केंद्रीय कमेटी की विज्ञप्ति
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की केंद्रीय कमेटी की बैठक 16 से 18 जनवरी तक ईएमएस अकादमी त्रिवेंद्रम में हुई। बैठक के बाद निम्रलिखित विज्ञप्ति जारी की गयी।
केंद्रीय कमेटी ने, राज्य में घोर गरीबी को खत्म करने के लिए केरल की एलडीएफ सरकार को बधाई दी। यह कामयाबी, केरल विकास मॉडल की कारगरता का सबूत है। यह माडल प्रगतिशील राजनीति, विकेंद्रीकृत शासन और अधिकार आधारित दृष्टिï पर आधारित है। केरल की सफलता इसके बावजूद हासिल की गयी है कि केंद्र सरकार ने राज्य के खिलाफ एक मुसलसल राजकोषीय जंग छेड़े रखी है, जिसके जरिए सुनियोजित तरीके से विपक्ष-शासित राज्यों पर फंड का अभाव थोपा गया है। इससे यह उपलब्धि और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। यह उपलब्धि अनेक सीमाओं के बावजूद, जनकल्याण के श्रेष्ठतर नतीजे हासिल करने की, वामपंथी सरकार की राजनीतिक इच्छा तथा प्रतिबद्घता का प्रदर्शन करती है।
केंद्रीय कमेटी ने एलडीएफ सरकार की सराहना की, जिसनेे साफ-साफ कह दिया है कि वह भाजपा-नीति केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए लेबर कोड अधिसूचित नहीं करेगी। यह एक बार फिर एलडीएफ सरकार के मजदूर-पक्षधर चेहरे को सामने लाता है।
केंद्रीय कमेटी ने इसका भरोसा जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव मेें केरल की जनता एक बार फिर एलडीएफ के पक्ष में वोट डालेगी और ऐतिहासिक अनवरत तीसरे कार्यकाल के लिए उसे जिताएगी।
विधानसभाई
चुनाव
केंद्रीय कमेटी ने आने वाले विधानसभाई चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा की। जल्द ही पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं--केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु,असम और पुदुच्चेरी।
केरल में पार्टी एलडीएफ सरकार की उपलब्धियों के आधार पर प्रचार करते हुए, इस सरकार के दोबारा चुने जाने के लिए काम करेगी। वह केरल के वैध देयों का भुगतान करने से भाजपा-नीत केंद्र सरकार के इंकार करने को, राज्य पर थोपे गये राजकोषीय बंधनों को और संघवाद पर समग्रता में हमले को बेनकाब करेगी। पार्टी, संघवाद पर इस हमले का कारगर ढंग से मुकाबला करने में, संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में कांग्रेस की विफलता को भी बेनकाब करेगी। खासतौर पर केरल में कांगे्रस, सांप्रदायिक आरएसएस-भाजपा के खिलाफ विचारधारात्मक रूप से लडऩे में कोताही बरतती रही है और जनता के सामने इसे भी बेनकाब किया जाएगा।
बंगाल में पार्टी, तृमूकां और भाजपा, दोनों को हराने के लिए काम करेगी, जो दोनों ही समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही हैं। हम, उनके खिलाफ काम करने के लिए तैयार, सभी शक्तियों को गोलबंद करने की कोशिश करेंगे।
तमिलनाडु में पार्टी, भाजपा और उसके सहयोगियों को पराजित करने के लिए, डीएमके और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
असम में पार्टी तमाम भाजपा-विरोधी पार्टियों व ताकतों को गोलबंद करने और घोर सांप्रदायिक तथा फूटपरस्त भाजपा सरकार को शिकस्त देने के लिए काम करेगी।
पुदुच्चेरी में पार्टी भाजपायी गठजोड़ की सरकार को हराने के लिए काम करेगी।
भाजपा-नीत केंद्र सरकार
की जनविरोधी नीतियां
भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने संसद के शीत सत्र का इस्तेमाल बिना समुचित चर्चा का मौका दिए, जनता के हितों को चोट पहुंचाने वाले कई कुंजीभूत विधेयक थोपने के लिए किया। चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया गया। मगनरेगा को हटाकर उसकी जगह ग्राम जी को बैठाया गया। और बीज विधेयक तथा बिजली विधेयक पाइपलाइन में हैं।
संसद के शीत सत्र में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विधेयक पारित कराया है, जो बीमा क्षेत्र में 100 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत देता है। और नाभिकीय विद्युत के क्षेत्र में निजी तथा विदेशी कारपोरेशनों के प्रवेश की इजाजत दी गयी है। नाभिकीय ऊर्जा जैसे रणनीतिक तथा महत्वपूर्ण क्षेत्र के दरवाजे निजी कंपनियों के लिए खोला जाना सत्यानाशी साबित होगा।
भाजपा जान-बूझकर संसद के काम-काज को कमजोर कर रही है और इस तरह कार्यपालिका को विधायिका की जांच के आधीन करने से इंकार कर रही है, जबकि यह संसदीय जनतंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है। उसकी ये हरकतें देश के जनतांत्रिक ढांचे को कमजोर करती हैं और तानाशाहीपूर्ण चरित्र को मजबूत करती हैं।
मतदाता सूचियों का विशेष सघन पुनरीक्षण भाजपा-आरएसएस जोड़ी की एक सोची-समझी राजनीतिक परियोजना है, जिसे सरकार के फर्माबरदार भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआइ) के जरिए लागू किया जा रहा है। पार्टी, नागरिकता तय करने का अधिकार हड़पने की ईसीआइ की कोशिश के खिलाफ विस्तृत अभियान चलाएगी और इसके साथ ही साथ यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी वैध मतदाता को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जा सके। इसी प्रकार हम सतर्क रहेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे के भाजपा और चुनाव आयोग की मशीनरी की मिलीभगत से मतदाता सूचियों में फर्जी मतदाताओं के नाम दाखिल नहीं किए जाएं।
अल्पसंख्यकों, मुस्लिम और ईसाई दोनों पर हमले भी बढ़ रहे हैं। हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक संगठन इन हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे मामलों में भाजपा सरकार की निष्क्रियता सोची-समझी है और इसका मकसद ऐसे हमलों को सुगम बनाना है।
केंद्रीय कमेटी ने महिलाओं, दलितों तथा आदिवासियों पर बढ़ते हमलों की निंदा की। ये हमले भाजपा-शासित राज्यों में खासतौर पर बढ़ रहे हैं।
ये सभी, धर्मनिरपेक्ष राज्य को ध्वस्त करने और एक हिंदू राष्ट्र स्थापित करने की भाजपा-आरएसएस की लगातार जारी कोशिशों के ही हिस्से हैं।
केंद्रीय कमेटी ने सर्वसम्मति से एक विशेष कार्यक्रम स्वीकार किया, जिसमें मांग की गयी है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा फौरन बहाल किया जाए और उनके तमाम जनतांत्रिक अधिकार बहाल किए जाएं।
12 फरवरी की
आम हड़ताल
केंद्रीय कमेटी ने 12 फरवरी की आम हड़ताल के आह्वान को अपना पूर्ण समर्थन दिया। चार लेबर कोडों की अधिसूचना के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इस हड़ताल का आह्वान किया है। पार्टी सक्रिय रूप से केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आम हड़ताल के आह्वान को अपना समर्थन देगी। हड़ताल के दिन, ट्रेड यूनियनों की कार्रवाई के समर्थन में पार्टी कार्यकर्ताओं को गोलबंद किया जाएगा।
मनरेगा कानून को निरस्त
करने के खिलाफ अभियान
मगनरेगा को नष्ट किए जाने के खिलाफ पार्टी एक सघन अभियान चलाएगी। यह एक सार्वभौम, मांग-आधारित कानून था, जो काम का एक सीमित अधिकार देता था। इसे एक नया कानून बनाकर खत्म किया गया है। यह अभियान 30 जनवरी (महात्मा गांधी की शहादत की सालगिरह) से शुरू होगा और एक सप्ताह यानी 5 फरवरी तक चलेगा।
वेनेजुएला पर अमरीकी
हमलेे के खिलाफ
केंद्रीय कमेटी ने वेनेजुएला के खिलाफ हमले की अमरीका की अभूतपूर्व करतूत की भत्र्सना की। पार्टी, वेनेजुएला पर अमरीकी हमले के खिलाफ विस्तृत अभियान चलाएगी और तमाम गैर-भाजपा पार्टियों को गोलबंद कर के विशाल विरोध कार्रवाइयां आयोजित करेगी।
फिलिस्तीन पर
इस्राइली हमला
केंद्रीय कमेटी ने फिलिस्तान पर इस्राइल के लगातार जारी हमले की भत्र्सना की। अमरीका ने अब गज़ा के लिए बोर्ड आफ पीस के गठन का एलान किया है। यह प्रस्तावित बोर्ड गज़ा का पुनर्निर्माण करने के लिए नहीं है बल्कि तबाही का मुनाफे के लिए शोषण करने के लिए ही है। उल्लेखनीय है कि यह शांति योजना, फिलिस्तीनी भूभाग पर बाहरी कब्जे को खत्म करने के मुद्दे पर गोलमोल बातों तक की सीमित रहती है।
वेनेजुएला और फिलिस्तीन, दोनों के मामले में भारत सरकार की विदेश नीति शर्मनाक है। यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर समझौता किये जाने को दिखाता है और दिखाता है कि किस तरह उसकी नीतियां, अमरीका के सैन्य तथा विदेश नीति संबंधी फरमानों और उसकी वर्चस्ववादी परियोजना के साथ बंधी हुई हैं।
अमरीका के साथ और योरपीय यूनियन के साथ भी, व्यापार डील करने की भारत सरकार की कोशिशों पर केंद्रीय कमेटी ने अपना विरोध जताया। ये व्यापार डीलें हमारी खेती को तथा उद्योग को ध्वस्त कर देंगी और हमारी जनता के जीवन में तबाही बरपा कर देंगी।
सीपीआइ (एम) की केंद्रीय कमेटी ने भाजपा तथा हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अपना दृढ़ संकल्प संघर्ष जारी रखने और इसके साथ ही साथ पार्टी की स्वतंत्र शक्ति को मजबूत करने के लिए काम करने की कसम ली।
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