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MH 48 AF 3866
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#☝ मेरे विचार अक्सर मां और बाबूजी को अपने बेटों की शादी से पहले कोई गलती नजर ही नई आती नजर अंदाज करते हैं , बेटों की हर गलतियों को वो , सोचे - समझे बिना हर बात मान लेते हैं , और बच्चों की शादी के बाद , हर छोटी - छोटी बात पर , सारा दोष बहुओं का , कहेंगे क्या , शादी के बाद से बदल गया है , हमें कुछ समझता ही नई है , (शादी से पहले आपने समझने का मौका दिया?) वो जो बोलती है वही करता है , (शादी से पहले कौन थी बोलने वाली ? तब भी तो वो वही करता था) परिवार में फूट डालती है , (शादी से पहले परिवार में कितनी एकता थी?) हमारे बेटे को हमसे तोड़के रख दी है (शादी से पहले कितना जुड़ा था आपका बेटा आपसे) अक्सर बेटों की शादी से पहले कुछ नजर ही नई आता सब कुछ शादी के बाद ही महसूस होता है दरअसल शादी से पहले गलतियां गिनाने के लिए , सामने कोई होता नई है , और खुद की गलती कभी किसीको नजर आती नई कुल मिला जुला कर बच्चों की शादी से पहले माता - पिता अंधे , गूंगे और बहरे होते है। आंख , कान , जुबान और दिमाग सब सुन्न रहता है , और वहीं बच्चों की शादी के बाद ऐसा लगता है , जान आ गई है , सब कुछ खुल जाता है आंखों से दिखाई देने लगता है। कानों से सुनाई देने लगता है। जुबान भी खुल जाती है। और दिमाग तो कुछ ज्यादा ही चलने लगता है गर पहले कि गई गलतियों पर टोकते ,रोकते तो , बाद में दूसरों को गलत ठहराने की नौबत ही ना आती वैसे हर बहु सही नई होती , और हर माता पिता भी गलत नई होते। और लड़कों के बारे में क्या कहूं बेचारे , शादी से पहले मां - बाबूजी के आंख के तारे , और शादी के बाद पत्नी के पति परमेश्वर , बेचारे जाएं तो जाएं किधर? 🙏🙏🙏 सुनिता
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