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#🙏कर्म क्या है❓ बाइक चलाते वक्त गुटका खाकर चलती बाइक से जो लोग सोचे - समझे बिना थूक देते हैं मन करता है इन लोगों को भगा - भगा के मारु ये लोग चलती बाइक से इस तरह थूकते हैं के , तेज हवा के कारण इनका थूक इनके पीछे चलने वाले लोगों के मुंह पर उड़के आता है मन करता है तेज गाड़ी चलाकर इनके आगे निकलूं और और इनकी ही तरह थूक कर इनको बताऊं के उनके इस हरकत का नतीजा क्या है हालांकि कोई समझदार रहा तो समझ जाता है और सॉरी बोलकर आगे बढ़ते हैं पर इनमें से कई लोगों को बोलके बताने पर भी समझ ही नई आता के हम कहना क्या चाह रहे हैं एक तो ये लोग गलतियां करते हैं ऊपर से जुबान लड़ाते हैं वो उल्टे हमें ही गाली देकर तेज गाड़ी चलाकर आगे निकल जाते हैं मेरे साथ कई बार ऐसा हो चुका है ऐसे लोगों से या साधारण बाइक चलाने वालों से हाथ जोड़कर मेरी बिनती है के कृपया ध्यान रखें , गाड़ी कहीं साइड पर लगाकर अपना मुंह खाली कर लें ताकि दूसरों को परेशानी ना हो 🙏 सुनिता
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#❤️जीवन की सीख में कभी भी किसी से तुम्हे , गहरा लगाव हो जाए गर तो , सिर्फ तुम अकेले वादा मत देना , किसी भी बात का , एक बार उससे भी वादा ले लेना , के वो भी हर हाल में साथ रहे , आखिरी सांस तक, क्योंकि एकतरफा लगाव बहोत घाव देता है , ये जो एकतरफा लगाव , एकतरफा दोस्ती जो होती है ना मेरे दोस्त , ये एक समय के बाद दम तोड़ देती है , और जिस ओर से लगाव हो ना , उसकी जान भी ले लेती है , क्योंकि इस एकतरफा लगाव में , हमेशा तुम रूठोगे , तो तुम्हे खुद ही मान जाना पड़ेगा , तुम खुद गुस्सा होंगे , तो तुम्हे खुद ही शांत हो जाना होगा , तुम खुद चीखोगे चिल्लाओगे , फिर तुम्हे खुद ही चुप होना होगा , तुम खुद रोओगे , और तुम्हे खुद ही अपने आप मुस्कुराना होगा , वो कभी भी तुम्हे कुछ भी नई जताएंगे , तुम कभी उन्हें समझ ही नई पाओगे , और आखिर में एक हद तक जाकर , तुम चुप हो जाओगे , पत्थर बन जाओगे , पर फिर भी वो नई पिघलेंगे , तुम उनसे दूर हो जाओगे , दूर होके भी तुम रह नई पाओगे , और फिर भी वो तुम्हे मानने नई आयेंगे , उनको कोई फर्क ही नई पड़ेगा , क्योंकि उस तरफ से कोई लगाव कभी था ही नई , एक दिन इस बात को तुम्हे हर हाल में , स्वीकारना ही होगा , इसलिए हर रिश्ता , एक हद तक ही सीमित रहने देना , बस इंसानियत जिंदा रखना , शुरुआत तुमने किया है , तो अंत भी तुम्हे ही करना होगा 😞 सुनिता
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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ Mfg - 2O15 Exp - 2O25 🌼🌼🌼 जब हम किसी से अलग हो जाएं , या हमसे कोई अलग हो जाए , तब सब कुछ अलग ही अलग नज़र आता है , कुछ अच्छा नई लगता , हर तरफ मायूसी , हर तरफ उदासी , मन करता चीख - चीख कर चिल्ला - चिल्ला कर रोऊं , कहां जाऊं , क्या करूं , किससे कहूं , ऐसा लगता है बस अब काश थोड़ी हिम्मत आ जाए , खुद को खत्म कर दूं , ना जिंदा रहूं , ना तकलीफ सहू , कहीं भाग जाऊं , इस दर्द से बाहर कैसे निकलूं , काश ये जिंदगी फिर से , 1O साल पीछे चली जाए , फिर शुरुआत हो हमारी दोस्ती की , और इस बार कुछ गलतफहमियां ना आए हमारे बीच , किसी की नज़र ना लगे , इस दोस्ती को , कोई दूसरा - तीसरा आग ना लगा पाए , कोई दूसरा - तीसरा आके , हमारे बीच हुई गलत फहमीयों को धो जाए , गर कुछ नई हो सकता तो , इतना ही हो जाए , काश मेरी याददाश्त चली जाए , काश कुछ तो ऐसा हो जाए , की हम फिर से दोस्त बन जाए , और गर ये सब ना हो पाए तो , जैसे हिंदी फिल्मों में होता है , वैसा कुछ मेरे साथ हो जाए , मेरा एक्सीडेंट हो जाए , कम से कम उसी बहाने , मेरी दोस्त मुझसे मिलने आए , और अगर फिर भी ना आए तो , कम से कम मुझे मौत ही आ जाए 😭 अब तो उसे आना ही पड़ेगा हर हाल में , अब इसके बाद क्या हुआ , क्या होगा , मुझे कुछ पता नही , क्योंकि अब तो मैं जिंदा ही नही , काश जीते जी सर पे हाथ रख देती तो आज वक्त से पहले मुझे कफ़न ना लपेटना पड़ता 😊 ❣️❣️ सुनिता ❣️
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#☝ मेरे विचार अक्सर मां और बाबूजी को अपने बेटों की शादी से पहले कोई गलती नजर ही नई आती नजर अंदाज करते हैं , बेटों की हर गलतियों को वो , सोचे - समझे बिना हर बात मान लेते हैं , और बच्चों की शादी के बाद , हर छोटी - छोटी बात पर , सारा दोष बहुओं का , कहेंगे क्या , शादी के बाद से बदल गया है , हमें कुछ समझता ही नई है , (शादी से पहले आपने समझने का मौका दिया?) वो जो बोलती है वही करता है , (शादी से पहले कौन थी बोलने वाली ? तब भी तो वो वही करता था) परिवार में फूट डालती है , (शादी से पहले परिवार में कितनी एकता थी?) हमारे बेटे को हमसे तोड़के रख दी है (शादी से पहले कितना जुड़ा था आपका बेटा आपसे) अक्सर बेटों की शादी से पहले कुछ नजर ही नई आता सब कुछ शादी के बाद ही महसूस होता है दरअसल शादी से पहले गलतियां गिनाने के लिए , सामने कोई होता नई है , और खुद की गलती कभी किसीको नजर आती नई कुल मिला जुला कर बच्चों की शादी से पहले माता - पिता अंधे , गूंगे और बहरे होते है। आंख , कान , जुबान और दिमाग सब सुन्न रहता है , और वहीं बच्चों की शादी के बाद ऐसा लगता है , जान आ गई है , सब कुछ खुल जाता है आंखों से दिखाई देने लगता है। कानों से सुनाई देने लगता है। जुबान भी खुल जाती है। और दिमाग तो कुछ ज्यादा ही चलने लगता है गर पहले कि गई गलतियों पर टोकते ,रोकते तो , बाद में दूसरों को गलत ठहराने की नौबत ही ना आती वैसे हर बहु सही नई होती , और हर माता पिता भी गलत नई होते। और लड़कों के बारे में क्या कहूं बेचारे , शादी से पहले मां - बाबूजी के आंख के तारे , और शादी के बाद पत्नी के पति परमेश्वर , बेचारे जाएं तो जाएं किधर? 🙏🙏🙏 सुनिता
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