सुनो जाना..
न कोई वादा, न कोई शोर है,
फिर भी हर लम्हा तेरा ही ज़िक्र है..
मैं कुछ लिखता हूँ, तू सब समझ जाती है,
तेरी खामोशी में भी इक नज़्म बसी रहती है..!!
तू जवाब नहीं देती, पर इंतज़ार करती है,
हर लफ़्ज़ की दस्तक को महसूस करती है..
मैं जानता हूँ, तू जानती है,
ये सब तेरे लिए ही लिखा गया है..!!
हमने कभी 'प्यार' कहा नहीं,
क्योंकि वो तो हमारे बीच की हवा में घुला है..
बातों में कम, नज़रों में ज़्यादा,
हमारा रिश्ता एक ख़ामोश दुआ सा खुला है..!!
हदें भी हैं, और खुलापन भी,
हम समझते हैं कब रुकना है, कब कहना है सब कुछ..
ना कोई शक, ना कोई दिखावा,
ये रिश्ता है सच्चा, और पूरा मुकम्मल..!!
तू नहीं पूछती, फिर भी सब जानती है,
मैं नहीं बताता, फिर भी तू पढ़ लेती है..
हमें बाबू जान सोना टोना रोना जैसे शब्दों की ज़रूरत कहाँ है,
जब इश्क़ तेरी और मेरी हर साँस में, बसा हुआ है..!!
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