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Subhash Dagar
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Subhash Dagar
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#GodMorningSaturday #TrueWorship_CuresCancer . कबीर, जिस मरने से जग डरे, मेरे मन आनन्द। कब मरूं कब पाऊं, वो पूरण परमानन्द।। कबीर साहिब जी ज्ञान देने के लिए समझाते हैं कि जिस मरण से संसार डरता है, वह मेरे लिए आनंद है। कब मरूँगा और कब पूर्ण परमानंद स्वरूप ईश्वर का दर्शन करूँगा। देह त्याग के बाद ही ईश्वर का साक्षात्कार होगा। घट का अंतराल हट जाएगा तो अंशी में अंश मिल जाएगा। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🌞 Good Morning🌞
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#GodMorningSaturday #TrueWorship_CuresCancer . पतिव्रता गरीब, पतिव्रता के बरत में, कदे न परि है भंग। उनका दुनिया क्या करे, जिनके भगति उमंग।। गरीब~निहकर्मी पतिव्रत सो आन उपाय न मूल। एक पुरूष से परसि है पतिव्रता सम तूल।। गरीब~निहकर्मी सो जानिये एक पुरूष से रात। निरदावे निरबैरता ना दूजे से बात।। गरीब~स्वाल सुखन किस कुँ कहे पतिव्रता सो नार। हुकम अदूल न मेट ही सो पतिव्रता पार।। गरीब~घर आंगन इकसार है वचन उलंघन होय। आन खसम से ओलने पतिव्रता है सोय।। गरीब~आन खसम से हंसत है चंडी चोर चुडैल। जिन से क्या घर बास है घर में बसै घुडैल।। गरीब~एक पुरूष अपना सही दूजा आन अनीत। अपनें पीव से रातिये और शिला सब भीत।। गरीब~निहकर्मी घर में रहै पतिव्रता सो नार। आन पुरूष से प्रीतडी ना रखिये घर बार।। गरीब~पतिव्रता सूनी नहीं रखवाले हैं राम। कल्पवृक्ष करूणामयी चौकी आठों जाम।। गरीब~पतिव्रता पानी चली पनही नाहीं पाय। वस्त्र अंग बिनंग है आपे देत उढाय।। Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🌞 Good Morning🌞
Subhash Dagar
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#GodMorningSaturday #TrueWorship_CuresCancer . #वाणी गरीब~ऐसा अविगत राम है आदि अंत नहिं कोय। वार पार कीमत नहीं अचल हिरबर सोय।। गरीब~ऐसा अविगत राम है अगम अगोचर नूर। सुन्न सनेही आदि है सकल लोक भरपूर ।। गरीब~ऐसा अविगत राम है गुण इन्द्रिय से न्यार। सुन्न सनेही रमि रह्मा दिल अंदर दीदार।। गरीब~अलह अविगत राम है बेचणून चित माहिं। शब्द अतीत अगाध है निर्गुण सरगुण नाहिं।। गरीब~अलह अविगत राम है बेचगून निरबान। मौले मालिक है सही महल मढी नहीं थान।। गरीब~अलह अविगत राम है कीमत कही न जाय। नाम निरंतर लीजिये मुखसे कह न सुनाय।। गरीब~अलह अविगत राम है निरबानी निबंध। नाम निरंतर लीजिये जयं हिलमिल मीन समुद्र।। Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🌞 Good Morning🌞
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#GodMorningSaturday #TrueWorship_CuresCancer . कबीर साहिब और धर्म दास मे ज्ञान चर्चा कबीर परमेश्वर वचन जिंदा रूप में परमेश्वर कबीर जी ने तर्क वितर्क करके यथार्थ अध्यात्म ज्ञान समझाया। प्रश्न किया कि जो शालिगराम लिए हुए हो, ये किस लोक से आए हैं? अड़सठ तीर्थ के स्नान व भ्रमण से किस लोक में साधक जाएगा? यह तत्काल बता। राम तथा कृष्ण कौन-से लोक में रहते हैं? जिनको आप शालिगराम कहते हो, ये तो जड़ हैं। इनके सामने घंटा बजाने का कोई लाभ नहीं। ये न सुन सकते हैं, न बोल सकते हैं। ये तो पत्थर या अन्य धातु से बने हैं। हे धर्मदास! कहाँ भटक रहे हो? सतलोक को पहचान। जिस परमेश्वर की शक्ति से प्रत्येक जीव बोलता है, हे धर्मदास! उसको नहीं जाना। चिदानंद परमेश्वर को पहचान। इन पत्थर व धातु को पटक दे। परमेश्वर कबीर जी जिंदा बाबा ने कहा कि हे धर्मदास! राम-कृष्ण तो करोड़ों जन्म लेकर मर लिए। मालिक सदा से एक ही है। वह कभी नहीं मरता। आप विवेक से काम लो। ये आपके पत्थर व पीतल धातु के भगवानों को दरिया में छोड़कर देखो, डूब जाएँगे तो ये आपकी क्या मदद करेंगे? इनको मूर्तिकार ने काट-पीट, कूटकर इनकी छाती पर पैर रखकर काटकर रूप दिया। इनका रचनहार तो कारीगर है। ये जगत के उत्पत्तिकर्ता व दुःख हरता कैसे हैं? ऐसी पूजा कौन करे? जिस परमेश्वर ने माता के गर्भ में रक्षा की, खान-पान दिया, सुरक्षित जन्म दिया, उसकी भक्ति कर। यह पत्थर-पीतल तथा तीर्थ के जल की पूजा की कमजोर आशा त्याग दे। जिंदा बाबा ने कहा कि जो पूर्ण परमात्मा सब सृष्टि की रचना करके इससे भिन्न रहता है। अपनी शक्ति से सब ब्रह्माण्डों को चला व संभाल रहा है, उसका विचार कर। उसका शरीर श्वांस से नहीं चलता। वह सबसे ऊपर के लोक में रहता है। आपकी समझ में नहीं आता है। उसकी शक्ति सर्वव्यापक है। उसका आश्रम अधर अधार यानि सबसे ऊपर है। वह अजर-अमर अविनाशी है। धर्मदास जी ने कहा कि बोलत है धर्मदास, सुनौं जिंदे मम बाणी। कौन तुम्हारी जाति, कहांसैं आये प्राणी।। ये अचरज की बात, कही तैं मोसैं लीला। नामा के पीया दूध, पत्थरसैं करी करीला।। नरसीला नित नाच, पत्थर के आगै रहते। जाकी हूंडी झालि, सांवल जो शाह कहंते।। पत्थर सेयै रैंदास, दूध जिन बेगि पिलाया। सुनौ जिंद जगदीश, कहां तुम ज्ञान सुनाया।। परमेश्वर प्रवानि, पत्थर नहीं कहिये जिंदा। नामा की छांनि छिवाई, दइ देखो सर संधा। सिरगुण सेवा सार है, निरगुण सें नहीं नेह। सुन जिंदे जगदीश तूं, हम शिक्षा क्या देह।। धर्मदास जी कुछ नाराज होकर परमेश्वर से बोले कि हे जीव! तेरी जाति क्या है? कहाँ से आया है? आपने मेरे से बड़ी हैरान कर देने वाली बातें कही हैं, सुनो! नामदेव ने पत्थर के देव को दूध पिलाया। नरसी भक्त नित्य पत्थर के सामने नृत्य किया करता यानि पत्थर की मूर्ति की पूजा करता था। उसकी ड्रॉफ्ट कैश किया। वहाँ पर सांवल शाह कहलाया। रविदास ने पत्थर की मूर्ति को दूध पिलाया। हे जिन्दा! तू यह क्या शिक्षा दे रहा है कि पत्थर की पूजा त्याग दो। ये मूर्ति परमेश्वर समान हैं। इनको पत्थर न कहो। नामदेव की छान डाली। देख ले परमेश्वर की लीला। हम तो सर्गुण की पूजा सही मानते हैं। निर्गुण से हमारा लगाव नहीं है। हे जिन्दा! मुझे क्या शिक्षा दे रहा है? बौलै जिंद कबीर, सुनौ बाणी धर्मदासा। हम खालिक हम खलक, सकल हमरा प्रकाशा।। हमहीं से चंद्र अरू सूर, हमही से पानी और पवना। हमही से धरणि आकाश, रहैं हम चौदह भवना।। हम रचे सब पाषान नदी यह सब खेल हमारा। अचराचर चहुं खानि, बनी बिधि अठारा भारा। हमही सृष्टि संजोग, बिजोग किया बोह भांती। हमही आदि अनादि, हमैं अबिगत कै नाती।। हमही माया मूल, हमही हैं ब्रह्म उजागर। हमही अधरि बसंत, हमहि हैं सुखकै सागर।। हमही से ब्रह्मा बिष्णु, ईश है कला हमारी। हमही पद प्रवानि, कलप कोटि जुग तारी।। हम साहिब सत्यपुरूष हैं, यह सब रूप हमार। जिंद कहै धर्मदाससैं, शब्द सत्य घनसार।। जिन्दा रूप मे परमात्मा कबीर साहिब जी ने कहा कि हे धर्मदास! आपने जो भक्त बताए हैं, वे पूर्व जन्म के परमेश्वर के परम भक्त थे। सत्य साधना किया करते थे जिससे उनमें भक्ति-शक्ति जमा थी। किसी कारण से वे पार नहीं हो सके। उनको तुरंत मानव जन्म मिला। जहाँ उनका जन्म हुआ, उस क्षेत्रा में जो लोकवेद प्रचलित था, वे उसी के आधार से साधना करने लगे। जब उनके ऊपर कोई आपत्ति आई तो उनकी इज्जत रखने व भक्ति तथा भगवान में आस्था मानव की बनाए रखने के लिए मैंने वह लीला की थी। मैं समर्थ परमेश्वर हूँ। यह सब सृष्टि मेरी रचना है। हम संसार के मालिक हैं। संसार हमसे ही उत्पन्न है। हमने यानि मैंने अपनी शक्ति से चाँद, सूर्य, तारे, सब ग्रह तथा ब्रह्माण्ड उत्पन्न किए हैं। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश की आत्मा की उत्पत्ति मैंने की है। हे धर्मदास! मैं सतपुरूष हूँ। यह सब मेरी आत्माएँ हैं जो जीव रूप में रह रहे हैं। यह सत्य वचन है। धर्मदास जी ने अपनी शंका बताई। कहा कि बोलत हैं धर्मदास, सुनौं सरबंगी देवा। देखत पिण्ड अरू प्राण, कहौ तुम अलख अभेवा।। नाद बिंद की देह, शरीर है प्राण तुम्हारै। तुम बोलत बड़ बात, नहीं आवत दिल म्हारै।। खान पान अस्थान, देह में बोलत दीशं। कैसे अलख स्वरूप, भेद कहियो जगदीशं।। कैसैं रचे चंद अरू सूर, नदी गिरिबर पाषानां। कैसैं पानी पवन, धरनि पृथ्वी असमानां।। कैसैं सष्टि संजोग, बिजोग करैं किस भांती। कौन कला करतार, कौन बिधि अबिगत नांती।। कैसैं घटि घटि रम रहे, किस बिधि रहौ नियार। कैसैं धरती पर चलौ, कैसैं अधर अधार।।994।। Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🌞 Good Morning🌞
Subhash Dagar
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#GodMorningSaturday #TrueWorship_CuresCancer . गरीब, बनजारे के बैल ज्यौ, फिरै देश प्रदेश। जिन कै संग न साथ हू, जगत दिखावे भेष।। संत गरीबदास जी महाराज कहते हैं कि जो हरयाई गाय की तरह इधर-उधर दुनिया को ठगते फिरते हैं, परमात्मा उनके साथ नहीं है। वे जगत में साधु वेश बनाकर प्रभावित करके काल जाल में डालते हैं। अथार्त नकली झुठे ये संत का भेष मे फिरते है वे केवल काल भगवान के दूत है। परमात्मा उनके साथ नही है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🌞 Good Morning🌞
Subhash Dagar
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#GodMorningSaturday #TrueWorship_CuresCancer . गरीब, राम कह्या तौ क्या हुआ, उर में नहीं यकीन। चोर मुसैं घर लूटहीं, पांच पचीसौं तीन॥ यदि पूर्ण विश्वास के साथ राम नाम यानी दीक्षा में प्राप्त मंत्र का जाप नहीं किया तो नाम जपा न जपा के बराबर है। उस साधक पर पाँचों विकार काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार तथा प्रत्येक की पाँच-पाँच प्रकति जो कुल पच्चीस हैं तथा तीनों गुण रज, सत, तम मिलकर ये चोर आपके जीवन रूपी श्वांस धन को मुस रहे हैं यानी चुरा रहे हैं। ( मुसना = चोरी करना) तेरे शरीर रूपी घर को लूट रहे हैं। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🌞 Good Morning🌞
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