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@hbopo5368
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14 hours ago
#सत_भक्ति_संदेश गरीब, तन मन सेती दूर है, मांहे मंझ मिलाप। तरबर छाया विरछ में, है सो आपे आप।। सरलार्थ:- वह परमेश्वर दूर सतलोक में है जिसे स्थूल शरीर तथा मन की कल्पनाओं से नहीं देख सकते। वैसे उस प्रभु का प्रभाव शरीर में भी है। इस प्रकार जीव से मिला भी है। #गुरु_महिमा #🙏गुरु महिमा😇
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1 days ago
#Annapurna_Muhim_SantRampalJi अन्नपूर्णा मुहिम के जरिए मिल रही सहायता ने बदल दी कई जिंदगियां। देखें दर्द से राहत तक का सफर — अन्नपूर्णा मुहिम के साथ। संत रामपाल जी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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3 days ago
#GodNightWednesday #TrueWorship_EndsSuffering ये कसाई का लोक है। कबीर परमात्मा ने कहा कि तुम जिस लोक में रह रहे हो ये कसाई का लोक है। यहां कोई रहम नाम की चीज़ नहीं है। किसी का बेटा मरो। किसी की बेटी मरो। पूरा क्षेत्र नष्ट हो जाओ। इस काल में दया नाम की चीज़ नहीं है। Sa True Story YtChannel #🙏गुरु महिमा😇
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4 days ago
भक्ति न करने वाले और मनमानी पूजाएं करने वाले को काल के दूत ले जाते हैं जबकि सतभक्ति करने वाले को परमात्मा विमान में बैठाकर अमरलोक यानी सतलोक ले जाते हैं। जो व्यक्ति मनुष्य जन्म प्राप्त करके भक्ति नहीं करता, वह चौरासी लाख योनियों में कष्ट उठाता है। कुत्ता रात में ऊपर की ओर मुंह करके बहुत रोता है। इसलिए पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर सतभक्ति करनी चाहिए। जब किसी की मौत होती है तो यम के दूत उसे लेने आते हैं और उसे दंडित करते हैं कर्म आधार पर। जबकि सतगुरु संत रामपाल जी महाराज की भक्ति करने से यमदूतों से भी रक्षा हो रही है। संत गरीबदास जी बताते हैं- सतगुरु जो चाहे सो करही, चौदह कोटि दूत जम डरहीं। ऊत भूत जम त्रास निवारे, चित्र गुप्त के कागज फारै ।। सुनते आए हैं कि परमात्मा अंधों को आँख, कोढ़ी को काया, बाँझन को पुत्र और निर्धन व्यक्ति को धन देता है। वर्तमान समय में यह सर्व सुख संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई सतभक्ति करने से लोगों को मिल रहे हैं जोकि स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के अवतार हैं। कबीर साहेब जी ने भी कहा है - मम संत मुझे जान, मेरा ही स्वरूपं।पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी संत की भूमिका में आए और ऐसा अद्वितीय ज्ञान दिया कि देखते ही देखते 64 लाख लोग परमात्मा के शिष्य बन गए। वर्तमान में स्वयं कबीर जी संत रामपाल जी महाराज के रूप में अवतरित हैं और वो भी वही शास्त्र प्रमाणित ज्ञान दे रहे हैं जिसे समझकर करोड़ों लोग उनसे जुड़ चुके हैं। आज से 600 वर्ष पहले कबीर परमात्मा संत की भूमिका में पृथ्वी पर आए और काल जाल में कष्ट भोग रहे प्राणियों को सतभक्ति विधि बताकर अनेकों लाभ दिए। अब फिर कबीर परमात्मा जी संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में आए हुए हैं और लाखों दीन दुःखियों को वही भक्ति विधि बताकर दुःखों से छुटकारा दिला रहे हैं। कबीर, जब ही सत्यनाम हृदय धरयो भयो पाप को नाश। मानो चिंगारी अग्नि की पड़ी पुराने घास ।। कबीर साहेब के अवतार संत रामपाल जी महाराज वही भक्ति बताते हैं जो कबीर साहेब ने बताई है। जिससे पाप नाश होते हैं, भक्तों को अनगिनत लाभ मिल रहे हैं, उनके साथ आये दिन चमत्कार हो रहे हैं। यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13, अध्याय 5 मंत्र 32 में स्प्ष्ट है कि कबीर परमेश्वर जी सभी पापों का नाश कर देते हैं। वहीं वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर कबीर परमेश्वर की भक्ति करने से लोगों के सर्व पाप समाप्त हो रहें हैं जिससे लोगों का जीवन सुखी हो रहा है। कबीर, जब ही सत्यनाम हृदय धरो, भयो पाप को नाश। मानो चिंगारी अग्नि की, पड़े पुरानी घास।। #TrueWorship_EndsSuffering #SaTrueStoryYouTubeChannel #worship #faith #cancer #fyp #coloncancer #healthcare #stroke #digitalhealth #cancertreatment #healthsecrets #meditation #waheguru #harharmahadev #shiv #viralreels #SantRampalJiMaharaj #सत भक्ति संदेश #सत भक्ति संदेश
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5 days ago
#GodNightMonday #Facts_About_EasterSunday 📖📖📖📖📖 "चरित्रवान की कथा" एक शुकदेव ऋषि थे। वे श्री वेदव्यास के पुत्र थे। एक दिन वे दीक्षा लेने के उद्देश्य से राजा जनक जी के पास मिथिला नगरी में गए। राजा जनक ने कहा कि शुकदेव कल सुबह नाम दूँगा। उनके ठहरने की व्यवस्था अलग भवन में कर दी। एक सुंदर युवती को ऋषि जी की सेवा में परीक्षा लेने के उद्देश्य से भेजा। युवती शुकदेव जी के पलंग पर पैरों की और बैठ गई। ऋषि जी ने पैर सिकोड़कर और मोड़ लिए। युवती ऋषि जी की ओर निकट हुई तो उठकर खड़े हो गए। कहा कि हे बहन! आप अच्छे घर की बेटी दिखाई देती हो। कृपा कमरे से बाहर जाऐं, नहीं तो मैं चला जाता हूँ। लड़की चली गई। राजा जनक से बताया कि सुच्चा व्यक्ति है। ऐसे-ऐसे हुआ। सुबह राजा जनक जी ने ऋषि शुकदेव जी से पूछा कि आपसे मिलने स्त्री आई थी, आपने उसे अंगिकार न करके अच्छे संयम का प्रदर्शन किया है। आप संयमी व्यक्ति हैं। धन्य हैं आपके माता-पिता। * कबीर परमेश्वर जी के विचार इनसे भी उच्च तथा श्रेष्ठ हैं। वे कहते हैं कि ऋषि शुकदेव भी आत्मज्ञानी नहीं था क्योंकि जब युवती शुकदेव के पलंग पर बैठी तो शुकदेव ने उसे स्त्री समझकर अपने शरीर से छूने नहीं दिया और खड़ा होकर बाहर जाने की तैयारी कर दी। इससे स्पष्ट है कि शुकदेव जी को आत्म ज्ञान नहीं था। विचार करें कि यदि युवती के स्थान पर युवक बैठ जाता तो शुकदेव जी क्या करते? वे उससे कुशल-मंगल पूछते और पलंग छोड़कर खड़े नहीं होते। कहते कि भईया! पलंग एक ही है, आप पलंग पर विश्राम करो, मैं नीचे पृथ्वी पर आसन लगा लेता हूँ। यदि युवक सभ्य होता तो कहता कि नहीं ऋषि जी! आप पलंग पर विराजो, मैं पृथ्वी पर विश्राम करूंगा। परंतु युवती होने के कारण ऋषि शुकदेव को काम दोष के कारण भय लगा। कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि स्त्री तथा पुरूष आत्मा के ऊपर दो वस्त्र हैं। जैसे गीता अध्याय 2 श्लोक 22 में कहा कि अर्जुन! जीव शरीर त्यागकर नया शरीर धारण कर लेता है, इसे मृत्यु कहते हैं। यह तो ऐसा है जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए पहन लेता है। इसलिए आत्म तत्व को जान। उदाहरण :- एक गाँव में सांग (स्वांग) मण्डली आई। कई दिनों तक सांग किया। पुराने जमाने में सांग के नाटक में पुरूष ही स्त्री का अभिनय किया करते थे। एक लड़का अपने साथी के साथ पहली बार सांग देखने गया। सांग में एक लड़के को लड़की के वस्त्र पहना रखे थे। छाती भी युवा लड़की की तरह बना रखी थी। प्रथम बार गए लड़के ने अपने साथी (जो कई बार सांग देख चुका था) से कहा कि देख ! कितनी सुंदर लड़की है। साथी बोला, यह लड़की नहीं लड़का है। परंतु प्रथम बार गया लड़का मानने को तैयार नहीं था। उसको अपने मित्र की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था। सांग के समाप्त होने के पश्चात् सांगी अपने उस स्थान पर गए जहाँ ठहरे हुए थे। दोनों लड़के भी उनके साथ वहीं गए। उस लड़के ने जो लड़की का स्वांग बनाए हुए था, अपने स्त्री वाले वस्त्र उतारकर खूंटी पर टाँग दिये। छाती से बनावटी दूधी उतारकर बैग में डाल दी। कच्छे-कच्छे में स्नान करने चला गया। यह देखकर नए दर्शक को विश्वास हुआ कि वास्तव में यह लड़का है। अगले दिन उस लड़के दर्शक को वह लड़की के वेश में लड़के में लड़की वाली मलीन वासना दिल में नहीं आई। उसे लड़का दिखाई दे रहा था। इसी प्रकार यदि शुकदेव ऋषि को अध्यात्म विवेक से आत्म ज्ञान होता तो उसे स्त्री नहीं आत्मा रूप में पुरूष समझकर कहता कि आप पलंग पर विराजो, मैं पृथ्वी पर विश्राम करता हूँ। साधु, संत, फकीर इस विचारधारा से जीवन जीते हैं। साधना करके मोक्ष प्राप्त करते हैं। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 Kabir Is God
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6 days ago
#Facts_About_EasterSunday बाईबल में यूहन्ना ग्रन्थ (अध्याय 16 श्लोक 4 से 15) में प्रमाण है काल भक्ति युक्त भक्तों को नबी बनाकर भेजता है और उन्हीं भक्तों की कमाई से चमत्कार करवाता रहता है। जब उनकी कमाई खत्म हो जाती है उनको मरने के लिए छोड़ देता है जैसे ईसा जी की मृत्यु हुई। लेकिन परमेश्वर भक्ति दृढ़ रखने के लिए 3 दिन बाद ईसा जी के रूप में प्रकट हुए। ताकि जब भक्ति युग आए तो सब सतभक्ति करें और साधक पूर्ण मोक्ष को प्राप्त करें। Kabir Is God #🙏गुरु महिमा😇
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6 days ago
#Facts_About_EasterSunday परमेश्वर कबीर जी की भक्ति से ही रक्षा होती है ईसा जी को उनके शिष्य ने सिर्फ 30 रुपए के लिए उनके विरोधियों को सौंप दिया। Kabir Is God #🙏गुरु महिमा😇
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7 days ago
#GodNightSaturday धर्म तो धसक नहीं,धसकै तीनूं लोक! खैरायत में खैर हैं, कीजै आत्म पोष! धर्म कभी नष्ट नहीं होता।तीनों लोक नष्ट हो जाते हैं। (खैरायत) दान-धर्म करने से (खैर) बचाव है। इसलिए धर्म-भण्डारा (लंगर) करके धर्म करना चाहिए! देखें श्रद्धा चैनल 2 बजे से #🙏गुरु महिमा😇
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8 days ago
#RealKnowledgeOf_Bible ईसा जी की मृत्यु बाद परमेश्वर प्रकट हुए ईसा जी को क्रश करने के बाद पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब, ईसा जी का रूप धारण करके अनेकों जगह प्रकट होकर शिष्यों को दिखाई देने लगे। यदि परमेश्वर नहीं आते तो ईसा जी के पूर्व चमत्कारों को देखते हुए‌ ईसा जी का अंत देखकर कोई भी व्यक्ति भक्ति साधना नहीं करता, नास्तिक हो जाते। (प्रमाण पवित्र बाईबल में यूहन्ना 16: 4-15) Sant RampalJi YtChannel #सत भक्ति संदेश
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11 days ago
#जैन_धर्म_की_सच्चाई मारीचि जी के जीव ने प्रथम तीर्थकंर ऋषभदेव जी से दीक्षा लेकर साधना की। उसके परिणामस्वरूप मारीचि जी के जीव ने गधा, कुत्ता आदि का जीवन भोगा और स्वर्ग-नरक में भटका। फिर महावीर जैन बना। जिसका प्रमाण पुस्तक ‘‘आओ जैन धर्म को जानें‘‘ के पृष्ठ 294-296 में है। महावीर जी ने तो किसी से दीक्षा भी नहीं ली थी। उन्होंने तो मनमाना आचरण करके साधना की। तो विचार करें, उनका क्या हुआ होगा? Sant RampalJi YtChannel #सत भक्ति संदेश #सत भक्ति संदेश