्रहों का अध्ययन करना चाहिए। आइये देखते हैं स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में कौन से ग्रह के होने का क्या प्रभाव पड़ता है।. सूर्य-चंद्रमा सूर्य : स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में यदि सूर्य हो तो वह दुष्ट स्वभाव की होती है। उसका स्वर कर्कश होता है और हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहती है। इस स्वभाव के कारण स्त्री पति के प्रेम से वंचित रह जाती है।चंद्रमा: सप्तम भाव में चंद्रमा हो तो स्त्री का स्वभाव मधुर होता है। उसमें लाज-शर्म होती है। यदि सप्तम भाव का चंद्रमा वृषभ राशि में हो तो स्त्री को वस्त्र, आभूषण पहनने का शौक होता है और वह रूपवान होती है।. मंगल सप्तम का मंगल स्त्री को सौभाग्यहीन बनाता है। ऐसी स्त्री बुरे लोगों की संगत में रहती है और बुरे कर्म करती है। सप्तम स्थान में कर्क या सिंह राशि हो तथा मंगल के साथ शनि भी हो तो स्त्री के कई पुरुषों के साथ संबंध होते हैं। हालांकि इसके पास धन प्रचुर मात्रा में होता है।. बुध स्त्री की कुंडली में सप्तम स्थान में बुध हो तो उसके पास बड़ी मात्रा में आभूषण होते हैं। बोलचाल की भाषा मधुर होती है। मिलनसार होती है और पति की प्यारी होती है। इस स्थान में बुध यदि उच्च राशि का हो तो स्त्री लेखिका, धनी और अनेक प्रकार के ऐश्वर्य भोगने वाली होती है।. गुरु-शुक्र गुरु: बृहस्पति के कारण स्त्री पतिव्रता, धनवान, गुणवान और सुखी होती है। सप्तम स्थान में गुरु हो और चंद्रमा कर्क राशि में हो तो नारी सौंदर्य से भरपूर होती है। पुरुष इनके आकर्षण में बंधा रहता है।शुक्र: सप्तम स्थान में शुक्र हो तो स्त्री को श्रेष्ठ गुणों वाला सुंदर, धनवान और कामकला में निपुण पति मिलता है। ऐसी स्त्री भी स्वयं सुंदरता की मिसाल होती है। इसके बाल लंबे, गौर वर्ण और नेत्र तीखे होते हैं। शनि, राहु-केतु शनि: सप्तम स्थान का शनि स्त्री की कुंडली में हो तो उसका पति रोगी, दरिद्र, व्यसनी, निर्बल होता है। यदि शनि तुला राशि में हो तो वह उच्च का होता है। उच्च का शनि पति धनवान, गुणवान, शीलवान होता है।राहु या केतु: कुंडली के सप्तम भाव में राहु या केतु हो तो ऐसी स्त्री अपने कुल पर दोष लगाने वाली होती है। सदा दुखी रहती है तथा पति के सुख से वंचित होती है। ऐसी स्त्री का स्वभाव कड़ा होता है। किसी से उसकी ठीक से नहीं बनती l fees 351rs #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी कुंडली देखकर भावी पत्नी के स्वभाव के बारे में काफी कुछ जानकारी हासिल की जा सकती है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव जीवनसाथी का भाव होता है। इससे होने वाले पति या पत्नी के स्वभाव के बारे में पता लगता है। इस भाव में उपस्थित ग्रहों के अनुसार स्वभाव तय होता है। किसी स्त्री के बारे में जानकारी हासिल करना हो तो इस भाव के ग्रहों का अध्ययन करना चाहिए। आइये देखते हैं स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में कौन से ग्रह के होने का क्या प्रभाव पड़ता है।. सूर्य-चंद्रमा सूर्य : स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में यदि सूर्य हो तो वह दुष्ट स्वभाव की होती है। उसका स्वर कर्कश होता है और हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहती है। इस स्वभाव के कारण स्त्री पति के प्रेम से वंचित रह जाती है।चंद्रमा: सप्तम भाव में चंद्रमा हो तो स्त्री का स्वभाव मधुर होता है। उसमें लाज-शर्म होती है। यदि सप्तम भाव का चंद्रमा वृषभ राशि में हो तो स्त्री को वस्त्र, आभूषण पहनने का शौक होता है और वह रूपवान होती है।. मंगल सप्तम का मंगल स्त्री को सौभाग्यहीन बनाता है। ऐसी स्त्री बुरे लोगों की संगत में रहती है और बुरे कर्म करती है। सप्तम स्थान में कर्क या सिंह राशि हो तथा मंगल के साथ शनि भी हो तो स्त्री के कई पुरुषों के साथ संबंध होते हैं। हालांकि इसके पास धन प्रचुर मात्रा में होता है।. बुध स्त्री की कुंडली में सप्तम स्थान में बुध हो तो उसके पास बड़ी मात्रा में आभूषण होते हैं। बोलचाल की भाषा मधुर होती है। मिलनसार होती है और पति की प्यारी होती है। इस स्थान में बुध यदि उच्च राशि का हो तो स्त्री लेखिका, धनी और अनेक प्रकार के ऐश्वर्य भोगने वाली होती है।. गुरु-शुक्र गुरु: बृहस्पति के कारण स्त्री पतिव्रता, धनवान, गुणवान और सुखी होती है। सप्तम स्थान में गुरु हो और चंद्रमा कर्क राशि में हो तो नारी सौंदर्य से भरपूर होती है। पुरुष इनके आकर्षण में बंधा रहता है।शुक्र: सप्तम स्थान में शुक्र हो तो स्त्री को श्रेष्ठ गुणों वाला सुंदर, धनवान और कामकला में निपुण पति मिलता है। ऐसी स्त्री भी स्वयं सुंदरता की मिसाल होती है। इसके बाल लंबे, गौर वर्ण और नेत्र तीखे होते हैं। शनि, राहु-केतु शनि: सप्तम स्थान का शनि स्त्री की कुंडली में हो तो उसका पति रोगी, दरिद्र, व्यसनी, निर्बल होता है। यदि शनि तुला राशि में हो तो वह उच्च का होता है। उच्च का शनि पति धनवान, गुणवान, शीलवान होता है।राहु या केतु: कुंडली के सप्तम भाव में राहु या केतु हो तो ऐसी स्त्री अपने कुल पर दोष लगाने वाली होती है। सदा दुखी रहती है तथा पति के सुख से वंचित होती है। ऐसी स्त्री का स्वभाव कड़ा होता है। किसी से उसकी ठीक से नहीं बनती l fees 351rs
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी चोथे भाव का सूर्य +++++++++++++ मित्रों चोथा भाव जन्मकुंडली में हमारे माता भूमि वाहन मानसिक सुख और शरीर में ह्दय का माना जाता है | चूँकि काल पुरुष की कुंडली में यहाँ जल तत्व राशि कर्क आती है और सूर्य अग्नि तत्व ग्रह है इसिलिय अधिकतर विद्वानों ने सूर्य के बुरे फल ही इस भाव में बताये है | यहाँ के सूर्य होने से जातक का मन विचलित रहता है और उसे मानसिक शान्ति कम मिलती है साथ ही यहाँ का सूर्य ह्दय रोग का कारक भी माना गया है लेकिन जहाँ तक मेरा विचार है सूर्य यदि यहाँ शत्रु राशि में हो और उस पर किसी पापी ग्रह शनी राहू आदि की दृष्टी हो तभी ह्दय की बिमारी होगी |} यदि सूर्य यहाँ योगकारक होकर बली अवस्था में हुवे तो जातक को जीवन में कभी भी ह्दय की समस्या नही होती | लाल किताब के 1942 वाले संस्करण में इसे दाई आँख का डेला या बुआ का लड़का कहा है यानी जिस प्रकार से आपकी बुआ का लड़का आपको सहायक सिद्ध होता है जीवन में उसी प्रकार यहाँ का सूर्य आपको शुभ फल देता है या फिर आपकी दाई आँख का डेला जिस तरह आपको दुनिया दीखता है उसी प्रकार सूर्य आपका मार्गदर्शक बनकर सहायता करता है | लाल किताब में ही आगे कहा गया है की ऐसा जातक जीवन में धन जोड़कर मरता है लेकिन उसका धन उसके खुद के काम आने के बजाए उसकी औलाद के ही काम ज्यादा आता है | ऐसे जातक को सफर के काम से विशेष लाभ मिलता है और सरकार से फायदा मिलने के योग बनते है | साथ ही आगे ये हिदायत विशेष रूप से दी गई है की ऐसा जातक यदि अपने बुजुर्गो के कार्य को छोड़कर कोई नया कार्य करता है तो उसे विशेष लाभ मिलता है | ऐसे में यदि चन्द्र मंगल गुरु शुभ हो तो जातक को ये नया कार्य बहुत फलता है | सूर्य चार के समय ही यदि शनी या राहू दस्मे भाव में हो तो ऐसे में ससुराल से इन ग्रहों से सम्बन्धित वस्तु लेकर प्रयोग करने से जातक को बहुत नुक्सान का सामना करना पड़ता है | सूर्य चार के समय चन्द्र जिस भी भाव में हो उस भाव से सम्बन्धित रिश्तेदारों से जातक को धन लाभ के योग बनते है जैसे तीसरे में चन्द्र हो तो भाइयों से पंचम में सन्तान से सप्तम में पत्नी से आदि | सूर्य इस भाव में होने के समय यदि शनी सप्तम भाव में हो तो अन्धराता टेवा होगा जिसमे ग्रह आधे अंधे की तरह जातक को फल देंगे दुसरे शब्दों में जातक का जीवन ज्यादा सुखी नही होगा | मित्रों ये आंशिक विवेचना है पूर्ण फल पूरी कुंडली पर निर्भर करेगा |
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#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨काली मिर्च से धन प्राप्ति के अचूक उपाय जीवन में धन अति आवश्यक है। धन न हो तो व्यक्ति के जीवन में खुशियां भी बेमानी लगती है और यदि धन है तो हर दिन एक नई खुशी होती है। अनेक धर्म ग्रंथों में भी धन के महत्व का वर्णन किया गया है। तंत्र शास्त्र के अंतर्गत कई ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से धन की चाह पूरी हो जाती है और जीवन में फिर कभी धन की कमी नहीं होती। ऐसे ही कुछ उपाय नीचे लिखे हैं- उपाय 1- शनिवार के दिन पीपल का एक पत्ता तोड़कर उसे गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी तथा दही के घोल से अपने दाएं हाथ की अनामिका अंगुली से ह्रीं लिखें। इसके बाद इस पत्ते को धूप-दीप दिखाकर अपने बटुए में रखे लें। प्रत्येक शनिवार को पूजा के साथ वह पत्ता बदलते रहें। यह उपाय करने से आपका बटुआ कभी धन से खाली नहीं होगा। पुराना पत्ता किसी पवित्र स्थान पर ही रखें। 2- काली मिर्च के 5 दाने अपने सिर पर से 7 बार उतारकर 4 दाने चारों दिशाओं में फेंक दें तथा पांचवें दाने को आकाश की ओर उछाल दें। यह टोटका करने से आकस्मिक धन लाभ होगा। 3- अचानक धन प्राप्ति के लिए सोमवार के दिन श्मशान में स्थित महादेव मंदिर जाकर दूध में शुद्ध शहद मिलाकर चढ़ाएं। 4- अगर धन नहीं जुड़ रहा हो तो तिजोरी में लाल वस्त्र बिछाएं। 5- तिजोरी में गुंजा के बीज रखने से भी धन की प्राप्ति होती है। 6- जिस घर में प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ होता है, वहां लक्ष्मी अवश्य निवास करती हैं #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯वास्तु दोष उपाय कहां से आक्रमण करते हैं - भूत-प्रेत और मायावी शक्तियां ? ================================ भूत-प्रेतों का निवास नीचे दिए गए कुछ वृक्षों एवं स्थानों पर माना गया है। इन वृक्षों के नीचे एवं स्थानों पर किसी प्रकार की तेज खुशबू का प्रयोग एवं गंदगी नहीं करनी चाहिए, नहीं तो भूत-प्रेत का असर हो जाने की संभावना रहती है। पीपल वृक्ष:- शास्त्रों में इस वृक्ष पर देवताओं एवं भूत-प्रेतों, दोनों का निवास माना गया है। अतः कभी भी पीपल के पेड़ नहीं काटने चाहिए। इसी कारण हर प्रकार के कष्ट एवं दुख को दूर करने हेतु इसकी पूजा अर्चना करने का विधान है। मौलसिरी:- इस वृक्ष पर भी भूत-प्रेतों का निवास माना गया है। कीकर वृक्ष:- इस वृक्ष पर भी भूत-प्रेत रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि तुलसीदास ने इस वृक्ष में रोज पानी डालकर इस वृक्ष पर रहने वाले प्रेत को प्रसन्न कर उसकी मदद से हनुमान जी के दर्शन प्राप्त कर प्रभु श्री राम से मिलने का सूत्र पाया था। यह भूत प्राणियों को लाभ पहुंचाने वाली श्रेणी का था। श्मशान या कब्रिस्तान:- इन स्थानों पर भी भूत-प्रेत निवास करते है। भूत-प्रेतों से सावधानी जल में भूत-प्रेतों का निवास होता है। इसलिए किसी भी स्त्री-पुरुष को नदी-तालाब में, चाहे वह कितने ही निर्जन स्थान में क्यों न हों, निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए क्योंकि भूत-प्रेत गंदगी से रुष्ट होकर मनुष्यों को नुकसान पहुंचाते हैं। कुएं में भी किसी प्रकार की गंदगी नहीं डालनी चाहिए क्योंकि कुंए में भी विशेष प्रकार के जिन्न रहते हैं जो कि रुष्ट होने पर व्यक्ति को बहुत कष्ट देते हैं। श्मशान या कब्रिस्तान में भी कभी कुछ नहीं खाना चाहिए और न ही वहां पर कोई मिठाई, सफेद व्यंजन, शक्कर या बूरा लेकर जाना चाहिए क्योंकि इनसे भी भूत-प्रेत बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं। ऐसे स्थानों में रात में कोई तीव्र खुशबू लेकर भी नहीं जाना चाहिए तथा मलमूल त्याग भी नहीं करना चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति से विशेष रूप से दी गई इलायची, सेब, केला, लौंग आदि नहीं खानी चाहिए, क्योंकि यह भूत-प्रेत से प्रभावित करने के विशेष साधन माने गए हैं। भूत-प्रेत से बचाव यदि अनुभव हो कि भूत प्रेत का असर है तो घर में नियमित रूप से सुन्दरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा सूर्य देव को जल चढ़ाएं। 1. यदि किसी मनुष्य पर भूत-प्रेत का असर अनुभव हो, तो उसकी चारपाई के नीचे नीम की सूखी पत्ती जलाएं। 2. मंगल या शनिवार को एक समूचा नींबू लेकर भूत-प्रेत ग्रसित व्यक्ति के सिर से पैर तक 7 बार उतारकर घर से बाहर आकर उसके चार टुकड़े कर चारों दिशाओं में फेंक दें। यह ध्यान रहे कि जिस चाकू से नींबू काटा है उसे भी फेंक देना चाहिए।.
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपायशेयर मार्किट से लाभ के ग्रहयोग आज के समय में शेयर मार्किट एकऐसा विषय है जिसकी और हर एकव्यक्ति आकर्षित होता है और इसे धनलाभ अर्जित करने के लिए एक सुनहरेमार्ग के रूप में देखा जाने लगा है औरअधिकांश व्यक्ति अपने पास उपस्थितधन का कुछ ना कुछ भाग शेयर मार्किटमें इन्वेस्ट करने के इच्छुक होते ही हैं, पर सभी व्यक्तियों को इस क्षेत्र से लाभप्राप्त होता ही हो ऐसा नहीं है, जहाँबहुत से लोग शेयर में अपना धनइन्वेस्ट करके बड़ा लाभ कमाते हैं तोबहुत से व्यक्तियों को भारी नुकसानका भी सामना करना पड़ता है ज्योतिषीय दृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहस्थिति भिन्न-भिन्न होती है इसलिए जिस कार्य में एक व्यक्ति उन्नति कर रहा है दूसरा भी उसमे सफल हो ऐसा आवश्यक नहीं है इसी प्रकार शेयर मार्किट का क्षेत्र किसी व्यक्ति के लिए लाभदायक होगा या नहीं यह पूरी तरह उसकी कुंडली में बनी ग्रहस्थिति पर निर्भर करता है, तो आईये जानते हैं हमारी कुंडली में कौनसे ग्रहयोग शेयर मार्किट से लाभ कराने में अपनी भूमिका निभाते हैं। ज्योतिष में शेयर मार्किट के लिए सीधेसीधे किसी एक ग्रह की भूमिका नहोकर कुंडली के “पंचम भाव” कोसर्वाधिक महत्व दिया गया है, जन्मकुंडली के पंचम भाव को शेयर, लॉट्री या स्पेकुलेशन आदि का कारकभाव माना गया है इसलिए शेयरमार्किट से जुड़ने या लाभ प्राप्त करने मेंसबसे पहले तो कुंडली के पंचम भावऔर पंचमेश का शुभ स्थिति में होनाआवश्यक है, इसके बाद लाभ स्थानअर्थात कुंडली के ग्यारहवे भाव की भीयहाँ महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकिकिसी भी प्रकार से इन्वेस्ट किये गएधन से आपको लाभ प्राप्त हो पायेगा यानहीं या किस स्तर का लाभ जीवन मेंहोगा यह लाभ स्थान और लाभेश कीस्थिति पर निर्भर करता है, शुक्र धनऔर विलासिता का कारक होने से यहाँअपनी सहायक भूमिका निभाता है इसीप्रकार राहु को आकस्मिक कार्य याझटके के कार्यों का कारक होने से राहुकी भी यहाँ सहायक भूमिका होती है, अतः निष्कर्षतः कुंडली में पंचम भावऔर पंचमेश बली स्थिति में होने परशेयर–मार्केट से शुभ परिणाम प्राप्तहोते हैं इसके अलावा लाभ स्थान, लाभेश और शुक्र जितनी अच्छी औरमजबूत स्थिति में होंगे उतना ही अच्छीमात्रा में व्यक्ति को लाभ होता है। शेयर-मार्किट में सफलता के कुछ विशेष ग्रहयोग – यदि कुंडली में पंचमेश पंचम भाव मेंही स्थित हो तो शेयर मार्किट से जुड़करलाभ प्राप्त होता है। यदि पंचमेश (पंचम भाव कास्वामी) स्व या उच्च राशि में होकरशुभ स्थान में हो तो शेयर मार्किट मेंलाभ प्राप्त होता है। यदि बली पंचमेश की पंचम भाव परदृष्टि हो तो यह भी शेयरमार्केट मेंसफलता दिलाता है। पंचमेश का दशम या एकादश भावमें होना भी शेयर मार्किट से जुड़करलाभ कराता है। यदि पंचमेश दशम भाव में औरदशमेश पंचम भाव में हो तो शेयरमार्किट से जुड़कर व्यक्ति लाभ प्राप्तकरता है। यदि पंचमेश लाभ स्थान (ग्यारहवाभाव) में और लाभेश पंचम भाव में होतो व्यक्ति शेयर मार्किट से बहुत लाभकमाता है। पंचमेश और धनेश का राशिपरिवर्तन भी शेयर मार्किट में अच्छेपरिणाम दिलाता है। यदि लाभेश लाभ स्थान में हो यालाभेश की लाभ स्थान पर दृष्टि होतथा पंचमेश और पंचम भाव शुभस्थिति में हों तो भी शेयर मार्किट मेंअच्छा लाभ मिलता है। पंचमेश का लाभेश या दशमेश केसाथ केंद्र – त्रिकोण में होना भी इसक्षेत्र से लाभ कराता है। भाग्येश और पंचमेश का राशिपरिवर्तन भी शेयर मार्किट के लिएअच्छा योग है। राहु का लाभ स्थान (ग्यारहवाभाव) में होना शेयर मार्किट के क्षेत्र केलिए सहायक होता है पर पंचम भावऔर पंचमेश शुभ स्थिति में होनेचाहियें। यदि शुक्र स्व या उच्च राशि में होतथा पंचमेश शुभ स्थान (केंद्र–त्रिकोण) में हो तो यह भी शेयर मार्किटमें अच्छी सफलता दिलाता है। राहु का उच्च राशि में होकर शुभ स्थान में बैठना भी व्यक्ति को आकस्मिक निर्णय लेने की अच्छी क्षमता देकर शेयर मार्किट के क्षेत्र में सहायक होता है। राहु शुभ भाव में हो कुंडली के शुभकारक ग्रहों के प्रभाव में हो तथा किसी ग्रह के साथ कोई दुर्योग न बना रहा हो तो भी इस क्षेत्र के लिए सहायक होता है। विशेष – जैसा की हमने यहाँ देखा केकुंडली का पंचम भाव शेयर मार्किट केकार्य में अपनी अहम भूमिका निभाताहै और लाभ स्थान व लाभेश की स्थितिहोने वाले लाभ का स्तर तय करती हैतो यहाँ विशेष बात यही है के पंचमभाव और पंचमेश बली होने पर भीआपकी पूरी कुंडली की स्ट्रैन्थ कितनीहै यह बात संपूर्ण सफलता को निश्चितकरती है अर्थात पंचम भाव औरपंचमेश तो बहुत लोगो की कुंडली मेंबलि हो सकते हैं पर हर व्यक्ति कीकुंडली में बने बाकि अच्छे या कमजोरग्रहयोग प्रत्येक व्यक्ति को भिन्न स्तरकी सफलता देते हैं। कुंडली में पंचमभाव, पंचमेश व लाभ स्थान शुभस्थिति में होने पर जो ग्रह कुंडली मेंबहुत बलवान और अच्छी स्थिति में होउन से सम्बंधित वस्तुओं पर निवेशकरना अच्छा होता है। “जिन लोगो की कुंडली में पंचमेश नीचराशि मे हो, छटे, आठवे या बारहवे भावमे हो, पंचम भाव में पाप योग बन रहेहों, लाभेश पाप भाव में हो या लाभस्थान और लाभेश पीड़ित हों उन्हें शेयरमार्किट में इन्वेस्ट नहीं करना चाहिएऐसे में हानि की अधिक सम्भावनाहोती है।” इसके अतिरिक्त कुंडली मेंचल रही ग्रहदशायें और गोचर ग्रहवर्तमान में लाभ या हानि को निश्चितकरते हैं इसलिए किसी योग्य ज्योतिषीसे परामर्श के बाद ही इस क्षेत्र में जानाचाहिए। #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨
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