🌿 कथा: जब छोटे कृष्ण ने राधा से माखन बाँटा
एक सुबह नंदगाँव में यशोदा मैया माखन मथ रही थीं।
छोटे कृष्ण पास ही बैठे थे और बार-बार माखन की ओर देख रहे थे।
जैसे ही यशोदा अंदर गईं, कृष्ण ने चुपके से माखन की एक छोटी मटकी उठा ली।
फिर वे बाहर भागे।
बाहर आकर उन्होंने देखा—राधा और कुछ सखियाँ खेल रही थीं।
कृष्ण ने हँसते हुए कहा—
“देखो, मैं माखन लाया हूँ!”
सखियाँ खुश हो गईं।
सबने थोड़ा-थोड़ा माखन खाया।
राधा चुपचाप खड़ी थीं।
🌸 राधा की बात
राधा ने कृष्ण से पूछा—
“कान्हा, यह माखन तुमने चुराया है न?”
कृष्ण ने शरारती मुस्कान से कहा—
“हाँ, पर अकेले खाने से अच्छा है
सबके साथ बाँटना।”
राधा हँस पड़ीं।
उन्होंने कहा—
“तो चोरी भी ऐसी हो
जिससे सब खुश हो जाएँ।”
🌼 तभी यशोदा आईं
इतने में यशोदा वहाँ पहुँच गईं।
उन्होंने खाली मटकी देखी और समझ गईं कि क्या हुआ है।
उन्होंने पूछा—
“कान्हा, माखन कहाँ गया?”
कृष्ण ने तुरंत राधा की ओर इशारा किया और बोले—
“मैया, हमने सब मिलकर खाया!”
यशोदा हँस पड़ीं।
🌺 इस कथा का भाव
यह छोटी सी बाल-लीला दिखाती है कि:
कृष्ण की शरारतें भी आनंद बाँटने वाली थीं
और राधा बचपन से ही उनकी सबसे करीबी साथी थीं
जहाँ बालपन में ही
हँसी, शरारत और अपनापन हो,
वहीं प्रेम सबसे स्वाभाविक बनता है।
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