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Radha Rani
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Radha Rani
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यह कथा ना तो आपको किसी ग्रंथ में मिलेगी और ना ही आज से पहले आपने सुनी होगी।इसलिए एक दम सावधान होकर पढ़े और लीला का आनंद लें। जैसा चिन्तन रहेगा भाव भी वैसा ही बनेगा। कल सारा दिन भगवान् शिव के विवाह की कथाओं का कानों से श्रवण और मन से लीलाओं का चिन्तन चलता रहा। अब आपको यह भी पता है यदि मन में कोई भी लीला चल रही है तो उस लीला में लाला और बाबा तो होंगे ही।क्योंकि लीला चाहे कोई भी हो।वो लाला और बाबा के इर्दगिर्द घुमती रहती है। तो कल भोले बाबा की बारात में बाबा कू भी लाला के संग निमंत्रण था।भोले बाबा का विशेष आग्रह था कि लाला कू संग अवश्य लाए। अब आपको यह भी पता है कि अभी कुछ वर्ष पहले तक ऐसी प्रथा थी कि बारात में माताएं नहीं जाती थी।जब कि यह जो लीला चल रही है वो द्वापर युग की है। इसलिए जशोदा ने भोले बाबा के विशेष आग्रह पर ना चाहते हुए अपनी गोद के लाला कू बाबा के संग भेज दियो। अब भोले बाबा के विवाह की कथा तो आप सबने सुनी ही होगी कि कैसे भोले बाबा बारात लेकर महाराज हिमालय के द्वार पर आते है और कैसे नैना मईया भोले बाबा का स्वरूप देखकर भयभीत होकर मूर्छित हो जाती है।और फिर कैसे भगवान् नारायण के कहने पर भोले बाबा अपनी वेशभूषा परिवर्तन करते है।और देवर्षि नारद नैना मईया को समझाते हैं। बस इसी सब में काफी लम्बा समय निकल जाता है।और जैसा कि हमनें आपको बताया कि लाला अभी गोद का है।उसे अधिक देर तक जशोदा मईया की गोद से दूर रहने का अभ्यास नहीं है।और अभी वो है भी मईया के दूध पर। अब अधिक विलम्ब होने के कारण लाला का रुदन प्रारंभ हो गया।धीरे-धीरे रुदन का स्वर इतना तेज हो गया कि भीतर भवन में बैठी महाराज हिमालय की कन्या (माता पार्वती) के कानों में पड़ने लगा।उन्होंने एक दासी के द्वारा लाला कू अपने भवन में बुला भेजा।दासी ने बाबा से लाला कू ले जाकर माता पार्वती की गोद में दे दिया। माता पार्वती ने सभी दासियों से कहा :- हमें एकांत चाहिए। सभी दासियाॅं वहाँ से चली जाती है। और तभी माता पार्वती लाला कू अपने वक्षस्थल से लगाकर दूध पान करवाती है। और उधर जब देवर्षि नारद माता नैना को समझा रहे होते हैं तो वो माता नैना को इस दृश्य के भी दर्शन करवाते हैं।जो इस समय माता पार्वती के भवन में चल रहा है। माता नैना इस दृश्य को देखकर स्तम्भ सी रह जाती है कि एक कुंवारी कन्या के वक्षो से दूध कैसे आ सकता है। तब देवर्षि नारद उन्हें समझाते हैं कि जिसे वो केवल अपनी पुत्री और कुॅंवारी कन्या समझ रही है वो कोई सामान्य स्त्री नहीं बल्कि जगत माता है जो पूरे विश्व का पालन पोषण करती है। देवर्षि की बात सुन माता नैना अपने आपको ध्यान मानती है कि स्वयं जगत माता मेरे घर में मेरी पुत्री के रूप में आई है और मुझे जगत माता और जगत पिता का गठबंधन करवाने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। ****(जय जय श्री राधे)**** #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं #🌺राधा कृष्ण💞
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