साहिबज़ादा गुरु ज़ोरावर सिंह जी और गुरु फ़तेह सिंह जी का बलिदान
साहिबज़ादा गुरु ज़ोरावर सिंह जी (उम्र लगभग 9 वर्ष) और साहिबज़ादा गुरु फ़तेह सिंह जी (उम्र लगभग 7 वर्ष) सिख इतिहास के सबसे महान बाल शहीद हैं। वे दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्र थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1704–1705 के दौरान सरहिंद के नवाब वज़ीर ख़ान के आदेश पर दोनों साहिबज़ादों को उनकी दादी माता गुजरी जी के साथ गिरफ़्तार किया गया। उन्हें ठंडे बुर्ज (ठंडा बुर्ज) में कैद रखा गया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया।
अडिग आस्था और साहस
इतनी कम उम्र में भी दोनों साहिबज़ादों ने इस्लाम स्वीकार करने से साफ़ इंकार कर दिया और अपने सिख धर्म पर अटल रहे। उनके साहस, विश्वास और गुरमत पर दृढ़ता ने अत्याचारियों को भी चकित कर दिया।
शहादत
वज़ीर ख़ान के आदेश से सरहिंद में दोनों साहिबज़ादों को ज़िंदा दीवार में चिनवा दिया गया। यह अमानवीय यातना सहते हुए भी उन्होंने “वाहेगुरु” का नाम नहीं छोड़ा। उनकी यह शहादत सिख इतिहास में अद्वितीय है।
प्रभाव और संदेश
उनका बलिदान धर्म, सत्य और आत्मसम्मान के लिए अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
यह सिखों के लिए ही नहीं, समस्त मानवता के लिए न्याय और साहस का प्रतीक है।
हर वर्ष शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
🙏 साहिबज़ादे अमर हैं—उनका बलिदान हमें सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति देता है।
#🙏🏻गुरबानी
यदि चाहें तो मैं इसे छोटी कहानी, कविता, या पोस्टर/इमेज के रूप में भी प्रस्तुत कर सकता हूँ।