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Zeͥ𝓱rͣeͫe𝔩a..
@aitbaar_
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Zeͥ𝓱rͣeͫe𝔩a..
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??? - सुनो !! ह्म्म्म..!! कुछ नहीं ..जाने दो.. कहो भी.. सुन रही हूँ मैं.. जानता हूँ सुन रही हो तुम..पर यकीन मानो खुद मैं नहीं जानता कि मुझको आखिर कहना क्या है... एक हुजूम सा है विचारो का मन में, मन कहीं ठहरता ही नहीं ..कोई एक सोच टिक कर नही रहती कभी.. कभी कभी मन करता है खुद को छुपा लूँ .. की कोई दुनिया मुझे न देखे उनके सवालो उनकी नज़रों से बस गायब हो जाऊँ .. तो कभी मन करता है उस पहाड़ की चोटी पर चढ़ कर बहुत चिल्लाऊँ के मेरे अंदर का तूफान कुछ पल तो ठहर जाये.. एक समंदर लिए फिरता हूँ हर पल .. कहना होता है पर क्या खुद नहीं जानता ... खैर जाने दो ये बाते हमे और उदास कर देगी.. बस जब मन बहुत भर जाता है और Depression आ जाता है.. तुम्हे पुकार लेता हूँ..!! कहना क्या है खुद नहीं जानता.. . मम्म.. सुनो?? #💔दर्द कविताएं #💔दर्द भरी कहानियां #❤️ प्यार की कहानियां #📓 हिंदी साहित्य #✍️ साहित्य एवं शायरी
Zeͥ𝓱rͣeͫe𝔩a..
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अच्छा सुनो ना .?? छोड़ो ये गिले शिकवे अब ये सब छोड़ते हैं ना .. कोई फायदा नहीं रूठने मनाने का अब, इन सबको बंद करते हैं ना ...!! जितना काम हो एक दूजे से हमें, सिर्फ उतनी ही बात करते हैं ना ..!! ना दखल दूं मैं तेरी जिंदगी मे, ना दखल दे तू मेरी जिंदगी में ..!! आज हम ये फैसला लेते हैं ना, एक साथ रहना भले ही मजबूरी है हमारी .!! संग चलना भी शायद होगा जरूरी, मगर इसे सिर्फ दिखावे तक ही रहने देते हैं ना .!! कि ना वजह बने तू कभी मेरे आंसओं की और ना वजह बनू मैं कभी तेरे आंसओं की ... चल आज एक दूजे को अलविदा कहते हैं ना, जानते हैं हम एक दूजे को भली भांति...!! क्या चाहत है एक दूजे से हमारी, इसलिए बची कुची जिंदगी को चैन से जीते हैं ना..!! #💔दर्द कविताएं #❤️ प्यार की कहानियां #📓 हिंदी साहित्य #💔दर्द भरी कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी
Zeͥ𝓱rͣeͫe𝔩a..
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सुनो जाना.. न कोई वादा, न कोई शोर है, फिर भी हर लम्हा तेरा ही ज़िक्र है.. मैं कुछ लिखता हूँ, तू सब समझ जाती है, तेरी खामोशी में भी इक नज़्म बसी रहती है..!! तू जवाब नहीं देती, पर इंतज़ार करती है, हर लफ़्ज़ की दस्तक को महसूस करती है.. मैं जानता हूँ, तू जानती है, ये सब तेरे लिए ही लिखा गया है..!! हमने कभी 'प्यार' कहा नहीं, क्योंकि वो तो हमारे बीच की हवा में घुला है.. बातों में कम, नज़रों में ज़्यादा, हमारा रिश्ता एक ख़ामोश दुआ सा खुला है..!! हदें भी हैं, और खुलापन भी, हम समझते हैं कब रुकना है, कब कहना है सब कुछ.. ना कोई शक, ना कोई दिखावा, ये रिश्ता है सच्चा, और पूरा मुकम्मल..!! तू नहीं पूछती, फिर भी सब जानती है, मैं नहीं बताता, फिर भी तू पढ़ लेती है.. हमें बाबू जान सोना टोना रोना जैसे शब्दों की ज़रूरत कहाँ है, जब इश्क़ तेरी और मेरी हर साँस में, बसा हुआ है..!! . #💔दर्द कविताएं #❤️ प्यार की कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी #💔दर्द भरी कहानियां #📓 हिंदी साहित्य
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