*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 10 मई 2026*
*⛅दिन - रविवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - ज्येष्ठ*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - अष्टमी दोपहर 03:06 तक तत्पश्चात् नवमी*
*⛅नक्षत्र - धनिष्ठा मध्यरात्रि 12:50 तक तत्पश्चात् शतभिषा*
*⛅योग - ब्रह्म मध्यरात्रि 02:09 तक तत्पश्चात् इन्द्र*
*⛅राहुकाल - शाम 05:19 से शाम 06:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 05:48*
*⛅सूर्यास्त - 06:59 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:22 से प्रातः 05:05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:57 से दोपहर 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:02 से मध्यरात्रि 12:45 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है व नवमी को लौकी खाना गौमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स#💮आज का पंचांग एवं मुहूर्त💫
प्रेरणादायक कथा
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एक राजा था | उसका मंत्री बहुत बुद्धिमान था | एक बार राजा ने अपने मंत्री से प्रश्न किया – “ मंत्री जी! भेड़ों और कुत्तों की पैदा होने कि दर में तो कुत्ते भेड़ों से बहुत आगे हैं, लेकिन भेड़ों के झुंड के झुंड देखने में आते हैं और कुत्ते कहीं-कहीं एक आध ही नजर आते है | इसका क्या कारण हो सकता है ?”
मंत्री बोला – “ महाराज! इस प्रश्न का उत्तर आपको कल सुबह मिल जायेगा |”
राजा के सामने उसी दिन शाम को मंत्री ने एक कोठे में बिस कुत्ते बंद करवा दिये और उनके बीच रोटियों से भरी एक टोकरी रखवा दी |”
दूसरे कोठे में बीस भेड़े बंद करवा दी और चारे की एक टोकरी उनके बीच में रखवा दी | दोनों कोठों को बाहर से बंद करवाकर, वे दोनों लौट गये |
सुबह होने पर मंत्री राजा को साथ लेकर वहां आया | उसने पहले कुत्तों वाला कोठा खुलवाया | राजा को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि बीसो कुत्ते आपस में लड़-लड़कर अपनी जान दे चुके हैं और रोटियों की टोकरी ज्यों की त्यों रखी है | कोई कुत्ता एक भी रोटी नहीं खा सका था |
इसके पश्चात मंत्री राजा के साथ भेड़ों वाले कोठे में पहुंचा | कोठा खोलने के पश्चात राजा ने देखा कि बीसो भेड़े एक दूसरे के गले पर मुंह रखकर बड़े ही आराम से सो रही थी और उनकी चारे की टोकरी एकदम खाली थी |
मंत्री राजा से बोला – “ महाराज! कुत्ते एक भी रोटी नहीं खा सके तथा आपस में लड़-लड़कर मर गये | उधर भेड़ों ने बड़े ही प्रेम से मिलकर चारा खाया और एक दूसरे के गले लगकर सो गयी | यही कारण है, कि भेड़ों के वंश में वृद्धि है | समृद्धि है | उधर कुत्ते हैं, जो एक-दूसरे को सहन नहीं कर सकते | जिस बिरादरी में इतनी घृणा तथा द्वेष होगा | उसकी वृद्धि भला कैसे हो सकती है |”
राजा मंत्री की बात से पूरी तरह संतुष्ट हो गया | उसने उसे बहुत-सा पुरस्कार दिया | वह मान गया था, कि आपसी प्रेम तथा भाईचारे से ही वंश वृद्धि होती है | मंत्री ने इस संबंध में राजा को एक कहानी सुनायी –
एक बार ब्रह्मा ने देवता तथा असुरों की एक सभा बुलवायी | सभी देवता तथा दानव ब्रह्मा के दरबार में उपस्थित हुये | ब्रह्मा ने वैसे तो दोनों ही समुदाय की बड़ी आवभगत की, लेकिन देवताओं के प्रति उनके मन में अधिक श्रद्धा तथा सम्मान था |
दानवों ने इस बात को भाप लिया की, ब्रह्मा के मन में देवताओं के प्रति अधिक मान-सम्मान है | दिखाने के लिए वे बराबर का बर्ताव कर रहे हैं | दानवों ने राजा से कहा – “ ब्रह्मा जी! देखिये आप देवताओं को अधिक महत्व दे रहे हैं | उनके प्रति आपके ह्रदय में अधिक सम्मान है | अगर ऐसा ही है, तो फिर हमें यहां क्यों बुलवाया |”
ब्रह्मा ने बहुत समझाया बुझाया; किंतु दानवों का क्रोध कम नहीं हुआ | अब तो ब्रह्मा ने संकल्प लिया कि दानवों को इस बात का बोध कराना ही होगा कि वे देवताओं की बराबरी नहीं कर सकते | ब्रह्मा ने असुरों के राजा से कहा – “ मुझे प्रसन्नता होगी | यदि आप देवताओं के समान बन जाये, उनसे पीछे न रहे |”
“ हम तो पहले ही उनसे बहुत आगे हैं |” असुरों के राजा ने अकड़कर कहा |
“ बुरा ना माने तो, मैं आपकी परीक्षा ले लूं |” ब्रह्मा ने पूछा |
“ ठीक है | हो जाये परीक्षा |” दानवों के राजा ने कहा |
रात के भोजन में ब्रह्मा ने देवताओं दानवो सबके हाथों पर उंगलियों तक डंडे बधवा दिये | जिससे दोनों हाथ मूड़ न सके | सबसे पहले ब्रह्मा ने असुरों के आगे लड्डूओ के बड़े-बड़े थाल परोसे और कहा कि “ जो अधिक लड्डू खायेगा | वही श्रेष्ठ होगा |” दानवों ने लड्डू उठा तो लिये; किंतु हाथ में डंडे बंधे होने के कारण वे लड्डूओं को अपने मुंह तक नहीं ले जा सके | यह एक विकट समस्या उत्पन्न हो गयी | बहुत प्रयास करने के पश्चात भी कोई भी दानव लड्डू खाने में सफल नहीं हो सका | सभी उठ गये |
अब देवताओं की बारी आयी | उनके हाथ पर भी उसी प्रकार डंडे बांधे गये | उनके हाथ भी मूड नहीं सकते थे | पंक्ति में बैठे सभी देवताओं के सम्मुख लड्डू परोसे गये | देवताओं ने दो-दो जोड़ी बना ली | एक देवता दूसरे देवता को लड्डू खिला रहा था | सभी दानव यह तमाशा देख रहे थे | उन्हें मानना पड़ा कि वास्तव में देवता दानवों से श्रेष्ठ है |
राजा को मंत्री की कहानी बहुत पसंद आयी | वह मान गया कि वास्तव में एकता द्वारा कुछ भी कार्य किया जा सकता है..!!
जय जय श्री राधे
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#☝आज का ज्ञान#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 09 मई 2026*
*⛅दिन - शनिवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - ज्येष्ठ*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - सप्तमी दोपहर 02:02 तक तत्पश्चात् अष्टमी*
*⛅नक्षत्र - श्रवण रात्रि 11:24 तक तत्पश्चात् धनिष्ठा*
*⛅योग - शुक्ल रात्रि 02:36 मई 10 तक तत्पश्चात् ब्रह्म*
*⛅राहुकाल - सुबह 09:07 से सुबह 10:45 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 05:49*
*⛅सूर्यास्त - 06:58 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:22 से प्रातः 05:05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:57 से दोपहर 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:02 से मध्यरात्रि 12:45 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी*
*🌥️विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है एवं अष्टमी को नारियल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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बदलाव
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जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?” महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |” क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ | यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न | महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |
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#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स#☝आज का ज्ञान
बड़ा मंगल 2026: तिथि, कथा, महत्व, पूजा विधि और उपाय
क्या आप जानते हैं कि बड़ा मंगल के दिन किया गया एक छोटा सा उपाय आपकी किस्मत बदल सकता है? बड़ा मंगल 2026 का पर्व हनुमान भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान हनुमान जी की पूजा करने से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं।
कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस लेख में जानें #बड़ामंगल2026 की सही तिथियां, महत्व, कथा, पूजा विधि और चमत्कारी उपाय। #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स#🙏 जय हनुमान
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