यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित् कृणुथा सुप्रतीकम्।
भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद्वो वय उच्यते सभासु।।
"गौमाता, आप कृश (दुर्बल) शरीर वाले व्यक्ति को हष्ट-पुष्ट कर देती हो एंव तेजोहीन को सुन्दर बना देती हो, आप माँ शब्द की हुंकार से हमारे घरों को मंगलमय बना देती हो, इन्हीं दिव्य गुणों से सभाओं में आपके ही महान यश का गान होता है।"
#गौमहिमा
हरि ॐ भगवान
हम गौव्रती रहें अर्थात् वैदिक गौवंश से प्रदत्त दुग्ध, दधी, घृत, गौबर, गौमूत्र आराध्य देवी (माताजी), देवता (बावजी) को अर्पित कर गौगव्य का निजी जीवन में उपयोग कर गौव्रत करना है।
#गौमहिमा
यत्र गावः प्रसन्नाः स्युः प्रसन्नास्तत्र सम्पदः।
यत्र गावो विषण्णाः स्युर्विषण्णास्तत्र सम्पदः॥
जहाँ गायें प्रसन्न रहती है, वहाँ समस्त सम्पदाएँ प्रसन्न होकर प्राप्त रहती है, और जहाँ गायें दुःखी रहती है, वहाँ सम्पदाएँ दुःखी होकर लुप्त हो जाती है।
#गौमहिमा
वैदिक सनातन में धर्म शास्त्रों के अनुसार 40 संस्कार गौवंश के बिना से पूर्ण नहीं हो सकता है, पौराणिक संस्कारों में सतोगुण और अनुष्ठान सफल करने वाली दिव्य शक्ति गौमाता ही है।
#गौमहिमा