#📿जया एकादशी🪔 जया एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 29 जनवरी 2026*
*⛅दिन - गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - माघ*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - एकादशी दोपहर 01:55 तक तत्पश्चात् द्वादशी*
*⛅नक्षत्र - रोहिणी प्रातः 07:31 तक, तत्पश्चात् मृगशिरा प्रातः 05:29 जनवरी 30 तक, तत्पश्चात् आद्रा*
*⛅योग - इन्द्र रात्रि 08:27 तक तत्पश्चात् वैधृति*
*⛅राहुकाल - दोपहर 02:03 से दोपहर 03:26 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:08*
*⛅सूर्यास्त - 06:12 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 जनवरी 30 से रात्रि 01:06 जनवरी 30 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - जया एकादशी, रोहिणी व्रत, भीष्म द्वादशी*
*🌥️विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) व द्वादशी को पूतिका (पोइ) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
*🔹घर में बरकत व समृद्धि के अचूक उपाय🔹*
*🔸घर की साफ-सफाई सुबह करनी चाहिए । रात को घर में झाडू लगाने से लक्ष्मी की बरकत क्षीण हो जाती है । इसलिए गृहस्थियों को रात्रि को झाड़ू नहीं लगानी चाहिए ।*
*🔸भोजन में से गाय, पक्षियों, जीव-जंतुओं का थोड़ा हिस्सा रखनेवाले के धन-धान्य में बरकत रहती है ।*
*🔸घर से निकलें खा के बाहर मिले पका के कभी यात्रा में जायें या किसीसे मिलने जायें तो भूखे या निराहार होकर नहीं मिलें । कुछ खा-पीकर जायें, तृप्त हो के जायें तो मिलने पर भाव में तृप्ति आयेगी ।*
*🔸कहीं यात्रा में जाने में घर से विदाई के समय थोड़ा-सा दही या मट्ठा लेना गृहस्थियों के लिए शुभ माना जाता है ।*
🔹 *अंत्येष्टि संस्कार क्यों ?*🔹
*🔸देहत्याग के समय क्या करें और क्यों ?🔸*
*🔸व्यक्ति अंतिम श्वास ले रहा होता है तो उस आतुर काल में भूमि को गाय के गोबर से लेपन करके शुद्ध करें और जल-रेखा से मंडल (घेरा) बनायें । फिर उस भूमि पर दक्षिणाग्र कुश (नुकीला अग्रभाग दक्षिण की ओर किये हुए कुश) तथा तिल को बिछा दें ।*
*🔸मरणासन्न व्यक्ति को उस पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर सिर करके सीधा लिटा दें ।*
*🔸सिर पर तुलसी का पत्ता रखें । उस व्यक्ति के मुँह में बीच-बीच में तुलसी दल डला हुआ गंगाजल डालते रहें । ऐसा करने से वह पापमुक्त हो जाता है ।*
*🔸घी का दीपक जला दें । मरणासन्न व्यक्ति के दोनों हाथों में कुशा रखें । 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें ।*
*🔸मरणासन्न व्यक्ति से उसकी सद्गति के लिए तिल, नमक, गाय आदि का दान करा दें । आतुर काल में लवण (नमक) दान करने से जीव की दुर्गति नहीं होती ।*
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 28 जनवरी 2026*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - माघ*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - दशमी शाम 04:35 तक तत्पश्चात् एकादशी*
*⛅नक्षत्र - कृत्तिका सुबह 09:26 तक तत्पश्चात् रोहिणी*
*⛅योग - ब्रह्म रात्रि 11:54 तक तत्पश्चात् इन्द्र*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:40 से दोपहर 02:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:08*
*⛅सूर्यास्त - 06:12 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:14 जनवरी 29 से रात्रि 01:06 जनवरी 29 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (अहो रात्रि)*
*🌥️विशेष - दशमी को कलंबी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹सबके लिए क्यों जरूरी है सूर्यस्नान ?🔹*
*🔸सूर्य की किरणों में जो रोगप्रतिकारक शक्ति है, रोगनाशिनी शक्ति है वह दुनिया की सब औषधियों को मिलाकर भी नहीं मिलती है ।*
*🔸डॉक्टर सोले कहते हैं : "सूर्य में जितनी रोगनाशक शक्ति है उतनी संसार के अन्य किसी पदार्थ में नहीं है ।*
*🔸 कैंसर, नासूर, भगंदर आदि दुःसाध्य रोग, जो बिजली या रेडियम के प्रयोग से भी ठीक नहीं किये जा सकते, वे सूर्य-रश्मियों के प्रयोग से ठीक होते हुए मैंने देखे हैं ।"*
*🔸जो माइयाँ सूर्यकिरणों से अपने को बचाये रखती हैं उनके जीवन में ज्यादा बीमारियाँ देखी जा सकती हैं । इसलिए रोज सुबह सिर को कपड़े से ढककर ८ मिनट सूर्य की ओर मुख व १० मिनट पीठ करके बैठना चाहिए । ऐसा सूर्यस्नान लेटकर करें तो और अच्छा ।*
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स#💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫
*🔸डॉक्टर होनर्ग ने लिखा है: 'रक्त का पीलापन, पतलापन, लोह (हीमोग्लोबिन) की कमी, नसों की दुर्बलता, कमजोरी, थकान, पेशियों की शिथिलता आदि बीमारियों का सूर्य किरण की मदद से इलाज करना लाजवाब है ।'*
*अचला सप्तमी (सूर्य सप्तमी) महत्व, स्नान विधि और व्रत कथा*
रथ सप्तमी पर्व माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मनाया जाता है, इस दिन भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करके उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
रथ सप्तमी को विभिन्न नामों से जाना जाता है, माघ शुक्ल सप्तमी के कारण इसे माघी सप्तमी, अचला सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी और अर्क सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।
रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके उगते हुए सूर्य का दर्शन एवं उन्हें ॐ घृणि सूर्याय नम: कहते हुए जल अर्पित करें। सूर्यदेव की किरणों को लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें।
सूर्यदेव को जल देने के पश्चात् लाल आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर मंत्र का 108 बार जप करें।
रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से और दान- पुण्य करने से व्यक्ति को निरोगी शरीर और सफलता-यश का वरदान मिलता है। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 23 जनवरी 2026*
*⛅दिन - शुक्रवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - माघ*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - पञ्चमी रात्रि 01:46 जनवरी 24 तक तत्पश्चात् षष्ठी*
*⛅नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद*
*⛅योग - परिघ शाम 03:59 तक तत्पश्चात् शिव*
*⛅राहुकाल - सुबह 11:17 से दोपहर 12:39 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:10*
*⛅सूर्यास्त - 06:08 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:13 जनवरी 24 से रात्रि 01:05 जनवरी 24 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - वसंत पंचमी, सुभाषचंद्र बोस जयंती*
*🌥️विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹धन-लाभ के साथ पायें पुण्यलाभ व आरोग्य🔹*
*🔸व्यवसाय में लाभ नहीं हो रहा हो तो शुक्रवार के दिन शाम की संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास देशी गाय के घी या तिल के तेल का दीपक जलायें । परब्रह्म-प्रकाशस्वरूपा दीपज्योति को नमस्कार करें और निम्न मंत्रों का उच्चारण करें :*
*दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।*
*दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ॥*
*शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखसम्पदाम् ।*
*शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ॥*
*🔸इससे धन-लाभ होता है, साथ ही पापों का नाश होता है । शत्रु का विनाश होकर शत्रुओं की वृद्धि रुकती है तथा आयु-आरोग्य की प्राप्ति होती है ।*
*🔹शास्त्रों में वृक्षारोपण की महत्ता🔹*
*👉 पद्म पुराण में पुलस्त्यजी भीष्मजी से कहते हैं कि "वृक्ष पुत्रहीन पुरुष को पुत्रवान होने का फल देते हैं । इतना ही नहीं, वे अधिदेवतारूप से तीर्थों में जाकर वृक्ष लगानेवालों को पिंड भी देते हैं ।*
*👉 अतः भीष्म ! तुम यत्नपूर्वक पीपल के वृक्ष लगाओ । वह अकेला ही तुम्हें एक हजार पुत्रों का फल देगा।*
*👉 पीपल का पेड़ लगाने से मनुष्य निरोग व धनी होता है ।*
*👉 पलाश से ब्रहातेज, खैर से आरोग्य व नीम से आयु की प्राप्ति होती है ।*
*👉 नीम लगानेवालों पर भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं ।*
*👉 चंदन और कटहल के वृक्ष क्रमशः पुण्य और लक्ष्मी देनेवाले हैं ।*
*👉 चम्पा सौभाग्य-प्रदायक है । इसी प्रकार अन्यान्य वृक्ष भी यथायोग्य फल प्रदान करते हैं ।*
*👉 जो लोग वृक्ष लगाते हैं उन्हें (परलोक में) प्रतिष्ठा प्राप्त होती है और जो वृक्ष व गोचर भूमि का उच्छेद करते हैं उनकी २१ पीढ़ियाँ रौरव नरक में पकायी जाती हैं ।"*
*👉 'भविष्य पुराण में आता है कि 'जो व्यक्ति छाया, फूल और फल देनेवाले वृक्षों का रोपण करता है या मार्ग में तथा देवालय में वृक्षों को लगाता हैं वह अपने पितरों को बड़े-बड़े पापों से तारता है और रोपणकर्ता इस मनुष्यलोक में महती कीर्ति तथा शुभ परिणाम को प्राप्त करता है तथा पूर्वकालीन और भावी पितरों को स्वर्ग में जाकर भी तारता ही रहता है ।*
*👉 विधिपूर्वक वृक्षों का रोपण करने से स्वर्ग-सुख प्राप्त होता है और रोपणकर्ता के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं ।*
*👉 वृक्ष के आरोपण में वैशाख मास श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ अशुभ है। आषाढ, श्रावण तथा भाद्रपद ये भी श्रेष्ठ हैं ।'*
*👉 अग्नि पुराण में आता है कि 'दक्षिण में गूलर और पश्चिम में पीपल का वृक्ष उत्तम माना जाता है । लगाये हुए वृक्षों को ग्रीष्मकाल में प्रातः-सायं, शीत ऋतु में मध्याह्न के समय तथा वर्षाकाल में भूमि के सूख जाने पर सींचना चाहिए ।'*
*🔸अतः ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या का हल करना हो, पर्यावरण की सुरक्षा करनी हो, अपना इहलोक व परलोक सँवारना हो, आर्थिक लाभ पाना हो... किसी भी दृष्टि से देखा जाय तो वृक्षों का रोपण, संरक्षण-संवर्धन जरूरी है और हर व्यक्ति का कर्तव्य है ।*
*🔸अपने जन्मदिवस या अन्य किसी शुभ अवसर पर कम-से-कम १ वृक्ष लगाने का अवश्य संकल्प करें और दूसरों को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित भी करें ।*