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Subham Kumar Parjapat
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Subham Kumar Parjapat
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#GodMorningFriday #TrueWorship_CuresCancer . धर्म दास व कबीर साहिब जी की ज्ञान चर्चा धर्म दास वचन हम वैष्णव बैरागी, धर्म में सदा रहाई। सुद्र न बैठें संग, कलप ऐसी मन मांही।। सुन जिंदा मम ज्ञान कूं, अधिक अचार बिचार। हमरी करनी जो करै, उतरे भवजल पार।। धर्मदास जी ने कहा कि मैं वैष्णव पंथ से दीक्षित हूँ। मेरे को अपने परमात्मा विष्णु के प्रति पूर्ण वैराग्य है। सदा अपने हिन्दू धर्म में पुण्य के कार्य करता हूँ। हम शुद्र को निकट नहीं बैठने देते, यह हमारे मन की कल्पना है। हम शुद्ध, स्वच्छ रहते हैं। हे जिन्दा! हमारा ज्ञान सुन। हम अधिक आचार विचार यानि कर्मकाण्ड करते हैं। हमारी क्रिया जो करेगा, वह भवजल से पार हो जाएगा। कबीर जी ने कहा कि बोलैं धनी कबीर, सुनौं वैष्णव बैरागी। कौन तुम्हारा नाम, गाम कहिये बड़भागी। कौन कौंम कुल जाति, कहां को गवन किया है। कौन तुम्हारी रहसि, किन्हें तुम नाम दिया है।। कौन तुम्हारा ज्ञान ध्यान, सुमरण है भाई। कौन पुरूषकी सेव, कहां समाधि लगाई।। को आसन को गुफा, के भ्रमत रहौ सदाई। शालिग सेवन कीन, बहुत अति भार उठाई।। झोली झंडा धूप दीप, तुम अधिक आचारी। बोलै धनी कबीर, भेद कहियौं ब्रह्मचारी।। दोहा-हम कूं पार लंघावही, पार उजागर रूप। जिंद कहै धर्मदास सैं, तुम हो मुक्ति स्वरूप। कुल के मालिक कबीर परमेश्वर जी ने धर्मदास जी को एक महात्मा, स्वामी जी कहकर संबोधित किया ताकि यह मेरी पूर्ण बात सुन सके। परमात्मा ने प्रश्न किया कि हे वैष्णव बैरागी! हे भाग्यवान! आप अपना नाम तथा गाँव का नाम बताने की कृपा करें। आप किस वर्ण में जन्में हैं? अब आपको कहाँ जाना है? आपका निवास यानि संत डेरा कहाँ है? आपको किस गुरू ने नाम दिया है?आप किस नाम का स्मरण करते हैं? आप किस प्रभु के पुजारी हैं? कहाँ पर समाधि लगाते हो? आप किसी गुफा में रहते हो या कोई स्थाई स्थान यानि डेरा बनाया है या सदा भ्रमण करते रहते हो? आपने शालिगराम यानि मूर्तियों की पूजा की है। यह बहुत भार उठाया हुआ है। हे ब्रह्मचारी! मुझे इस साधना का ज्ञान बताएँ। मैं भक्ति करने का इच्छुक हूँ। मुझे सच्ची साधना का ज्ञान बताने वाला कोई नहीं मिला है। आप धूप, दीप, झोली, झंडा आदि लिए हो। आप तो अधिक कर्मकांडी हो। आप बहुत भक्ति करने वाले लगते हो। सबके मालिक कुल धनी कबीर जी ने जिंदा बाबा के वेश में धर्मदास जी से निवेदन किया कि आप तो मुक्ति के दाता हैं। मेरे को भी पार करो। आपका चेहरा बताता है कि आप महान आत्मा हैं। धर्मदास ने बताया कि बांदौगढ़ है गाम, नाम धर्मदास कहीजै। वैश्य कुली कुल जाति, शुद्र की नहीं बात सुनीजै।। सिर्गुण ज्ञान स्वरूप, ध्यान शालिग की सेवा। मलागीर छिरकंत, संत सब पुजै देवा।। अठसठि तीरथ न्हांन, ध्यान करि करि हम आये। पुजै शालिगराम, तिलक गलि माल चढायै।। धूप दीप अधिकार, आरती करैं हमेशा। राम कृष्ण का जाप, रटत हैं शंकर शेषा। नेम धर्म सें नेह, सनेह दुनियां से नांहीं। आरूढं बैराग, औरकी मानौं नांहीं। सुनि जिंदे मम धर्म कूं, वैष्णव रूप हमार। अठसठि तीरथ हम किये, चीन्हा सिरजनहार।। धर्मदास जी अपनी प्रशंसा सुनकर मन-मन में हर्षित हुआ तथा अपना परिचय बताया। मेरा गाँव-बांधवगढ़ मध्यप्रदेश प्रान्त में है। मेरे को धर्मदास कहते हैं। मेरी कुल जाति वैश्य है। हम शुद्र से बात नहीं करते। मैं सर्गुण परमात्मा के स्वरूप शालिग की पूजा करता हूँ। चंदन छिड़कता हूँ। सब संत इसी प्रकार देवताओं की पूजा करते हैं। मैं अड़सठ तीर्थों के स्नान के लिए निकला हूँ। कुछ पर स्नान कर आया हूँ। वहाँ ध्यान व पूजा करके आया हूँ। हम शालिगराम की पूजा करते हैं, तिलक लगाते हैं। गले में माला डालते हैं। इस तरह सर्गुण परमात्मा रूप में मूर्ति की पूजा करते हैं। धूप लगाते हैं, देशी घी की ज्योति जलाते हैं। आरती प्रतिदिन सदा करते हैं। राम कृष्ण का जाप जपते हैं। शंकर भगवान तथा शेष नाग की पूजा करते हैं। मैं तो सदा अपने नित्य नियम यानि भक्ति कर्म में लगा रहता हूँ। मुझे संसार से कोई प्रेम नहीं है। मैं अपने वैष्णव धर्म पर पूर्ण रूप से आरूढ़ हूँ। अन्य किसी के धर्म के ज्ञान को नहीं मानता। हे जिन्दा! मेरे धर्म के विषय में सुन! मेरा वैष्णव धर्म है। मेरी वैष्णव वेशभूषा है। मैंने अड़सठ तीर्थों पर भ्रमण कर के सबके उत्पत्तिकर्ता परमात्मा को चिन्हा है यानि प्राप्त किया है। कबीर साहिब जी ने कहा कि बौलै जिन्दा बैंन, कहां सें शालिंग आये। को अठसठिका धाम, मुझैं ततकाल बताये।। राम कृष्ण कहां रहै, नगर वह कौन कहावै। ये जड़वत हैं देव, तास क्यौं घंट बजावै।। सुनहि गुनहि नहीं बात, धात पत्थर के स्वामी। कहां भरमें धर्मदास, चीन्ह निजपद निहकामी।। आवत जात न कोय, हम ही अलख अबिनाशी सांई। रहत सकल सरबंग, बोलि है जहाँ तहाँ सब मांही।। बोलत घट घट पूर्ण ब्रह्म, धर्म आदू नहीं जाना। चिदानंदकौं चीन्ह, डारि पत्थर पाषाणा।। राम कृष्ण कोट्यौं गये, धनी एक का एक। जिंद कहै धर्मदाससैं, बूझौं ज्ञान बिबेक।। बूझौं ज्ञान बिबेक, एक निज निश्चय आनं। दूजा दोजिख जात, कहा पूजो पाषानं।। शिला न शालिगराम, प्रतिमा पत्थर कहावै। पत्थर पीतल घात बूड़ जल दरीया जावै।। कूटि घड्या घनसार, लगी है टांकी ज्याकै। चितर्या बदन बनाय, ऐसी पूजा को राखै।। जलकी बूंद जिहान, गर्भ में साज बनाया। दश द्वार की देह, नेहसैं मनुष्य कहाया।। जठर अग्नि में राखि, साखि सुनियौं धर्मदासा। तजि पत्थर पाषान, छाडि़ यह बोदी आशा।। अनंत कोटि ब्रह्मांड रचि, सब तजि रहै नियार। जिंद कहैं धर्मदाससूं, जाका करो बिचार।। जाका करौ बिचार, सकल जिन सृष्टि रचाई। वार पार नहीं कोय, बोलता सब घट माहीं।। अजर आदि अनादि, समाधि स्वरूप बखाना। दम देही नहीं तास, अभय पद निरगुण जान्या।। सकल सुनि प्रवान, समानि रहै अनुरागी। तुम्हरी चीन्ह न परैं, सुनौं वैष्णव बैरागी।। अलख अछेद अभेद, सकल ज्यूनीसैं न्यारा। बाहरि भीतरि पूर्णब्रह्म, आश्रम अधरि अधारा।। अलख अबोल अडोल, संगि साथी नहीं कोई। परलो कोटि अनंत, पलक में अनगिन होई।। अजर अमर पद अभय है, अबिगत आदि अनादि। जिंद कहै धर्मदास सैं, जा घर विद्या न बाद।। कबीर परमेश्वर वचन जिंदा रूप में परमेश्वर कबीर जी ने तर्क वितर्क करके यथार्थ अध्यात्म ज्ञान समझाया। प्रश्न किया कि जो शालिगराम लिए हुए हो, ये किस लोक से आए हैं? अड़सठ तीर्थ के स्नान व भ्रमण से किस लोक में साधक जाएगा? यह तत्काल बता। राम तथा कृष्ण कौन-से लोक में रहते हैं? जिनको आप शालिगराम कहते हो, ये तो जड़ हैं। इनके सामने घंटा बजाने का कोई लाभ नहीं। ये न सुन सकते हैं, न बोल सकते हैं। ये तो पत्थर या अन्य धातु से बने हैं। हे धर्मदास! कहाँ भटक रहे हो? सतलोक को पहचान। जिस परमेश्वर की शक्ति से प्रत्येक जीव बोलता है, हे धर्मदास! उसको नहीं जाना। चिदानंद परमेश्वर को पहचान। इन पत्थर व धातु को पटक दे। परमेश्वर कबीर जी जिंदा बाबा ने कहा कि हे धर्मदास! राम-कृष्ण तो करोड़ों जन्म लेकर मर लिए। मालिक सदा से एक ही है। वह कभी नहीं मरता। आप विवेक से काम लो। ये आपके पत्थर व पीतल धातु के भगवानों को दरिया में छोड़कर देखो, डूब जाएँगे तो ये आपकी क्या मदद करेंगे? इनको मूर्तिकार ने काट-पीट, कूटकर इनकी छाती पर पैर रखकर काटकर रूप दिया। इनका रचनहार तो कारीगर है। ये जगत के उत्पत्तिकर्ता व दुःख हरता कैसे हैं? ऐसी पूजा कौन करे? जिस परमेश्वर ने माता के गर्भ में रक्षा की, खान-पान दिया, सुरक्षित जन्म दिया, उसकी भक्ति कर। यह पत्थर-पीतल तथा तीर्थ के जल की पूजा की कमजोर आशा त्याग दे। जिंदा बाबा ने कहा कि जो पूर्ण परमात्मा सब सृष्टि की रचना करके इससे भिन्न रहता है। अपनी शक्ति से सब ब्रह्माण्डों को चला व संभाल रहा है, उसका विचार कर।उसका शरीर श्वांस से नहीं चलता। वह सबसे ऊपर के लोक में रहता है। आपकी समझ में नहीं आता है। उसकी शक्ति सर्वव्यापक है। उसका आश्रम अधर अधार यानि सबसे ऊपर है। वह अजर अमर अविनाशी है। Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
Subham Kumar Parjapat
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#GodMorningFriday #TrueWorship_CuresCancer . नन्दा नाई का उद्धार कबीर, जो जन मेरी शरण है, ताका हूँ मैं दास। गेल-गेल लाग्या फिरूँ, जब तक धरती आकाश।। परमात्मा कबीर जी ने बताया है कि यदि कोई जीव किसी युग में मेरी दीक्षा ले लेता है। यदि वह पार नहीं हो पाता है तो उसको किसी मानुष जन्म में ज्ञान सुनाकर शरण में लूँगा। उसके साथ-साथ रहूँगा। मेरी कोशिश रहती है कि किसी प्रकार यह काल जाल से छूटकर सुख सागर सत्यलोक में जाकर सुखी हो जाए। मेरा प्रयत्न तब तक रहता है जब तक धरती और आकाश नष्ट नहीं होते यानि प्रलय नहीं होती। नाई समुदाय में एक महान भक्त शेना जी हुए हैं नाई को सैन भी कहते हैं। वे परमात्मा की धुन में लगे रहते थे। राजा के निजी नाई थे। प्रतिदिन राजा की हजामत करने जाया करते थे। राजा के सिर की मालिश करने भी जाते थे। भक्त नंदा जी एक दिन भगवान की भक्ति में इतना मग्न हो गया कि उसको ध्यान नहीं रहा कि मैंने राजा की हजामत करने जाना था। राजा की दाढ़ी बनाने करने जाने का निर्धारित समय था। वह समय जा चुका था। दो घण्टे देर हो चुकी थी। राजाओं की जुबान पर दण्ड रहता था। जो भी नौकर जरा-सी गलती करता था तो उसको निर्दयता से कोड़ों से पीटा जाता था। अचेत होने पर छोड़ा जाता था। शरीर की खाल उतर जाती थी। रो-रोकर बेहोश हो जाता था। यह दश्य भक्त नंदा कई नौकरों के साथ देख चुके थे। आज उनको वही भय सता रहा था। काँपते-काँपते राजा के निवास पर पहुँचे। राजा के पैरों में गिरकर देर से आने की क्षमा याचना करने लगा कहा कि माई-बाप आगे से कभी गलती नहीं करूँगा। भक्त ने देखा कि राजा की दाढ़ी बनाई हुई थी। सिर में मालिश भी कर रखी थी। भक्त सैन को समझते देर नहीं लगी कि किसी अन्य नाई से हजामत तथा मालिश कराई है। राजा ने पूछा कि हे नन्दा नाई! आप क्या कह रहे हो? आप पागल हो गये हो क्या? भक्त नंदा जी ने कहा, महाराज! आज मुझे ध्यान ही नहीं रहा, मैं भूल गया। मैं आपके दाढ़ी बनाने के समय पर नहीं आया। जीवन में पहली व अंतिम गलती है। कभी नहीं करूँगा। उसका विलाप सुनकर रानी तथा अन्य मंत्री भी आ गए थे। राजा ने कहा कि हे नन्दा सैन! आप अभी-अभी दाढ़ी बनाकर सिर में मालिश करके गए हो। आप क्या कह रहे हो? आप देर से आए हो। क्या नींद में बोल रहे हो? भक्त नंदा जी ने कहा कि नहीं महाराज! आपने किसी अन्य नाई से हजामत कराई है। मैं तो अभी-अभी आया हूँ। राजा ने सैन भक्त के घर पर मंत्री भेजकर पता कराया तो उनकी पत्नी भी रो रही थी कि आज पति देर से गए हैं, उनको दण्ड दिया जा रहा होगा मंत्री ने पूछा कि क्यों रो रही हो बहन? भक्तमति ने बताया कि मेरे से गलती हो गई मैंने भक्त को याद नहीं दिलाया। भक्ति पर बैठने से पहले भक्त ने कहा था कि कुछ समय पश्चात् मुझे याद दिलाना कि राजा की सेवा करने जाना है। मैं भी भूल गई, भक्त भी भक्ति में व्यस्त थे। दो घण्टे बाद उठे तो याद आया। उनकी नौकरी जाएगी तो हम क्या खाएंगे? बच्चे भूखे मर जाएंगे पति को दण्ड मिलेगा। मंत्री जी तुरंत वापिस आए और राजा से बताया कि वास्तव में नंदा तो देर से अभी आया है। इनके रूप में कोई और आया था जो आपकी हजामत तथा मालिश करके चला गया। यह बात सुनकर राजा को समझते देर नहीं लगी कि भक्त सैन के रूप में भगवान आए थे। राजा सिंहासन से नीचे आया और भक्त सैन जी को सीने से लगाया और कहा कि भक्त! मैं तेरे को सेवा से मुक्त करता हूँ। तेरे को राजदरबार में दरबारी रखता हूँ। मेरे को दोष लगा है कि भक्त के स्थान पर भगवान ने मेरी दाढ़ी बनाई, सिर की मालिश की। मैं इस पाप को कैसे धो पाऊँगा? नंदा जी भी समझ गए कि मेरे कारण परमात्मा को कष्ट हुआ तो और जोर-जोर से रोने लगे कि हे परवरदिगार! मुझ दो कोड़ी के दास के कारण आप स्वर्ग छोड़कर नाई सैन बने। मुझे उठा देते भगवान। आपको कष्ट उठाना नहीं पड़ता। मैं समय पर आ जाता। इसलिए वाणी के माध्यम से बताया है कि सच्चे भक्त पर परमात्मा ऐसे कृपया करते हैं। गरीब दास, गोता मारूँ स्वर्ग में, जा पैठूँ पाताल। गरीबदास खोजत फिरूँ, अपने हीरे मोती लाल।। Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
Subham Kumar Parjapat
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#GodMorningFriday #TrueWorship_CuresCancer . ज्यों बच्छा गऊ की नजर में, यूं सांई कूं संत। भक्तों के पीछे फिरे, भक्त वच्छल भगवन्त।। कबीर साहिब जी कहते हैं कि गाय चाहे किसी भी तरफ घूम रही हो परन्तु अपने बच्चे के ऊपर एकटक नजर रखती है कि कोई पशु-पक्षी या मनुष्य मेरे बच्चे को मार न दे। अपनी सानिध्य मे रखती है। इसी प्रकार परमात्मा अपने भक्त के ऊपर दृष्टि रखता है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
Subham Kumar Parjapat
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#GodMorningFriday #TrueWorship_CuresCancer . तुलसी बिरवा बाग में, सींचत भी मुरझावे। राम भरोसे जो रहे, वो पर्वत पर लहरावे।। बगीचे में पौधा सिंचाई करते-करते भी मुरझा जाता है और राम भरोसे पर्वत के ऊपर कोई संभालने वाला भी नहीं होता, कोई सिंचाई करने वाला भी नहीं होता लेकिन परमात्मा के भरोसे जो रहे वो पर्वत पर लहरावे। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏शाम की आरती🪔 #moj_content
Subham Kumar Parjapat
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#GodMorningFriday #TrueWorship_CuresCancer . कबीर, मांस मछलिया खात हैं, सुरापान से हेत। ते नर नरकै जाहिंगे, माता पिता समेत। परमात्मा कबीर जी कहते हैं जो मनुष्य मांस, मछली खाते हैं वह नरक में माता पिता के साथ जाते हैं। मांस खाना महापाप है। यह हमारे किसी भी सद्ग्रंथ में नही लिखा है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sa TrueStory YouTube Savior of the World Sant Rampal Ji Maharaj #🙏शाम की आरती🪔 #moj_content #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
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