#😱3 बहनों की मौत पर बड़ा खुलासा 😮 चीखों से गूंज उठा इलाका
जब बच्चियों के गिरने की तेज आवाज आई, तो आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. सामने का मंजर डराने वाला था.
जमीन पर तीनों बहनें खून से लथपथ हालत में पड़ी थीं. हर तरफ खून बिखरा था. इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही लड़कियों के परिजनों को भी सूचना मिल गई. पूरे सोसायटी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल था. परिवार में चीख-पुकार मच गई थी. वहां मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी.
पुलिस की एंट्री
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों बच्चियों को एंबुलेंस से लोनी के 50 शैय्या अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी ग
ACP ने क्या बताया?
इलाके के एसीपी अतुल कुमार सिंह के अनुसार, रात करीब 2:15 बजे पीआरवी के जरिए सूचना मिली थी. सूचना में बताया गया कि भारत सिटी के टावर B-1 के फ्लैट 907 की नौवीं मंजिल से तीन बच्चियां कूद गई हैं. मौके पर पहुंचने पर पुष्टि हुई कि तीनों की मौत गिरने से हुई है. पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला माना है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है.
सुसाइड नोट ने बढ़ाई बेचैनी
पुलिस को मौका-ए-वारदात से एक पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है. उस नोट पर एक डायरी का जिक्र है और उसमें लिखा था- 'Mummy Papa Sorry'. इस छोटे से वाक्य ने पूरे मामले को और भी दर्दनाक बना दिया. पुलिस के मुताबिक, बच्चियों के कमरे से मिली डायरी में कुछ इशारे और भावनात्मक बातें लिखी गई हैं. नोट और डायरी को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
पिता ने किसे ठहराया जिम्मेदार?
मृतक बच्चियों के पिता चेतन कुमार ने इस दर्दनाक घटना के पीछे एक ऑनलाइन कोरियन टास्क बेस्ड 'लवर गेम' को जिम्मेदार ठहराया है. पिता का कहना है कि तीनों बेटियां काफी समय से इस गेम को खेल रही थीं. बताया जा रहा है कि गेम का आखिरी टास्क बेहद खतरनाक था और उसी टास्क को पूरा करने के लिए बच्चियों ने मौत का रास्ता चुना.
गेम में कौन था लीडर?
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनों में 14 वर्षीय प्राची इस गेम की लीडर थी. वही तीनों को कमांड देती थी और गेम से जुड़े टास्क समझाती थी. तीनों बहनें हर काम एक साथ करती थीं- खाना, सोना, स्कूल जाना और गेम खेलना. यही वजह है कि उन्होंने यह खौफनाक कदम भी एक साथ उठाया.मोबाइल और डिजिटल एंगल
डीसीपी निमिष पाटिल और एसीपी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि तीनों बच्चियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं. पुलिस अब उनकी डिजिटल गतिविधियों, चैट, गेमिंग ऐप्स और संपर्कों की बारीकी से जांच कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कोई ऑनलाइन कंट्रोलर या लिंक था, जो बच्चियों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा था.
कोरोना काल से शुरू हुई गेम की लत
परिजनों के अनुसार, कोरोना काल के दौरान बच्चियों को मोबाइल गेमिंग की लत लगी थी. स्कूल बंद होने और ऑनलाइन पढ़ाई के चलते मोबाइल उनका सबसे बड़ा सहारा बन गया. धीरे-धीरे गेमिंग का समय बढ़ता गया और पढ़ाई व सामाजिक गतिविधियां पीछे छूटती चली गईं. पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ समय से बच्चियों का स्कूल जाना भी अनियमित था.
मोबाइल यूज़ करने से रोका, बढ़ा तनाव
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि हाल के दिनों में परिवार ने बच्चियों के मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश की थी. इसी बात को लेकर घर में तनाव का माहौल था. माना जा रहा है कि मोबाइल और गेम से दूरी बनाए जाने पर बच्चियां मानसिक रूप से परेशान थीं और इसी तनाव ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया.
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